अगस्त 2026 में शेयर और कमोडिटी परपेचुअल्स का कारोबार $778 अरब रहा, जो प्रमुख प्लेटफॉर्मों के कुल परपेचुअल वॉल्यूम का 23.48% था। [13] जनवरी से मई 2026 के बीच क्रिप्टो एक्सचेंजों ने शेयर, इंडेक्स और कमोडिटी से जुड़े परपेचुअल्स में $1.32 ट्रिलियन से अधिक का कारोबार प्रोसेस किया—2025 के पूरे $104.21 अरब से कई गुना अधिक।...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How are crypto exchanges increasingly becoming major venues for perpetual futures tied to stocks, indexes, commodities, and other tokenized. Article summary: Crypto exchanges are becoming cross-asset derivatives venues: they offer continuously tradable, often USDT-settled perpetuals whose prices reference equities, equity indexes, ETFs, metals, energy products, and private-co. Topic tags: general, general web, user generated, academic, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks,
क्रिप्टो एक्सचेंज अब केवल बिटकॉइन और अन्य डिजिटल टोकन खरीदने-बेचने की जगह नहीं रह गए हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर तकनीकी शेयरों, इक्विटी इंडेक्स, कीमती धातुओं, ऊर्जा उत्पादों और निजी कंपनियों के मूल्य-संदर्भों से जुड़े परपेचुअल फ्यूचर्स तेजी से सूचीबद्ध हो रहे हैं।
इनका आकर्षण साफ है: चौबीसों घंटे ट्रेडिंग, छोटी पोजीशन से शुरुआत, लीवरेज और कीमत गिरने पर दांव लगाने यानी शॉर्ट करने की सुविधा। मगर एक बुनियादी बात याद रखना जरूरी है—किसी शेयर से जुड़ा परपेचुअल खरीदने का अर्थ आम तौर पर उस कंपनी का शेयर खरीदना नहीं है। इससे न वोटिंग अधिकार मिलते हैं, न लाभांश, न प्रत्यक्ष शेयरधारक के समान कानूनी सुरक्षा।
सामान्य फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की एक तय समाप्ति तिथि होती है। इसके उलट परपेचुअल फ्यूचर्स की कोई निश्चित एक्सपायरी नहीं होती। इसकी कीमत को संदर्भित एसेट की कीमत के पास रखने के लिए आम तौर पर आवधिक फंडिंग तंत्र और लगातार मार्क-टू-मार्केट प्रक्रिया अपनाई जाती है। अब इसी मॉडल का इस्तेमाल टेक शेयरों, शेयर सूचकांकों, धातुओं, ऊर्जा और प्री-IPO या निजी कंपनियों के प्रॉक्सी कॉन्ट्रैक्ट्स तक में हो रहा है। 18
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ट्रेडर एक ही क्रिप्टो-नेटिव इंटरफेस पर अलग-अलग वैश्विक एसेट थीमों में दांव लगा सकते हैं। प्लेटफॉर्मों के लिए यह उस परपेचुअल मॉडल का विस्तार है, जो पहले से क्रिप्टो डेरिवेटिव गतिविधि का बड़ा आधार रहा है।
अलग-अलग रिपोर्टों में प्लेटफॉर्मों की सूची और एसेट की परिभाषा अलग है, इसलिए उनके आंकड़ों को जोड़कर एक ही बाजार का सटीक कुल नहीं मानना चाहिए। फिर भी, सभी आंकड़े एक ही रुझान दिखाते हैं: पारंपरिक वित्तीय एसेट से जुड़े परपेचुअल्स बहुत तेजी से बढ़े हैं।
अर्थात ये कॉन्ट्रैक्ट अब क्रिप्टो डेरिवेटिव एक्सचेंजों पर कोई छोटा प्रयोग भर नहीं हैं।
परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन किसी शेयर या टोकन जैसी नहीं होती। इस बाजार को समझने के लिए ये मापदंड ज्यादा उपयोगी हैं:
ऊंचा वॉल्यूम अपने आप में उतनी ही बड़ी बकाया वैल्यू या गहरी लिक्विडिटी का प्रमाण नहीं है। टोकनाइज़्ड शेयर और कैश-सेटल्ड परपेचुअल भी एक जैसे उत्पाद नहीं हैं: टोकनाइज़्ड शेयर किसी संरचित दावे का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जबकि परपेचुअल केवल कीमत का डेरिवेटिव ट्रैक कर सकता है।
रिपोर्टिंग में उद्धृत WuBlockchain Data Center के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीकृत एक्सचेंजों पर स्टॉक परपेचुअल्स का अगस्त वॉल्यूम $665.42 अरब था। इसमें SanDisk, SK hynix और SpaceX से जुड़े SPCX कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा मिलाकर 50.4% था। 1
SanDisk का रिपोर्टेड वॉल्यूम $193.58 अरब, SK hynix का $75.89 अरब और SPCX का $65.93 अरब रहा। 1 इससे यह संकेत मिलता है कि तेज वृद्धि के बावजूद बाजार की गतिविधि अभी सैकड़ों एसेट्स में समान रूप से फैली हुई नहीं है।
मौजूदा मांग विशेष रूप से अस्थिर और चर्चा-केंद्रित टेक व सेमीकंडक्टर एक्सपोज़र में केंद्रित दिखती है—ऐसे ट्रेड जिनमें लीवरेज और ऊंचे जोखिम की तलाश रखने वाले क्रिप्टो ट्रेडरों की दिलचस्पी अधिक हो सकती है।
अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) ने 29 मई 2026 को KalshiEX के BTCPERP को मंजूरी दी। यह बिटकॉइन की स्पॉट कीमत को संदर्भित करने वाला कैश-सेटल्ड परपेचुअल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट है, जिसे एक नामित कॉन्ट्रैक्ट मार्केट (DCM) पर सूचीबद्ध किया जा सकता है। CFTC ने परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स की लिस्टिंग पर एक नीति वक्तव्य भी अपनाया।
महत्व यह था कि निश्चित एक्सपायरी के बिना चलने वाला एक ‘ट्रू परपेचुअल’ अमेरिकी नियामकीय ढांचे में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के रूप में मंजूर हुआ। KalshiEX की फाइलिंग के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट की अवधि अनिश्चित है और इसे लगातार मार्क-टू-मार्केट किया जाता है।
हालांकि, इसे हर परपेचुअल उत्पाद की सामान्य मंजूरी नहीं समझना चाहिए। न ही यह स्टॉक-लिंक्ड परपेचुअल्स की मंजूरी थी। CFTC की कार्रवाई एक विशिष्ट बिटकॉइन कॉन्ट्रैक्ट और मामले-विशेष की समीक्षा से जुड़ी थी। आगे के उत्पादों को कॉन्ट्रैक्ट डिजाइन, बाजार की निष्पक्षता, सेटलमेंट पद्धति, क्लियरिंग और जोखिम प्रबंधन जैसी लागू शर्तों को पूरा करना होगा।
क्रिप्टो एक्सचेंज अब केवल दूसरे क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों से नहीं लड़ रहे। वे ऑनलाइन ब्रोकरों, CFD प्रदाताओं, पारंपरिक फ्यूचर्स एक्सचेंजों और ऑप्शंस बाजारों के साथ भी ट्रेडिंग फ्लो के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उनका अलग प्रस्ताव है: 24x7 ट्रेडिंग और तेजी से नए वैश्विक मूल्य-संदर्भों को सूचीबद्ध करने वाला क्रिप्टो-नेटिव डेरिवेटिव इंटरफेस।
दूसरी ओर, पारंपरिक विनियमित बाजारों के पास स्थापित क्लियरिंग व्यवस्था, नियमों की स्पष्टता, औपचारिक निगरानी, संस्थागत पहुंच और ग्राहक-सुरक्षा के तय नियम जैसी खूबियां हैं। CFTC का फैसला एक व्यवस्था को दूसरी से बदल देने का संकेत कम, और दोनों मॉडलों के मिश्रित भविष्य का संकेत ज्यादा देता है।
असल नीतिगत प्रश्न यह है कि आर्थिक रूप से मिलते-जुलते उत्पादों पर लीवरेज, जोखिम-खुलासे, मूल्य निर्धारण, बाजार में हेरफेर, कस्टडी, क्लियरिंग और सीमा-पार पहुंच के नियम भी तुलनीय होंगे या नहीं। खासकर तब, जब किसी उत्पाद को ‘टोकनाइज़्ड इक्विटी’ कहा जाए, लेकिन उसमें केवल सिंथेटिक मूल्य-एक्सपोज़र मिलता हो।
शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि क्रिप्टो की परपेचुअल-फ्यूचर्स संरचना पारंपरिक एसेट थीमों में पर्याप्त ट्रेडिंग खींच सकती है। लेकिन 24x7 पहुंच, तेज लिस्टिंग और ऊंचा टर्नओवर डेरिवेटिव के पुराने जोखिमों को भी बढ़ाते हैं—लीवरेज, सीमित एसेट्स में लिक्विडिटी का जमाव, अचानक कीमतों का उतार-चढ़ाव और संदर्भ कीमतों की गुणवत्ता पर सवाल।
संभावित नतीजा एक मिश्रित बाजार होगा। ऑफशोर और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म गति और उत्पाद-प्रयोग में आगे रह सकते हैं, जबकि विनियमित एक्सचेंज क्लियरिंग, निगरानी और ग्राहक सुरक्षा वाले ढांचे में परपेचुअल डिजाइन को अपनाने की कोशिश करेंगे। ट्रेडरों के लिए सबसे अहम अंतर यही है: कीमत को ट्रैक करने वाले कॉन्ट्रैक्ट की सुविधा और किसी पारंपरिक वित्तीय एसेट के मालिकाने या नियमित बाजार में ट्रेडिंग से मिलने वाले अधिकार व सुरक्षा एक ही चीज नहीं हैं।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
अगस्त 2026 में शेयर और कमोडिटी परपेचुअल्स का कारोबार $778 अरब रहा, जो प्रमुख प्लेटफॉर्मों के कुल परपेचुअल वॉल्यूम का 23.48% था। [13]
अगस्त 2026 में शेयर और कमोडिटी परपेचुअल्स का कारोबार $778 अरब रहा, जो प्रमुख प्लेटफॉर्मों के कुल परपेचुअल वॉल्यूम का 23.48% था। [13] जनवरी से मई 2026 के बीच क्रिप्टो एक्सचेंजों ने शेयर, इंडेक्स और कमोडिटी से जुड़े परपेचुअल्स में $1.32 ट्रिलियन से अधिक का कारोबार प्रोसेस किया—2025 के पूरे $104.21 अरब से कई गुना अधिक। [18][23]
29 मई 2026 को CFTC ने KalshiEX के बिटकॉइन परपेचुअल को मंजूरी दी, जिससे अमेरिकी विनियमित ढांचे में ‘ट्रू परपेचुअल’ फ्यूचर्स के लिए एक रास्ता खुला। [50][51]
अगस्त 2026 में शेयर और कमोडिटी परपेचुअल्स का कारोबार $778 अरब रहा, जो प्रमुख प्लेटफॉर्मों के कुल परपेचुअल वॉल्यूम का 23.48% था। [13] जनवरी से मई 2026 के बीच क्रिप्टो एक्सचेंजों ने शेयर, इंडेक्स और कमोडिटी से जुड़े परपेचुअल्स में $1.32 ट्रिलियन से अधिक का कारोबार प्रोसेस किया—2025 के पूरे $104.21 अरब से कई गुना अधिक।...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Terra से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How are crypto exchanges increasingly becoming major venues for perpetual futures tied to stocks, indexes, commodities, and other tokenized. Article summary: Crypto exchanges are becoming cross-asset derivatives venues: they offer continuously tradable, often USDT-settled perpetuals whose prices reference equities, equity indexes, ETFs, metals, energy products, and private-co. Topic tags: general, general web, user generated, academic, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks,
क्रिप्टो एक्सचेंज अब केवल बिटकॉइन और अन्य डिजिटल टोकन खरीदने-बेचने की जगह नहीं रह गए हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर तकनीकी शेयरों, इक्विटी इंडेक्स, कीमती धातुओं, ऊर्जा उत्पादों और निजी कंपनियों के मूल्य-संदर्भों से जुड़े परपेचुअल फ्यूचर्स तेजी से सूचीबद्ध हो रहे हैं।
इनका आकर्षण साफ है: चौबीसों घंटे ट्रेडिंग, छोटी पोजीशन से शुरुआत, लीवरेज और कीमत गिरने पर दांव लगाने यानी शॉर्ट करने की सुविधा। मगर एक बुनियादी बात याद रखना जरूरी है—किसी शेयर से जुड़ा परपेचुअल खरीदने का अर्थ आम तौर पर उस कंपनी का शेयर खरीदना नहीं है। इससे न वोटिंग अधिकार मिलते हैं, न लाभांश, न प्रत्यक्ष शेयरधारक के समान कानूनी सुरक्षा।
सामान्य फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की एक तय समाप्ति तिथि होती है। इसके उलट परपेचुअल फ्यूचर्स की कोई निश्चित एक्सपायरी नहीं होती। इसकी कीमत को संदर्भित एसेट की कीमत के पास रखने के लिए आम तौर पर आवधिक फंडिंग तंत्र और लगातार मार्क-टू-मार्केट प्रक्रिया अपनाई जाती है। अब इसी मॉडल का इस्तेमाल टेक शेयरों, शेयर सूचकांकों, धातुओं, ऊर्जा और प्री-IPO या निजी कंपनियों के प्रॉक्सी कॉन्ट्रैक्ट्स तक में हो रहा है। 18
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि ट्रेडर एक ही क्रिप्टो-नेटिव इंटरफेस पर अलग-अलग वैश्विक एसेट थीमों में दांव लगा सकते हैं। प्लेटफॉर्मों के लिए यह उस परपेचुअल मॉडल का विस्तार है, जो पहले से क्रिप्टो डेरिवेटिव गतिविधि का बड़ा आधार रहा है।
अलग-अलग रिपोर्टों में प्लेटफॉर्मों की सूची और एसेट की परिभाषा अलग है, इसलिए उनके आंकड़ों को जोड़कर एक ही बाजार का सटीक कुल नहीं मानना चाहिए। फिर भी, सभी आंकड़े एक ही रुझान दिखाते हैं: पारंपरिक वित्तीय एसेट से जुड़े परपेचुअल्स बहुत तेजी से बढ़े हैं।
अर्थात ये कॉन्ट्रैक्ट अब क्रिप्टो डेरिवेटिव एक्सचेंजों पर कोई छोटा प्रयोग भर नहीं हैं।
परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन किसी शेयर या टोकन जैसी नहीं होती। इस बाजार को समझने के लिए ये मापदंड ज्यादा उपयोगी हैं:
ऊंचा वॉल्यूम अपने आप में उतनी ही बड़ी बकाया वैल्यू या गहरी लिक्विडिटी का प्रमाण नहीं है। टोकनाइज़्ड शेयर और कैश-सेटल्ड परपेचुअल भी एक जैसे उत्पाद नहीं हैं: टोकनाइज़्ड शेयर किसी संरचित दावे का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जबकि परपेचुअल केवल कीमत का डेरिवेटिव ट्रैक कर सकता है।
रिपोर्टिंग में उद्धृत WuBlockchain Data Center के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीकृत एक्सचेंजों पर स्टॉक परपेचुअल्स का अगस्त वॉल्यूम $665.42 अरब था। इसमें SanDisk, SK hynix और SpaceX से जुड़े SPCX कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा मिलाकर 50.4% था। 1
SanDisk का रिपोर्टेड वॉल्यूम $193.58 अरब, SK hynix का $75.89 अरब और SPCX का $65.93 अरब रहा। 1 इससे यह संकेत मिलता है कि तेज वृद्धि के बावजूद बाजार की गतिविधि अभी सैकड़ों एसेट्स में समान रूप से फैली हुई नहीं है।
मौजूदा मांग विशेष रूप से अस्थिर और चर्चा-केंद्रित टेक व सेमीकंडक्टर एक्सपोज़र में केंद्रित दिखती है—ऐसे ट्रेड जिनमें लीवरेज और ऊंचे जोखिम की तलाश रखने वाले क्रिप्टो ट्रेडरों की दिलचस्पी अधिक हो सकती है।
अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) ने 29 मई 2026 को KalshiEX के BTCPERP को मंजूरी दी। यह बिटकॉइन की स्पॉट कीमत को संदर्भित करने वाला कैश-सेटल्ड परपेचुअल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट है, जिसे एक नामित कॉन्ट्रैक्ट मार्केट (DCM) पर सूचीबद्ध किया जा सकता है। CFTC ने परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स की लिस्टिंग पर एक नीति वक्तव्य भी अपनाया।
महत्व यह था कि निश्चित एक्सपायरी के बिना चलने वाला एक ‘ट्रू परपेचुअल’ अमेरिकी नियामकीय ढांचे में फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के रूप में मंजूर हुआ। KalshiEX की फाइलिंग के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट की अवधि अनिश्चित है और इसे लगातार मार्क-टू-मार्केट किया जाता है।
हालांकि, इसे हर परपेचुअल उत्पाद की सामान्य मंजूरी नहीं समझना चाहिए। न ही यह स्टॉक-लिंक्ड परपेचुअल्स की मंजूरी थी। CFTC की कार्रवाई एक विशिष्ट बिटकॉइन कॉन्ट्रैक्ट और मामले-विशेष की समीक्षा से जुड़ी थी। आगे के उत्पादों को कॉन्ट्रैक्ट डिजाइन, बाजार की निष्पक्षता, सेटलमेंट पद्धति, क्लियरिंग और जोखिम प्रबंधन जैसी लागू शर्तों को पूरा करना होगा।
क्रिप्टो एक्सचेंज अब केवल दूसरे क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों से नहीं लड़ रहे। वे ऑनलाइन ब्रोकरों, CFD प्रदाताओं, पारंपरिक फ्यूचर्स एक्सचेंजों और ऑप्शंस बाजारों के साथ भी ट्रेडिंग फ्लो के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उनका अलग प्रस्ताव है: 24x7 ट्रेडिंग और तेजी से नए वैश्विक मूल्य-संदर्भों को सूचीबद्ध करने वाला क्रिप्टो-नेटिव डेरिवेटिव इंटरफेस।
दूसरी ओर, पारंपरिक विनियमित बाजारों के पास स्थापित क्लियरिंग व्यवस्था, नियमों की स्पष्टता, औपचारिक निगरानी, संस्थागत पहुंच और ग्राहक-सुरक्षा के तय नियम जैसी खूबियां हैं। CFTC का फैसला एक व्यवस्था को दूसरी से बदल देने का संकेत कम, और दोनों मॉडलों के मिश्रित भविष्य का संकेत ज्यादा देता है।
असल नीतिगत प्रश्न यह है कि आर्थिक रूप से मिलते-जुलते उत्पादों पर लीवरेज, जोखिम-खुलासे, मूल्य निर्धारण, बाजार में हेरफेर, कस्टडी, क्लियरिंग और सीमा-पार पहुंच के नियम भी तुलनीय होंगे या नहीं। खासकर तब, जब किसी उत्पाद को ‘टोकनाइज़्ड इक्विटी’ कहा जाए, लेकिन उसमें केवल सिंथेटिक मूल्य-एक्सपोज़र मिलता हो।
शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि क्रिप्टो की परपेचुअल-फ्यूचर्स संरचना पारंपरिक एसेट थीमों में पर्याप्त ट्रेडिंग खींच सकती है। लेकिन 24x7 पहुंच, तेज लिस्टिंग और ऊंचा टर्नओवर डेरिवेटिव के पुराने जोखिमों को भी बढ़ाते हैं—लीवरेज, सीमित एसेट्स में लिक्विडिटी का जमाव, अचानक कीमतों का उतार-चढ़ाव और संदर्भ कीमतों की गुणवत्ता पर सवाल।
संभावित नतीजा एक मिश्रित बाजार होगा। ऑफशोर और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म गति और उत्पाद-प्रयोग में आगे रह सकते हैं, जबकि विनियमित एक्सचेंज क्लियरिंग, निगरानी और ग्राहक सुरक्षा वाले ढांचे में परपेचुअल डिजाइन को अपनाने की कोशिश करेंगे। ट्रेडरों के लिए सबसे अहम अंतर यही है: कीमत को ट्रैक करने वाले कॉन्ट्रैक्ट की सुविधा और किसी पारंपरिक वित्तीय एसेट के मालिकाने या नियमित बाजार में ट्रेडिंग से मिलने वाले अधिकार व सुरक्षा एक ही चीज नहीं हैं।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
अगस्त 2026 में शेयर और कमोडिटी परपेचुअल्स का कारोबार $778 अरब रहा, जो प्रमुख प्लेटफॉर्मों के कुल परपेचुअल वॉल्यूम का 23.48% था। [13]
अगस्त 2026 में शेयर और कमोडिटी परपेचुअल्स का कारोबार $778 अरब रहा, जो प्रमुख प्लेटफॉर्मों के कुल परपेचुअल वॉल्यूम का 23.48% था। [13] जनवरी से मई 2026 के बीच क्रिप्टो एक्सचेंजों ने शेयर, इंडेक्स और कमोडिटी से जुड़े परपेचुअल्स में $1.32 ट्रिलियन से अधिक का कारोबार प्रोसेस किया—2025 के पूरे $104.21 अरब से कई गुना अधिक। [18][23]
29 मई 2026 को CFTC ने KalshiEX के बिटकॉइन परपेचुअल को मंजूरी दी, जिससे अमेरिकी विनियमित ढांचे में ‘ट्रू परपेचुअल’ फ्यूचर्स के लिए एक रास्ता खुला। [50][51]