3 सितंबर को होसैन शरियत्मदारी ने ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से फारस की खाड़ी तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी अंतरराष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिक केबलों को बाधित या काटने की अपील की। [11][14][15] उन्होंने माना कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध होगा, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के कथित...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Hossein Shariatmadari, editor of Iran’s ultra conservative Kayhan newspaper and a representative of the supreme leader, urge the Ir. Article summary: On September 3, Hossein Shariatmadari urged Iran’s military and the IRGC to disrupt or cut international fibre optic cables on the Persian Gulf seabed and through the Strait of Hormuz.. Topic tags: general web, prompt engineering, ai, workflow, security. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, click
होसैन शरियत्मदारी ने 3 सितंबर को ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से फारस की खाड़ी के समुद्रतल और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय फाइबर-ऑप्टिक केबलों के कामकाज में गंभीर बाधा डालने या उन्हें काटने की अपील की। शरियत्मदारी ईरान के अति-रूढ़िवादी कयहान अखबार के संपादक और सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि हैं। 11
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उन्होंने स्वीकार किया कि जानबूझकर केबल काटना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। फिर भी उन्होंने इसे अमेरिका और उसके “दुष्ट सहयोगियों” के कथित अपराधों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बताया और तर्क दिया कि ईरान को इन “बुराई के स्रोतों” को झुकाने के लिए ऐसा करने का अधिकार है। 14
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होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ तेल-जहाजरानी का अहम रास्ता नहीं है, बल्कि डिजिटल संपर्क का भी एक संवेदनशील केंद्र है। समुद्र के नीचे कई फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क यहां से गुजरते हैं और भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया को खाड़ी देशों तथा मिस्र के जरिए यूरोप से जोड़ते हैं। इनमें एशिया-अफ्रीका-यूरोप 1 (AAE-1), FALCON और गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल केबल सिस्टम जैसे नेटवर्क शामिल हैं। 8
इन मार्गों में एक से अधिक केबलों को नुकसान होने पर खाड़ी क्षेत्र की इंटरनेट क्षमता, क्लाउड सेवाएं, डेटा सेंटरों के बीच संपर्क, कंपनियों के नेटवर्क और अन्य डिजिटल संचार पर गंभीर दबाव पड़ सकता है। परिणाम के रूप में डेटा ट्रैफिक धीमा हो सकता है, वैकल्पिक मार्गों पर भीड़ बढ़ सकती है और कुछ सेवाओं में रुकावट आ सकती है। 8
यह अपील ऐसे समय आई जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर बढ़ा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि अमेरिकी बलों ने ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की, जिनमें वायु-रक्षा स्थल, रडार सिस्टम, समुद्री परिसंपत्तियां, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता और संचार स्थल शामिल थे। 2
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हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर शरियत्मदारी की अपील और किसी वास्तविक केबल-हमले की योजना या अभियान के बीच प्रत्यक्ष, स्वतंत्र रूप से पुष्ट संबंध स्थापित नहीं होता। इसे एक सार्वजनिक, उग्र दबाव-रणनीति के आह्वान के रूप में देखना अधिक उचित है।
यदि कई समुद्रतलीय केबल लंबे समय के लिए बाधित होती हैं, तो खाड़ी देशों पर असर अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है क्योंकि उनकी अंतरराष्ट्रीय डिजिटल कनेक्टिविटी का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर है। बैंकिंग और सीमा-पार भुगतान से जुड़े कुछ संचार नेटवर्क भी प्रभावित हो सकते हैं यदि उनके दूरसंचार प्रदाताओं की क्षमता घटे।
लेकिन उपलब्ध साक्ष्य यह निष्कर्ष नहीं देते कि ऐसा हमला अपने-आप वैश्विक SWIFT प्रणाली को पूरी तरह बंद कर देगा या 2008 जैसी वित्तीय मंदी दोहरा देगा। वह तुलना अधिकतम एक संभावित व्यापक झटके की चेतावनी है—विशेषकर यदि केबलों पर असर के साथ जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति में भी बाधा हो। 8
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3 सितंबर को होसैन शरियत्मदारी ने ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से फारस की खाड़ी तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी अंतरराष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिक केबलों को बाधित या काटने की अपील की। [11][14][15]
3 सितंबर को होसैन शरियत्मदारी ने ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से फारस की खाड़ी तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी अंतरराष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिक केबलों को बाधित या काटने की अपील की। [11][14][15] उन्होंने माना कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध होगा, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के कथित अपराधों के जवाब में इसे जरूरी कदम बताया। [14][15]
होर्मुज से गुजरने वाली केबलें भारत और दक्षिण पूर्व एशिया को खाड़ी देशों व मिस्र के रास्ते यूरोप से जोड़ती हैं; कई केबलों में AAE 1 भी शामिल है। [8]