यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमले रूस के तेल क्षेत्र के लिए केवल अलग-अलग, छोटी अवधि की रुकावट नहीं रह गए हैं। रिफाइनरी इकाइयों को नुकसान से पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन घटता है; और जब भंडारण, बंदरगाह क्षमता, टैंकर उपलब्धता तथा निर्यात मार्ग भी दबाव में हों, तो उत्पादक हर अतिरिक्त बैरल कच्चे तेल को दूसरी जगह नहीं भेज सकते। नतीजतन, रिफाइनरी संकट कच्चे तेल उत्पादन पर भी अंकुश लगा सकता है।
रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्ज़ेंडर नोवाक ने उत्पादन में गिरावट को अस्थायी बताया और कहा कि रिफाइनरियों का रखरखाव पूरा होने पर उत्पादन बढ़ेगा। यह बात किसी एक संयंत्र की मरम्मत के संदर्भ में सही हो सकती है। लेकिन बार-बार के हमले, कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुंची रिफाइनिंग दरें, घरेलू ईंधन की किल्लत और निर्यात रोक यह संकेत देते हैं कि जोखिम केवल एक बार की तकनीकी बाधा तक सीमित नहीं है।
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511 मिलियन टन वाला आंकड़ा क्या था?
यहां एक अहम अंतर है। 511 मिलियन टन रूस का मई में जारी 2026 के लिए कच्चे तेल और गैस कंडेनसेट उत्पादन का अनुमान था; यह पिछले वर्ष के आसपास स्थिर रहने का अनुमान था, 17 साल का निचला स्तर नहीं।
बाद के सरकारी मसौदा पूर्वानुमान में 2026 के कच्चे तेल उत्पादन का अनुमान घटाकर करीब 494.2 मिलियन टन, यानी लगभग 98.8 लाख बैरल प्रतिदिन, कर दिया गया। यह पहले के अनुमान से 17.2 मिलियन टन कम और 2009 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा।
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रिफाइनरी बंद होने से कच्चे तेल पर असर क्यों पड़ता है?
रिफाइनरियां कम चलती हैं तो घरेलू बाजार में कच्चे तेल की मांग कम होती है। सामान्य परिस्थिति में उत्पादक वह तेल निर्यात कर सकते हैं या भंडारण में डाल सकते हैं। मगर निर्यात ढांचे, जहाजरानी और भंडारण पर दबाव हो तो यह विकल्प सीमित पड़ जाता है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों के कारण 2026 में रूसी कच्चा तेल उत्पादन करीब 3% घटकर 89 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान लगाया था। रिस्टैड एनर्जी ने भी रिफाइनरियों, बंदरगाहों और टैंकरों पर हमलों तथा कड़े प्रतिबंधों के बाद रूस के लिए अपना अनुमान घटाया है: 2026 का औसत 89.5 लाख बैरल प्रतिदिन और 2027 में करीब 86 लाख बैरल प्रतिदिन।
असली झटका डीज़ल जैसी उत्पादक इकाइयों को
हर रिफाइनरी बाधा का असर एक जैसा नहीं होता। केवल कच्चे तेल को प्राथमिक रूप से अलग करने वाली डिस्टिलेशन क्षमता के बजाय, अगर हमले द्वितीयक और उन्नत प्रोसेसिंग इकाइयों पर हों, तो डीज़ल, पेट्रोल और जेट ईंधन जैसे अधिक मूल्य वाले उत्पादों की प्राप्ति सीधे प्रभावित होती है।
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रॉयटर्स के आकलन के अनुसार, जनवरी से मई के बीच 16 रिफाइनरियों में हमलों से करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई। इसके बाद मध्य रूस की कई प्रमुख रिफाइनरियों को उत्पादन रोकना या घटाना पड़ा।
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डीज़ल उत्पादन पर असर स्पष्ट था: अप्रैल में उत्पादन महीने-दर-महीने करीब 10% घटा और मई में फिर लगभग 10% गिरा। देर गर्मियों तक दैनिक तेल-प्रसंस्करण दर कई वर्षों के निचले स्तरों पर पहुंच गई थी।
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निर्यात रोक घरेलू दबाव का संकेत
रूस ने जुलाई में डीज़ल निर्यात पर रोक लगाई और नोवाक ने यह भी कहा कि देश ईंधन आयात शुरू करेगा। बाद में डीज़ल, समुद्री ईंधन और गैस ऑयल पर लागू प्रतिबंध को 30 सितंबर तक बढ़ाया गया। सरकार का कहना था कि यह कदम घरेलू ईंधन बाजार को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है।
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कई क्षेत्रों में ईंधन बिक्री की सीमाएं, कीमतों में बढ़ोतरी, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और राशनिंग की खबरें आईं। इसका व्यावहारिक अर्थ है कि निर्यात के लिए उपलब्ध होने वाला उत्पाद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रोका जा रहा है।
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यूरोप और वैश्विक बाजार को क्यों फर्क पड़ता है?
यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद यूरोप को रूस से सीधे मिलने वाला डीज़ल पहले की तुलना में काफी कम है। फिर भी असर वैश्विक बाजार के रास्ते पहुंचता है। रूस से कम आपूर्ति मिलने पर तुर्की, उत्तरी अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य खरीदार वैकल्पिक कार्गो के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं—जिनमें वे खेप भी शामिल हो सकती हैं जो अन्यथा यूरोप पहुंचतीं।
इसलिए मुख्य संकेतक रूस से यूरोप की सीधी आपूर्ति भर नहीं है, बल्कि डीज़ल और गैस ऑयल की वैश्विक उपलब्धता का सख्त होना तथा इनके रिफाइनिंग मार्जिन का बढ़ना है। जुलाई की शुरुआती निर्यात रोक के समय वैश्विक डीज़ल कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर तक पहुंचीं।
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डीज़ल, जेट ईंधन, समुद्री गैस ऑयल और हीटिंग ऑयल को ऊर्जा बाजार में अक्सर मिडिल डिस्टिलेट्स कहा जाता है। ये उत्पाद रिफाइनरी क्षमता और व्यापारिक मार्गों के स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसलिए रूसी डीज़ल की कमी पूरे इस समूह को तंग कर सकती है—खासकर यदि यह सर्दियों की हीटिंग मांग, अन्य देशों में रिफाइनरी रखरखाव या पश्चिम एशिया की शिपिंग बाधाओं के साथ हो।
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आगे क्या देखना चाहिए?
निर्णायक कारक अवधि है। यदि मरम्मत टिकाऊ रहती है और हमलों की रफ्तार कम होती है, तो रूस कुछ कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन वापस बढ़ा सकता है। लेकिन यदि हमले जारी रहते हैं, तो रिफाइनरी बाधाएं बार-बार लौट सकती हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू उत्पाद-कमी, कच्चे तेल उत्पादन पर दबाव और अंतरराष्ट्रीय डीज़ल बाजार में तंगी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
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