चूहे के नए अध्ययनों के अनुसार, कुछ ट्यूमर अपने आसपास PRDX1 नामक एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम छोड़ते हैं, जो टी कोशिकाओं के सक्रियण के लिए जरूरी ROS संकेतों को घटाकर उनकी कैंसर विरोधी क्षमता कमजोर कर सकता है। प्रस्तावित ‘रेडॉक्स चेकपॉइंट’ PD 1/PD L1 से अलग है: इसमें रिसेप्टर लिगैंड ब्रेक लगाने के बजाय ट्यूमर के स्थानीय रासाय...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Terra से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How do tumors evade T-cell–mediated immune destruction by releasing the antioxidant peroxiredoxin-1 (PRDX1) to remove the reactive oxygen sp. Article summary: Tumors can create an extracellular antioxidant “sink”: they release PRDX1, a peroxide-removing enzyme, into tumor interstitial fluid. By lowering the small, signaling-level reactive oxygen species (ROS) that T cells requ. Topic tags: general, government, academic, general web, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
कैंसर इम्यूनोथेरेपी की चर्चा अक्सर PD-1/PD-L1 जैसे रिसेप्टर-आधारित ‘चेकपॉइंट’ के इर्द-गिर्द होती है। लेकिन नए शोध से ट्यूमर के बच निकलने का एक और संभावित तरीका सामने आया है: वे अपने आसपास का रासायनिक माहौल बदल सकते हैं।
कुछ ट्यूमर कोशिकाएं एंटीऑक्सिडेंट प्रोटीन पेरॉक्सीरिडॉक्सिन-1 (PRDX1) छोड़ती हैं। यह प्रोटीन रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़, यानी ROS, को हटा सकता है—जबकि टी कोशिकाओं को सक्रिय होकर ट्यूमर पर हमला करने के लिए ROS की बहुत कम, नियंत्रित मात्रा चाहिए होती है। शोधकर्ता इसे संभावित ‘रेडॉक्स चेकपॉइंट’ कह रहे हैं। 13
ROS को केवल हानिकारक कोशिकीय उपोत्पाद समझना अधूरा होगा। अधिक मात्रा में वे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन कम और सख्ती से नियंत्रित स्तर पर वे प्रतिरक्षा कोशिकाओं की सिग्नलिंग में भी भाग लेते हैं। पेरॉक्सीरिडॉक्सिन एंटीऑक्सिडेंट एंजाइमों का एक समूह है, जो हाइड्रोजन पेरॉक्साइड को तोड़कर रेडॉक्स संतुलन नियंत्रित करता है। 17
नए काम में वैज्ञानिकों ने ट्यूमर इंटरस्टिशियल फ्लूइड—अर्थात ट्यूमर के भीतर कोशिकाओं के आसपास मौजूद द्रव—का अध्ययन किया। इसमें एंटीऑक्सिडेंट-समृद्ध वातावरण मिला। ट्यूमर से निकला PRDX1 स्थानीय स्तर पर ROS हटाता था, जिससे टी कोशिकाओं का सक्रियण, बढ़ना और प्रभावी प्रतिरक्षा कार्य घट गया। सरल शब्दों में, ट्यूमर को हर टी कोशिका को सीधे निष्क्रिय करने की जरूरत नहीं पड़ सकती; वह उस रासायनिक संकेत को कम कर सकता है जिसकी टी कोशिका को ‘ऑन’ होने के लिए आवश्यकता है। 13
इसीलिए इसे रेडॉक्स चेकपॉइंट कहा जा रहा है। यह PD-1/PD-L1 अवरोधन से अवधारणात्मक रूप से अलग है, क्योंकि PD-1/PD-L1 अवरोधक रिसेप्टर-आधारित ब्रेक पर काम करते हैं। फिर भी, दोनों रास्तों का अंतिम नतीजा एक जैसा हो सकता है: ट्यूमर के विरुद्ध टी-सेल प्रतिक्रिया कमजोर पड़ना। 4
13
सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण अभी प्रीक्लिनिकल हैं, यानी मुख्यतः प्रयोगशाला और पशु-अध्ययनों तक सीमित हैं। रिपोर्ट किए गए चूहे के प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने CRISPR/Cas9 जीन-संपादन तकनीक से ऐसी ट्यूमर कोशिकाएं बनाईं जो PRDX1 नहीं बना सकती थीं। इससे ट्यूमर इंटरस्टिशियल फ्लूइड में PRDX1 घटा और टी-सेल दमन कम हुआ।
अध्ययन के अनुसार, PRDX1-विहीन ट्यूमर पर प्रतिरक्षा तंत्र का नियंत्रण अधिक मजबूत था। मेलेनोमा मॉडल में PRDX1-रहित ट्यूमर अस्वीकार हो गए, जबकि ट्यूमर PRDX1 की कमी ने कुछ पहले से प्रतिरोधी ट्यूमर को इम्यून-चेकपॉइंट थेरेपी के प्रति संवेदनशील बनाया। 13
सूजन से जुड़े कोलोरेक्टल कैंसर के एक अलग मॉडल में भी Prdx1 नॉकआउट से कोलन ट्यूमर बनना दब गया। इन ट्यूमर में CD4+ और CD8+ टी कोशिकाओं की घुसपैठ अधिक तथा CD163+ ट्यूमर-संबद्ध मैक्रोफेज कम पाए गए—जो कम प्रतिरक्षा-दमनकारी वातावरण के अनुरूप है। 2
ये निष्कर्ष इस विचार को समर्थन देते हैं कि PRDX1 प्रतिरक्षा से बच निकलने में योगदान दे सकता है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हर कैंसर स्रावित PRDX1 पर निर्भर है या इसे रोकना मनुष्यों में सुरक्षित और प्रभावी होगा।
मानव आंकड़े फिलहाल उत्साहजनक संकेत देते हैं, पर वे क्लिनिकल प्रमाण नहीं हैं। कोलोरेक्टल कैंसर में PRDX1 की अधिक अभिव्यक्ति का संबंध खराब रोग-पूर्वानुमान और कम टी-सेल घुसपैठ से बताया गया है। 10
हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) के शोध में ट्यूमर-संबद्ध बैक्टीरिया की मौजूदगी से PRDX1 अभिव्यक्ति बढ़ी। इसका संबंध CD8+ टी-सेल की कैंसर-मारने की क्षमता में कमी और PD-1 ब्लॉकेड से कम लाभ के साथ मिला; in vivo प्रयोगों में PRDX1 अवरोधन ने बताई गई प्रतिरोधी स्थिति को उलट दिया। 1
ये संबंध PRDX1 को आगे जांचे जाने योग्य बायोमार्कर और उपचार लक्ष्य बनाते हैं। लेकिन किसी ट्यूमर नमूने में मिला सहसंबंध यह सिद्ध नहीं करता कि किसी मरीज के कैंसर में प्रतिरक्षा से बचने का प्रमुख कारण PRDX1 स्राव ही है। इसके लिए रोगियों पर भावी अध्ययन, दवा-विज्ञान संबंधी शोध और क्लिनिकल ट्रायल जरूरी होंगे।
ये सभी विकल्प अभी प्रयोगात्मक स्तर पर हैं:
सबसे बड़ी चुनौती चयनात्मकता है। PRDX1 स्वस्थ कोशिकाओं में भी रेडॉक्स नियंत्रण के महत्वपूर्ण आंतरिक काम करता है। Prdx1 की कमी वाले चूहे के मॉडलों में सूजन संबंधी लक्षण और लाल रक्त कोशिकाओं को साफ करने में दोष देखे गए हैं। 3 PRDX1 की भूमिका संदर्भ पर निर्भर भी है: पूर्व शोध में इसे ऑक्सीडेटिव तनाव के दौरान नेचुरल किलर (NK) कोशिकाओं के जीवित रहने और उनकी कैंसर-विरोधी गतिविधि का समर्थन करते पाया गया है।
7 इसलिए पूरे शरीर में काम करने वाला PRDX1 अवरोधक विषाक्तता पैदा कर सकता है या लाभकारी प्रतिरक्षा कार्यों को नुकसान पहुंचा सकता है।
रेडॉक्स-चेकपॉइंट मॉडल यह समझाने में मदद कर सकता है कि ऑक्सिडेंट को बिना भेदभाव कम करना कैंसर में हमेशा उपयोगी क्यों नहीं रहा। यदि टी-सेल सक्रियण के लिए सीमित ROS संकेत जरूरी हैं, तो ट्यूमर के वातावरण में व्यापक एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव सैद्धांतिक रूप से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कमजोर कर सकता है और कैंसर कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव सहने में भी मदद दे सकता है। 13
17
इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी एंटीऑक्सिडेंट नुकसानदेह हैं, या कैंसर से जूझ रहे लोगों को केवल इस तंत्र के आधार पर अपने सप्लीमेंट बदल देने चाहिए। प्रभाव पदार्थ, खुराक, लेने के तरीके, समय, ट्यूमर के प्रकार और उपचार के संदर्भ पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, प्रीक्लिनिकल शोध की एक समीक्षा में उच्च-खुराक विटामिन C ने चूहे के एक लिम्फोमा मॉडल में एंटी-PD-1 उपचार की कैंसर-विरोधी गतिविधि बढ़ाई और एडॉप्टिव CD8+ टी-सेल गतिविधि के कुछ पहलुओं को बेहतर किया। 5
व्यावहारिक संदेश व्यापक परहेज नहीं, बल्कि सटीकता है: ट्यूमर प्रतिरक्षा में कम ROS हमेशा बेहतर नहीं होते और अधिक ROS भी हमेशा बेहतर नहीं होते।
ट्यूमर से स्रावित PRDX1 कैंसर के लिए टी कोशिकाओं को रासायनिक रूप से दबाने का एक नया संभावित तरीका हो सकता है: यह प्रतिरक्षा सक्रियण के लिए जरूरी छोटे ROS संकेतों को हटा देता है। चूहे के निष्कर्ष इसे संयोजन इम्यूनोथेरेपी के लिए एक आशाजनक उम्मीदवार बनाते हैं, जबकि मानव ट्यूमर डेटा गहन जांच का शुरुआती आधार देते हैं। 10
13
फिलहाल PRDX1 को एक प्रभावशाली प्रीक्लिनिकल लक्ष्य के रूप में देखना चाहिए—मानवों में प्रमाणित कैंसर-दवा लक्ष्य के रूप में नहीं। उपचार या सप्लीमेंट के बारे में कोई बदलाव ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
चूहे के नए अध्ययनों के अनुसार, कुछ ट्यूमर अपने आसपास PRDX1 नामक एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम छोड़ते हैं, जो टी कोशिकाओं के सक्रियण के लिए जरूरी ROS संकेतों को घटाकर उनकी कैंसर विरोधी क्षमता कमजोर कर सकता है।
चूहे के नए अध्ययनों के अनुसार, कुछ ट्यूमर अपने आसपास PRDX1 नामक एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम छोड़ते हैं, जो टी कोशिकाओं के सक्रियण के लिए जरूरी ROS संकेतों को घटाकर उनकी कैंसर विरोधी क्षमता कमजोर कर सकता है। प्रस्तावित ‘रेडॉक्स चेकपॉइंट’ PD 1/PD L1 से अलग है: इसमें रिसेप्टर लिगैंड ब्रेक लगाने के बजाय ट्यूमर के स्थानीय रासायनिक वातावरण में सक्रियण संकेत दबाया जाता है।
PRDX1 को रोकना इम्यून चेकपॉइंट थेरेपी के साथ उपयोगी हो सकता है, लेकिन PRDX1 के सामान्य सुरक्षात्मक कार्य भी हैं; इसलिए ट्यूमर केंद्रित और चयनात्मक तरीकों की जरूरत होगी।
चूहे के नए अध्ययनों के अनुसार, कुछ ट्यूमर अपने आसपास PRDX1 नामक एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम छोड़ते हैं, जो टी कोशिकाओं के सक्रियण के लिए जरूरी ROS संकेतों को घटाकर उनकी कैंसर विरोधी क्षमता कमजोर कर सकता है। प्रस्तावित ‘रेडॉक्स चेकपॉइंट’ PD 1/PD L1 से अलग है: इसमें रिसेप्टर लिगैंड ब्रेक लगाने के बजाय ट्यूमर के स्थानीय रासाय...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Terra से संपादितGPT Image 2 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How do tumors evade T-cell–mediated immune destruction by releasing the antioxidant peroxiredoxin-1 (PRDX1) to remove the reactive oxygen sp. Article summary: Tumors can create an extracellular antioxidant “sink”: they release PRDX1, a peroxide-removing enzyme, into tumor interstitial fluid. By lowering the small, signaling-level reactive oxygen species (ROS) that T cells requ. Topic tags: general, government, academic, general web, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
कैंसर इम्यूनोथेरेपी की चर्चा अक्सर PD-1/PD-L1 जैसे रिसेप्टर-आधारित ‘चेकपॉइंट’ के इर्द-गिर्द होती है। लेकिन नए शोध से ट्यूमर के बच निकलने का एक और संभावित तरीका सामने आया है: वे अपने आसपास का रासायनिक माहौल बदल सकते हैं।
कुछ ट्यूमर कोशिकाएं एंटीऑक्सिडेंट प्रोटीन पेरॉक्सीरिडॉक्सिन-1 (PRDX1) छोड़ती हैं। यह प्रोटीन रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़, यानी ROS, को हटा सकता है—जबकि टी कोशिकाओं को सक्रिय होकर ट्यूमर पर हमला करने के लिए ROS की बहुत कम, नियंत्रित मात्रा चाहिए होती है। शोधकर्ता इसे संभावित ‘रेडॉक्स चेकपॉइंट’ कह रहे हैं। 13
ROS को केवल हानिकारक कोशिकीय उपोत्पाद समझना अधूरा होगा। अधिक मात्रा में वे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन कम और सख्ती से नियंत्रित स्तर पर वे प्रतिरक्षा कोशिकाओं की सिग्नलिंग में भी भाग लेते हैं। पेरॉक्सीरिडॉक्सिन एंटीऑक्सिडेंट एंजाइमों का एक समूह है, जो हाइड्रोजन पेरॉक्साइड को तोड़कर रेडॉक्स संतुलन नियंत्रित करता है। 17
नए काम में वैज्ञानिकों ने ट्यूमर इंटरस्टिशियल फ्लूइड—अर्थात ट्यूमर के भीतर कोशिकाओं के आसपास मौजूद द्रव—का अध्ययन किया। इसमें एंटीऑक्सिडेंट-समृद्ध वातावरण मिला। ट्यूमर से निकला PRDX1 स्थानीय स्तर पर ROS हटाता था, जिससे टी कोशिकाओं का सक्रियण, बढ़ना और प्रभावी प्रतिरक्षा कार्य घट गया। सरल शब्दों में, ट्यूमर को हर टी कोशिका को सीधे निष्क्रिय करने की जरूरत नहीं पड़ सकती; वह उस रासायनिक संकेत को कम कर सकता है जिसकी टी कोशिका को ‘ऑन’ होने के लिए आवश्यकता है। 13
इसीलिए इसे रेडॉक्स चेकपॉइंट कहा जा रहा है। यह PD-1/PD-L1 अवरोधन से अवधारणात्मक रूप से अलग है, क्योंकि PD-1/PD-L1 अवरोधक रिसेप्टर-आधारित ब्रेक पर काम करते हैं। फिर भी, दोनों रास्तों का अंतिम नतीजा एक जैसा हो सकता है: ट्यूमर के विरुद्ध टी-सेल प्रतिक्रिया कमजोर पड़ना। 4
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सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण अभी प्रीक्लिनिकल हैं, यानी मुख्यतः प्रयोगशाला और पशु-अध्ययनों तक सीमित हैं। रिपोर्ट किए गए चूहे के प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने CRISPR/Cas9 जीन-संपादन तकनीक से ऐसी ट्यूमर कोशिकाएं बनाईं जो PRDX1 नहीं बना सकती थीं। इससे ट्यूमर इंटरस्टिशियल फ्लूइड में PRDX1 घटा और टी-सेल दमन कम हुआ।
अध्ययन के अनुसार, PRDX1-विहीन ट्यूमर पर प्रतिरक्षा तंत्र का नियंत्रण अधिक मजबूत था। मेलेनोमा मॉडल में PRDX1-रहित ट्यूमर अस्वीकार हो गए, जबकि ट्यूमर PRDX1 की कमी ने कुछ पहले से प्रतिरोधी ट्यूमर को इम्यून-चेकपॉइंट थेरेपी के प्रति संवेदनशील बनाया। 13
सूजन से जुड़े कोलोरेक्टल कैंसर के एक अलग मॉडल में भी Prdx1 नॉकआउट से कोलन ट्यूमर बनना दब गया। इन ट्यूमर में CD4+ और CD8+ टी कोशिकाओं की घुसपैठ अधिक तथा CD163+ ट्यूमर-संबद्ध मैक्रोफेज कम पाए गए—जो कम प्रतिरक्षा-दमनकारी वातावरण के अनुरूप है। 2
ये निष्कर्ष इस विचार को समर्थन देते हैं कि PRDX1 प्रतिरक्षा से बच निकलने में योगदान दे सकता है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि हर कैंसर स्रावित PRDX1 पर निर्भर है या इसे रोकना मनुष्यों में सुरक्षित और प्रभावी होगा।
मानव आंकड़े फिलहाल उत्साहजनक संकेत देते हैं, पर वे क्लिनिकल प्रमाण नहीं हैं। कोलोरेक्टल कैंसर में PRDX1 की अधिक अभिव्यक्ति का संबंध खराब रोग-पूर्वानुमान और कम टी-सेल घुसपैठ से बताया गया है। 10
हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) के शोध में ट्यूमर-संबद्ध बैक्टीरिया की मौजूदगी से PRDX1 अभिव्यक्ति बढ़ी। इसका संबंध CD8+ टी-सेल की कैंसर-मारने की क्षमता में कमी और PD-1 ब्लॉकेड से कम लाभ के साथ मिला; in vivo प्रयोगों में PRDX1 अवरोधन ने बताई गई प्रतिरोधी स्थिति को उलट दिया। 1
ये संबंध PRDX1 को आगे जांचे जाने योग्य बायोमार्कर और उपचार लक्ष्य बनाते हैं। लेकिन किसी ट्यूमर नमूने में मिला सहसंबंध यह सिद्ध नहीं करता कि किसी मरीज के कैंसर में प्रतिरक्षा से बचने का प्रमुख कारण PRDX1 स्राव ही है। इसके लिए रोगियों पर भावी अध्ययन, दवा-विज्ञान संबंधी शोध और क्लिनिकल ट्रायल जरूरी होंगे।
ये सभी विकल्प अभी प्रयोगात्मक स्तर पर हैं:
सबसे बड़ी चुनौती चयनात्मकता है। PRDX1 स्वस्थ कोशिकाओं में भी रेडॉक्स नियंत्रण के महत्वपूर्ण आंतरिक काम करता है। Prdx1 की कमी वाले चूहे के मॉडलों में सूजन संबंधी लक्षण और लाल रक्त कोशिकाओं को साफ करने में दोष देखे गए हैं। 3 PRDX1 की भूमिका संदर्भ पर निर्भर भी है: पूर्व शोध में इसे ऑक्सीडेटिव तनाव के दौरान नेचुरल किलर (NK) कोशिकाओं के जीवित रहने और उनकी कैंसर-विरोधी गतिविधि का समर्थन करते पाया गया है।
7 इसलिए पूरे शरीर में काम करने वाला PRDX1 अवरोधक विषाक्तता पैदा कर सकता है या लाभकारी प्रतिरक्षा कार्यों को नुकसान पहुंचा सकता है।
रेडॉक्स-चेकपॉइंट मॉडल यह समझाने में मदद कर सकता है कि ऑक्सिडेंट को बिना भेदभाव कम करना कैंसर में हमेशा उपयोगी क्यों नहीं रहा। यदि टी-सेल सक्रियण के लिए सीमित ROS संकेत जरूरी हैं, तो ट्यूमर के वातावरण में व्यापक एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव सैद्धांतिक रूप से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कमजोर कर सकता है और कैंसर कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव सहने में भी मदद दे सकता है। 13
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इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी एंटीऑक्सिडेंट नुकसानदेह हैं, या कैंसर से जूझ रहे लोगों को केवल इस तंत्र के आधार पर अपने सप्लीमेंट बदल देने चाहिए। प्रभाव पदार्थ, खुराक, लेने के तरीके, समय, ट्यूमर के प्रकार और उपचार के संदर्भ पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, प्रीक्लिनिकल शोध की एक समीक्षा में उच्च-खुराक विटामिन C ने चूहे के एक लिम्फोमा मॉडल में एंटी-PD-1 उपचार की कैंसर-विरोधी गतिविधि बढ़ाई और एडॉप्टिव CD8+ टी-सेल गतिविधि के कुछ पहलुओं को बेहतर किया। 5
व्यावहारिक संदेश व्यापक परहेज नहीं, बल्कि सटीकता है: ट्यूमर प्रतिरक्षा में कम ROS हमेशा बेहतर नहीं होते और अधिक ROS भी हमेशा बेहतर नहीं होते।
ट्यूमर से स्रावित PRDX1 कैंसर के लिए टी कोशिकाओं को रासायनिक रूप से दबाने का एक नया संभावित तरीका हो सकता है: यह प्रतिरक्षा सक्रियण के लिए जरूरी छोटे ROS संकेतों को हटा देता है। चूहे के निष्कर्ष इसे संयोजन इम्यूनोथेरेपी के लिए एक आशाजनक उम्मीदवार बनाते हैं, जबकि मानव ट्यूमर डेटा गहन जांच का शुरुआती आधार देते हैं। 10
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फिलहाल PRDX1 को एक प्रभावशाली प्रीक्लिनिकल लक्ष्य के रूप में देखना चाहिए—मानवों में प्रमाणित कैंसर-दवा लक्ष्य के रूप में नहीं। उपचार या सप्लीमेंट के बारे में कोई बदलाव ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
चूहे के नए अध्ययनों के अनुसार, कुछ ट्यूमर अपने आसपास PRDX1 नामक एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम छोड़ते हैं, जो टी कोशिकाओं के सक्रियण के लिए जरूरी ROS संकेतों को घटाकर उनकी कैंसर विरोधी क्षमता कमजोर कर सकता है।
चूहे के नए अध्ययनों के अनुसार, कुछ ट्यूमर अपने आसपास PRDX1 नामक एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम छोड़ते हैं, जो टी कोशिकाओं के सक्रियण के लिए जरूरी ROS संकेतों को घटाकर उनकी कैंसर विरोधी क्षमता कमजोर कर सकता है। प्रस्तावित ‘रेडॉक्स चेकपॉइंट’ PD 1/PD L1 से अलग है: इसमें रिसेप्टर लिगैंड ब्रेक लगाने के बजाय ट्यूमर के स्थानीय रासायनिक वातावरण में सक्रियण संकेत दबाया जाता है।
PRDX1 को रोकना इम्यून चेकपॉइंट थेरेपी के साथ उपयोगी हो सकता है, लेकिन PRDX1 के सामान्य सुरक्षात्मक कार्य भी हैं; इसलिए ट्यूमर केंद्रित और चयनात्मक तरीकों की जरूरत होगी।