क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने एक अति शीतल रूबिडियम परमाणु की तरंग के स्थिर और मुक्त पतन करते हिस्सों के बीच सापेक्ष क्वांटम फेज़ मापी। एक हिस्से को चुंबकीय क्षेत्र से प्रयोगशाला के सापेक्ष स्थिर रखा गया, जबकि दूसरे हिस्से को ऊपर की ओर गति देकर पृथ्वी के गुरुत्व में मुक्त पतन करने दिया गया। नतीजा इस सीमित, कम ऊर्ज...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did the Quantum Galileo Interferometer experiment led by researchers from Ben-Gurion University, the University of Ulm, and the Universi. Article summary: The Quantum Galileo Interferometer (QGI) measured the relative quantum phase between two parts of an ultracold ^87Rb atom wave packet: one magnetically levitated at rest in the laboratory frame and one released upward, t. Topic tags: general, academic, education, general web, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
परमाणु को गिरते देखना नई बात नहीं है। इस प्रयोग की खासियत यह है कि वैज्ञानिकों ने एक ही अति-शीतल रूबिडियम-87 परमाणु की पदार्थ-तरंग को दो सुसंगत हिस्सों में बाँटा: एक हिस्सा प्रयोगशाला के सापेक्ष स्थिर रहा, जबकि दूसरा ऊपर की ओर भेजे जाने के बाद पृथ्वी के गुरुत्व में मुक्त-पतन करता रहा। बाद में दोनों को फिर मिलाया गया। उनके हस्तक्षेप पैटर्न ने दोनों रास्तों में जमा हुआ क्वांटम फेज़ अंतर बता दिया। 1
टीम ने परमाणु-तरंग को स्थानिक सुपरपोज़िशन में रखा—अर्थात क्वांटम वर्णन में वह एक साथ दो अलग-अलग गतियों से जुड़ी थी। चुंबकीय क्षेत्र ने एक शाखा को गुरुत्व के विरुद्ध सहारा दिया, जिससे वह प्रयोगशाला फ्रेम में स्थिर रही। दूसरी शाखा को संवेग का पल्स देकर ऊपर उछाला गया; उसे ऐसी अवस्था में रखा गया जो चुंबकीय ढाल के प्रति असंवेदनशील थी, इसलिए वह बैलिस्टिक पथ पर पृथ्वी के गुरुत्व के अधीन मुक्त-पतन कर सकी। 1
5
15
नियंत्रित समय तक विकसित होने के बाद दोनों शाखाओं को पुनः जोड़ा गया। क्वांटम हस्तक्षेप उस फेज़ अंतर को मापने योग्य संकेत में बदल देता है। यही परमाणु इंटरफेरोमीटर का मूल काम है: एक ही क्वांटम वस्तु की दो सुसंगत इतिहास-रेखाओं में जमा फेज़ की तुलना।
मुक्त-पतन वाली शाखा के लिए अनुमानित फेज़ में एक पद शामिल है जो इस प्रकार बदलता है:
[
\frac{m g^2 T^3}{6\hbar},
]
इसके साथ स्थिति पर निर्भर एक अन्य पद भी होता है। यहाँ (m) परमाणु का द्रव्यमान, (g) गुरुत्वीय त्वरण, (T) मुक्त-विकास का समय और (\hbar) अपसारित प्लांक नियतांक है। रिपोर्ट किया गया सापेक्ष फेज़ इस भविष्यवाणी के अनुरूप था। 1
परमाणु इंटरफेरोमीटर पहले भी गुरुत्व, त्वरण और गुरुत्व से जुड़े फेज़ बदलाव माप चुके हैं। QGI की विशिष्टता यह है कि इसमें पृथ्वी की प्रयोगशाला में एक साथ मौजूद स्थिर संदर्भ और मुक्त-पतन करती शाखा की प्रत्यक्ष तुलना की गई। 1
इस डिज़ाइन से शोधकर्ता उस फेज़ को अलग से निशाना बना सके जो गिरती क्वांटम तरंग को प्रयोगशाला फ्रेम के सापेक्ष वर्णित करने पर जुड़ता है। उनके अनुसार, यह देखा गया फेज़ आइंस्टीन के समतुल्यता सिद्धांत में समर्थित प्रयोगशाला के फ्रेम और साथ-साथ गिरते फ्रेम के बीच रूपांतरण का क्वांटम समकक्ष है। 1
इसलिए “पहला” होने का दावा सीमित अर्थ में समझना चाहिए। यह किसी परमाणु या पदार्थ-तरंग इंटरफेरोमीटर में गुरुत्व का पहला अवलोकन नहीं है; दावा मुक्त-पतन शाखा और एक साथ स्थिर संदर्भ शाखा की इस प्रत्यक्ष तुलना तथा उससे अनुमानित मुक्त-पतन क्वांटम फेज़ मापने का है। 1
यह परिणाम प्रयोग की स्थलीय और कम-ऊर्जा परिस्थितियों में सामान्य क्वांटम फेज़-विकास तथा समतुल्यता सिद्धांत के बीच संगति का समर्थन करता है। सरल शब्दों में, मुक्त-पतन करती पदार्थ-तरंग ने वैसा ही व्यवहार दिखाया जैसा गुरुत्व के संदर्भ में इन दो फ्रेमों के संबंध से अपेक्षित था। 1
यह गुरुत्व और क्वांटम की सीमा पर एक महत्वपूर्ण परिशुद्धता परीक्षण है। लेकिन इसका निष्कर्ष उतना ही है जितना प्रयोग ने परखा है: इन परिस्थितियों में संबंधित क्वांटम भविष्यवाणी और समतुल्यता सिद्धांत की जांची गई व्याख्या आपस में मेल खाती हैं।
यह प्रयोग क्वांटम यांत्रिकी और सामान्य सापेक्षता का एकीकरण नहीं करता। यह न तो गुरुत्व को क्वांटम क्षेत्र सिद्ध करता है, न ग्रैविटॉन का पता लगाता है, और न गुरुत्व-मध्यस्थित एंटैंगलमेंट दिखाता है। इस व्यवस्था में गुरुत्व एक बाहरी, शास्त्रीय क्षेत्र की तरह काम करता है जो परमाणु की गति नियंत्रित करता है; मापन परमाणु की क्वांटम फेज़ प्रतिक्रिया का है। 1
16
साथ ही, यह हर संभावित समतुल्यता-सिद्धांत उल्लंघन करने वाले मॉडल को खारिज करने वाला सार्वभौमिक प्रमाण नहीं है। नतीजे का मेल उन विचलनों को सीमित करता है जो इस परीक्षण में दिख सकते थे, पर अलग वैकल्पिक मॉडलों को अलग प्रयोगों से परखना पड़ सकता है। 1
डियोसी–पेनरोज़ से जुड़े प्रस्ताव अलग सवाल उठाते हैं: क्या स्थानिक सुपरपोज़िशन में रखी पर्याप्त भारी वस्तु गुरुत्व-संबंधी प्रभावों के कारण अपनी क्वांटम सुसंगति खो सकती है? ऐसे विचारों की जांच के लिए वस्तु का द्रव्यमान, दोनों शाखाओं के बीच दूरी और सुसंगति बनाए रखने का समय बढ़ाना जरूरी होता है। 3
16
QGI में एकल रूबिडियम परमाणु ने सुसंगत रहते हुए अनुमानित फेज़ दिखाई। यह छोटी अवधि वाला परमाणु-स्तरीय सुपरपोज़िशन उस दीर्घजीवी, अधिक भारी स्थानिक सुपरपोज़िशन जैसा नहीं है जिसकी आवश्यकता गुरुत्व-संबंधी कोलैप्स मॉडलों की संवेदनशील जांच के लिए होती है। इसलिए यहाँ हस्तक्षेप दिखना, अपने आप में, उन प्रस्तावों को न सिद्ध करता है न खारिज।
भविष्य के पदार्थ-तरंग प्रयोगों में नैनोडायमंड और अन्य मेसोस्कोपिक वस्तुओं जैसी भारी प्रणालियों को सुपरपोज़िशन में रखने का लक्ष्य है। द्रव्यमान, शाखाओं की दूरी और विकास समय बढ़ने पर मानक क्वांटम यांत्रिकी से संभावित विचलनों या विशिष्ट डीकोहेरेंस मॉडलों को पकड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है—हालाँकि तकनीकी चुनौती बहुत बड़ी है। 16
QGI इस दिशा में पूरक उपलब्धि है: उसने स्थिर प्रयोगशाला संदर्भ के मुकाबले मुक्त-पतन से जुड़े क्वांटम फेज़ को सीधे पढ़ने का तरीका दिखाया। भारी वस्तुओं वाले इंटरफेरोमीटर संबंधित, लेकिन अलग लक्ष्य का पीछा करेंगे—क्या द्रव्यमान, स्थानिक अलगाव और समय बढ़ने पर क्वांटम सुसंगति स्वयं बदलती है। 1
16
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने एक अति शीतल रूबिडियम परमाणु की तरंग के स्थिर और मुक्त पतन करते हिस्सों के बीच सापेक्ष क्वांटम फेज़ मापी।
क्वांटम गैलीलियो इंटरफेरोमीटर ने एक अति शीतल रूबिडियम परमाणु की तरंग के स्थिर और मुक्त पतन करते हिस्सों के बीच सापेक्ष क्वांटम फेज़ मापी। एक हिस्से को चुंबकीय क्षेत्र से प्रयोगशाला के सापेक्ष स्थिर रखा गया, जबकि दूसरे हिस्से को ऊपर की ओर गति देकर पृथ्वी के गुरुत्व में मुक्त पतन करने दिया गया।
नतीजा इस सीमित, कम ऊर्जा परीक्षण में क्वांटम यांत्रिकी और आइंस्टीन के समतुल्यता सिद्धांत की संगति का समर्थन करता है; यह गुरुत्व के क्वांटीकृत होने का प्रमाण नहीं है।