व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यूक्रेन पर शांति वार्ता फिलहाल ठप है और रूस केवल ठोस, सार्थक बातचीत में हिस्सा लेगा। [13][6] उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन के राजनीतिक सैन्य नेतृत्व पर हमला नहीं कर रहा, क्योंकि भविष्य की शांति प्रक्रिया में कीव के वार्ताकारों की जरूरत पड़ सकती है। [13] पुतिन ने अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और...
शोध उत्तर

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व्लादिमीर पुतिन ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद रूस को सैन्य रूप से आगे बढ़ता हुआ बताया, लेकिन यूक्रेन के साथ कूटनीतिक प्रक्रिया को लगभग ठप करार दिया। उन्होंने इस गतिरोध के लिए कीव के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया और रूस में जल्द किसी नई बड़ी लामबंदी की खबरों से इनकार किया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में रूस और यूक्रेन के दावों में बड़ा अंतर है। मोर्चे की स्थिति, इलाकों पर नियंत्रण और संभावित सैनिक भर्ती से जुड़ी कई बातें विवादित हैं।
पुतिन ने कहा कि रूस यूक्रेन के राजनीतिक-सैन्य नेतृत्व पर हमला इसलिए नहीं कर रहा क्योंकि अगर कीव शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, तो बातचीत के लिए उन्हीं पक्षों के प्रतिनिधियों की जरूरत होगी। 13
उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर बातचीत की प्रक्रिया फिलहाल “जमी हुई” या ठप है। पुतिन के अनुसार, मॉस्को ऐसी वार्ताओं में शामिल होना चाहता है जिनमें ठोस विषय-वस्तु हो, न कि केवल औपचारिक या निष्फल संपर्क। 6
इस बयान में उन्होंने एक ओर रूस को बातचीत के लिए खुला दिखाया, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी दिया कि मॉस्को अपनी शर्तों और अपने आकलन के मुताबिक ही वार्ता को सार्थक मानेगा।
पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ काम करने को लेकर सहजता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों रूस में स्वागत योग्य अतिथि होंगे। 6
इससे अमेरिका की मदद से संभावित संपर्क का रास्ता खुला जरूर दिखता है, लेकिन पुतिन ने किसी नए, सहमत वार्ता प्रारूप या औपचारिक बैठक की घोषणा नहीं की। इसलिए इसे शांति समझौते की दिशा में ठोस प्रगति के बजाय बातचीत की संभावना खुली रखने वाला संकेत माना जा सकता है।
पुतिन ने कहा कि रूसी सेना डोनबास के अलग-अलग हिस्सों में आगे बढ़ रही है और स्लोवियांस्क तथा क्रामातोर्स्क की दिशा में अभियान जारी है। उन्होंने इस प्रगति के लिए कोई निश्चित समयसीमा बताने से इनकार किया और युद्ध की कठिनाई का हवाला दिया। 7
ये क्रेमलिन के दावे हैं। उपलब्ध सामग्री में इन शहरों या आसपास के क्षेत्रों पर किसी निर्णायक रूसी कब्जे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। युद्धक्षेत्र की रिपोर्टों में दोनों पक्ष अक्सर अपनी स्थिति को बेहतर दिखाते हैं, इसलिए ऐसे दावों का आकलन स्वतंत्र मानचित्रों, उपग्रह तस्वीरों और विश्वसनीय सैन्य विश्लेषणों के साथ करना जरूरी है।
पुतिन ने कहा कि चुनावों के बाद रूस में नई लामबंदी शुरू होने की खबरें “पूरी तरह बकवास” हैं और रूस के खिलाफ चलाया जा रहा “सूचना हमला” हैं। 11
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लेकिन इन आशंकाओं की पृष्ठभूमि केवल सोशल मीडिया अफवाहों तक सीमित नहीं है। यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि रूस के जनरल स्टाफ ने 2026 और 2027 के दौरान अतिरिक्त 6 लाख लोगों को सेना में बुलाने की योजना तैयार की है—दोनों वर्षों में 3-3 लाख। यूक्रेनी पक्ष ने इसके पीछे रूसी सैनिकों के भारी नुकसान और स्वैच्छिक भर्ती में कमी को वजह बताया है। 15
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यह दावा यूक्रेनी खुफिया आकलन पर आधारित है। इससे यह साबित नहीं होता कि रूस ने लामबंदी का आदेश जारी कर दिया है या वह निश्चित रूप से जल्द लागू होने वाली है।
सितंबर 2022 में रूस की “आंशिक लामबंदी” की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में रूसी नागरिक देश से बाहर चले गए थे। इसी वजह से नई लामबंदी की अफवाहों पर रूस में डर और अविश्वास का एक ऐतिहासिक संदर्भ मौजूद है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, एक सप्ताह में 1 लाख 13 हजार से अधिक रूसी नागरिक वेरख्नी लार्स सीमा चौकी के रास्ते जॉर्जिया पहुंचे। रूसी सीमा शुल्क आंकड़ों के हवाले से इस मार्ग पर असामान्य रूप से अधिक आवाजाही की बात कही गई। 10
फिर भी, सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति के जाने का कारण लामबंदी का डर ही था—यह केवल इन आंकड़ों से साबित नहीं होता। इसी तरह, सीमा पर बढ़ी आवाजाही अपने-आप में यह प्रमाण नहीं है कि नई लामबंदी तत्काल शुरू होने वाली थी।
पुतिन ने दावा किया कि रूस ने खार्किव के उत्तर में स्थित सीमावर्ती बस्ती कोजाचा लोपान पर कब्जा कर लिया है। यूक्रेन की 14वीं आर्मी कोर ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बस्ती यूक्रेनी रक्षा बलों के नियंत्रण में है, सैनिक अपनी रक्षात्मक स्थिति बनाए हुए हैं और इलाके में सक्रिय लड़ाई जारी है। 3
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इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने भी यूक्रेनी पक्ष के खंडन का उल्लेख किया और आकलन किया कि उपलब्ध साक्ष्य रूसी कब्जे के दावे का समर्थन नहीं करते। 3
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यूक्रेनी पक्ष ने कोजाचा लोपान क्षेत्र में रूसी नुकसान का भी दावा किया है। हालांकि, ऐसे हताहत आंकड़े और उनसे जुड़े कारण स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं। 4
यूक्रेन ने रूस के उस पुराने दावे को भी खारिज किया था जिसमें कहा गया था कि कोस्तियान्तिनिव्का पर कब्जा कर लिया गया है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने कहा था कि शहर अब भी यूक्रेन के नियंत्रण में है, जबकि शहरी क्षेत्र में लड़ाई जारी थी। 1
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उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पिसारिव्का की सटीक स्थिति पर भरोसे के साथ निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। इसी तरह, इन लड़ाइयों से जुड़े रूस के विशिष्ट हताहत आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है।
बिश्केक के बाद पुतिन का संदेश दोहरा था: रूस सैन्य बढ़त का दावा कर रहा है, लेकिन वार्ता के लिए दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं बता रहा। उन्होंने कीव नेतृत्व को बातचीत में रुकावट का कारण बताया, विटकॉफ और कुशनर के साथ संपर्क की संभावना खुली रखी और नई लामबंदी की खबरों को खारिज किया।
दूसरी ओर, यूक्रेनी अधिकारियों और सैन्य विश्लेषकों ने रूस के कई क्षेत्रीय दावों को चुनौती दी है। 6 लाख सैनिकों की कथित लामबंदी योजना भी अभी खुफिया आकलन है, आधिकारिक रूप से जारी भर्ती आदेश की पुष्टि नहीं। इसलिए पुतिन के बयानों को समझने के लिए रूसी दावों, यूक्रेनी प्रतिवादों और स्वतंत्र सत्यापन—तीनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
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व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यूक्रेन पर शांति वार्ता फिलहाल ठप है और रूस केवल ठोस, सार्थक बातचीत में हिस्सा लेगा। [13][6]
व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि यूक्रेन पर शांति वार्ता फिलहाल ठप है और रूस केवल ठोस, सार्थक बातचीत में हिस्सा लेगा। [13][6] उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन के राजनीतिक सैन्य नेतृत्व पर हमला नहीं कर रहा, क्योंकि भविष्य की शांति प्रक्रिया में कीव के वार्ताकारों की जरूरत पड़ सकती है। [13]
पुतिन ने अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के रूस आने का स्वागत किया, लेकिन किसी तयशुदा अमेरिकी मध्यस्थता वाले वार्ता प्रारूप की घोषणा नहीं की। [6]