3 सितंबर 2026 को Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना BepiColombo की आठ साल लंबी अंतरग्रहीय यात्रा के अंत और बुध पर पहुंचने के अभियान की शुरुआत का संकेत है; यह खुद बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं है। [5][6] 2018 में प्रक्षेपण के बाद मिशन ने सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध अपनी ऊर्जा घटाने के लिए पृथ्वी का एक, शु...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is the significance of BepiColombo’s planned September 3, 2026 separation of its Mercury Transfer Module after an eight-year ESA-JAXA j. Article summary: The 3 September separation is the handoff from interplanetary cruise to Mercury arrival: BepiColombo discards the Mercury Transfer Module (MTM), leaving ESA’s Mercury Planetary Orbiter (MPO) and JAXA’s Mio orbiter to exe. Topic tags: general, general web, academic, government, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, wate
3 सितंबर 2026 को BepiColombo के Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना मिशन के लिए एक साधारण तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक निर्णायक हस्तांतरण होगा। MTM ने अंतरिक्षयान को आंतरिक सौरमंडल में आठ साल तक आगे बढ़ाने के लिए सौर-विद्युत प्रणोदन उपलब्ध कराया। इसके अलग होने के बाद यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का Mercury Planetary Orbiter (MPO) और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA का Mio बुध की कक्षा में स्थापित होने वाली कठिन प्रक्रियाएं पूरी करेंगे। 5
6
हालांकि, 3 सितंबर को BepiColombo बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं करेगा। कक्षा-प्रविष्टि की योजना 21 नवंबर 2026 के लिए है। इसके बाद भी कई अलगाव, कक्षा को ऊपर-नीचे करने वाली चालें और उपकरणों की तैयारियां होंगी। दोनों ऑर्बिटर का नियमित वैज्ञानिक काम अप्रैल 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। 5
7
BepiColombo को 20 अक्टूबर 2018 को लॉन्च किया गया था। बुध की ओर सीधा रास्ता अपनाने के बजाय मिशन ने ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण का सहारा लिया—पृथ्वी का एक, शुक्र के दो और बुध के छह फ्लाईबाय। 1
2
10
इस लंबे और घुमावदार रास्ते की वजह सूर्य का अत्यंत शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण है। सूर्य की ओर बढ़ता कोई भी अंतरिक्षयान गति पकड़ता जाता है। इसलिए केवल बुध की दिशा में उड़ना पर्याप्त नहीं होता; अंतरिक्षयान को लगातार अपनी सूर्य-केंद्रित ऊर्जा कम करनी पड़ती है और अंततः बुध की गति से इतना मेल बैठाना पड़ता है कि वह उसकी कक्षा में पकड़ा जा सके। 4
10
13
गुरुत्वीय फ्लाईबाय ने BepiColombo की दिशा और गति को बदलने में मदद की, जबकि MTM के कम-बल वाले विद्युत प्रणोदन ने लंबे समय तक धीरे-धीरे आवश्यक धक्का दिया। यह तरीका धीमा है, लेकिन पारंपरिक उच्च-शक्ति प्रणोदन की तुलना में ईंधन की जरूरत कम करता है। ESA के अनुसार, इस यात्रा में सौर-विद्युत प्रणोदन से जुड़े हजारों घंटे के जटिल संचालन शामिल रहे। 15
अप्रैल 2024 में बिजली से जुड़ी समस्या के कारण BepiColombo के विद्युत थ्रस्टर पूरी शक्ति पर काम नहीं कर सके। मिशन टीमों ने अभियान रोकने के बजाय मार्ग और संचालन योजना में बदलाव किया। 11
15 जून 2026 को 15:24 CEST पर सौर-विद्युत प्रणोदन प्रणाली ने अपना अंतिम थ्रस्ट आर्क पूरा किया। इस तरह लंबे क्रूज़ चरण का अंत हुआ और मिशन बुध तक पहुंचने के अभियान के लिए तैयार हुआ। 6
MTM के अलग होने के बाद आगमन से जुड़ी चालों में MPO की रासायनिक प्रणोदन प्रणाली प्रमुख भूमिका निभाएगी। इसके बावजूद आगे का चरण बेहद जटिल रहेगा, क्योंकि बुध के पास तेज तापमान, तीव्र सौर विकिरण और अत्यंत सटीक समय पर किए जाने वाले कई प्रज्वलन और अलगाव शामिल हैं। 5
निर्धारित प्रक्रिया में MTM, MPO, Mio और Mio के सुरक्षा कवच वाले संयुक्त ढांचे से अलग होगा। MTM ने अपना मूल काम पूरा कर लिया होगा—यानी सौर ऊर्जा और विद्युत प्रणोदन के सहारे पूरे अंतरिक्षयान को बुध तक पहुंचाना। 5
इस अलगाव के बाद MPO, Mio और उनका सनशील्ड उस विन्यास में रह जाएंगे जिसमें वे बुध के आसपास की अंतिम कक्षीय प्रक्रियाओं में हिस्सा लेंगे। इसके बाद हर हिस्से को सही समय और सही स्थिति पर अलग या पुनर्स्थापित करना होगा। ESA ने इस घटना का लाइव प्रसारण 13:45 CEST से करने की योजना बनाई है।
लाइवस्ट्रीम अपने-आप अंतरिक्षयान को अधिक सुरक्षित नहीं बनाती और न ही उसी क्षण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाती है। इसका महत्व सार्वजनिक और संचारात्मक है: यह वर्षों की शांत क्रूज़ गतिविधियों के बाद मिशन के एक निर्णायक और लगभग अपरिवर्तनीय इंजीनियरिंग पड़ाव को लोगों के सामने लाती है।
मिशन की नियोजित समयरेखा इस प्रकार है:
इनमें से हर पड़ाव पिछले चरण की सफलता पर निर्भर है। MTM का समय से पहले अलग होना, गलत कक्षा में प्रवेश या Mio का गलत स्थिति पर रिलीज होना ऑर्बिटर को उसकी निर्धारित वैज्ञानिक कक्षा तक पहुंचने में बाधित कर सकता है।
हाल के प्रयोगशाला अध्ययनों और अवलोकन संबंधी आंकड़ों के नए विश्लेषण के अनुसार, बुध की सतह के द्रव्यमान का लगभग 37% सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) हो सकता है। यह मात्रा पुराने अनुमानों से 25% तक कम है।
यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सतह में सिलिका की मात्रा से वैज्ञानिक अंदाजा लगा सकते हैं कि बुध की भूपर्पटी कैसे बनी। कम सिलिका वाली संरचना ऐसे ज्वालामुखीय पत्थरों से मेल खा सकती है जो मेंटल—भूपर्पटी के नीचे की परत—के अधिक गहरे और अधिक गर्म हिस्सों के बड़े पैमाने पर आंशिक पिघलने से बने हों।
इस व्याख्या का अर्थ यह हो सकता है कि बुध पर ज्वालामुखीय पदार्थ पहले के अनुमान की तुलना में अधिक गहराई और अधिक तापमान पर बने। हालांकि, यह अभी बुध के आंतरिक ढांचे का अंतिम पुनर्निर्माण नहीं है। सतह की रासायनिक संरचना अलग-अलग क्षेत्रों में बदल सकती है और पृथ्वी से किए गए मापों की अपनी सीमाएं हैं। मुख्य सवाल यह है कि कम सिलिका का अनुमान पूरे बुध पर लागू होता है या कुछ खास भूभागों और मापन-अनिश्चितताओं का परिणाम है।
MPO और Mio इस पहेली के अलग-अलग हिस्सों का अध्ययन करेंगे। MPO के उपकरण बुध की सतह की रासायनिक संरचना, भूविज्ञान, आंतरिक ढांचे और स्थलाकृति की जांच के लिए बनाए गए हैं। इनके आंकड़े तत्वों की मात्रा को ज्वालामुखीय मैदानों, भूपर्पटी की मोटाई, गुरुत्वाकर्षण में बदलाव और ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास से जोड़ सकते हैं।
Mio का मुख्य ध्यान बुध के चुंबकीय क्षेत्र और उसके आसपास के अंतरिक्ष वातावरण पर होगा। इसके माप से बुध के मैग्नेटोस्फीयर, प्लाज्मा और एक्सोस्फीयर का संदर्भ मिलेगा, जबकि MPO सतह और आंतरिक संरचना का अध्ययन करेगा। 5
दोनों ऑर्बिटर मिलकर यह स्पष्ट कर सकते हैं कि बुध में कम सिलिका वास्तव में व्यापक वैश्विक विशेषता है या केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित है। वे यह भी दिखा सकते हैं कि कम सिलिका का कुछ हिस्सा पुराने पृथ्वी-आधारित अवलोकनों की सीमाओं के कारण दिखाई दे रहा था। इस तरह मिशन वैज्ञानिकों को अप्रत्यक्ष अनुमानों से आगे बढ़ाकर बुध की सतह और उसके वातावरण के अधिक प्रत्यक्ष, वैश्विक माप उपलब्ध कराएगा।
MTM का अलग होना किसी अंतरिक्षयान के सामान्य हिस्से के टूटकर अलग होने जैसा लग सकता है, लेकिन इसे मिशन के परिवहन मोड से सटीक ग्रह-अभियान मोड में बदलाव के रूप में समझना बेहतर होगा।
पिछले आठ वर्षों में प्राथमिक लक्ष्य था—कम ऊर्जा और कम प्रणोदक वाले जटिल मार्ग से संयुक्त अंतरिक्षयान को बुध तक पहुंचाना। 3 सितंबर के बाद प्राथमिकता बदल जाएगी: कक्षा-प्रविष्टि, दोनों वैज्ञानिक ऑर्बिटर का अलगाव, सुरक्षा उपकरणों का त्याग और लंबे समय तक वैज्ञानिक अवलोकनों के लिए सही कक्षाओं की स्थापना।
यदि यह पूरी श्रृंखला सफल रहती है, तो BepiColombo बुध की सतह, आंतरिक संरचना, चुंबकीय क्षेत्र और भूवैज्ञानिक अतीत की अब तक की सबसे व्यापक तस्वीरों में से एक उपलब्ध करा सकता है। 3 सितंबर का अलगाव इस बात का पहला स्पष्ट संकेत होगा कि मिशन अपने अंतिम और सबसे कठिन चरण में प्रवेश कर चुका है।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
3 सितंबर 2026 को Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना BepiColombo की आठ साल लंबी अंतरग्रहीय यात्रा के अंत और बुध पर पहुंचने के अभियान की शुरुआत का संकेत है; यह खुद बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं है। [5][6]
3 सितंबर 2026 को Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना BepiColombo की आठ साल लंबी अंतरग्रहीय यात्रा के अंत और बुध पर पहुंचने के अभियान की शुरुआत का संकेत है; यह खुद बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं है। [5][6] 2018 में प्रक्षेपण के बाद मिशन ने सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध अपनी ऊर्जा घटाने के लिए पृथ्वी का एक, शुक्र के दो और बुध के छह—कुल नौ—गुरुत्वीय फ्लाईबाय तथा सौर विद्युत प्रणोदन का इस्तेमाल किया। [1][2][10]
नए अध्ययनों के अनुसार बुध की सतह में सिलिकॉन डाइऑक्साइड की मात्रा लगभग 37% हो सकती है, जो पुराने अनुमानों से 25% तक कम है; BepiColombo यह जांचने में मदद कर सकता है कि इसका संबंध अधिक गहरे, गर्म और शक्तिशाली प्राचीन ज्...
3 सितंबर 2026 को Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना BepiColombo की आठ साल लंबी अंतरग्रहीय यात्रा के अंत और बुध पर पहुंचने के अभियान की शुरुआत का संकेत है; यह खुद बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं है। [5][6] 2018 में प्रक्षेपण के बाद मिशन ने सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध अपनी ऊर्जा घटाने के लिए पृथ्वी का एक, शु...
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3 सितंबर 2026 को BepiColombo के Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना मिशन के लिए एक साधारण तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक निर्णायक हस्तांतरण होगा। MTM ने अंतरिक्षयान को आंतरिक सौरमंडल में आठ साल तक आगे बढ़ाने के लिए सौर-विद्युत प्रणोदन उपलब्ध कराया। इसके अलग होने के बाद यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का Mercury Planetary Orbiter (MPO) और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA का Mio बुध की कक्षा में स्थापित होने वाली कठिन प्रक्रियाएं पूरी करेंगे। 5
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हालांकि, 3 सितंबर को BepiColombo बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं करेगा। कक्षा-प्रविष्टि की योजना 21 नवंबर 2026 के लिए है। इसके बाद भी कई अलगाव, कक्षा को ऊपर-नीचे करने वाली चालें और उपकरणों की तैयारियां होंगी। दोनों ऑर्बिटर का नियमित वैज्ञानिक काम अप्रैल 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। 5
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BepiColombo को 20 अक्टूबर 2018 को लॉन्च किया गया था। बुध की ओर सीधा रास्ता अपनाने के बजाय मिशन ने ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण का सहारा लिया—पृथ्वी का एक, शुक्र के दो और बुध के छह फ्लाईबाय। 1
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इस लंबे और घुमावदार रास्ते की वजह सूर्य का अत्यंत शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण है। सूर्य की ओर बढ़ता कोई भी अंतरिक्षयान गति पकड़ता जाता है। इसलिए केवल बुध की दिशा में उड़ना पर्याप्त नहीं होता; अंतरिक्षयान को लगातार अपनी सूर्य-केंद्रित ऊर्जा कम करनी पड़ती है और अंततः बुध की गति से इतना मेल बैठाना पड़ता है कि वह उसकी कक्षा में पकड़ा जा सके। 4
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गुरुत्वीय फ्लाईबाय ने BepiColombo की दिशा और गति को बदलने में मदद की, जबकि MTM के कम-बल वाले विद्युत प्रणोदन ने लंबे समय तक धीरे-धीरे आवश्यक धक्का दिया। यह तरीका धीमा है, लेकिन पारंपरिक उच्च-शक्ति प्रणोदन की तुलना में ईंधन की जरूरत कम करता है। ESA के अनुसार, इस यात्रा में सौर-विद्युत प्रणोदन से जुड़े हजारों घंटे के जटिल संचालन शामिल रहे। 15
अप्रैल 2024 में बिजली से जुड़ी समस्या के कारण BepiColombo के विद्युत थ्रस्टर पूरी शक्ति पर काम नहीं कर सके। मिशन टीमों ने अभियान रोकने के बजाय मार्ग और संचालन योजना में बदलाव किया। 11
15 जून 2026 को 15:24 CEST पर सौर-विद्युत प्रणोदन प्रणाली ने अपना अंतिम थ्रस्ट आर्क पूरा किया। इस तरह लंबे क्रूज़ चरण का अंत हुआ और मिशन बुध तक पहुंचने के अभियान के लिए तैयार हुआ। 6
MTM के अलग होने के बाद आगमन से जुड़ी चालों में MPO की रासायनिक प्रणोदन प्रणाली प्रमुख भूमिका निभाएगी। इसके बावजूद आगे का चरण बेहद जटिल रहेगा, क्योंकि बुध के पास तेज तापमान, तीव्र सौर विकिरण और अत्यंत सटीक समय पर किए जाने वाले कई प्रज्वलन और अलगाव शामिल हैं। 5
निर्धारित प्रक्रिया में MTM, MPO, Mio और Mio के सुरक्षा कवच वाले संयुक्त ढांचे से अलग होगा। MTM ने अपना मूल काम पूरा कर लिया होगा—यानी सौर ऊर्जा और विद्युत प्रणोदन के सहारे पूरे अंतरिक्षयान को बुध तक पहुंचाना। 5
इस अलगाव के बाद MPO, Mio और उनका सनशील्ड उस विन्यास में रह जाएंगे जिसमें वे बुध के आसपास की अंतिम कक्षीय प्रक्रियाओं में हिस्सा लेंगे। इसके बाद हर हिस्से को सही समय और सही स्थिति पर अलग या पुनर्स्थापित करना होगा। ESA ने इस घटना का लाइव प्रसारण 13:45 CEST से करने की योजना बनाई है।
लाइवस्ट्रीम अपने-आप अंतरिक्षयान को अधिक सुरक्षित नहीं बनाती और न ही उसी क्षण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाती है। इसका महत्व सार्वजनिक और संचारात्मक है: यह वर्षों की शांत क्रूज़ गतिविधियों के बाद मिशन के एक निर्णायक और लगभग अपरिवर्तनीय इंजीनियरिंग पड़ाव को लोगों के सामने लाती है।
मिशन की नियोजित समयरेखा इस प्रकार है:
इनमें से हर पड़ाव पिछले चरण की सफलता पर निर्भर है। MTM का समय से पहले अलग होना, गलत कक्षा में प्रवेश या Mio का गलत स्थिति पर रिलीज होना ऑर्बिटर को उसकी निर्धारित वैज्ञानिक कक्षा तक पहुंचने में बाधित कर सकता है।
हाल के प्रयोगशाला अध्ययनों और अवलोकन संबंधी आंकड़ों के नए विश्लेषण के अनुसार, बुध की सतह के द्रव्यमान का लगभग 37% सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) हो सकता है। यह मात्रा पुराने अनुमानों से 25% तक कम है।
यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सतह में सिलिका की मात्रा से वैज्ञानिक अंदाजा लगा सकते हैं कि बुध की भूपर्पटी कैसे बनी। कम सिलिका वाली संरचना ऐसे ज्वालामुखीय पत्थरों से मेल खा सकती है जो मेंटल—भूपर्पटी के नीचे की परत—के अधिक गहरे और अधिक गर्म हिस्सों के बड़े पैमाने पर आंशिक पिघलने से बने हों।
इस व्याख्या का अर्थ यह हो सकता है कि बुध पर ज्वालामुखीय पदार्थ पहले के अनुमान की तुलना में अधिक गहराई और अधिक तापमान पर बने। हालांकि, यह अभी बुध के आंतरिक ढांचे का अंतिम पुनर्निर्माण नहीं है। सतह की रासायनिक संरचना अलग-अलग क्षेत्रों में बदल सकती है और पृथ्वी से किए गए मापों की अपनी सीमाएं हैं। मुख्य सवाल यह है कि कम सिलिका का अनुमान पूरे बुध पर लागू होता है या कुछ खास भूभागों और मापन-अनिश्चितताओं का परिणाम है।
MPO और Mio इस पहेली के अलग-अलग हिस्सों का अध्ययन करेंगे। MPO के उपकरण बुध की सतह की रासायनिक संरचना, भूविज्ञान, आंतरिक ढांचे और स्थलाकृति की जांच के लिए बनाए गए हैं। इनके आंकड़े तत्वों की मात्रा को ज्वालामुखीय मैदानों, भूपर्पटी की मोटाई, गुरुत्वाकर्षण में बदलाव और ग्रह के भूवैज्ञानिक इतिहास से जोड़ सकते हैं।
Mio का मुख्य ध्यान बुध के चुंबकीय क्षेत्र और उसके आसपास के अंतरिक्ष वातावरण पर होगा। इसके माप से बुध के मैग्नेटोस्फीयर, प्लाज्मा और एक्सोस्फीयर का संदर्भ मिलेगा, जबकि MPO सतह और आंतरिक संरचना का अध्ययन करेगा। 5
दोनों ऑर्बिटर मिलकर यह स्पष्ट कर सकते हैं कि बुध में कम सिलिका वास्तव में व्यापक वैश्विक विशेषता है या केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित है। वे यह भी दिखा सकते हैं कि कम सिलिका का कुछ हिस्सा पुराने पृथ्वी-आधारित अवलोकनों की सीमाओं के कारण दिखाई दे रहा था। इस तरह मिशन वैज्ञानिकों को अप्रत्यक्ष अनुमानों से आगे बढ़ाकर बुध की सतह और उसके वातावरण के अधिक प्रत्यक्ष, वैश्विक माप उपलब्ध कराएगा।
MTM का अलग होना किसी अंतरिक्षयान के सामान्य हिस्से के टूटकर अलग होने जैसा लग सकता है, लेकिन इसे मिशन के परिवहन मोड से सटीक ग्रह-अभियान मोड में बदलाव के रूप में समझना बेहतर होगा।
पिछले आठ वर्षों में प्राथमिक लक्ष्य था—कम ऊर्जा और कम प्रणोदक वाले जटिल मार्ग से संयुक्त अंतरिक्षयान को बुध तक पहुंचाना। 3 सितंबर के बाद प्राथमिकता बदल जाएगी: कक्षा-प्रविष्टि, दोनों वैज्ञानिक ऑर्बिटर का अलगाव, सुरक्षा उपकरणों का त्याग और लंबे समय तक वैज्ञानिक अवलोकनों के लिए सही कक्षाओं की स्थापना।
यदि यह पूरी श्रृंखला सफल रहती है, तो BepiColombo बुध की सतह, आंतरिक संरचना, चुंबकीय क्षेत्र और भूवैज्ञानिक अतीत की अब तक की सबसे व्यापक तस्वीरों में से एक उपलब्ध करा सकता है। 3 सितंबर का अलगाव इस बात का पहला स्पष्ट संकेत होगा कि मिशन अपने अंतिम और सबसे कठिन चरण में प्रवेश कर चुका है।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
3 सितंबर 2026 को Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना BepiColombo की आठ साल लंबी अंतरग्रहीय यात्रा के अंत और बुध पर पहुंचने के अभियान की शुरुआत का संकेत है; यह खुद बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं है। [5][6]
3 सितंबर 2026 को Mercury Transfer Module (MTM) का अलग होना BepiColombo की आठ साल लंबी अंतरग्रहीय यात्रा के अंत और बुध पर पहुंचने के अभियान की शुरुआत का संकेत है; यह खुद बुध की कक्षा में प्रवेश नहीं है। [5][6] 2018 में प्रक्षेपण के बाद मिशन ने सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध अपनी ऊर्जा घटाने के लिए पृथ्वी का एक, शुक्र के दो और बुध के छह—कुल नौ—गुरुत्वीय फ्लाईबाय तथा सौर विद्युत प्रणोदन का इस्तेमाल किया। [1][2][10]
नए अध्ययनों के अनुसार बुध की सतह में सिलिकॉन डाइऑक्साइड की मात्रा लगभग 37% हो सकती है, जो पुराने अनुमानों से 25% तक कम है; BepiColombo यह जांचने में मदद कर सकता है कि इसका संबंध अधिक गहरे, गर्म और शक्तिशाली प्राचीन ज्...