रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे के आसपास SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। इसके सौर पैनल और निचली उपकरण सूर्... 31 अगस्त को टेलीस्कोप ने सूर्य पृथ्वी L2 की ओर अपनी दिशा ठीक करने के लिए लगभग तीन मिनट का पहला म...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What happened during NASA’s Nancy Grace Roman Space Telescope’s launch and early journey—including its August 30 launch aboard a SpaceX Falc. Article summary: NASA’s Nancy Grace Roman Space Telescope launched successfully on August 30, 2026, at 7:26 a.m.. Topic tags: general web, workflow, api, growth, video. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail layouts. Make it useful as an illustrative visual, not as fa
30 अगस्त 2026 को नासा का Nancy Grace Roman Space Telescope SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट पर सवार होकर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचा। प्रक्षेपण सुबह 7:26 बजे EDT पर फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से हुआ। प्रक्षेपण के करीब एक घंटे 23 मिनट बाद रोमन के सौर पैनल और निचली उपकरण-सूर्य ढाल सफलतापूर्वक तैनात हो गए। 5
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अगले ही दिन, 31 अगस्त को, टेलीस्कोप ने अपनी यात्रा का पहला महत्वपूर्ण दिशा-सुधार किया। रोमन के थ्रस्टरों ने लगभग तीन मिनट तक फायरिंग की, जिससे उसका मार्ग सूर्य-पृथ्वी L2 की ओर ठीक किया गया। यह दो नियोजित मिड-कोर्स करेक्शन में पहला था। 5
रोमन पृथ्वी से करीब 10 लाख मील यानी लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित सूर्य-पृथ्वी Lagrange Point 2 (L2) की ओर बढ़ रहा है। यह ऐसा गुरुत्वीय क्षेत्र है जहां सूर्य और पृथ्वी के प्रभावों के कारण अंतरिक्ष यान अपेक्षाकृत स्थिर मार्ग पर रह सकता है। वहां पहुंचकर रोमन L2 के आसपास एक हेलो ऑर्बिट में काम करेगा।
नासा के अनुसार, पृथ्वी से L2 तक पहुंचने और टेलीस्कोप को वैज्ञानिक काम के लिए तैयार करने की पूरी प्रक्रिया लगभग तीन महीने की होगी। देर सितंबर में L2 पहुंचना वर्तमान कार्यक्रम का लक्ष्य है, लेकिन यह तारीख और आगे की समयसीमा बदल सकती है। 3
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L2 तक की यात्रा के दौरान और वहां पहुंचने के बाद इंजीनियर रोमन के अलग-अलग सिस्टम सक्रिय करेंगे, एंटीना और अन्य तैनाती योग्य हिस्सों की जांच करेंगे, ऑप्टिक्स और उपकरणों को ठंडा व कैलिब्रेट करेंगे तथा उनकी कार्यक्षमता परखेंगे।
मिशन के दो प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण हैं:
कमीशनिंग चरण लगभग 90 दिनों का है। 2027 की शुरुआत में आने वाली “पहली तस्वीरें” मिशन का अहम पड़ाव होंगी, लेकिन उन्हें नियमित सर्वेक्षण विज्ञान की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए। 2
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रोमन का मुख्य दर्पण 2.4 मीटर यानी 7.9 फुट व्यास का है—लगभग हबल स्पेस टेलीस्कोप के दर्पण जितना ही बड़ा। इसका खास लाभ यह है कि रोमन हबल जैसी तीक्ष्णता के साथ आकाश के कहीं बड़े हिस्से को एक साथ देख सकेगा। इसका Wide Field Instrument 300 मेगापिक्सल का इंफ्रारेड कैमरा है, जो ब्रह्मांड के दूरस्थ और पुराने हिस्सों का व्यापक सर्वेक्षण करेगा। 10
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यही क्षमता रोमन को केवल खूबसूरत तस्वीरें लेने वाला टेलीस्कोप नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर ब्रह्मांडीय आंकड़े जुटाने वाली वेधशाला बनाती है।
रोमन के सबसे बड़े वैज्ञानिक लक्ष्यों में डार्क एनर्जी को समझना शामिल है। वैज्ञानिक जानते हैं कि ब्रह्मांड का विस्तार तेज हो रहा है, लेकिन इस त्वरण के पीछे की वजह अब भी स्पष्ट नहीं है।
रोमन अलग-अलग समयों पर ब्रह्मांड में पदार्थ और आकाशगंगाओं के वितरण का मानचित्र बनाएगा। कमजोर गुरुत्वीय लेंसिंग, आकाशगंगा समूहों की संरचना और सुपरनोवा से मिलने वाली दूरी के आंकड़ों को जोड़कर वैज्ञानिक यह जांचेंगे कि:
रोमन डार्क एनर्जी को सीधे “देख” नहीं पाएगा। इसके बजाय यह उसके प्रभावों—जैसे आकाशगंगाओं के वितरण और ब्रह्मांड के विस्तार—को अत्यधिक सटीकता से मापेगा।
डार्क मैटर प्रकाश को न तो उत्सर्जित करता है और न ही सामान्य दूरबीनों से दिखाई देता है। फिर भी उसका गुरुत्वाकर्षण आकाशगंगाओं और दूर के प्रकाश के मार्ग को प्रभावित करता है।
रोमन के व्यापक इंफ्रारेड सर्वेक्षण इन प्रभावों को मापकर यह अनुमान लगाने में मदद करेंगे कि डार्क मैटर ब्रह्मांड में कहां और किस तरह फैला हुआ है। इससे वैज्ञानिक ब्रह्मांडीय संरचनाओं के बनने और समय के साथ विकसित होने की बेहतर तस्वीर बना सकेंगे। 13
रोमन हमारी आकाशगंगा के घने केंद्रीय क्षेत्र की ओर माइक्रोलेंसिंग सर्वेक्षण करेगा। इस तकनीक में किसी ग्रह या तारे का गुरुत्वाकर्षण उसके पीछे स्थित तारे के प्रकाश को थोड़ी देर के लिए बढ़ा या मोड़ देता है।
इससे ठंडे और दूर स्थित ग्रहों का पता लगाया जा सकता है—यहां तक कि ऐसे फ्री-फ्लोटिंग या आवारा ग्रहों का भी, जो किसी तारे की परिक्रमा नहीं करते। वहीं, कोरोनाग्राफ का प्रदर्शन भविष्य के मिशनों के लिए दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की सीधे तस्वीर लेने की तकनीक को आगे बढ़ाएगा। 3
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रोमन Type Ia सुपरनोवा के बड़े और अच्छी तरह कैलिब्रेट किए गए नमूने जुटाने की कोशिश करेगा। ये विस्फोटक तारकीय घटनाएं ब्रह्मांडीय दूरी मापने के लिए महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
अलग-अलग समयों और दूरियों पर सुपरनोवा का अध्ययन करके वैज्ञानिक उस “कॉस्मिक डिस्टेंस लैडर” को मजबूत कर सकेंगे, जिसका इस्तेमाल डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड के विस्तार की दर समझने में किया जाता है। 11
रोमन की कहानी का एक असामान्य पहलू इसका हार्डवेयर है। इसके ऑप्टिकल टेलीस्कोप असेंबली की शुरुआत उस टेलीस्कोप से हुई जिसे अमेरिकी National Reconnaissance Office (NRO) ने नासा को उपलब्ध कराया था। यह हार्डवेयर मूल रूप से एक गोपनीय सैन्य टोही कार्यक्रम के लिए विकसित किया गया था।
नासा और उसके औद्योगिक साझेदारों ने इसे दोबारा डिजाइन, संशोधित, पूरा, एकीकृत और योग्य बनाया, ताकि यह जासूसी के बजाय सटीक इंफ्रारेड खगोल विज्ञान के लिए काम कर सके। 1
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नासा के Office of Inspector General के अनुसार, रोमन मिशन की अनुमानित लागत 3.9 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 4.3 अरब डॉलर हो गई है। इसकी प्राथमिक मिशन अवधि पांच वर्ष है, जबकि अंतरिक्ष यान की स्थिति और ईंधन जैसे संसाधनों ने साथ दिया तो इसे 10 वर्ष तक चलाने का लक्ष्य रखा गया है। 11
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मिशन का प्रबंधन NASA Goddard Space Flight Center कर रहा है। इसमें NASA का Jet Propulsion Laboratory, Caltech/IPAC, Space Telescope Science Institute, NASA Ames और कई औद्योगिक साझेदार शामिल हैं। प्रमुख औद्योगिक भागीदारों में L3Harris, BAE Systems और Teledyne Imaging Sensors का नाम आता है। इसके अलावा विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक, रिसर्च टीमें और guest investigators भी मिशन के आंकड़ों के साथ काम करेंगे। 4
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इस वेधशाला का नाम Nancy Grace Roman के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें नासा की पहली chief astronomer माना जाता है। उन्होंने अंतरिक्ष-आधारित खगोल विज्ञान के लिए वैज्ञानिक समर्थन और संस्थागत आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके प्रयासों ने हबल और उसके बाद आने वाली अंतरिक्ष वेधशालाओं के लिए जरूरी वैज्ञानिक समुदाय और मिशन-समर्थन को आकार देने में मदद की। नासा की अगली प्रमुख व्यापक-दृश्य वेधशाला का नाम उनके नाम पर रखना उस विरासत की औपचारिक पहचान है। 12
30 अगस्त का प्रक्षेपण, सौर पैनलों और निचली सूर्य ढाल की तैनाती तथा 31 अगस्त का पहला मार्ग-सुधार अब तक पूरी हो चुकी घटनाएं हैं। इसके विपरीत, देर सितंबर में L2 तक पहुंचना, कमीशनिंग की सटीक अवधि और 2027 की शुरुआत में पहली तस्वीरें अभी कार्यक्रम के लक्ष्य हैं। अंतरिक्ष अभियानों में ये समयसीमाएं मिशन की वास्तविक स्थिति के अनुसार बदल सकती हैं।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे के आसपास SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। इसके सौर पैनल और निचली उपकरण सूर्...
रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे के आसपास SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। इसके सौर पैनल और निचली उपकरण सूर्... 31 अगस्त को टेलीस्कोप ने सूर्य पृथ्वी L2 की ओर अपनी दिशा ठीक करने के लिए लगभग तीन मिनट का पहला मिड कोर्स करेक्शन बर्न पूरा किया। L2 पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है, जहां रोमन एक हेलो कक्षा में काम करेगा। [5][7][15]
करीब 90 दिनों की कमीशनिंग के बाद 2027 की शुरुआत में पहली तस्वीरों की उम्मीद है। मिशन डार्क एनर्जी, डार्क मैटर, एक्सोप्लैनेट और सुपरनोवा का अध्ययन करेगा, हालांकि पहली तस्वीरें नियमित वैज्ञानिक सर्वेक्षण की शुरुआत के बर...
रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे के आसपास SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। इसके सौर पैनल और निचली उपकरण सूर्... 31 अगस्त को टेलीस्कोप ने सूर्य पृथ्वी L2 की ओर अपनी दिशा ठीक करने के लिए लगभग तीन मिनट का पहला म...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
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30 अगस्त 2026 को नासा का Nancy Grace Roman Space Telescope SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट पर सवार होकर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचा। प्रक्षेपण सुबह 7:26 बजे EDT पर फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से हुआ। प्रक्षेपण के करीब एक घंटे 23 मिनट बाद रोमन के सौर पैनल और निचली उपकरण-सूर्य ढाल सफलतापूर्वक तैनात हो गए। 5
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अगले ही दिन, 31 अगस्त को, टेलीस्कोप ने अपनी यात्रा का पहला महत्वपूर्ण दिशा-सुधार किया। रोमन के थ्रस्टरों ने लगभग तीन मिनट तक फायरिंग की, जिससे उसका मार्ग सूर्य-पृथ्वी L2 की ओर ठीक किया गया। यह दो नियोजित मिड-कोर्स करेक्शन में पहला था। 5
रोमन पृथ्वी से करीब 10 लाख मील यानी लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित सूर्य-पृथ्वी Lagrange Point 2 (L2) की ओर बढ़ रहा है। यह ऐसा गुरुत्वीय क्षेत्र है जहां सूर्य और पृथ्वी के प्रभावों के कारण अंतरिक्ष यान अपेक्षाकृत स्थिर मार्ग पर रह सकता है। वहां पहुंचकर रोमन L2 के आसपास एक हेलो ऑर्बिट में काम करेगा।
नासा के अनुसार, पृथ्वी से L2 तक पहुंचने और टेलीस्कोप को वैज्ञानिक काम के लिए तैयार करने की पूरी प्रक्रिया लगभग तीन महीने की होगी। देर सितंबर में L2 पहुंचना वर्तमान कार्यक्रम का लक्ष्य है, लेकिन यह तारीख और आगे की समयसीमा बदल सकती है। 3
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L2 तक की यात्रा के दौरान और वहां पहुंचने के बाद इंजीनियर रोमन के अलग-अलग सिस्टम सक्रिय करेंगे, एंटीना और अन्य तैनाती योग्य हिस्सों की जांच करेंगे, ऑप्टिक्स और उपकरणों को ठंडा व कैलिब्रेट करेंगे तथा उनकी कार्यक्षमता परखेंगे।
मिशन के दो प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण हैं:
कमीशनिंग चरण लगभग 90 दिनों का है। 2027 की शुरुआत में आने वाली “पहली तस्वीरें” मिशन का अहम पड़ाव होंगी, लेकिन उन्हें नियमित सर्वेक्षण विज्ञान की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए। 2
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रोमन का मुख्य दर्पण 2.4 मीटर यानी 7.9 फुट व्यास का है—लगभग हबल स्पेस टेलीस्कोप के दर्पण जितना ही बड़ा। इसका खास लाभ यह है कि रोमन हबल जैसी तीक्ष्णता के साथ आकाश के कहीं बड़े हिस्से को एक साथ देख सकेगा। इसका Wide Field Instrument 300 मेगापिक्सल का इंफ्रारेड कैमरा है, जो ब्रह्मांड के दूरस्थ और पुराने हिस्सों का व्यापक सर्वेक्षण करेगा। 10
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यही क्षमता रोमन को केवल खूबसूरत तस्वीरें लेने वाला टेलीस्कोप नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर ब्रह्मांडीय आंकड़े जुटाने वाली वेधशाला बनाती है।
रोमन के सबसे बड़े वैज्ञानिक लक्ष्यों में डार्क एनर्जी को समझना शामिल है। वैज्ञानिक जानते हैं कि ब्रह्मांड का विस्तार तेज हो रहा है, लेकिन इस त्वरण के पीछे की वजह अब भी स्पष्ट नहीं है।
रोमन अलग-अलग समयों पर ब्रह्मांड में पदार्थ और आकाशगंगाओं के वितरण का मानचित्र बनाएगा। कमजोर गुरुत्वीय लेंसिंग, आकाशगंगा समूहों की संरचना और सुपरनोवा से मिलने वाली दूरी के आंकड़ों को जोड़कर वैज्ञानिक यह जांचेंगे कि:
रोमन डार्क एनर्जी को सीधे “देख” नहीं पाएगा। इसके बजाय यह उसके प्रभावों—जैसे आकाशगंगाओं के वितरण और ब्रह्मांड के विस्तार—को अत्यधिक सटीकता से मापेगा।
डार्क मैटर प्रकाश को न तो उत्सर्जित करता है और न ही सामान्य दूरबीनों से दिखाई देता है। फिर भी उसका गुरुत्वाकर्षण आकाशगंगाओं और दूर के प्रकाश के मार्ग को प्रभावित करता है।
रोमन के व्यापक इंफ्रारेड सर्वेक्षण इन प्रभावों को मापकर यह अनुमान लगाने में मदद करेंगे कि डार्क मैटर ब्रह्मांड में कहां और किस तरह फैला हुआ है। इससे वैज्ञानिक ब्रह्मांडीय संरचनाओं के बनने और समय के साथ विकसित होने की बेहतर तस्वीर बना सकेंगे। 13
रोमन हमारी आकाशगंगा के घने केंद्रीय क्षेत्र की ओर माइक्रोलेंसिंग सर्वेक्षण करेगा। इस तकनीक में किसी ग्रह या तारे का गुरुत्वाकर्षण उसके पीछे स्थित तारे के प्रकाश को थोड़ी देर के लिए बढ़ा या मोड़ देता है।
इससे ठंडे और दूर स्थित ग्रहों का पता लगाया जा सकता है—यहां तक कि ऐसे फ्री-फ्लोटिंग या आवारा ग्रहों का भी, जो किसी तारे की परिक्रमा नहीं करते। वहीं, कोरोनाग्राफ का प्रदर्शन भविष्य के मिशनों के लिए दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की सीधे तस्वीर लेने की तकनीक को आगे बढ़ाएगा। 3
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रोमन Type Ia सुपरनोवा के बड़े और अच्छी तरह कैलिब्रेट किए गए नमूने जुटाने की कोशिश करेगा। ये विस्फोटक तारकीय घटनाएं ब्रह्मांडीय दूरी मापने के लिए महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
अलग-अलग समयों और दूरियों पर सुपरनोवा का अध्ययन करके वैज्ञानिक उस “कॉस्मिक डिस्टेंस लैडर” को मजबूत कर सकेंगे, जिसका इस्तेमाल डार्क एनर्जी और ब्रह्मांड के विस्तार की दर समझने में किया जाता है। 11
रोमन की कहानी का एक असामान्य पहलू इसका हार्डवेयर है। इसके ऑप्टिकल टेलीस्कोप असेंबली की शुरुआत उस टेलीस्कोप से हुई जिसे अमेरिकी National Reconnaissance Office (NRO) ने नासा को उपलब्ध कराया था। यह हार्डवेयर मूल रूप से एक गोपनीय सैन्य टोही कार्यक्रम के लिए विकसित किया गया था।
नासा और उसके औद्योगिक साझेदारों ने इसे दोबारा डिजाइन, संशोधित, पूरा, एकीकृत और योग्य बनाया, ताकि यह जासूसी के बजाय सटीक इंफ्रारेड खगोल विज्ञान के लिए काम कर सके। 1
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नासा के Office of Inspector General के अनुसार, रोमन मिशन की अनुमानित लागत 3.9 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 4.3 अरब डॉलर हो गई है। इसकी प्राथमिक मिशन अवधि पांच वर्ष है, जबकि अंतरिक्ष यान की स्थिति और ईंधन जैसे संसाधनों ने साथ दिया तो इसे 10 वर्ष तक चलाने का लक्ष्य रखा गया है। 11
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मिशन का प्रबंधन NASA Goddard Space Flight Center कर रहा है। इसमें NASA का Jet Propulsion Laboratory, Caltech/IPAC, Space Telescope Science Institute, NASA Ames और कई औद्योगिक साझेदार शामिल हैं। प्रमुख औद्योगिक भागीदारों में L3Harris, BAE Systems और Teledyne Imaging Sensors का नाम आता है। इसके अलावा विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक, रिसर्च टीमें और guest investigators भी मिशन के आंकड़ों के साथ काम करेंगे। 4
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इस वेधशाला का नाम Nancy Grace Roman के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें नासा की पहली chief astronomer माना जाता है। उन्होंने अंतरिक्ष-आधारित खगोल विज्ञान के लिए वैज्ञानिक समर्थन और संस्थागत आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके प्रयासों ने हबल और उसके बाद आने वाली अंतरिक्ष वेधशालाओं के लिए जरूरी वैज्ञानिक समुदाय और मिशन-समर्थन को आकार देने में मदद की। नासा की अगली प्रमुख व्यापक-दृश्य वेधशाला का नाम उनके नाम पर रखना उस विरासत की औपचारिक पहचान है। 12
30 अगस्त का प्रक्षेपण, सौर पैनलों और निचली सूर्य ढाल की तैनाती तथा 31 अगस्त का पहला मार्ग-सुधार अब तक पूरी हो चुकी घटनाएं हैं। इसके विपरीत, देर सितंबर में L2 तक पहुंचना, कमीशनिंग की सटीक अवधि और 2027 की शुरुआत में पहली तस्वीरें अभी कार्यक्रम के लक्ष्य हैं। अंतरिक्ष अभियानों में ये समयसीमाएं मिशन की वास्तविक स्थिति के अनुसार बदल सकती हैं।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे के आसपास SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। इसके सौर पैनल और निचली उपकरण सूर्...
रोमन स्पेस टेलीस्कोप 30 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे के आसपास SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर के Launch Complex 39A से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। इसके सौर पैनल और निचली उपकरण सूर्... 31 अगस्त को टेलीस्कोप ने सूर्य पृथ्वी L2 की ओर अपनी दिशा ठीक करने के लिए लगभग तीन मिनट का पहला मिड कोर्स करेक्शन बर्न पूरा किया। L2 पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है, जहां रोमन एक हेलो कक्षा में काम करेगा। [5][7][15]
करीब 90 दिनों की कमीशनिंग के बाद 2027 की शुरुआत में पहली तस्वीरों की उम्मीद है। मिशन डार्क एनर्जी, डार्क मैटर, एक्सोप्लैनेट और सुपरनोवा का अध्ययन करेगा, हालांकि पहली तस्वीरें नियमित वैज्ञानिक सर्वेक्षण की शुरुआत के बर...