19 मई 2026 को शुरू हुआ झेंगझोउ प्रोजेक्ट करीब 2,500 मीटर गहरे कुएँ में भूजल के बजाय बंद सर्किट में CO₂ प्रवाहित करता है। यह तकनीक कम भूजल वाले क्षेत्रों में गर्म चट्टानों से ऊर्जा लेने की संभावना दिखाती है, लेकिन गहरी ड्रिलिंग, सीमित ऊष्मा संचरण, कुएँ की मजबूती और पर्याप्त भूमिगत हीट एक्सचेंज क्षेत्र अब भी बड़ी चुनौ...
शोध उत्तर
चीन का पहला चालू किया गया सुपरक्रिटिकल CO₂ बंद-लूप जियोथर्मल प्रोजेक्ट बिजली संयंत्र नहीं, बल्कि हीटिंग का प्रदर्शन है। 19 मई 2026 को हेनान प्रांत के झेंगझोउ में शुरू हुए इस China Huaneng प्रोजेक्ट में करीब 2,500 मीटर गहरे सीलबंद कुएँ के भीतर कार्बन डाइऑक्साइड का संचार किया जाता है। CO₂ भूमिगत चट्टानों से गर्मी सोखता है और सतह पर लौटकर एक अलग जल-सर्किट को गर्म करता है, जिसका इस्तेमाल सर्दियों में इमारतों की हीटिंग के लिए किया जाता है। 6
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इस परियोजना की अहमियत यह है कि यह भूजल निकाले बिना भू-तापीय गर्मी हासिल करने का तरीका परखती है। हालांकि, इसके मौजूदा नतीजों को शुरुआती परिचालन उपलब्धि के रूप में देखना चाहिए—यह अभी इस बात का प्रमाण नहीं है कि बंद-लूप जियोथर्मल तकनीक सस्ती, चौबीसों घंटे बिजली दे सकती है।
इस कुएँ में को-एक्सियल बंद-लूप व्यवस्था है। एक प्रवाह-पथ अपेक्षाकृत ठंडे और दबावयुक्त CO₂ को नीचे ले जाता है, जबकि दूसरा गर्म होकर लौटने वाले द्रव को सतह तक लाता है। गहराई में आसपास की चट्टानों की गर्मी कुएँ की संरचना के जरिए परिसंचरित CO₂ तक पहुँचती है। सतह पर लौटने वाला CO₂ अपनी गर्मी हीटिंग सिस्टम के पानी को देता है। CO₂ बंद सर्किट के भीतर ही रहता है और भूमिगत संरचना के साथ मिश्रित नहीं होता। 6
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यह पारंपरिक हाइड्रोथर्मल जियोथर्मल प्लांट से अलग है। ऐसे संयंत्र प्राकृतिक रूप से गर्म और पारगम्य भूमिगत जलाशय से गर्म पानी निकालते हैं और आमतौर पर इस्तेमाल किए गए द्रव को वापस जमीन में भेजते हैं। बंद-लूप व्यवस्था में भूजल का प्राकृतिक प्रवाह जरूरी नहीं होता; गर्म चट्टानें मौजूद हों, लेकिन उनमें पर्याप्त पानी न बहता हो, तब भी उनसे गर्मी लेने की संभावना रहती है।
इस परियोजना में सुपरक्रिटिकल CO₂ को ऊष्मा-संचरण माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उपयुक्त दबाव और तापमान पर CO₂ में गैस जैसी गतिशीलता और द्रव जैसी घनत्व-विशेषताएँ एक साथ हो सकती हैं। इंजीनियरिंग तर्क यह है कि गहरे कुएँ में यह अपेक्षाकृत कम प्रवाह-प्रतिरोध के साथ घूम सकता है और प्रभावी ढंग से गर्मी ले जा सकता है। 6
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CO₂ से थर्मोसाइफन प्रभाव भी मिल सकता है। गर्म होकर ऊपर उठते समय द्रव का घनत्व नीचे जा रहे ठंडे CO₂ की तुलना में कम हो जाता है। यह अंतर परिसंचरण को आंशिक रूप से खुद चलाने में मदद कर सकता है और पंपिंग के लिए जरूरी ऊर्जा घटा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सतह पर पंप, नियंत्रण प्रणाली या अन्य उपकरणों की जरूरत खत्म हो जाती है—और न ही यह कम परिचालन लागत की गारंटी है।
बंद-लूप व्यवस्था के संभावित फायदे हैं:
फिर भी ये पूरे सिस्टम के संभावित फायदे हैं, व्यावसायिक सफलता की गारंटी नहीं। चट्टानों और कुएँ की दीवारों के जरिए गर्मी पर्याप्त तेजी से स्थानांतरित होनी चाहिए, तभी अपेक्षित उत्पादन हासिल होगा।
सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, इस सिस्टम में CO₂ करीब 8 डिग्री सेल्सियस पर नीचे जाता है और लगभग 22 डिग्री सेल्सियस पर लौटता है। पानी-आधारित ऊष्मा-निकासी व्यवस्था की तुलना में इसकी ऊष्मा-निकासी क्षमता करीब 20% बढ़ने और प्रति इकाई हीटिंग ऊर्जा खपत करीब 10% घटने की बात कही गई है। यह प्रोजेक्ट सर्दियों में 18,000 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय क्षेत्र की केंद्रीकृत हीटिंग के लिए डिजाइन किया गया है। 3
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ये आँकड़े उपयोगी हीटिंग सेवा दिखाते हैं, बिजली उत्पादन नहीं। उपलब्ध साक्ष्य में इस परियोजना से बिजली पैदा होने का प्रमाण नहीं है। लौटने वाला लगभग 22 डिग्री सेल्सियस तापमान हीटिंग-स्तर का है; इसे बिजली उत्पादन के लिए जरूरी उच्च तापमान का संकेत नहीं माना जा सकता।
यहाँ एक शब्दावली संबंधी सावधानी भी जरूरी है। “सुपरक्रिटिकल CO₂” सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले द्रव की अवधारणा और उसकी दबाव-तापमान अवस्था को दर्शाता है। सार्वजनिक परिचालन सारांश भूमिगत हिस्से के हर बिंदु पर वास्तविक दबाव और तापमान प्रोफाइल स्थापित नहीं करते। एक द्वितीयक रिपोर्ट में इनलेट और आउटलेट तापमान के अलग आँकड़े दिए गए हैं। इसलिए 8 से 22 डिग्री सेल्सियस का अक्सर दोहराया जाने वाला आँकड़ा एक रिपोर्टेड ऑपरेटिंग फिगर है, पूरे भूमिगत थर्मोडायनामिक विवरण का विकल्प नहीं। 3
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भू-तापीय गर्मी मौसम या दिन के उजाले पर निर्भर नहीं होती, इसलिए यह पवन और सौर ऊर्जा की तुलना में लगातार उपलब्ध संसाधन हो सकती है। सिद्धांत रूप में, यदि बंद-लूप सिस्टम पर्याप्त गर्म चट्टानों तक पहुँचे और पर्याप्त मात्रा में द्रव प्रवाहित कर सके, तो वह निरंतर गर्मी और अधिक तापमान पर बिजली भी दे सकता है।
लेकिन झेंगझोउ प्रोजेक्ट अभी यह परिणाम प्रदर्शित नहीं करता। बिजली बनाने के लिए अधिक उपयोगी ऊष्मा-प्रवाह और ऐसे तापमान चाहिए जो किसी पावर-कन्वर्जन चक्र के लिए उपयुक्त हों। मौजूदा परियोजना का काम आवासीय हीटिंग है, इसलिए इसे पहले ही 24 घंटे की भू-तापीय बिजली का प्रमाण बताना उपलब्ध साक्ष्यों से आगे जाना होगा।
अर्थशास्त्र इससे भी बड़ी कसौटी है। मॉडलिंग से संकेत मिलता है कि बंद-लूप सिस्टम गर्मी के लिए प्रतिस्पर्धी लागत हासिल कर सकते हैं, लेकिन बिजली की प्रतिस्पर्धी लागत के लिए ड्रिलिंग खर्च में बड़ी कमी जरूरी होगी। एक अलग अध्ययन में पाया गया कि 180 डिग्री सेल्सियस जलाशय वाले सिम्युलेटेड सिस्टम 30 लेटरल्स और 75 किलोग्राम प्रति सेकंड उत्पादन दर के बावजूद अपने पूरे जीवनकाल की लागत वसूल नहीं कर पाए।
को-एक्सियल कुएँ में गर्मी के आदान-प्रदान के लिए उपलब्ध सतह अपेक्षाकृत सीमित होती है। इसके मुकाबले गहरे U-आकार या U-लूप डिजाइन में दो ऊर्ध्वाधर हिस्सों को गर्म चट्टानों के बीच एक लंबे क्षैतिज हिस्से से जोड़ा जाता है। इससे भूमिगत संपर्क-क्षेत्र बढ़ सकता है और परिसंचरित द्रव में स्थानांतरित होने वाली गर्मी की मात्रा भी बढ़ सकती है।
यह डिजाइन सिंगल-वेल सिस्टम की एक मूल सीमा को संबोधित करता है: उपयोगी उत्पादन के लिए पर्याप्त चट्टान-संपर्क क्षेत्र, तापमान और लंबे समय तक स्थिर प्रवाह चाहिए। लेकिन इसके साथ दिशात्मक ड्रिलिंग की जटिलता, कुएँ के निर्माण का जोखिम और पूँजीगत खर्च भी बढ़ते हैं। उपलब्ध सामग्री चीन की किसी विशेष गहरी U-आकार परियोजना की सटीक गहराई, प्रदर्शन, निर्माण स्थिति या लागत स्थापित नहीं करती। इसलिए इसे सिद्ध व्यावसायिक समाधान नहीं, बल्कि तकनीकी विकास की दिशा के रूप में समझना बेहतर है।
चुनौती सिर्फ गर्म चट्टान खोजने की नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या लंबे समय तक टिकने वाला और अधिक उत्पादन वाला भूमिगत हीट-एक्सचेंजर ऐसी लागत पर बनाया जा सकता है, जिसे उससे मिलने वाली गर्मी या बिजली चुका सके।
मुख्य बाधाएँ हैं:
Nature की एक समीक्षा के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में एक मल्टीलेटरल सेट की लागत लगभग 5 से 10 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। लाभप्रदता उत्पादन और स्थानीय मांग—दोनों पर निर्भर करती है। समीक्षा एक मूलभूत सीमा भी बताती है: बंद-लूप सिस्टम आसपास की चट्टान से मुख्यतः कंडक्शन के जरिए गर्मी लेते हैं, जबकि प्राकृतिक रूप से बहते जियोथर्मल जलाशय में कन्वेक्शन अधिक तेज हो सकता है।
यही वजह है कि बिजली उत्पादन की तुलना में जिला-हीटिंग पहले व्यावसायिक अवसर बन सकती है। मध्यम तापमान वाली गर्मी पास की इमारतों को सीधे बेची जा सकती है; इसके विपरीत बिजली संयंत्र को अधिक गर्म संसाधन, अधिक प्रवाह और महंगे रूपांतरण उपकरण चाहिए।
बवेरिया के Geretsried में Eavor का प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण तुलना पेश करता है। 4 दिसंबर 2025 को इसने सीलबंद, मल्टीलेटरल बंद-लूप जियोथर्मल सिस्टम से जर्मन ग्रिड को बिजली देना शुरू किया। यह अपनी तरह की पहली रिपोर्टेड व्यावसायिक परियोजना थी जिसने बिजली पैदा की।
इस परियोजना की पूरी डिजाइन क्षमता करीब 8.2 मेगावाट बिजली और 64 मेगावाट गर्मी बताई गई है। इसके लूप प्राकृतिक रूप से उत्पादक गर्म-पानी वाले जलाशय पर निर्भर होने के बजाय लंबी भूमिगत वेलबोर संरचनाओं का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, मार्च 2026 तक चार नियोजित लूप में से पहला ही चालू था। इसलिए Geretsried तकनीकी व्यवहार्यता का महत्वपूर्ण प्रदर्शन जरूर है, लेकिन इसका पूरा विस्तार और अर्थशास्त्र अभी भी खुले सवाल हैं। 17
झेंगझोउ और Geretsried मिलकर इसी व्यापक विचार के दो चरण दिखाते हैं। झेंगझोउ उपयोगी भू-तापीय हीटिंग के लिए सीलबंद CO₂ परिसंचरण प्रदर्शित करता है। Geretsried दिखाता है कि मल्टीलेटरल बंद-लूप सिस्टम ग्रिड तक बिजली पहुँचा सकता है। लेकिन इनमें से कोई भी परियोजना यह साबित नहीं करती कि गहरी बंद-लूप जियोथर्मल ऊर्जा सस्ती, हर जगह लागू करने योग्य या पारंपरिक बिजली उत्पादन की जगह लेने के लिए तैयार है।
चीन की झेंगझोउ परियोजना को “गर्मी लो, भूजल नहीं” वाले प्रयोग के रूप में समझना सबसे उचित है। 2,500 मीटर का को-एक्सियल कुआँ, सीलबंद CO₂ सर्किट, रिपोर्ट की गई 20% अधिक ऊष्मा-निकासी क्षमता और 18,000 वर्ग मीटर से अधिक हीटिंग सेवा इस तकनीक की संभावनाएँ दिखाती हैं। 6
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यह तरीका भविष्य में उन जगहों तक जियोथर्मल ऊर्जा पहुँचा सकता है जहाँ प्राकृतिक रूप से बहता भूमिगत पानी उपलब्ध नहीं है। लेकिन चौबीसों घंटे बिजली तक पहुँचने के लिए अधिक कठिन समस्याएँ हल करनी होंगी—गहरे और बड़े भूमिगत हीट-एक्सचेंजर, भरोसेमंद उच्च-तापमान ड्रिलिंग, दशकों तक स्थिर थर्मल प्रदर्शन और बहुत कम पूँजीगत लागत।
अब तक के प्रमाण सावधानीपूर्ण आशावाद का आधार देते हैं, बड़े पैमाने पर सिद्ध व्यावसायिक क्रांति का नहीं।
Studio Global AI
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19 मई 2026 को शुरू हुआ झेंगझोउ प्रोजेक्ट करीब 2,500 मीटर गहरे कुएँ में भूजल के बजाय बंद सर्किट में CO₂ प्रवाहित करता है।
19 मई 2026 को शुरू हुआ झेंगझोउ प्रोजेक्ट करीब 2,500 मीटर गहरे कुएँ में भूजल के बजाय बंद सर्किट में CO₂ प्रवाहित करता है। यह तकनीक कम भूजल वाले क्षेत्रों में गर्म चट्टानों से ऊर्जा लेने की संभावना दिखाती है, लेकिन गहरी ड्रिलिंग, सीमित ऊष्मा संचरण, कुएँ की मजबूती और पर्याप्त भूमिगत हीट एक्सचेंज क्षेत्र अब भी बड़ी चुनौतियाँ हैं।