GCRMN के आकलन में 2020–24 के दौरान वैश्विक हार्ड कोरल कवर 1980–2009 के संदर्भ औसत से 9.5% कम पाया गया; ब्लीचिंग घटनाएं अब लगभग हर पांच से छह साल में लौट रही हैं। 2023 में शुरू हुई चौथी वैश्विक कोरल ब्लीचिंग घटना अब तक की सबसे व्यापक और तीव्र घटना रही; अलग अलग मापों के अनुसार लगभग 84%–87% वैश्विक रीफ क्षेत्र हीट स्ट्...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does the Global Coral Reef Monitoring Network’s landmark report reveal about the accelerating decline of the world’s coral reefs—includ. Article summary: GCRMN’s *Status of Coral Reefs of the World: 2025* finds that warming-driven marine heatwaves are no longer occasional shocks: they are recurring fast enough to prevent many reefs from rebuilding mature, reproductive cor. Topic tags: general, education, general web, government, academic. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
Global Coral Reef Monitoring Network (GCRMN) की Status of Coral Reefs of the World: 2025 रिपोर्ट की सबसे अहम चेतावनी यह नहीं है कि दुनिया के कोरल रीफ में प्रवाल घट रहे हैं। असली चिंता यह है कि समुद्री हीटवेव कई रीफ को पूरी तरह संभलने का समय मिलने से पहले ही लौट रही हैं। इससे कोरल के बढ़ने, परिपक्व होने और प्रजनन करने की गुंजाइश लगातार कम हो रही है—और बार-बार होने वाली क्षति लंबे समय की, संभवतः अपरिवर्तनीय गिरावट में बदल सकती है। 1
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रिपोर्ट में 1980 से 2024 तक रीफ में आए बदलावों का अध्ययन किया गया है। इसके लिए 124 देशों, क्षेत्रों और अर्थव्यवस्थाओं में 36,886 साइटों से जुटाए गए 21 मिलियन से अधिक अवलोकनों और 87,000 से ज्यादा सर्वेक्षणों का इस्तेमाल किया गया। इतने बड़े डेटासेट से वैज्ञानिक अलग-अलग ब्लीचिंग घटनाओं को अलग-अलग संकट मानने के बजाय दशकों के वैश्विक और क्षेत्रीय रुझानों की तुलना कर सके। 8
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रिपोर्ट का प्रमुख पैमाना हार्ड-कोरल कवर है—यानी रीफ की सतह का वह हिस्सा जो जीवित, रीफ बनाने वाले कठोर प्रवालों से ढका है। 2020–24 में वैश्विक हार्ड-कोरल कवर 1980–2009 के संदर्भ औसत से 9.5% कम था। इसका अर्थ यह है कि दोनों अवधियों के औसत में इतना अंतर है; यह जरूरी नहीं कि 9.5 प्रतिशत अंक की पूरी कमी केवल 2020–24 के दौरान हुई हो। 3
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ब्लीचिंग के बाद कोरल तब उबर सकते हैं, जब बची हुई कॉलोनियां फिर स्वस्थ हों और नए प्रवाल विकसित हों। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, नुकसान पहुंचाने वाली गर्मी की घटनाएं अब ज्यादा जल्दी-जल्दी हो रही हैं। वैश्विक ब्लीचिंग घटनाओं के बीच का अंतर अब औसतन पांच से छह साल रह गया है, जबकि पहले यह अंतर काफी लंबा हुआ करता था। 5
जब रीफ को पर्याप्त समय मिलता है, तो वे वापस संभलने की क्षमता दिखाते हैं। तीसरी वैश्विक ब्लीचिंग घटना के बाद 2017 से 2019 के बीच वैश्विक हार्ड-कोरल कवर में लगभग 6% की वृद्धि हुई थी। लेकिन अब ऐसा रिकवरी समय मिलना कठिन होता जा रहा है। अगली गंभीर हीटवेव कोरल के पर्याप्त आकार और परिपक्वता हासिल करने तथा प्रजनन के लिए तैयार होने से पहले ही आ सकती है। 1
वैज्ञानिक इसे सीढ़ीनुमा गिरावट के रूप में देखते हैं: हर गर्मी की घटना कुछ कोरल नष्ट करती है और अगली घटना उससे पहले आ जाती है, जब पारिस्थितिकी तंत्र खोई हुई संरचना को दोबारा बना सके।
NOAA के Coral Reef Watch के अनुसार, चौथी वैश्विक कोरल ब्लीचिंग घटना 2023 में शुरू हुई और संभवतः 2025 तक समाप्त हो गई। जनवरी 2023 से सितंबर 2025 के बीच दुनिया के लगभग 84.4% कोरल रीफ क्षेत्र में ब्लीचिंग-स्तर का हीट स्ट्रेस दर्ज किया गया, जबकि कम से कम 83 देशों और क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ब्लीचिंग की पुष्टि हुई। 17
एक अलग अकादमिक विश्लेषण में अनुमान लगाया गया कि वैश्विक रीफ क्षेत्र का लगभग 87% हिस्सा हीट स्ट्रेस से प्रभावित हुआ। इस अध्ययन के अनुसार, जमा हुआ औसत हीट स्ट्रेस पिछली वैश्विक घटना के रिकॉर्ड की तुलना में करीब 50% अधिक था। 84.4% और 87% के आंकड़ों में अंतर अलग-अलग पद्धतियों और मापों की वजह से है, लेकिन दोनों स्रोत इस घटना को भौगोलिक विस्तार और तीव्रता के लिहाज से असाधारण बताते हैं। 18
यह घटना बताती है कि समुद्र के रिकॉर्ड गर्म तापमान रीफ के लिए इतने खतरनाक क्यों हैं। ब्लीचिंग अब कभी-कभार होने वाली, लंबे अंतराल वाली आपदा नहीं रह गई है; यह गर्मी के दोहराते चक्र और अधूरी रिकवरी का हिस्सा बनती जा रही है।
वैज्ञानिक लगातार गर्म समुद्रों और एक और मजबूत El Niño की संभावना पर भी नजर रख रहे हैं। El Niño पहले से गर्म समुद्र के ऊपर अल्पकालिक अतिरिक्त गर्मी जोड़ सकता है, जिससे समुद्री हीटवेव और ब्लीचिंग का खतरा बढ़ जाता है। 18
कोरल रिकॉर्ड पर आधारित कुछ शोधों और रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि हाल के दशकों में El Niño अधिक तीव्र हुआ हो सकता है। हालांकि, El Niño के व्यवहार में हर बदलाव को इसी कारण से समझाने वाली यह अभी स्थापित वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं है; इस पर शोध जारी है।
फिलहाल सीधी चिंता यह है कि इस लंबे समय के सवाल का जवाब मिले बिना भी, समुद्र का बढ़ा हुआ आधारभूत तापमान प्राकृतिक जलवायु उतार-चढ़ाव के साथ आने वाली अतिरिक्त गर्मी के दौरान रीफ को पहले से ज्यादा असुरक्षित बना देता है।
यह आकलन पलाऊ में Pacific Islands Forum के साथ प्रस्तुत किया गया। इस क्षेत्र के नेताओं के सामने वैश्विक रीफ डेटा रखना खास मायने रखता है, क्योंकि प्रशांत द्वीपों के समुदाय, अर्थव्यवस्थाएं और तटीय पर्यावरण समुद्र से गहराई से जुड़े हैं। रिपोर्ट का समय COP31 से पहले भी महत्वपूर्ण है, जब प्रशांत नेता मजबूत जलवायु कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह संदर्भ रिपोर्ट के मुख्य नीतिगत संदेश को मजबूत करता है: रीफ संरक्षण को जलवायु नीति से अलग नहीं किया जा सकता। स्थानीय स्तर पर रीफ की रक्षा करने से उसके गर्मी सहने की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन अगर वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ऊंचा बना रहता है, तो स्थानीय प्रबंधन समुद्र को लगातार गर्म होने से नहीं रोक सकता।
समाधान के दो जुड़े हुए हिस्से हैं:
स्थिति गंभीर है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर रीफ पहले ही खत्म होने की कगार पर है। जब गर्मी का दबाव कम होता है और स्थानीय परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो रीफ में फिर उबरने की क्षमता दिखाई देती है। अब निर्णायक सवाल यह है कि क्या भविष्य में उन्हें इतना लंबा रिकवरी समय मिलेगा—और क्या उत्सर्जन में कटौती वैश्विक स्तर पर इस क्षमता को बचाने के लिए पर्याप्त तेजी से होगी।
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GCRMN के आकलन में 2020–24 के दौरान वैश्विक हार्ड कोरल कवर 1980–2009 के संदर्भ औसत से 9.5% कम पाया गया; ब्लीचिंग घटनाएं अब लगभग हर पांच से छह साल में लौट रही हैं।
GCRMN के आकलन में 2020–24 के दौरान वैश्विक हार्ड कोरल कवर 1980–2009 के संदर्भ औसत से 9.5% कम पाया गया; ब्लीचिंग घटनाएं अब लगभग हर पांच से छह साल में लौट रही हैं। 2023 में शुरू हुई चौथी वैश्विक कोरल ब्लीचिंग घटना अब तक की सबसे व्यापक और तीव्र घटना रही; अलग अलग मापों के अनुसार लगभग 84%–87% वैश्विक रीफ क्षेत्र हीट स्ट्रेस से प्रभावित हुआ।
रीफ अब भी संभल सकते हैं, लेकिन इसके लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज कटौती के साथ प्रदूषण, तलछट बहाव, अत्यधिक मछली पकड़ने और अन्य स्थानीय दबावों को कम करना जरूरी है।