पुतिन को लगता है कि डोनबास पर पूर्ण नियंत्रण के बिना युद्ध रोकना उनके राजनीतिक अधिकार के लिए लगातार आर्थिक दबाव और सैन्य नुकसान सहने से अधिक खतरनाक हो सकता है। लंबी दूरी के हमले रोकने के प्रस्ताव को ठुकराना और कोस्त्यांतिनिव्का की ओर रूसी बढ़त यह संकेत देती है कि मॉस्को मौजूदा मोर्चे को स्थिर करने वाले युद्धविराम के...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What, according to The Economist and other cited reporting, prompted Vladimir Putin to escalate the war in Ukraine despite growing domestic. Article summary: Putin’s apparent logic is that ending the war without a demonstrable victory—especially full control of Donbas—would be more dangerous to his authority than accepting further economic pain, casualties, and domestic anxie. Topic tags: general, news, general web, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with f
उपलब्ध रिपोर्टों से सबसे मजबूत निष्कर्ष यह निकलता है कि व्लादिमीर पुतिन का फैसला केवल सैन्य गणित से नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति से भी जुड़ा है। उनका आकलन संभवतः यह है कि बिना ऐसी जीत के युद्ध समाप्त करना, जिसे वे रूस के सामने उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें—विशेषकर डोनबास पर नियंत्रण—उनकी सत्ता के लिए आगे के सैन्य नुकसान, आर्थिक दबाव और बढ़ती जनचिंता से अधिक जोखिमपूर्ण होगा।
हालांकि, रूस की अगली सैन्य कार्रवाइयों से जुड़े कई दावे अभी खुफिया आकलन हैं; उन्हें स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
रूस में युद्ध का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में अधिक स्पष्ट दिख रहा है। पेट्रोल की कमी, यूक्रेनी ड्रोन हमले, इंटरनेट बाधित होने और नई लामबंदी की आशंका को लेकर चिंता बढ़ी है। द इकोनॉमिस्ट द्वारा उद्धृत एक सर्वेक्षण में 55% लोगों ने कहा कि उनके सहकर्मी और रिश्तेदार चिंतित महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 40% था। 2
फिर भी यह दबाव अभी तक युद्ध समाप्त करने के फैसले में नहीं बदला है। रिपोर्टों में पुतिन से जुड़ी जो राजनीतिक गणना सामने आती है, उसके अनुसार युद्ध जारी रखने की व्यक्तिगत कीमत अब भी उस कीमत से कम है जो उन्हें ऐसी स्थिति स्वीकार करने पर चुकानी पड़ सकती है जिसे वे जीत के रूप में पेश न कर सकें। द इकोनॉमिस्ट ने युद्ध को पुतिन का अपना बनाया हुआ ऐसा जाल बताया है, जिसमें जीत की संभावना घट रही है, लेकिन सम्मानजनक निकास का रास्ता बनाना और कठिन होता जा रहा है। 9
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि कीव का मानना है कि रूस सितंबर में होने वाले संसदीय चुनावों के बाद 3 लाख और सैनिकों की भर्ती या लामबंदी कर सकता है। रॉयटर्स ने इसे यूक्रेन का आकलन बताया है, रूस की ओर से जारी किसी पुष्ट लामबंदी आदेश की जानकारी नहीं। 17
इस संभावित बढ़ोतरी का तरीका नई भर्ती या लामबंदी हो सकता है। इसे यह प्रमाण नहीं माना जा सकता कि ऐसा आदेश निश्चित रूप से जारी होगा या इतने सैनिक अंततः मोर्चे तक पहुंचेंगे। फिर भी यह दावा उस सैन्य जरूरत का संकेत देता है जिसे यूक्रेन मॉस्को से जोड़कर देखता है: मोर्चे पर दबाव बनाए रखना और भारी नुकसान की भरपाई करना।
पुतिन ने यूक्रेन के लंबी दूरी के हमले रोकने के प्रस्ताव को ठुकराया है। उन्होंने कहा है कि रूस दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज़्झिया पर पूर्ण कब्जे के लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। इस रुख से ऐसा समझौता मुश्किल हो जाता है जिसमें मौजूदा नियंत्रण रेखा को ही स्थायी या अस्थायी सीमा मान लिया जाए। 22
मैदानी घटनाक्रम भी इसी लक्ष्य की ओर इशारा करता है। रूसी सैनिक कोस्त्यांतिनिव्का में घुसपैठ कर उसे घेरने की कोशिश कर रहे हैं। यह शहर क्रामातोर्स्क और स्लोवियांस्क की दिशा में जाने वाला रणनीतिक प्रवेशद्वार माना जाता है। इसके गिरने से रूस को पूर्वी यूक्रेन के बचे हुए प्रमुख यूक्रेनी गढ़ों की ओर बढ़ने और पूरे डोनबास पर कब्जे के लक्ष्य के करीब पहुंचने का रास्ता मिल सकता है।
रॉयटर्स ने क्रेमलिन के करीबी लोगों के हवाले से बताया कि पुतिन डोनबास पर पूर्ण नियंत्रण को आवश्यक जीत मानते हैं। रूस की तेल रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर यूक्रेनी हमलों ने उनके युद्ध जारी रखने के संकल्प को और मजबूत किया है। हालांकि ये स्रोत गुमनाम थे; इसलिए यह क्रेमलिन की सोच का आकलन है, सार्वजनिक रूप से सत्यापित नीति दस्तावेज नहीं। 21
यूक्रेन ने रूस के तेल ढांचे, बंदरगाहों और सैन्य गतिविधियों से जुड़े अन्य ठिकानों पर लंबी दूरी के हमले किए हैं। द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, रिफाइनरियों पर हमलों के कारण रूस के एक दर्जन से अधिक क्षेत्रों में पेट्रोल राशनिंग की स्थिति बनी। 3 पुतिन ने भी ईंधन की कमी को स्वीकार किया है और यूक्रेनी ड्रोन से निपटने के लिए रूसी वायु-रक्षा उत्पादन तेज करने का आह्वान किया है।
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इन दबावों के बीच मॉस्को की रणनीति केवल तेज जमीनी सफलता पर निर्भर नहीं है। रूस धीरे-धीरे क्षेत्रीय बढ़त हासिल करने के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए यूक्रेनी शहरों तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। पहले की रिपोर्टों में इस रणनीति का उद्देश्य केवल जमीन कब्जाना नहीं, बल्कि यूक्रेन की काम करने और प्रतिरोध जारी रखने की क्षमता को कमजोर करना भी बताया गया था। 10
इसका अर्थ है कि रूस एक महंगी दोहरी रणनीति अपना रहा है: मोर्चे पर लगातार दबाव के लिए सैनिकों की तैनाती और पीछे के इलाकों में लागत बढ़ाने के लिए लंबी दूरी के हमले। हालांकि इनमें से कोई भी बात यह साबित नहीं करती कि रूस अपने घोषित क्षेत्रीय लक्ष्यों को जल्दी हासिल कर सकता है।
उपलब्ध रिपोर्टों में यूरोप के लिए सबसे तत्काल चिंता ऐसे अभियानों की है जो खुले नाटो-रूस युद्ध की सीमा से नीचे रहते हैं। अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने रूस से जुड़ी या रूस पर आरोपित गतिविधियों में तोड़फोड़, हत्या की साजिशें, हवाई क्षेत्र का उल्लंघन, जीपीएस जामिंग, साइबर हमले, समुद्र के नीचे महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान, राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रवासन को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख किया है।
पोलैंड और बाल्टिक देशों ने बांधों, बिजली संयंत्रों और प्राकृतिक गैस ढांचे जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ाई है। उन्हें आशंका है कि रूस यूक्रेनी ड्रोन का इस्तेमाल कर किसी झूठे-झंडे वाले हमले की साजिश रच सकता है, ताकि नाटो की प्रतिक्रिया को परखा जा सके। कुछ रिपोर्टों में यूक्रेन को हथियार और अन्य सहायता पहुंचाने वाले यूरोपीय रक्षा उत्पादन केंद्रों तथा आपूर्ति मार्गों को निशाना बनाए जाने की चिंता भी जताई गई है। हालांकि किसी खास साजिश के दावे को पुष्ट घटना से अलग करके देखना जरूरी है।
ऐसी रणनीति मॉस्को को यूक्रेन के समर्थकों पर दबाव बनाने का रास्ता देती है, बिना तुरंत पारंपरिक सैन्य हमला शुरू किए। लेकिन इसमें गलत आकलन का खतरा भी है: कोई गुप्त रखने के लिए की गई कार्रवाई नागरिकों को घायल कर सकती है, महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है या ऐसी प्रतिक्रिया भड़का सकती है जिसकी रूस ने योजना न बनाई हो।
इन चेतावनियों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए। 30 अगस्त को नाटो के एक अधिकारी ने कहा कि रूस अपनी हाइब्रिड गतिविधियां बढ़ा रहा है, लेकिन गठबंधन को इस समय हमले का कोई तत्काल खतरा दिखाई नहीं देता। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रूस नाटो के किसी देश पर हमला करने का जोखिम उठाएगा।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। पश्चिमी अधिकारी तोड़फोड़, साइबर हमलों या अन्य दबावपूर्ण कार्रवाइयों के बढ़ते जोखिम को स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मॉस्को ने नाटो की जमीन पर पारंपरिक सैन्य आक्रमण का फैसला कर लिया है। उपलब्ध रिपोर्टें तनाव बढ़ने और गठबंधन की परीक्षा लिए जाने की आशंका का समर्थन करती हैं, तत्काल हमले की पुष्टि का नहीं।
रूस की परमाणु बयानबाजी लंबे समय से पश्चिमी दखल को रोकने की चेतावनी के रूप में इस्तेमाल होती रही है। लेकिन उपलब्ध स्रोतों में हाल में बताए गए किसी खास परमाणु-सक्षम मिसाइल परीक्षण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। इसी तरह, ये रिपोर्टें यह भी साबित नहीं करतीं कि रूस ने परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का कोई तत्काल फैसला किया है।
इसलिए सावधानी से निकाला जा सकने वाला निष्कर्ष सीमित है: परमाणु धमकियां और परमाणु-सक्षम प्रणालियां युद्ध के दांव को बहुत ऊंचा कर देती हैं और दबाव बनाने के संकेत के रूप में इस्तेमाल की जा सकती हैं। लेकिन मजबूत और स्वतंत्र रूप से पुष्ट रिपोर्टिंग के बिना इन्हें परमाणु हथियारों के आसन्न इस्तेमाल का प्रमाण नहीं कहा जा सकता।
पुतिन की दिखाई दे रही रणनीति यह है कि दबाव तब तक बढ़ाया जाए जब तक रूस ऐसा परिणाम हासिल न कर ले जिसे वह जीत के रूप में पेश कर सके—विशेषकर डोनबास में—या युद्ध जारी रखने की कीमत रुकने की कीमत से स्पष्ट रूप से अधिक न हो जाए। रूस में बढ़ती चिंता, ईंधन की कमी और यूक्रेनी हमलों ने युद्ध को अधिक महंगा जरूर बनाया है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इनका असर अब तक समझौते के बजाय रणनीति बदलने और तनाव बढ़ाने के रूप में दिखा है। 1
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निकट भविष्य के प्रमुख जोखिम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं: रूस की बड़ी लामबंदी, यूक्रेन पर और भारी हमले तथा यूरोपीय बुनियादी ढांचे और यूक्रेन तक पहुंचने वाली आपूर्ति-श्रृंखलाओं के खिलाफ हाइब्रिड अभियान। साथ ही, अधिकारियों की चेतावनियों और पुष्ट इरादों के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है। नाटो फिलहाल किसी तत्काल पारंपरिक हमले की बात नहीं कर रहा है और उपलब्ध साक्ष्य किसी नए परमाणु परीक्षण या परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के आसन्न फैसले की पुष्टि नहीं करते।
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पुतिन को लगता है कि डोनबास पर पूर्ण नियंत्रण के बिना युद्ध रोकना उनके राजनीतिक अधिकार के लिए लगातार आर्थिक दबाव और सैन्य नुकसान सहने से अधिक खतरनाक हो सकता है।
पुतिन को लगता है कि डोनबास पर पूर्ण नियंत्रण के बिना युद्ध रोकना उनके राजनीतिक अधिकार के लिए लगातार आर्थिक दबाव और सैन्य नुकसान सहने से अधिक खतरनाक हो सकता है। लंबी दूरी के हमले रोकने के प्रस्ताव को ठुकराना और कोस्त्यांतिनिव्का की ओर रूसी बढ़त यह संकेत देती है कि मॉस्को मौजूदा मोर्चे को स्थिर करने वाले युद्धविराम के बजाय क्षेत्रीय बढ़त चाहता है।
पश्चिमी अधिकारी यूरोप में रूस की हाइब्रिड गतिविधियों के बढ़ने की चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन नाटो का कहना है कि गठबंधन पर किसी पारंपरिक हमले का तत्काल खतरा नहीं है।