संक्षिप्त जवाब
नाटो का सार्वजनिक आकलन है कि रूस यूरोप में अपनी तथाकथित हाइब्रिड गतिविधियां—यानी पारंपरिक युद्ध की सीमा से नीचे रहने वाले साइबर हमले, तोड़फोड़, जासूसी, ड्रोन घुसपैठ और सूचना अभियानों—को तेज़ कर रहा है। फिर भी, गठबंधन को इस समय किसी सदस्य देश पर रूस के तत्काल पारंपरिक सैन्य हमले के संकेत नहीं दिखते।
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इसका अर्थ यह नहीं है कि जोखिम खत्म हो गया है। अमेरिकी खुफिया आकलनों में आने वाले वर्षों में नाटो की एकजुटता और उसके Article 5—एक सदस्य पर हमला, सभी पर हमला माना जा सकता है—की प्रतिबद्धता को परखने के लिए सीमित कार्रवाई की संभावना पर विचार किया गया है।
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चिंता क्यों बढ़ी है?
यूरोपीय सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के वर्षों में रूस से जुड़ी या रूस-समर्थित मानी गई कई गतिविधियों की ओर इशारा किया है। इनमें शामिल हैं:
- औद्योगिक इकाइयों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के खिलाफ आगजनी और तोड़फोड़;
- सैन्य सहायता पहुंचाने वाले मार्गों की निगरानी और उनसे जुड़ी संदिग्ध साइबर गतिविधियां;
- सरकारी संस्थानों, कंपनियों और सेवा प्रदाताओं पर साइबर हमले;
- हवाई क्षेत्र में ड्रोन और लड़ाकू विमानों की घुसपैठ;
- जीपीएस तथा अन्य नेविगेशन सिग्नलों में जैमिंग और स्पूफिंग;
- जासूसी, हिंसा और कथित हत्या की साजिशें।
यूरोपीय संघ की आधिकारिक सामग्री में रूस और बेलारूस से जुड़े हाइब्रिड खतरों के तहत ड्रोन या लड़ाकू विमानों द्वारा हवाई क्षेत्र के उल्लंघन तथा नेविगेशन सिग्नल में दखल का उल्लेख है।
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‘हर महीने 15 घटनाएं’—इस आंकड़े को कैसे समझें?
रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल के बाद से रूस से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की रफ्तार बढ़कर करीब 15 घटनाएं प्रति माह हो गई है। हालांकि, यह आंकड़ा खुफिया अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित अनुमान है; यह नाटो की सार्वजनिक रूप से जांची जा सकने वाली आधिकारिक घटना-सूची नहीं है।
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इसी तरह, यूरोपीय सरकारों और खुफिया एजेंसियों ने कई घटनाओं में रूस की भूमिका का आरोप लगाया है, लेकिन पूरे घटनाक्रम में मॉस्को की जिम्मेदारी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है। एक अमेरिकी सरकारी संस्था से जुड़े मानचित्रण अध्ययन ने 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद से नाटो क्षेत्र में रूस से जुड़ी या रूस पर संदेहित करीब 150 हाइब्रिड कार्रवाइयों को दर्ज किया है।
वे घटनाएं जिनसे यूरोप में अलार्म बढ़ा
यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार, चिंता केवल ऑनलाइन हमलों तक सीमित नहीं है। पोलैंड में यूक्रेन को सैन्य सहायता पहुंचाने वाले रेल मार्गों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने के आरोप लगे हैं। पोलिश अधिकारियों ने रूस से जुड़े आगजनी और हिंसा के कथित षड्यंत्रों को विफल करने की भी जानकारी दी है।
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जर्मनी में संवेदनशील हवाई अड्डों के आसपास विस्फोटक सामग्री वाले ड्रोन मिलने की खबरों ने भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ाई हैं। कुछ मामलों में ड्रोन गतिविधि सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों या यूक्रेन से जुड़े मालवाहक विमानों के आसपास दर्ज की गई।
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एस्टोनिया ने रूस पर तोड़फोड़, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और जासूसी गतिविधियां तेज़ करने का आरोप लगाया है। यूरोपीय आयोग ने भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को प्रभावित करने वाली शत्रुतापूर्ण घटनाओं की बढ़ती संख्या को सुरक्षा खामियों का संकेत बताया है।
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इन आरोपों को पढ़ते समय एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है: संदिग्ध घटना, सरकारी आरोप और स्वतंत्र रूप से सिद्ध जिम्मेदारी—ये तीनों एक ही बात नहीं हैं।
पोलैंड और बाल्टिक देशों की चेतावनी
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा है कि देश के सामने “महत्वपूर्ण महीने” हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नाटो देश के खिलाफ रूसी उकसावे की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इससे पहले टस्क ने कहा था कि रूस कुछ महीनों के भीतर नाटो सदस्य देश पर हमला करने में सक्षम हो सकता है।
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लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने कहा कि खुफिया आकलनों में लिथुआनिया, अन्य बाल्टिक देशों या पोलैंड के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर संभावित सीमित हमलों की जानकारी है। इनमें ऊर्जा और परिवहन प्रणालियां शामिल हो सकती हैं।
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इन चेतावनियों का मतलब यह नहीं है कि हमला तय है। वे इस बात का संकेत हैं कि रूस के साथ सीमा साझा करने वाले या यूक्रेन को मजबूत सैन्य समर्थन देने वाले देश सबसे खराब संभावित स्थिति के लिए तैयारी बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका और यूरोप की कूटनीतिक प्रतिक्रिया
रिपोर्टों के अनुसार, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को को नाटो सदस्यों, खासकर एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया के खिलाफ कार्रवाई से चेताया। इन रिपोर्टों का संदर्भ ऐसे खुफिया आकलनों से है जिनमें रूस द्वारा गठबंधन की एकजुटता को परखने की संभावित कोशिश पर विचार किया गया है।
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने रूसी गतिविधियों को गंभीर हाइब्रिड खतरा बताया है और कड़े यूरोपीय जवाब का समर्थन किया है। फ्रांस, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों ने संदिग्ध साइबर अभियानों पर राजनयिक विरोध, राजदूतों को तलब करने, सार्वजनिक आरोप और समन्वित प्रतिबंधों का सहारा लिया है।
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Article 5 को परखने के संभावित तरीके
अमेरिकी खुफिया आकलनों में बताए गए संभावित परिदृश्य तत्काल बड़े पैमाने के आक्रमण से अलग हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
- बड़े साइबर हमले या बुनियादी ढांचे में तोड़फोड़;
- बिना पहचान वाले सशस्त्र समूहों के जरिए सीमित समय के लिए किसी इलाके पर कब्जा;
- नाटो के पूर्वी हिस्से में किसी कमजोर सदस्य के खिलाफ छोटी पारंपरिक सैन्य घुसपैठ।
ऐसी कार्रवाई का कथित उद्देश्य बड़े भू-भाग पर कब्जा करना नहीं, बल्कि यह जांचना हो सकता है कि नाटो किसी छोटे सदस्य की रक्षा के लिए वास्तव में सामूहिक सैन्य प्रतिक्रिया देगा या नहीं।
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यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आकस्मिक या संभावित परिदृश्य हैं, यह घोषणा नहीं कि रूस ने हमला करने का आदेश दे दिया है। सीमित हमले की संभावना को लेकर आकलन भी तत्काल खतरे के नाटो के सार्वजनिक निष्कर्ष से अलग है।
मॉस्को का जवाब
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस पर लगाए गए साइबर और हाइब्रिड युद्ध के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि रूस इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और मॉस्को के खिलाफ ऐसे दावे बार-बार बिना ठोस प्रमाण के लगाए जाते हैं। रूस ने यूरोप में हुई व्यापक तोड़फोड़ की घटनाओं में अपनी भूमिका से लगातार इनकार किया है।
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क्या इससे यूक्रेन के लिए यूरोपीय समर्थन कमजोर हुआ?
अब तक उपलब्ध साक्ष्य यह नहीं दिखाते कि संदिग्ध रूसी अभियान यूक्रेन के लिए यूरोपीय समर्थन तोड़ने के अपने संभावित रणनीतिक लक्ष्य में सफल हुआ है। इसके उलट, पोलैंड और बाल्टिक देश यूक्रेन के सबसे मजबूत समर्थकों में बने हुए हैं। उन्होंने इन घटनाओं का इस्तेमाल अधिक मजबूत प्रतिरोधक क्षमता, बेहतर सुरक्षा और सैन्य सहायता के मार्गों की रक्षा की मांग के लिए किया है।
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इन गतिविधियों से आर्थिक लागत, राजनीतिक दबाव और असुरक्षा जरूर बढ़ सकती है। लेकिन अभी ऐसा पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि उन्होंने पूर्वी नाटो सदस्यों के यूक्रेन समर्थन को वास्तविक रूप से कमजोर कर दिया है।
निष्कर्ष: नाटो की मौजूदा सार्वजनिक स्थिति “तत्काल हमला” नहीं, बल्कि “बढ़ता हुआ और गंभीर हाइब्रिड खतरा” है। गठबंधन सतर्क है, जबकि पोलैंड और बाल्टिक देशों की चिंता इस संभावना पर केंद्रित है कि रूस भविष्य में सीमित कार्रवाई के जरिए नाटो की सामूहिक रक्षा व्यवस्था को परखने की कोशिश कर सकता है।