30 अगस्त को अमेरिकी बलों ने ईरान के लारक द्वीप पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े दो रॉकेट लॉन्च साइटों को निशाना बनाया। यह एक महीने से अधिक समय में ईरान के खिलाफ पहला ज्ञात अमेरिकी हमला बताया गया है।
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अमेरिकी पक्ष के अनुसार, IRGC के कर्मियों को ऐसे रॉकेट तैयार करते देखा गया था जिनमें समुद्री बारूदी सुरंगें लगाई गई थीं और जिन्हें होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दागा जा सकता था। यह विवरण एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी के हवाले से सामने आया है, इसलिए इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य नहीं, बल्कि अमेरिकी पक्ष का आरोप माना जाना चाहिए। हमले में लॉन्चरों को कितना नुकसान हुआ और अमेरिकी कार्रवाई में कोई हताहत हुआ या नहीं, इसकी आधिकारिक स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
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ईरान की प्रतिक्रिया और इसके बाद की कार्रवाई
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि हमले में कई सैनिक और नागरिक मारे गए तथा घायल हुए। उसने कार्रवाई को “जवाब और सजा” दिए जाने की चेतावनी के साथ जोड़ा, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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इसके बाद IRGC के करीबी एक टेलीग्राम चैनल ने मिसाइल और ड्रोन लॉन्च की नई लहर की घोषणा की। चैनल ने दावा किया कि कुछ हमले होर्मुज़ में उन जहाजों के खिलाफ थे जिन्हें उसने “नियमों का पालन न करने वाला” बताया। इसी अवधि में जॉर्डन में अमेरिकी बलों को निशाना बनाकर दागी गई लगभग सभी मिसाइलों को रोक लिए जाने की रिपोर्ट आई, लेकिन लक्ष्यों, नुकसान और हताहतों के बारे में स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए गए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
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छह महीने से जारी संघर्ष का संदर्भ
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान का व्यापक टकराव करीब छह महीने से चल रहा है। अगस्त की शुरुआत तक इस संघर्ष ने लगभग पांच महीने से तेल निर्यात और क्षेत्रीय व्यापार को प्रभावित किया था। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव और नाकाबंदी लगाई, जबकि ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात पर प्रतिबंध लगाए।
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17 जून को वॉशिंगटन और तेहरान ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी थी और ईरान को वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित और बिना शुल्क आवागमन की व्यवस्था करनी थी। हालांकि, यह व्यवस्था बाद में टूट गई या प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी।
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24 जुलाई को अमेरिका ने कूटनीति के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से हमले रोकने की घोषणा की थी। ईरान ने भी क्षेत्र में अपनी “जवाबी” सैन्य कार्रवाई रोकने की बात कही। लेकिन जुलाई के अंत में अमेरिकी ठिकानों और जहाजों पर कथित ईरानी मिसाइल हमलों के बाद लड़ाई फिर शुरू हो गई।
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होर्मुज़ जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम तेल-निर्यात मार्गों में से एक है। इसके रास्ते से होने वाला आवागमन बाधित होने पर वैश्विक तेल आपूर्ति घट सकती है, कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में अस्थिरता पैदा हो सकती है।
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14 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात ने कहा था कि ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो जहाजों पर हमला किया। इसके बाद जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन में केवल नौ जहाज इस मार्ग से गुजरे—जो अगस्त के औसत से कम था।
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वॉशिंगटन का कहना है कि वह ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी को अनिश्चितकाल तक जारी रख सकता है और तेहरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि होर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए अमेरिकी नाकाबंदी, प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों का अंत जरूरी है।
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ईरान ने ओमान के साथ संभावित वाणिज्यिक-जहाजरानी व्यवस्था पर भी कहा है कि उसके तहत सैन्य जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।
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अमेरिकी सैन्य तैनाती और कूटनीतिक दबाव
लारक द्वीप पर हमला संकेत देता है कि जुलाई में घोषित विराम ने संघर्ष के मूल विवादों को हल नहीं किया। अमेरिका सीमित और संभावित रूप से पूर्व-emptive कार्रवाई करने को तैयार दिख रहा है, जबकि ईरान के पास जहाजों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को धमकाने की क्षमता बनी हुई है।
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अमेरिकी नौसैनिक और विमानवाहक पोतों की अतिरिक्त तैनाती की खबरें लंबे समय तक क्षेत्रीय मिशन जारी रखने की तैयारी और सैन्य संसाधनों पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करती हैं। हालांकि, उपलब्ध सामग्री से अमेरिकी सैन्य तैयारी या सैनिकों की सटीक संख्या का विश्वसनीय आकलन नहीं किया जा सकता।
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अमेरिका पर जी20 में दोहरा दबाव है: उसे ऊर्जा आपूर्ति और वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा करनी है, लेकिन संघर्ष को व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलने से भी बचना है। होर्मुज़ में सीमित यातायात से पैदा हुए आर्थिक प्रभाव इस चुनौती को और गंभीर बनाते हैं। उपलब्ध स्रोत जी20 में लिए गए किसी विशिष्ट फैसले या प्रतिबद्धता का दस्तावेज नहीं देते, इसलिए इससे आगे का दावा अटकल होगा।
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