18 अगस्त 2026 को मिखाइलो फेदोरोव ने युद्ध के बीच चुनाव कराने के लिए एक “कानूनी, सुरक्षित और यथार्थवादी” रास्ता तलाशने की मांग की। इससे उनका पद से हटाया जाना जेलेंस्की के खिलाफ सबसे गंभीर आंतरिक राजनीतिक चुनौती में बदल... फेदोरोव ने इसे केवल रक्षा मंत्रालय का विवाद नहीं बताया, बल्कि भ्रष्टाचार, नौकरशाही, धीमे सुधार औ...
शोध उत्तर

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मिखाइलो फेदोरोव और वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच टकराव महज मंत्रिमंडल में बदलाव का नतीजा नहीं था। रक्षा मंत्री पद से हटाए जाने के बाद फेदोरोव ने करीब नौ मिनट के वीडियो संदेश में सरकार की युद्धकालीन वैधता पर सवाल उठाए और राष्ट्रीय चुनावों की ओर लौटने का रास्ता तलाशने की अपील की। इससे वह रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद जेलेंस्की को चुनौती देने वाले सबसे प्रमुख आंतरिक नेता बन गए। 3
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इस टकराव के केंद्र में तीन सवाल हैं: यूक्रेन युद्ध का संचालन कैसे कर रहा है, उसकी राजनीतिक व्यवस्था कितनी प्रभावी है और नागरिकों को दोबारा मतदान का अधिकार कब मिलना चाहिए।
फेदोरोव लंबे समय से यूक्रेन के डिजिटल आधुनिकीकरण अभियान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय की आधिकारिक सामग्री के अनुसार, उन्होंने सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने के साथ-साथ देश की ड्रोन क्षमता से जुड़े प्रयासों में भी काम किया था। बाद में उन्होंने रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। 18
सरकारी संचार में उन्हें हथियारों और ड्रोन की जरूरतों की योजना बनाने, वायु रक्षा मजबूत करने तथा इंटरसेप्टर ड्रोन की खरीद जैसे कार्यों से जोड़ा गया। 17
इस पृष्ठभूमि ने फेदोरोव को एक अलग राजनीतिक पहचान दी। वे तकनीक और सुधारों पर जोर देने वाले नेता के रूप में सामने आए, जिन्हें युद्धकालीन शासन की सबसे कठिन संस्थाओं में से एक को बदलने की जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी बर्खास्तगी की खबरों में उन्हें लोकप्रिय और सुधारवादी मंत्री बताया गया। इसके बाद कीव और यूक्रेन के अन्य शहरों में रक्षा क्षेत्र में सुधार तथा उन्हें वापस लाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। 2
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उपलब्ध स्रोत खरीद प्रक्रियाओं, युद्धक्षेत्र के आकलन या सैन्य कमांडरों के साथ अंदरूनी मतभेदों से जुड़ी हर बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते। लेकिन व्यापक राजनीतिक घटनाक्रम स्पष्ट है: फेदोरोव को हटाया गया, उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति हुई और इसके बाद उन्होंने सीधे यूक्रेनी जनता को संबोधित किया। 1
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18 अगस्त के अपने संबोधन में फेदोरोव ने कहा कि समस्या केवल एक मंत्रालय या एक पद तक सीमित नहीं है। उन्होंने भ्रष्टाचार, नौकरशाही की रुकावटों, जनता के अविश्वास और नवाचार को पर्याप्त तेजी से लागू न कर पाने को जोड़ते हुए इसे “शासन का व्यवस्थागत संकट” बताया। 5
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उन्होंने यह भी कहा कि देश की सैन्य स्थिति बिगड़ रही है और रक्षा संबंधी फैसलों को अधिक प्रभावी तथा जवाबदेह बनाने की जरूरत है। ये एक पूर्व मंत्री के राजनीतिक आरोप थे—किसी अदालत के निष्कर्ष या पूरी हो चुकी आधिकारिक जांच के प्रमाणित निष्कर्ष नहीं।
फेदोरोव की चुनौती इसलिए प्रभावशाली बनी क्योंकि उन्होंने प्रशासनिक विवाद को व्यापक राजनीतिक अभियोग में बदल दिया। उनके संदेश का संकेत था कि यूक्रेन की युद्धकालीन मुश्किलें केवल मोर्चे की स्थिति या रूस के दबाव का परिणाम नहीं हैं; कीव में सत्ता और सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन का तरीका भी इसके लिए जिम्मेदार है।
फेदोरोव की सबसे महत्वपूर्ण मांग थी कि यूक्रेन युद्ध के बीच पूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने के लिए “कानूनी, सुरक्षित और यथार्थवादी व्यवस्था” तैयार करे। उनका कहना था कि “लोकतंत्र को रूस का बंधक नहीं बनाया जा सकता।” उन्होंने चुनाव को उस उद्देश्य का हिस्सा बताया जिसके लिए यूक्रेन युद्ध लड़ रहा है। 4
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यह मांग यूक्रेन के युद्धकालीन कानूनी ढांचे से सीधे टकराती है। देश में आखिरी राष्ट्रीय चुनाव 2019 में हुए थे और रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद फरवरी 2022 से मार्शल लॉ लागू है। यूक्रेनी कानून मार्शल लॉ के दौरान चुनाव कराने पर रोक लगाता है।
चुनाव कराने पर केवल कानून बदलने का सवाल नहीं होगा। रूस के हमलों के बीच मतदान केंद्रों की सुरक्षा कैसे होगी? सैनिक और विस्थापित नागरिक कैसे वोट देंगे? विदेश में रह रहे यूक्रेनी नागरिकों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित होगी? रूसी कब्जे वाले इलाकों के लिए क्या व्यवस्था होगी? इन सभी सवालों का जवाब देना होगा।
इसी वजह से चुनाव पर बहस फेदोरोव के व्यक्तिगत राजनीतिक भविष्य से कहीं बड़ी हो गई। यह लोकतांत्रिक जवाबदेही और जारी आक्रमण की सुरक्षा जरूरतों के बीच संतुलन का बुनियादी प्रश्न बन गई है।
जेलेंस्की ने सक्रिय युद्ध के दौरान चुनाव कराने के विचार को खारिज किया। 23 अगस्त को सामने आई उनकी टिप्पणियों के अनुसार, युद्धकालीन मतदान यूक्रेन को “तबाह” कर सकता है, क्योंकि इससे देश में विभाजन पैदा होगा। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव को राजनीतिक “सुनामी” भी बताया।
राष्ट्रपति का तर्क है कि प्राथमिकता युद्ध समाप्त करने और स्वतंत्र, संप्रभु राज्य को बचाए रखने की होनी चाहिए; राष्ट्रीय चुनाव उसके बाद कराए जाएं। रॉयटर्स के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा है कि यदि यूक्रेन के सहयोगी मतदान की सुरक्षा की गारंटी देने में मदद कर सकें तो वह चुनाव कराने के लिए तैयार होंगे।
इस मांग ने जेलेंस्की को कठिन स्थिति में डाल दिया है। चुनाव से इनकार करने पर मौजूदा युद्धकालीन व्यवस्था बनी रहती है, लेकिन सरकार पर लोकतांत्रिक नवीनीकरण को अनिश्चित समय तक टालने का आरोप लग सकता है। दूसरी ओर, चुनाव स्वीकार करने से रूस के हमले जारी रहते हुए सुरक्षा, कानून और प्रशासन से जुड़े बड़े जोखिम पैदा होंगे।
फेदोरोव की बर्खास्तगी के बाद हुए प्रदर्शनों से पता चला कि उन्हें व्यक्तिगत समर्थन हासिल है और रक्षा प्रबंधन तथा भ्रष्टाचार को लेकर असंतोष वास्तविक है। लेकिन उनकी चुनावी मुहिम पर रिपोर्टिंग ने इसे राजनीतिक रूप से जोखिम भरा बताया है। तत्काल चुनाव कराने के पक्ष में किसी स्पष्ट राष्ट्रीय सहमति के प्रमाण नहीं मिले। 2
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उपलब्ध जनमत सर्वेक्षण दो तरह के संकेत देते हैं। कई यूक्रेनी सरकार में नए चेहरों और बदलाव का समर्थन करते हैं, लेकिन सर्वेक्षणों में लगातार यह भी दिखा है कि बहुमत सक्रिय युद्ध के दौरान नहीं, बल्कि युद्ध समाप्त होने के बाद चुनाव कराना पसंद करता है।
फेदोरोव की व्यक्तिगत विश्वसनीयता फिर भी उल्लेखनीय दिखाई देती है। कीव इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी के जुलाई के अंत में किए गए एक सर्वेक्षण में पूर्व सैन्य कमांडर वालेरी जालुज्नी पर 66 प्रतिशत, फेदोरोव पर 63 प्रतिशत और जेलेंस्की पर 56 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया। ये आंकड़े भरोसे का स्तर बताते हैं, निश्चित चुनावी नतीजे या वोट शेयर नहीं।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। सर्वेक्षण संकेत देते हैं कि फेदोरोव एक गंभीर राजनीतिक शक्ति बन सकते हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उन्हें अभी बहुमत हासिल है या यूक्रेनी नागरिक मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव चाहते हैं।
चुनाव को लेकर विवाद ऐसे समय तेज हुआ जब यूक्रेन की भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसियों ने एक विशेष अभियान की घोषणा की। इसमें मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा राष्ट्रपति कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े कथित आपराधिक संगठन की जांच शामिल थी। रिपोर्टों के अनुसार, मामला 150 करोड़ ह्रीव्निया की कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा था।
फेदोरोव को 31 अगस्त की सुनवाई के लिए संसद की अस्थायी जांच समिति ने भी बुलाया। समिति “ऑपरेशन मिडास” के संबंध में मार्शल लॉ के दौरान संभावित भ्रष्टाचार, सार्वजनिक धन और सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल पर उनसे जवाब चाहती है। हालांकि किसी व्यक्ति को समन भेजा जाना जांच या संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है; यह अपने आप में अपराध सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं है।
इस मामले में राष्ट्रपति कार्यालय की पूर्व उप प्रमुख इरीना मुदरा का नाम भी सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने उनके घर की तलाशी ली और बाद में जेलेंस्की ने उन्हें पद से हटा दिया। उद्धृत रिपोर्टिंग में बर्खास्तगी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।
इन घटनाओं ने फेदोरोव के आरोपों को अधिक संवेदनशील राजनीतिक माहौल दे दिया, लेकिन दोनों बातों को एक नहीं माना जाना चाहिए। भ्रष्टाचार की जांच फेदोरोव के आरोपों को साबित नहीं करती। इसी तरह तलाशी, बर्खास्तगी या समन अपने आप में किसी नामित व्यक्ति की आपराधिक गलती साबित नहीं करते। उपलब्ध रिपोर्टिंग फेदोरोव की आपराधिक जिम्मेदारी स्थापित नहीं करती।
फेदोरोव चुनौतीकर्ता इसलिए बने क्योंकि कई विवाद एक साथ आ गए: एक चर्चित बर्खास्तगी, युद्धकालीन प्रशासन को लेकर मतभेद, भ्रष्टाचार और नौकरशाही से उपजा जन असंतोष तथा चुनावों पर अत्यंत संवेदनशील बहस।
उन्होंने बहस को इस सवाल से आगे बढ़ा दिया कि क्या उन्हें रक्षा मंत्रालय में लौटना चाहिए। अब सवाल यह है कि क्या यूक्रेन की युद्धकालीन सरकार को नया लोकतांत्रिक जनादेश चाहिए। जेलेंस्की की प्रतिक्रिया से साफ है कि वह आक्रमण के दौरान चुनाव को राष्ट्रीय एकता और राज्य की स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं।
फिलहाल उपलब्ध प्रमाण दोनों पक्षों के राजनीतिक दावों से अधिक सीमित निष्कर्ष का समर्थन करते हैं। फेदोरोव ने युद्धकालीन चुनावों की बहस को यूक्रेन की मुख्यधारा की राजनीति में ला कर एक पुरानी राजनीतिक वर्जना तोड़ी है। लेकिन कानूनी अड़चनें कायम हैं, सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान नहीं हुआ है और उपलब्ध सर्वेक्षण युद्ध समाप्त होने से पहले मतदान के व्यापक समर्थन का संकेत नहीं देते।
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18 अगस्त 2026 को मिखाइलो फेदोरोव ने युद्ध के बीच चुनाव कराने के लिए एक “कानूनी, सुरक्षित और यथार्थवादी” रास्ता तलाशने की मांग की। इससे उनका पद से हटाया जाना जेलेंस्की के खिलाफ सबसे गंभीर आंतरिक राजनीतिक चुनौती में बदल...
18 अगस्त 2026 को मिखाइलो फेदोरोव ने युद्ध के बीच चुनाव कराने के लिए एक “कानूनी, सुरक्षित और यथार्थवादी” रास्ता तलाशने की मांग की। इससे उनका पद से हटाया जाना जेलेंस्की के खिलाफ सबसे गंभीर आंतरिक राजनीतिक चुनौती में बदल... फेदोरोव ने इसे केवल रक्षा मंत्रालय का विवाद नहीं बताया, बल्कि भ्रष्टाचार, नौकरशाही, धीमे सुधार और युद्ध प्रबंधन से जुड़ा “शासन का व्यवस्थागत संकट” कहा। जेलेंस्की का तर्क है कि युद्ध के दौरान चुनाव देश को बांट और अस्थि...
यह विवाद भ्रष्टाचार रोधी जांचों के बीच सामने आया है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग फेदोरोव या किसी अन्य नामित व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं करती।