18 अगस्त को सीरिया के अबू अल दुहूर एयरबेस पर इज़राइल के हमले—जिन्हें आठ हमलों के रूप में रिपोर्ट किया गया—ने एर्दोआन नेतन्याहू विवाद को सीधे सुरक्षा संकट में बदल दिया। तनाव अब तीन मोर्चों पर है: गाज़ा युद्ध को लेकर आरोप प्रत्यारोप, सीरिया में तुर्की और इज़राइल की परस्पर विरोधी सैन्य योजनाएं, और गाज़ा जाने वाली सहायत...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has the diplomatic feud between Turkish President Recep Tayyip Erdoğan and Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu intensified in late. Article summary: The dispute has shifted from a bitter Gaza-related war of words into a more dangerous contest over military influence in Syria. A direct Turkish-Israeli war still appears unlikely in the near term, but the Abu al-Duhur s. Topic tags: general, news, general web, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with f
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच विवाद अब केवल गाज़ा को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं रह गया है। अगस्त के अंत तक यह सवाल बन गया कि असद के बाद के सीरिया में सुरक्षा के नियम कौन तय करेगा—और क्या अमेरिका इस प्रतिद्वंद्विता को अनजाने सैन्य टकराव में बदलने से रोक पाएगा।
तत्काल संकट की शुरुआत 18 अगस्त को हुई, जब इज़राइल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमला किया। इज़राइल का कहना था कि यह कार्रवाई तुर्की की संभावित सैन्य तैनाती को रोकने के लिए की गई, जिससे क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन बदल सकता था। तुर्की और सीरिया ने इस दावे को खारिज किया, जबकि अमेरिका के सीरिया मामलों के विशेष दूत टॉम बराक ने हमले को “अनावश्यक उकसावा” बताया। 1
2
5
राजनीतिक टकराव की जड़ गाज़ा में है। एर्दोआन ने इज़राइल पर गाज़ा में नरसंहार करने का आरोप लगाया है और ज़ायनिज़्म को आतंकवादी, चरमपंथी, कब्ज़ा करने वाली और हत्यारी विचारधारा बताया है। इज़राइली अधिकारियों ने जवाब में एर्दोआन पर यहूदी-विरोध, ‘ब्लड लिबेल’ जैसे यहूदी-विरोधी मिथकों और अधिनायकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने उन्हें “यहूदी-विरोधी तानाशाह” कहा। 4
इसके बाद अंकारा की भाषा और तीखी हो गई। तुर्की ने इज़राइली संस्थानों की तुलना नाज़ी प्रचार प्रमुख जोज़ेफ गोएबल्स की प्रचार मशीन से की और नेतन्याहू सरकार को “नरसंहार करने वाला संगठन” तथा “झूठ की मशीन” बताया। ऐसे आरोपों ने समझौते की गुंजाइश और कम कर दी है, क्योंकि दोनों नेता एक-दूसरे को केवल प्रतिद्वंद्वी सरकार नहीं, बल्कि मूलभूत खतरे के रूप में पेश कर रहे हैं।
अबू अल-दुहूर पर हमले के बाद इस राजनीतिक विवाद को सैन्य आयाम मिल गया। रॉयटर्स के अनुसार, रनवे और भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाकर आठ हमले किए गए। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि सीरिया इज़राइल के साथ सुरक्षा मामलों में बने “यथास्थिति” समझौते का उल्लंघन करने के करीब था, क्योंकि वह वहां तुर्की की मौजूदगी की अनुमति दे रहा था। अंकारा ने इन दावों को “अस्थिर और अस्वीकार्य” बताया, जबकि दमिश्क ने ऐसी तैनाती पर किसी सहमति से इनकार किया। 1
2
सीरिया सबसे संवेदनशील मोर्चा इसलिए बन गया है क्योंकि वहां तुर्की और इज़राइल के सुरक्षा लक्ष्य एक-दूसरे से टकराते हैं।
तुर्की राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की असद के बाद बनी सरकार का प्रमुख समर्थक बन चुका है और सीरिया में अपना प्रभाव तथा रणनीतिक सुरक्षा-गहराई बढ़ाना चाहता है। हमले के बाद अमेरिका ने तुर्की, इज़राइल और सीरिया के बीच सैन्य टकराव रोकने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन’ व्यवस्था बनाने की बात कही। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग देशों की सेनाएं गलतफहमी या बिना सूचना के एक-दूसरे के आमने-सामने न आ जाएं।
इज़राइल दूसरी ओर सीरिया में किसी प्रतिद्वंद्वी सैन्य शक्ति को बुनियादी ढांचा खड़ा करने या दक्षिण की ओर अपनी सेनाएं तैनात करने से रोकना चाहता है। इज़राइली अधिकारियों की नजर में तुर्की की सैन्य मौजूदगी इज़राइल के दक्षिण में उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों के करीब एक नया मोर्चा खोल सकती है। इसलिए विवाद केवल एक एयरबेस का नहीं, बल्कि सीरिया की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था और उसके आसपास के क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन का है। 2
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अमेरिका को पहले से सूचना देने के विवाद ने जोखिम और बढ़ा दिया। तुर्की में अमेरिकी राजदूत और सीरिया के विशेष दूत टॉम बराक ने कहा कि इज़राइल ने वॉशिंगटन को हमले से पहले चेतावनी नहीं दी थी। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि कार्रवाई का उद्देश्य तुर्की को जवाब देने के लिए “उकसाना” हो सकता है। इज़राइली अधिकारियों ने इस विवरण पर आपत्ति जताई। इससे मामला मूल खुफिया दावे जितना ही संकट-प्रबंधन और संचार की विश्वसनीयता का विवाद भी बन गया। 5
7
टकराव अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी दबाव तक पहुंच गया है। 21 अगस्त को तुर्की ने कहा कि वह गाज़ा में मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं को इज़राइल द्वारा रोके जाने से जुड़े घरेलू आपराधिक मामले में नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की मांग करेगा। 3
रेड नोटिस किसी व्यक्ति को दुनिया भर में तलाशने और प्रत्यर्पण की कार्यवाही लंबित रहने तक अस्थायी रूप से हिरासत में लेने का अंतरराष्ट्रीय अनुरोध होता है। यह अपने-आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं है। फिर भी तुर्की का कदम राजनीतिक दांव को ऊंचा करता है, क्योंकि इससे नेतन्याहू के आचरण को औपचारिक सीमा-पार कानूनी अभियान के केंद्र में रखा गया है। यह कदम एर्दोआन पर इज़राइल की ताजा तीखी टिप्पणियों के बाद आया और दोनों नेताओं के निजी विवाद को व्यापक राज्य-स्तरीय टकराव से जोड़ता है। 3
4
सीरिया का संकट व्यापक क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है। तुर्की और इज़राइल पूर्वी भूमध्यसागर में भी प्रभाव के लिए सक्रिय हैं, जहां ग्रीस और साइप्रस की रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रतिद्वंद्विता अब संरचनात्मक रूप ले रही है और सीरिया, भूमध्यसागरीय गठबंधनों, वॉशिंगटन की क्षेत्रीय कूटनीति तथा अन्य रणनीतिक गलियारों को प्रभावित कर रही है। 17
इसका महत्व इसलिए है क्योंकि एक मोर्चे का संकट दूसरे मोर्चे पर दबाव बढ़ा सकता है। इज़राइल, ग्रीस और साइप्रस के बीच सैन्य सहयोग को अंकारा तुर्की को घेरने की कोशिश के रूप में देख सकता है। वहीं सीरिया या साइप्रस में तुर्की के कदमों को इज़राइल अपने सामने बढ़ती क्षेत्रीय चुनौती के प्रमाण के रूप में पढ़ सकता है। जैसे-जैसे ये मोर्चे राजनीतिक रूप से जुड़ते जाएंगे, किसी स्थानीय घटना के व्यापक परिणाम पैदा करने का जोखिम बढ़ेगा। 17
तीखी बयानबाज़ी और सैन्य संकेतों के बावजूद, उपलब्ध जानकारी निकट भविष्य में तुर्की और इज़राइल के बीच जानबूझकर छेड़े गए युद्ध की ओर इशारा नहीं करती। दोनों देश अमेरिका से जुड़े हुए हैं और वॉशिंगटन सीरिया में उनकी सेनाओं के बीच टकराव रोकने के लिए संपर्क-व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है। 5
अधिक वास्तविक खतरा अनपेक्षित भिड़ंत का है—जैसे किसी ऐसे ठिकाने पर फिर हमला जिसे तुर्की के सैनिकों की मेजबानी करने वाला समझा जाए, किसी सैन्य तैनाती को गलत पढ़ लिया जाए या ऐसी जवाबी कार्रवाई हो जो सीरिया से निकलकर पूर्वी भूमध्यसागर तक फैल जाए। अबू अल-दुहूर प्रकरण ने समस्या साफ कर दी: दोनों पक्ष युद्ध के बजाय प्रतिरोध और दबाव की रणनीति पसंद कर सकते हैं, लेकिन कम भरोसा, परस्पर विरोधी दावे और अस्पष्ट संचार तनाव को नियंत्रित करना कठिन बना देते हैं।
फिलहाल एर्दोआन-नेतन्याहू विवाद को आसन्न द्विपक्षीय युद्ध से अधिक एक फैलती हुई रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता के रूप में समझना उचित है। सबसे विस्फोटक राजनीतिक भाषा का स्रोत गाज़ा है, लेकिन सैन्य टकराव का केंद्रीय बिंदु सीरिया बन चुका है—और यहीं बयानबाज़ी के सीधे सुरक्षा संकट में बदलने की आशंका सबसे अधिक है।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
18 अगस्त को सीरिया के अबू अल दुहूर एयरबेस पर इज़राइल के हमले—जिन्हें आठ हमलों के रूप में रिपोर्ट किया गया—ने एर्दोआन नेतन्याहू विवाद को सीधे सुरक्षा संकट में बदल दिया।
18 अगस्त को सीरिया के अबू अल दुहूर एयरबेस पर इज़राइल के हमले—जिन्हें आठ हमलों के रूप में रिपोर्ट किया गया—ने एर्दोआन नेतन्याहू विवाद को सीधे सुरक्षा संकट में बदल दिया। तनाव अब तीन मोर्चों पर है: गाज़ा युद्ध को लेकर आरोप प्रत्यारोप, सीरिया में तुर्की और इज़राइल की परस्पर विरोधी सैन्य योजनाएं, और गाज़ा जाने वाली सहायता नौका मामले में बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की तु...
अमेरिका तुर्की, इज़राइल और सीरिया के बीच सैन्य टकराव रोकने की व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है; फिर भी गलत आकलन या जवाबी कार्रवाई से अनपेक्षित भिड़ंत का खतरा बना हुआ है।
18 अगस्त को सीरिया के अबू अल दुहूर एयरबेस पर इज़राइल के हमले—जिन्हें आठ हमलों के रूप में रिपोर्ट किया गया—ने एर्दोआन नेतन्याहू विवाद को सीधे सुरक्षा संकट में बदल दिया। तनाव अब तीन मोर्चों पर है: गाज़ा युद्ध को लेकर आरोप प्रत्यारोप, सीरिया में तुर्की और इज़राइल की परस्पर विरोधी सैन्य योजनाएं, और गाज़ा जाने वाली सहायत...
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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच विवाद अब केवल गाज़ा को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं रह गया है। अगस्त के अंत तक यह सवाल बन गया कि असद के बाद के सीरिया में सुरक्षा के नियम कौन तय करेगा—और क्या अमेरिका इस प्रतिद्वंद्विता को अनजाने सैन्य टकराव में बदलने से रोक पाएगा।
तत्काल संकट की शुरुआत 18 अगस्त को हुई, जब इज़राइल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमला किया। इज़राइल का कहना था कि यह कार्रवाई तुर्की की संभावित सैन्य तैनाती को रोकने के लिए की गई, जिससे क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन बदल सकता था। तुर्की और सीरिया ने इस दावे को खारिज किया, जबकि अमेरिका के सीरिया मामलों के विशेष दूत टॉम बराक ने हमले को “अनावश्यक उकसावा” बताया। 1
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राजनीतिक टकराव की जड़ गाज़ा में है। एर्दोआन ने इज़राइल पर गाज़ा में नरसंहार करने का आरोप लगाया है और ज़ायनिज़्म को आतंकवादी, चरमपंथी, कब्ज़ा करने वाली और हत्यारी विचारधारा बताया है। इज़राइली अधिकारियों ने जवाब में एर्दोआन पर यहूदी-विरोध, ‘ब्लड लिबेल’ जैसे यहूदी-विरोधी मिथकों और अधिनायकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने उन्हें “यहूदी-विरोधी तानाशाह” कहा। 4
इसके बाद अंकारा की भाषा और तीखी हो गई। तुर्की ने इज़राइली संस्थानों की तुलना नाज़ी प्रचार प्रमुख जोज़ेफ गोएबल्स की प्रचार मशीन से की और नेतन्याहू सरकार को “नरसंहार करने वाला संगठन” तथा “झूठ की मशीन” बताया। ऐसे आरोपों ने समझौते की गुंजाइश और कम कर दी है, क्योंकि दोनों नेता एक-दूसरे को केवल प्रतिद्वंद्वी सरकार नहीं, बल्कि मूलभूत खतरे के रूप में पेश कर रहे हैं।
अबू अल-दुहूर पर हमले के बाद इस राजनीतिक विवाद को सैन्य आयाम मिल गया। रॉयटर्स के अनुसार, रनवे और भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाकर आठ हमले किए गए। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि सीरिया इज़राइल के साथ सुरक्षा मामलों में बने “यथास्थिति” समझौते का उल्लंघन करने के करीब था, क्योंकि वह वहां तुर्की की मौजूदगी की अनुमति दे रहा था। अंकारा ने इन दावों को “अस्थिर और अस्वीकार्य” बताया, जबकि दमिश्क ने ऐसी तैनाती पर किसी सहमति से इनकार किया। 1
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सीरिया सबसे संवेदनशील मोर्चा इसलिए बन गया है क्योंकि वहां तुर्की और इज़राइल के सुरक्षा लक्ष्य एक-दूसरे से टकराते हैं।
तुर्की राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की असद के बाद बनी सरकार का प्रमुख समर्थक बन चुका है और सीरिया में अपना प्रभाव तथा रणनीतिक सुरक्षा-गहराई बढ़ाना चाहता है। हमले के बाद अमेरिका ने तुर्की, इज़राइल और सीरिया के बीच सैन्य टकराव रोकने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन’ व्यवस्था बनाने की बात कही। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग देशों की सेनाएं गलतफहमी या बिना सूचना के एक-दूसरे के आमने-सामने न आ जाएं।
इज़राइल दूसरी ओर सीरिया में किसी प्रतिद्वंद्वी सैन्य शक्ति को बुनियादी ढांचा खड़ा करने या दक्षिण की ओर अपनी सेनाएं तैनात करने से रोकना चाहता है। इज़राइली अधिकारियों की नजर में तुर्की की सैन्य मौजूदगी इज़राइल के दक्षिण में उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों के करीब एक नया मोर्चा खोल सकती है। इसलिए विवाद केवल एक एयरबेस का नहीं, बल्कि सीरिया की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था और उसके आसपास के क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन का है। 2
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अमेरिका को पहले से सूचना देने के विवाद ने जोखिम और बढ़ा दिया। तुर्की में अमेरिकी राजदूत और सीरिया के विशेष दूत टॉम बराक ने कहा कि इज़राइल ने वॉशिंगटन को हमले से पहले चेतावनी नहीं दी थी। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि कार्रवाई का उद्देश्य तुर्की को जवाब देने के लिए “उकसाना” हो सकता है। इज़राइली अधिकारियों ने इस विवरण पर आपत्ति जताई। इससे मामला मूल खुफिया दावे जितना ही संकट-प्रबंधन और संचार की विश्वसनीयता का विवाद भी बन गया। 5
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टकराव अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी दबाव तक पहुंच गया है। 21 अगस्त को तुर्की ने कहा कि वह गाज़ा में मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं को इज़राइल द्वारा रोके जाने से जुड़े घरेलू आपराधिक मामले में नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की मांग करेगा। 3
रेड नोटिस किसी व्यक्ति को दुनिया भर में तलाशने और प्रत्यर्पण की कार्यवाही लंबित रहने तक अस्थायी रूप से हिरासत में लेने का अंतरराष्ट्रीय अनुरोध होता है। यह अपने-आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं है। फिर भी तुर्की का कदम राजनीतिक दांव को ऊंचा करता है, क्योंकि इससे नेतन्याहू के आचरण को औपचारिक सीमा-पार कानूनी अभियान के केंद्र में रखा गया है। यह कदम एर्दोआन पर इज़राइल की ताजा तीखी टिप्पणियों के बाद आया और दोनों नेताओं के निजी विवाद को व्यापक राज्य-स्तरीय टकराव से जोड़ता है। 3
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सीरिया का संकट व्यापक क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है। तुर्की और इज़राइल पूर्वी भूमध्यसागर में भी प्रभाव के लिए सक्रिय हैं, जहां ग्रीस और साइप्रस की रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रतिद्वंद्विता अब संरचनात्मक रूप ले रही है और सीरिया, भूमध्यसागरीय गठबंधनों, वॉशिंगटन की क्षेत्रीय कूटनीति तथा अन्य रणनीतिक गलियारों को प्रभावित कर रही है। 17
इसका महत्व इसलिए है क्योंकि एक मोर्चे का संकट दूसरे मोर्चे पर दबाव बढ़ा सकता है। इज़राइल, ग्रीस और साइप्रस के बीच सैन्य सहयोग को अंकारा तुर्की को घेरने की कोशिश के रूप में देख सकता है। वहीं सीरिया या साइप्रस में तुर्की के कदमों को इज़राइल अपने सामने बढ़ती क्षेत्रीय चुनौती के प्रमाण के रूप में पढ़ सकता है। जैसे-जैसे ये मोर्चे राजनीतिक रूप से जुड़ते जाएंगे, किसी स्थानीय घटना के व्यापक परिणाम पैदा करने का जोखिम बढ़ेगा। 17
तीखी बयानबाज़ी और सैन्य संकेतों के बावजूद, उपलब्ध जानकारी निकट भविष्य में तुर्की और इज़राइल के बीच जानबूझकर छेड़े गए युद्ध की ओर इशारा नहीं करती। दोनों देश अमेरिका से जुड़े हुए हैं और वॉशिंगटन सीरिया में उनकी सेनाओं के बीच टकराव रोकने के लिए संपर्क-व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है। 5
अधिक वास्तविक खतरा अनपेक्षित भिड़ंत का है—जैसे किसी ऐसे ठिकाने पर फिर हमला जिसे तुर्की के सैनिकों की मेजबानी करने वाला समझा जाए, किसी सैन्य तैनाती को गलत पढ़ लिया जाए या ऐसी जवाबी कार्रवाई हो जो सीरिया से निकलकर पूर्वी भूमध्यसागर तक फैल जाए। अबू अल-दुहूर प्रकरण ने समस्या साफ कर दी: दोनों पक्ष युद्ध के बजाय प्रतिरोध और दबाव की रणनीति पसंद कर सकते हैं, लेकिन कम भरोसा, परस्पर विरोधी दावे और अस्पष्ट संचार तनाव को नियंत्रित करना कठिन बना देते हैं।
फिलहाल एर्दोआन-नेतन्याहू विवाद को आसन्न द्विपक्षीय युद्ध से अधिक एक फैलती हुई रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता के रूप में समझना उचित है। सबसे विस्फोटक राजनीतिक भाषा का स्रोत गाज़ा है, लेकिन सैन्य टकराव का केंद्रीय बिंदु सीरिया बन चुका है—और यहीं बयानबाज़ी के सीधे सुरक्षा संकट में बदलने की आशंका सबसे अधिक है।
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18 अगस्त को सीरिया के अबू अल दुहूर एयरबेस पर इज़राइल के हमले—जिन्हें आठ हमलों के रूप में रिपोर्ट किया गया—ने एर्दोआन नेतन्याहू विवाद को सीधे सुरक्षा संकट में बदल दिया।
18 अगस्त को सीरिया के अबू अल दुहूर एयरबेस पर इज़राइल के हमले—जिन्हें आठ हमलों के रूप में रिपोर्ट किया गया—ने एर्दोआन नेतन्याहू विवाद को सीधे सुरक्षा संकट में बदल दिया। तनाव अब तीन मोर्चों पर है: गाज़ा युद्ध को लेकर आरोप प्रत्यारोप, सीरिया में तुर्की और इज़राइल की परस्पर विरोधी सैन्य योजनाएं, और गाज़ा जाने वाली सहायता नौका मामले में बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की तु...
अमेरिका तुर्की, इज़राइल और सीरिया के बीच सैन्य टकराव रोकने की व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है; फिर भी गलत आकलन या जवाबी कार्रवाई से अनपेक्षित भिड़ंत का खतरा बना हुआ है।