युद्ध शुरू होने के छह महीने बाद हॉर्मुज़ से कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का आवागमन युद्ध पूर्व लगभग 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन से घटकर अगस्त में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। [38] संकट का असर सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है; एलएनजी, डीज़ल, बीमा, माल ढुलाई और उर्वरक बाजार भी दबाव में हैं। अमेरिकी ऊर्जा क...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What have been the global and regional energy-market consequences six months after the United States and Israel launched their war on Iran o. Article summary: Six months on, the war has turned Hormuz from a risk premium into a sustained physical supply shock: oil and LNG flows remain severely constrained, fuel markets are tight, and the largest harm is falling on import-depend. Topic tags: general, government, education, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, c
छह महीने पहले शुरू हुआ ईरान युद्ध अब केवल तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का मामला नहीं रह गया है। यह एक वास्तविक आपूर्ति संकट बन चुका है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बेहद कम है, रिफाइंड ईंधन और एलएनजी बाजार तंग हैं, और इसका बोझ देशों व कंपनियों पर समान रूप से नहीं पड़ रहा। कुछ अमेरिकी तेल कंपनियों को ऊंची कीमतों और बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन से लाभ हुआ है, जबकि बांग्लादेश जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा, उर्वरक और परिवहन की बढ़ती लागत से जूझ रही हैं।
युद्ध से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी शिपमेंट हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते थे। संघर्ष से पहले इस मार्ग से कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का आवागमन करीब 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन था। रॉयटर्स द्वारा उद्धृत जहाज-आवागमन अनुमानों के अनुसार यह मात्रा जुलाई में घटकर 48 लाख बैरल प्रतिदिन और अगस्त में औसतन करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।
इस गिरावट की वजह केवल भौतिक नुकसान नहीं है। हमले, समुद्री बारूदी सुरंगों का जोखिम, नौसैनिक पाबंदियां, यात्रा करने को तैयार न होने वाले चालक दल और अनुपलब्ध या अत्यधिक महंगा बीमा—इन सबने जहाजों का गुजरना व्यावसायिक रूप से कठिन बना दिया है। 3 25 अगस्त को जलडमरूमध्य से केवल पांच वाणिज्यिक जहाजों के गुजरने का रिकॉर्ड मिला, जो युद्ध-पूर्व स्तर से बहुत नीचे था।
यह फर्क महत्वपूर्ण है। कोई जलमार्ग कानूनी या सैन्य अर्थों में आंशिक रूप से खुला हो सकता है, लेकिन सामान्य वाणिज्यिक जहाजरानी के लिए फिर भी लगभग बंद रह सकता है। इसका नतीजा कच्चे तेल, एलएनजी और रिफाइंड ईंधन तक कम भरोसेमंद पहुंच तथा माल ढुलाई, बीमा और डिलीवरी लागत में तेज उतार-चढ़ाव के रूप में सामने आता है।
हमलों के बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ी और संकट के चरम पर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। युद्ध शुरू होने से ठीक पहले यह करीब 71 डॉलर प्रति बैरल थी। 2
4 हालांकि, कच्चे तेल की कीमत अकेले इस व्यवधान की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती।
रिफाइंड ईंधन सबसे अधिक असुरक्षित हो गया है। रॉयटर्स के अनुसार जुलाई में वैश्विक रिफाइनरी उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 50 लाख बैरल प्रतिदिन कम था, जबकि डीज़ल और अन्य रिफाइंड उत्पादों के बाजारों में असाधारण तंगी देखी गई। एक्सॉनमोबिल और शेवरॉन ने चेतावनी दी कि साल की दूसरी छमाही में ईंधन की आपूर्ति सीमित रह सकती है, भले ही ऊंचे रिफाइनिंग मार्जिन से उनके रिफाइनिंग कारोबार को लाभ मिला हो। 18
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अनुमान लगाया कि 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति 43 लाख बैरल प्रतिदिन, यानी करीब 4%, घट सकती है। हॉर्मुज़ बंद रहने, अन्य इलाकों में हमलों और दूसरे व्यवधानों से उपलब्ध आपूर्ति कम हुई है। एजेंसी ने 2026 के तेल-मांग अनुमान में भी कटौती की है। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतें और आर्थिक नुकसान अब खपत को भी दबाने लगे हैं।
बाजार का संतुलन इसलिए जटिल है: कमजोर मांग आगे चलकर कच्चे तेल की कीमतों को कुछ नरम कर सकती है, लेकिन डीज़ल, एलएनजी और अन्य उत्पाद महंगे बने रह सकते हैं। रिफाइनिंग, गैस को तरल बनाने, जहाजरानी और भंडारण की क्षमता को तुरंत बढ़ाया या बदला नहीं जा सकता।
ईरान और ओमान ने हॉर्मुज़ से गुजरने के लिए एक अस्थायी संयुक्त समुद्री गलियारे पर चर्चा की है। इसके साथ समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के प्रयासों में तालमेल की भी बात हुई है। वार्ता में प्रगति की खबर आने पर तेल की कीमतों में कुछ गिरावट आई, क्योंकि इससे अधिक सुरक्षित और पूर्वानुमान योग्य आवाजाही की उम्मीद जगी।
फिर भी यह व्यवस्था अंतरिम यातायात-प्रबंधन प्रस्ताव है, जलडमरूमध्य के सामान्य वाणिज्यिक आवागमन में लौटने का प्रमाण नहीं। स्थायी सुधार के लिए केवल मार्ग पर सहमति काफी नहीं होगी। जहाज मालिकों, बीमा कंपनियों और चालक दल को यह भरोसा भी चाहिए होगा कि जहाज लगातार और सुरक्षित रूप से गुजर सकेंगे तथा हमले, बारूदी सुरंगों या बदलती पाबंदियों का खतरा दोबारा नहीं बढ़ेगा।
इसी वजह से बाजार ने हर कूटनीतिक प्रगति को संकट के अंत के बजाय अस्थायी राहत के रूप में लिया है। वार्ताओं ने कीमतों को बार-बार प्रभावित किया, लेकिन सैन्य तनाव और राजनीतिक गतिरोध के कारण जहाजरानी अब भी असुरक्षित है। 10
ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन ने अमेरिकी ऊर्जा उद्योग के कुछ हिस्सों के लिए बड़ा लाभ पैदा किया। एक्सॉनमोबिल ने दूसरी तिमाही में करीब 14.5 अरब डॉलर और शेवरॉन ने लगभग 12.1 अरब डॉलर की कमाई दर्ज की। दोनों कंपनियों को ऊंची कीमतों और अनुकूल रिफाइनिंग परिस्थितियों से लाभ मिला। 17
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हालांकि, इन नतीजों से यह भी स्पष्ट होता है कि “ऊंची कीमतों से तेल कंपनियों को फायदा होता है” कहना अधूरा निष्कर्ष है। आपूर्ति व्यवधानों से परिचालन प्रभावित होने के बीच एक्सॉन की पहली तिमाही की शुद्ध आय पांच साल के निचले स्तर पर आ गई थी, हालांकि कंपनी ने समायोजित आय के अनुमान को पीछे छोड़ा। 20 बाद में एक्सॉन ने दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड डीज़ल उत्पादन की जानकारी दी, जबकि शेवरॉन की अमेरिकी रिफाइनरियों ने प्रतिदिन 10 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया।
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सबसे अधिक लाभ उन कंपनियों को हुआ जिनके पास उत्पादन का विविध आधार, अमेरिका में पर्याप्त उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता है। ऐसी कंपनियां ऊंचे मार्जिन का लाभ उठा सकती हैं और खाड़ी क्षेत्र की जहाजरानी पर अपेक्षाकृत कम निर्भर रहती हैं। उपलब्ध साक्ष्य कॉनोकॉफिलिप्स और ऑक्सिडेंटल पेट्रोलियम के लिए खाड़ी से आपूर्ति में कमी या कमाई पर कंपनी-दर-कंपनी सटीक प्रभाव बताने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए इन कंपनियों के प्रभाव को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया जाना चाहिए।
बड़ी तस्वीर अधिक स्पष्ट है: विविधीकृत उत्पादक और रिफाइनर कमी से वित्तीय लाभ कमा सकते हैं, जबकि उपभोक्ताओं और उन कंपनियों को महंगे ईंधन और अधिक आपूर्ति-जोखिम का सामना करना पड़ता है जिन्हें समय पर डिलीवरी चाहिए।
बांग्लादेश इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि किस तरह समुद्री सुरक्षा का संकट घरेलू आर्थिक परेशानी में बदलता है। कतरएनर्जी ने 2026 के लिए बांग्लादेश को निर्धारित एलएनजी आपूर्ति आधी कर दी। इसके बाद सरकारी कंपनी पेट्रोबांग्ला को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं और महंगे स्पॉट बाजार से कार्गो तलाशने पड़े।
विश्व बैंक के अनुसार पेट्रोबांग्ला के छह में से पांच एलएनजी अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’—यानी असाधारण परिस्थितियों के कारण अनुबंधीय दायित्वों से अस्थायी राहत—घोषित की गई थी। स्पॉट एलएनजी की कीमत 24 से 28 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) तक पहुंच गई, जो पहले के स्तर से दोगुने से भी अधिक है। बैंक ने अनुमान लगाया कि ऊर्जा सब्सिडी सकल घरेलू उत्पाद के 2.8% तक बढ़ सकती है, जिससे सामाजिक खर्च के लिए सरकार के पास कम गुंजाइश बचेगी।
कमी का असर उद्योग और कृषि पर भी पड़ा है। गैस की कमी से बिजली और औद्योगिक आपूर्ति प्रभावित हुई है। मध्य-पूर्व में ऊर्जा व्यवधानों से नाइट्रोजन उर्वरक का उत्पादन प्रभावित होने के कारण उर्वरक बाजार भी तंग हुए हैं। 4 कुछ रिपोर्टों ने गैस की कमी को अशुगंज यूरिया संयंत्र के बंद होने से जोड़ा है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में समय और कारणों का विवरण पूरी तरह एक जैसा नहीं है।
इसके सामाजिक प्रभाव बड़े हो सकते हैं। विश्व बैंक से जुड़ी एक आकलन रिपोर्ट के अनुसार लगभग छह लाख नौकरियां जोखिम में हो सकती हैं और 2026 में गरीबी से बाहर निकलने वाले लोगों की संख्या करीब 17 लाख से घटकर लगभग पांच लाख रह सकती है। ये अनुमान अंतिम परिणाम नहीं हैं और इस बात पर निर्भर करेंगे कि संघर्ष तथा ऊर्जा कीमतों का झटका कितने समय तक जारी रहता है।
बांग्लादेश का अनुभव संकट के फैलने की पूरी श्रृंखला दिखाता है: एलएनजी आपूर्ति बाधित होती है, तो आपातकालीन स्पॉट खरीद करनी पड़ती है; महंगी गैस से बिजली और औद्योगिक लागत बढ़ती है; उर्वरक की कमी से कृषि लागत बढ़ती है; और बढ़ता आयात बिल सब्सिडी, घरेलू आय तथा गरीबी घटाने के प्रयासों पर दबाव डालता है।
खाड़ी के उत्पादक हॉर्मुज़ के आसपास से कच्चा तेल ले जाने वाली पाइपलाइनों पर काम कर रहे हैं या ऐसी योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। जुलाई तक कम-से-कम सात बड़ी परियोजनाओं के निर्माण, योजना या चर्चा में होने की खबर थी।
इन निवेशों से भविष्य में एक ही समुद्री मार्ग पर निर्भरता घट सकती है, लेकिन वे हॉर्मुज़ की पूरी समुद्री क्षमता को तेजी से प्रतिस्थापित नहीं कर सकते। एनपीआर द्वारा उद्धृत ऊर्जा विशेषज्ञों ने कहा कि इतनी जल्दी पर्याप्त वैकल्पिक बुनियादी ढांचा तैयार करना मुश्किल है। इसलिए वैकल्पिक मार्ग बढ़ने के बाद भी उपभोक्ताओं को कुछ समय तक ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।
पाइपलाइनें हर समस्या का समाधान भी नहीं करेंगी। वे मुख्य रूप से कच्चे तेल के परिवहन में मदद करती हैं। एलएनजी निर्यात, रिफाइंड उत्पाद, जहाजरानी बीमा, रिफाइनरी की उपलब्धता और समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने जैसे मुद्दों के लिए अलग समाधान चाहिए होंगे।
संकट के छह महीने बाद ऊर्जा बाजार किसी स्थायी भूगर्भीय कमी से कम और परिवहन सुरक्षा तथा कूटनीति की स्थिरता से अधिक प्रभावित हो रहा है। ऐसा विश्वसनीय समझौता जो वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित करे, फंसी हुई आपूर्ति को बाजार तक ला सकता है और जोखिम-आधारित अतिरिक्त कीमत को घटा सकता है। इसके विपरीत, नए हमले या व्यापक क्षेत्रीय तनाव से आवागमन फिर कम हो सकता है।
औपचारिक रूप से जलडमरूमध्य खुल जाने के बाद भी असर तुरंत खत्म नहीं होगा। टैंकरों को फिर से चलना होगा, बीमा व्यवस्था लौटनी होगी, भंडारण और रिफाइनरी तंत्र को संतुलित होने में समय लगेगा, और बांग्लादेश जैसे एलएनजी खरीदारों को बाधित अनुबंधों के प्रभाव झेलने होंगे।
इसलिए सबसे ठोस निष्कर्ष स्थायी रूप से ऊंचे तेल भाव का अनुमान नहीं, बल्कि इतना सीमित निष्कर्ष है: हॉर्मुज़ ने दिखा दिया है कि एक समुद्री संकरे मार्ग का संकट कितनी तेजी से वैश्विक ईंधन, उर्वरक और राजकोषीय संकट में बदल सकता है। अस्थायी ईरान-ओमान मार्ग नुकसान की रफ्तार धीमी कर सकता है, लेकिन इसे पलटने के लिए लंबे समय तक सुरक्षित आवागमन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सामान्य होने का समय—दोनों जरूरी होंगे।
Studio Global AI
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युद्ध शुरू होने के छह महीने बाद हॉर्मुज़ से कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का आवागमन युद्ध पूर्व लगभग 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन से घटकर अगस्त में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। [38]
युद्ध शुरू होने के छह महीने बाद हॉर्मुज़ से कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का आवागमन युद्ध पूर्व लगभग 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन से घटकर अगस्त में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। [38] संकट का असर सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है; एलएनजी, डीज़ल, बीमा, माल ढुलाई और उर्वरक बाजार भी दबाव में हैं।
अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के कुछ हिस्सों को ऊंची कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन से फायदा हुआ, जबकि बांग्लादेश जैसे आयात निर्भर देशों को महंगी ऊर्जा, उर्वरक और परिवहन लागत का सामना करना पड़ रहा है।