29 अगस्त को दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को को यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने का कोई आधार नजर नहीं आता और यूरोपीय नेतृत्व रूस के प्रति टकरावपूर्ण है। पेस्कोव ने आरोप लगाया कि यूरोप रूस को ‘प्रतिद्वंद्वी’ या ‘दुश्मन’ मान रहा है और उसके सैन्य संसाधनों को रूस के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। ये उपलब्ध रिपोर्टिंग में स्...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did Kremlin spokesman Dmitry Peskov say about Moscow’s view of the European Union and the prospects for improved relations, what accusa. Article summary: Peskov said Moscow now sees no basis for improving relations with the EU, portraying Europe as hostile rather than as a prospective partner. That is a marked hardening from the Kremlin’s mid-2026 message that Putin was p. Topic tags: general, news, general web, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
29 अगस्त के बयान में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस-यूरोपीय संघ संबंधों को लेकर मॉस्को का बेहद कठोर रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यूरोप के साथ संबंधों में सुधार की उम्मीद करने का कोई आधार नहीं दिखता और सत्ता में मौजूद यूरोपीय नेता रूस के प्रति “सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कामों में भी” टकरावपूर्ण हैं। 5
7
यह रुख 2026 के शुरुआती महीनों में दिखी उस सीमित कूटनीतिक संभावना से अलग है, जब क्रेमलिन ने कहा था कि व्लादिमीर पुतिन यूरोपीय नेताओं से बातचीत और संबंधों को फिर से सामान्य बनाने पर चर्चा के लिए तैयार हैं। हालांकि, वह पहल शुरू से ही शर्तों से बंधी थी और यूक्रेन युद्ध, प्रतिबंधों, यूरोपीय सुरक्षा तथा संभावित शांति समझौते की शर्तों पर मूलभूत मतभेद दूर नहीं हो सके।
पेस्कोव के अनुसार, यूरोपीय बयानों से संकेत मिलता है कि रूस को “प्रतिद्वंद्वी” या “दुश्मन” के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यूरोप के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर रूस का केवल बयानबाजी में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी सामना करने का आरोप लगाया। 5
6
उन्होंने यह भी दावा किया कि यूरोपीय देश रूस के खिलाफ अपनी सैन्य क्षमताएं जुटा रहे हैं और सीधे सैन्य कार्रवाइयों में शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पेस्कोव किन खास यूरोपीय बयानों या कार्रवाइयों का हवाला दे रहे थे। इसलिए इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि क्रेमलिन के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। 5
6
13
पेस्कोव का निष्कर्ष स्पष्ट था: मॉस्को को फिलहाल रूस और यूरोपीय संघ के संबंध सुधारने का कोई ठोस आधार नजर नहीं आता। 7
29 अगस्त का संदेश मई में दिए गए क्रेमलिन के बयानों की तुलना में अधिक कठोर था। 8 मई को पेस्कोव ने कहा था कि पुतिन यूरोपीय देशों समेत “हर किसी” से बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन उनका कहना था कि मॉस्को खुद पहल नहीं करेगा, क्योंकि उसके अनुसार ब्रसेल्स और कुछ यूरोपीय राजधानियों ने संबंधों को लगभग शून्य तक पहुंचाया था। 3
16
17 मई को क्रेमलिन ने कहा कि रूस यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध बहाल करने के उद्देश्य से बातचीत के लिए तैयार है। उसने यह भी संकेत दिया कि यूरोप का व्यावहारिक और कम टकराव वाला रुख संवाद की राह खोल सकता है। 14
जून में भी पेस्कोव ने कहा था कि रूस यूरोपीय देशों से संवाद के लिए तैयार है, लेकिन दबाव या अल्टीमेटम स्वीकार नहीं करेगा। उनका तर्क था कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए यूरोप को मॉस्को के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलना होगा। 1
12
इसलिए बदलाव को बिना शर्त सहयोग से अचानक शत्रुता में बदलना कहना सही नहीं होगा। पहले की पेशकश भी इस मांग से जुड़ी थी कि पहल कौन करे और बातचीत किन शर्तों पर हो। अगस्त के बयान ने बस यह संकेत दिया कि मॉस्को अब निकट भविष्य में संबंधों में सुधार की उम्मीद भी नहीं जता रहा है।
सबसे बड़ा विवाद यह था कि कूटनीति को यूक्रेन युद्ध से कैसे जोड़ा जाए। यूरोपीय संघ रूस के आक्रमण को आक्रामक युद्ध बताता रहा है और यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की पुष्टि करता रहा है। उसकी प्रतिक्रिया में यूक्रेन को राजनीतिक, वित्तीय, आर्थिक, मानवीय, सैन्य और कूटनीतिक सहायता देना तथा रूस पर प्रतिबंधों और अन्य दबावों को जारी रखना शामिल है।
मॉस्को उन वार्ताओं पर आपत्ति जताता रहा जिन्हें वह दबाव या मजबूरी पर आधारित मानता है। रूसी अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी शांति प्रस्ताव में “जमीनी वास्तविकताओं” को शामिल किया जाना चाहिए—ऐसी भाषा जो युद्धक्षेत्र की स्थिति और रूस की मांगों को संभावित समझौते के केंद्र में रखती है।
इन दोनों रुखों के बीच साझा जमीन बहुत सीमित रही। यूरोपीय सरकारें भविष्य की रूस-यूक्रेन कूटनीति में ईयू की भूमिका पर विचार कर रही थीं, लेकिन यूरोपीय अधिकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मॉस्को वास्तव में शांति में रुचि रखता है। उनका कहना था कि किसी वार्ता के जरिए रूस के क्षेत्रीय दावों को वैधता नहीं दी जा सकती।
कूटनीतिक पहल को युद्धक्षेत्र की घटनाओं ने भी पीछे छोड़ दिया। 16 जुलाई को क्रेमलिन ने कहा कि यूक्रेन के साथ शांति वार्ता फिर शुरू होने की तत्काल कोई संभावना नहीं है, हालांकि रूस ने बातचीत के विचार के लिए खुला रहने का दावा किया।
अगस्त के अंत तक यूक्रेनी अधिकारी संभावित तकनीकी वार्ताओं पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन उन्हें किसी तेज समझौते की उम्मीद नहीं थी। 19
20 अलग रिपोर्टों में रूस-यूक्रेन वार्ता को “गहरे ठहराव” में बताया गया, जबकि रूसी सेना अपना सैन्य अभियान जारी रखे हुए थी।
रॉयटर्स ने अगस्त के अंतिम दिनों में यूक्रेन पर रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों की भी रिपोर्ट की। 17 सीमित कूटनीतिक संपर्क और लगातार सैन्य कार्रवाइयों का यह मेल बताता है कि मध्य-2026 के संवाद सामान्य, युद्ध-पूर्व संबंध बहाल करने की ठोस प्रक्रिया के बजाय शुरुआती और अनिश्चित कोशिश थे।
पेस्कोव का बयान केवल शब्दों में बदलाव नहीं, बल्कि इस बात की स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा सकता है कि सीमित कूटनीतिक पहल असंगत राजनीतिक और सैन्य रुखों के बीच आगे नहीं बढ़ सकी। मॉस्को यूरोप को यूक्रेन का समर्थन करने और रूस पर दबाव डालने वाली शत्रुतापूर्ण शक्ति के रूप में पेश करता रहा है। दूसरी ओर, ईयू रूस के आक्रमण को यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए बुनियादी खतरा मानते हुए यूक्रेन का समर्थन और प्रतिबंध जारी रखे हुए है।
नतीजा यह है कि बातचीत की गुंजाइश बहुत संकरी और अस्थिर हो गई है। क्रेमलिन वार्ता के लिए तैयार होने की बात कह सकता है, लेकिन साथ ही अल्टीमेटम ठुकराता है, यूरोप से पहला कदम उठाने की मांग करता है और किसी समझौते में रूस की शर्तों को शामिल करने पर जोर देता है। यूरोपीय सरकारें कूटनीतिक चैनलों की संभावना तलाश सकती हैं, लेकिन उनका कहना है कि टिकाऊ शांति यूक्रेन की संप्रभुता, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होनी चाहिए। 1
12
इस पृष्ठभूमि में 29 अगस्त का बयान सभी संभावित संपर्कों के अंत की घोषणा नहीं करता। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि मॉस्को अब ईयू के साथ संबंधों में निकट भविष्य में सुधार को यथार्थवादी संभावना के रूप में पेश नहीं कर रहा। जब तक युद्ध, प्रतिबंधों, सुरक्षा संबंधी मांगों और शांति समझौते की शर्तों पर कोई साझा आधार नहीं बनता, 2026 के मध्य में दिखी कूटनीतिक गर्माहट ठहरी हुई ही रहेगी।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
29 अगस्त को दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को को यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने का कोई आधार नजर नहीं आता और यूरोपीय नेतृत्व रूस के प्रति टकरावपूर्ण है।
29 अगस्त को दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को को यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने का कोई आधार नजर नहीं आता और यूरोपीय नेतृत्व रूस के प्रति टकरावपूर्ण है। पेस्कोव ने आरोप लगाया कि यूरोप रूस को ‘प्रतिद्वंद्वी’ या ‘दुश्मन’ मान रहा है और उसके सैन्य संसाधनों को रूस के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। ये उपलब्ध रिपोर्टिंग में स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य नहीं, बल्कि क्रेमलिन के दावे...
मई और जून 2026 में व्लादिमीर पुतिन तथा क्रेमलिन ने यूरोपीय देशों से बातचीत और संबंध बहाल करने की सशर्त इच्छा जताई थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध, प्रतिबंधों और शांति समझौते की शर्तों पर मतभेद दूर नहीं हुए।
29 अगस्त को दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को को यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने का कोई आधार नजर नहीं आता और यूरोपीय नेतृत्व रूस के प्रति टकरावपूर्ण है। पेस्कोव ने आरोप लगाया कि यूरोप रूस को ‘प्रतिद्वंद्वी’ या ‘दुश्मन’ मान रहा है और उसके सैन्य संसाधनों को रूस के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। ये उपलब्ध रिपोर्टिंग में स्...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
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29 अगस्त के बयान में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस-यूरोपीय संघ संबंधों को लेकर मॉस्को का बेहद कठोर रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यूरोप के साथ संबंधों में सुधार की उम्मीद करने का कोई आधार नहीं दिखता और सत्ता में मौजूद यूरोपीय नेता रूस के प्रति “सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कामों में भी” टकरावपूर्ण हैं। 5
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यह रुख 2026 के शुरुआती महीनों में दिखी उस सीमित कूटनीतिक संभावना से अलग है, जब क्रेमलिन ने कहा था कि व्लादिमीर पुतिन यूरोपीय नेताओं से बातचीत और संबंधों को फिर से सामान्य बनाने पर चर्चा के लिए तैयार हैं। हालांकि, वह पहल शुरू से ही शर्तों से बंधी थी और यूक्रेन युद्ध, प्रतिबंधों, यूरोपीय सुरक्षा तथा संभावित शांति समझौते की शर्तों पर मूलभूत मतभेद दूर नहीं हो सके।
पेस्कोव के अनुसार, यूरोपीय बयानों से संकेत मिलता है कि रूस को “प्रतिद्वंद्वी” या “दुश्मन” के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यूरोप के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर रूस का केवल बयानबाजी में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी सामना करने का आरोप लगाया। 5
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उन्होंने यह भी दावा किया कि यूरोपीय देश रूस के खिलाफ अपनी सैन्य क्षमताएं जुटा रहे हैं और सीधे सैन्य कार्रवाइयों में शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पेस्कोव किन खास यूरोपीय बयानों या कार्रवाइयों का हवाला दे रहे थे। इसलिए इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि क्रेमलिन के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। 5
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पेस्कोव का निष्कर्ष स्पष्ट था: मॉस्को को फिलहाल रूस और यूरोपीय संघ के संबंध सुधारने का कोई ठोस आधार नजर नहीं आता। 7
29 अगस्त का संदेश मई में दिए गए क्रेमलिन के बयानों की तुलना में अधिक कठोर था। 8 मई को पेस्कोव ने कहा था कि पुतिन यूरोपीय देशों समेत “हर किसी” से बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन उनका कहना था कि मॉस्को खुद पहल नहीं करेगा, क्योंकि उसके अनुसार ब्रसेल्स और कुछ यूरोपीय राजधानियों ने संबंधों को लगभग शून्य तक पहुंचाया था। 3
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17 मई को क्रेमलिन ने कहा कि रूस यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध बहाल करने के उद्देश्य से बातचीत के लिए तैयार है। उसने यह भी संकेत दिया कि यूरोप का व्यावहारिक और कम टकराव वाला रुख संवाद की राह खोल सकता है। 14
जून में भी पेस्कोव ने कहा था कि रूस यूरोपीय देशों से संवाद के लिए तैयार है, लेकिन दबाव या अल्टीमेटम स्वीकार नहीं करेगा। उनका तर्क था कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए यूरोप को मॉस्को के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलना होगा। 1
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इसलिए बदलाव को बिना शर्त सहयोग से अचानक शत्रुता में बदलना कहना सही नहीं होगा। पहले की पेशकश भी इस मांग से जुड़ी थी कि पहल कौन करे और बातचीत किन शर्तों पर हो। अगस्त के बयान ने बस यह संकेत दिया कि मॉस्को अब निकट भविष्य में संबंधों में सुधार की उम्मीद भी नहीं जता रहा है।
सबसे बड़ा विवाद यह था कि कूटनीति को यूक्रेन युद्ध से कैसे जोड़ा जाए। यूरोपीय संघ रूस के आक्रमण को आक्रामक युद्ध बताता रहा है और यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की पुष्टि करता रहा है। उसकी प्रतिक्रिया में यूक्रेन को राजनीतिक, वित्तीय, आर्थिक, मानवीय, सैन्य और कूटनीतिक सहायता देना तथा रूस पर प्रतिबंधों और अन्य दबावों को जारी रखना शामिल है।
मॉस्को उन वार्ताओं पर आपत्ति जताता रहा जिन्हें वह दबाव या मजबूरी पर आधारित मानता है। रूसी अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी शांति प्रस्ताव में “जमीनी वास्तविकताओं” को शामिल किया जाना चाहिए—ऐसी भाषा जो युद्धक्षेत्र की स्थिति और रूस की मांगों को संभावित समझौते के केंद्र में रखती है।
इन दोनों रुखों के बीच साझा जमीन बहुत सीमित रही। यूरोपीय सरकारें भविष्य की रूस-यूक्रेन कूटनीति में ईयू की भूमिका पर विचार कर रही थीं, लेकिन यूरोपीय अधिकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मॉस्को वास्तव में शांति में रुचि रखता है। उनका कहना था कि किसी वार्ता के जरिए रूस के क्षेत्रीय दावों को वैधता नहीं दी जा सकती।
कूटनीतिक पहल को युद्धक्षेत्र की घटनाओं ने भी पीछे छोड़ दिया। 16 जुलाई को क्रेमलिन ने कहा कि यूक्रेन के साथ शांति वार्ता फिर शुरू होने की तत्काल कोई संभावना नहीं है, हालांकि रूस ने बातचीत के विचार के लिए खुला रहने का दावा किया।
अगस्त के अंत तक यूक्रेनी अधिकारी संभावित तकनीकी वार्ताओं पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन उन्हें किसी तेज समझौते की उम्मीद नहीं थी। 19
20 अलग रिपोर्टों में रूस-यूक्रेन वार्ता को “गहरे ठहराव” में बताया गया, जबकि रूसी सेना अपना सैन्य अभियान जारी रखे हुए थी।
रॉयटर्स ने अगस्त के अंतिम दिनों में यूक्रेन पर रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों की भी रिपोर्ट की। 17 सीमित कूटनीतिक संपर्क और लगातार सैन्य कार्रवाइयों का यह मेल बताता है कि मध्य-2026 के संवाद सामान्य, युद्ध-पूर्व संबंध बहाल करने की ठोस प्रक्रिया के बजाय शुरुआती और अनिश्चित कोशिश थे।
पेस्कोव का बयान केवल शब्दों में बदलाव नहीं, बल्कि इस बात की स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा सकता है कि सीमित कूटनीतिक पहल असंगत राजनीतिक और सैन्य रुखों के बीच आगे नहीं बढ़ सकी। मॉस्को यूरोप को यूक्रेन का समर्थन करने और रूस पर दबाव डालने वाली शत्रुतापूर्ण शक्ति के रूप में पेश करता रहा है। दूसरी ओर, ईयू रूस के आक्रमण को यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए बुनियादी खतरा मानते हुए यूक्रेन का समर्थन और प्रतिबंध जारी रखे हुए है।
नतीजा यह है कि बातचीत की गुंजाइश बहुत संकरी और अस्थिर हो गई है। क्रेमलिन वार्ता के लिए तैयार होने की बात कह सकता है, लेकिन साथ ही अल्टीमेटम ठुकराता है, यूरोप से पहला कदम उठाने की मांग करता है और किसी समझौते में रूस की शर्तों को शामिल करने पर जोर देता है। यूरोपीय सरकारें कूटनीतिक चैनलों की संभावना तलाश सकती हैं, लेकिन उनका कहना है कि टिकाऊ शांति यूक्रेन की संप्रभुता, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होनी चाहिए। 1
12
इस पृष्ठभूमि में 29 अगस्त का बयान सभी संभावित संपर्कों के अंत की घोषणा नहीं करता। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि मॉस्को अब ईयू के साथ संबंधों में निकट भविष्य में सुधार को यथार्थवादी संभावना के रूप में पेश नहीं कर रहा। जब तक युद्ध, प्रतिबंधों, सुरक्षा संबंधी मांगों और शांति समझौते की शर्तों पर कोई साझा आधार नहीं बनता, 2026 के मध्य में दिखी कूटनीतिक गर्माहट ठहरी हुई ही रहेगी।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
29 अगस्त को दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को को यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने का कोई आधार नजर नहीं आता और यूरोपीय नेतृत्व रूस के प्रति टकरावपूर्ण है।
29 अगस्त को दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को को यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने का कोई आधार नजर नहीं आता और यूरोपीय नेतृत्व रूस के प्रति टकरावपूर्ण है। पेस्कोव ने आरोप लगाया कि यूरोप रूस को ‘प्रतिद्वंद्वी’ या ‘दुश्मन’ मान रहा है और उसके सैन्य संसाधनों को रूस के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। ये उपलब्ध रिपोर्टिंग में स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य नहीं, बल्कि क्रेमलिन के दावे...
मई और जून 2026 में व्लादिमीर पुतिन तथा क्रेमलिन ने यूरोपीय देशों से बातचीत और संबंध बहाल करने की सशर्त इच्छा जताई थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध, प्रतिबंधों और शांति समझौते की शर्तों पर मतभेद दूर नहीं हुए।