NASA और SpaceX रोमन स्पेस टेलीस्कोप को 30 अगस्त 2026 को सुबह 7:26 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे) से पहले नहीं लॉन्च करने का लक्ष्य रख रहे हैं। रोमन में हबल के बराबर 2.4 मीटर का दर्पण और 300 मेगापिक्सल का इन्फ्रारेड कैमरा है, जिसका दृश्य क्षेत्र हबल से कम से कम 100 गुना बड़ा होगा। इसकी सबसे बड़ी ताकत बड़े पै...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What are the launch details, mission goals, capabilities, scientific objectives, history, and expected impact of NASA’s Nancy Grace Roman Sp. Article summary: NASA’s Nancy Grace Roman Space Telescope is targeted to launch no earlier than 7:26 a.m. EDT on Sunday, Aug. 30, 2026, aboard a SpaceX Falcon Heavy from Launch Complex 39A at Kennedy Space Center. NASA’s launch coverage . Topic tags: general, government, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake n
NASA का नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप खगोल विज्ञान में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है। NASA और SpaceX इसे रविवार, 30 अगस्त 2026 को सुबह 7:26 बजे EDT से पहले नहीं लॉन्च करने का लक्ष्य रख रहे हैं। भारत में यह समय लगभग शाम 4:56 बजे होगा। प्रक्षेपण फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से SpaceX के Falcon Heavy रॉकेट द्वारा किया जाएगा। NASA की लाइव कवरेज सुबह 6:20 बजे EDT, यानी भारत में लगभग शाम 3:50 बजे, शुरू होने वाली है। हालांकि मौसम, तकनीकी तैयारियों और अन्य परिस्थितियों के कारण समय बदल सकता है। 1
अगर 30 अगस्त को लॉन्च नहीं हो पाता, तो 31 अगस्त के लिए बैकअप अवसर रखा गया है। यह वैकल्पिक तारीख निश्चित गारंटी नहीं है; वास्तविक लॉन्च और शुरुआती परिचालन के आधार पर आगे की समय-सारिणी तय होगी।
रोमन को सिर्फ हबल से ज्यादा साफ तस्वीरें लेने के लिए नहीं बनाया गया है। इसकी असली ताकत है—बहुत बड़े आकाशीय क्षेत्र को तेज़ी से और एक समान गुणवत्ता के साथ देखना। यह दूरबीन उन पैटर्न, दुर्लभ घटनाओं और असामान्य पिंडों को खोज सकती है, जो किसी खास आकाशगंगा या तारे पर केंद्रित अवलोकन से छूट सकते हैं।
यह वेधशाला सूर्य-पृथ्वी L2 क्षेत्र में स्थापित की जाएगी, जो पृथ्वी से लगभग 9 लाख 30 हजार मील या 15 लाख किलोमीटर दूर है। यह वही गहरे अंतरिक्ष का व्यापक क्षेत्र है जहां जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप भी काम करता है। L2 की स्थिर और अपेक्षाकृत अनुकूल परिस्थितियां लंबे, व्यवस्थित अवलोकनों के लिए उपयोगी होंगी।
NASA ने रोमन के लिए पांच साल का प्राथमिक वैज्ञानिक मिशन तय किया है। अगर अंतरिक्ष यान स्वस्थ रहा और वित्तपोषण उपलब्ध रहा, तो इसका वैज्ञानिक काम आगे भी जारी रह सकता है।
रोमन का प्राथमिक दर्पण 2.4 मीटर यानी 7.9 फीट चौड़ा है—लगभग हबल स्पेस टेलीस्कोप के दर्पण जितना ही। लेकिन इसके ऑप्टिकल डिजाइन के कारण रोमन एक तस्वीर में हबल की तुलना में कम-से-कम 100 गुना बड़ा आकाशीय क्षेत्र देख सकेगा, जबकि तस्वीरों की स्पष्टता तुलनीय रहेगी।
इसका मुख्य उपकरण Wide Field Instrument एक 300 मेगापिक्सल का इन्फ्रारेड कैमरा है। यह लगभग 0.5 से 2.3 माइक्रोन तक की तरंगदैर्घ्य पर काम करेगा, यानी दृश्य प्रकाश से लेकर निकट-अवरक्त प्रकाश तक। रोमन की एक तस्वीर में पूर्णिमा के चंद्रमा के दिखाई देने वाले आकार के बराबर या उससे बड़ा आकाशीय क्षेत्र आ सकता है। 19
NASA का अनुमान है कि समान व्यापक सर्वेक्षण कार्य में रोमन हबल से 1,000 गुना तक तेज़ी से आकाश का सर्वेक्षण कर सकता है। अपने प्रमुख सर्वेक्षणों के दौरान यह 2 अरब से अधिक आकाशगंगाओं की तस्वीरें ले सकता है और हजारों नहीं, बल्कि दसियों हजार सुपरनोवा दर्ज कर सकता है। 3
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यही अंतर रोमन को महत्वपूर्ण बनाता है। हबल किसी आकाशगंगा, नीहारिका या अन्य लक्ष्य का बेहद विस्तृत अध्ययन करने में सक्षम है। इसके विपरीत, रोमन का काम विशाल क्षेत्रों का व्यवस्थित नक्शा तैयार करना होगा।
रोमन का एक प्रमुख लक्ष्य यह समझना है कि ब्रह्मांड का विस्तार तेज़ क्यों हो रहा है। वैज्ञानिक सुपरनोवा, आकाशगंगाओं के समूहों और कमजोर गुरुत्वीय लेंसिंग जैसी कई स्वतंत्र विधियों से यह पता लगाएंगे कि समय के साथ ब्रह्मांडीय संरचना कैसे विकसित हुई।
इन आंकड़ों से डार्क एनर्जी से जुड़े सिद्धांतों की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी परखा जा सकेगा कि कहीं गुरुत्वाकर्षण के मौजूदा सिद्धांतों में कोई कमी तो नहीं है। दूर की वस्तुओं से आने वाले प्रकाश को डार्क मैटर का गुरुत्व किस तरह मोड़ता है, इसका अध्ययन करके रोमन डार्क मैटर के वितरण का नक्शा बनाने में भी मदद करेगा। 17
रोमन हमारी आकाशगंगा में ग्रह प्रणालियों की एक व्यापक सांख्यिकीय जनगणना करेगा। इसके लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक गुरुत्वीय माइक्रोलेंसिंग होगी। इसमें सामने स्थित किसी तारे का गुरुत्व, पीछे मौजूद अधिक दूर के तारे के प्रकाश को कुछ समय के लिए बढ़ा देता है। अगर सामने वाले तारे की परिक्रमा कोई ग्रह कर रहा हो, तो वह इस बढ़ोतरी में एक छोटा-सा बदलाव पैदा कर सकता है।
माइक्रोलेंसिंग की खासियत यह है कि इससे अपने तारों से काफी दूर स्थित ठंडे ग्रहों का पता लगाया जा सकता है। ऐसे ग्रह उन तकनीकों से पकड़ना कठिन होते हैं, जो तारों के बहुत करीब परिक्रमा करने वाले ग्रहों पर अधिक निर्भर रहती हैं। NASA को उम्मीद है कि रोमन अपने ग्रह सर्वेक्षणों के जरिए 1 लाख से अधिक ग्रह खोज सकता है। इनमें ऐसे मुक्त-तैरते ग्रह भी शामिल हो सकते हैं, जो किसी तारे की परिक्रमा नहीं करते। 3
रोमन ट्रांजिट विधि में भी योगदान देगा। इस तकनीक में किसी ग्रह के अपने तारे के सामने से गुजरने पर तारे की चमक में आने वाली हल्की कमी को मापा जाता है।
रोमन में Coronagraph Instrument भी होगा। यह मुख्य रूप से एक तकनीकी प्रदर्शन है। कोरोनाग्राफ किसी तारे की तेज़ चमक को रोकता या दबाता है, जिससे उसके पास मौजूद अपेक्षाकृत बेहद धुंधली वस्तुओं को देखने की कोशिश की जा सके।
यह उपकरण कुछ विशाल एक्सोप्लैनेट और ग्रह बनने वाली धूल की डिस्क की सीधी तस्वीर लेने तथा उनका अध्ययन करने की तकनीकों का परीक्षण करेगा। इसका उद्देश्य पृथ्वी जैसे ग्रहों की पूरी सूची बनाना नहीं है। हालांकि इसके प्रदर्शन से भविष्य के ऐसे मिशनों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है, जो संभावित रूप से रहने योग्य ग्रहों की सीधे तस्वीर ले सकें। 2
रोमन का 2.4 मीटर प्राथमिक दर्पण मूल रूप से अमेरिकी गोपनीय टोही कार्यक्रम के लिए बनाए गए दो दर्पणों में से एक था। National Reconnaissance Office ने 2012 में ये दर्पण NASA को सौंपे। इससे NASA को नए सिरे से दर्पण विकसित किए बिना हबल के आकार का उच्च-गुणवत्ता वाला दर्पण मिल गया। 3
मिशन के विकास के दौरान समय और लागत से जुड़े कई दबाव आए, जिनमें COVID-19 महामारी से हुई बाधाएं भी शामिल थीं। NASA की पुनर्नियोजित योजना के अनुसार मिशन की अनुमानित जीवनचक्र लागत लगभग 4.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई। यह राशि सिर्फ दूरबीन बनाने की कीमत नहीं, बल्कि पूरे प्रोजेक्ट की व्यापक लागत का अनुमान है।
NASA ने रोमन की बड़ी असेंबली को औपचारिक रूप से मई 2027 तक लॉन्च की प्रतिबद्धता से पहले पूरा कर लिया था और 2026 के शुरुआती लॉन्च अवसर की तैयारी जारी रखी।
नहीं। रोमन, हबल और जेम्स वेब एक-दूसरे के पूरक होंगे। रोमन बड़े क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर दुर्लभ घटनाओं, महत्वपूर्ण आबादियों और असामान्य लक्ष्यों की पहचान करेगा। इसके बाद हबल, वेब और धरती पर मौजूद बड़ी दूरबीनें चुनिंदा आकाशगंगाओं, सुपरनोवा या ग्रह प्रणालियों का अधिक गहराई से अध्ययन कर सकेंगी।
यह काम का बंटवारा महत्वपूर्ण है। किसी एक आकाशगंगा का असाधारण बारीकी से अध्ययन करने वाली दूरबीन विशाल क्षेत्र में दुर्लभ घटनाओं की खोज तेजी से नहीं कर सकती। रोमन की भूमिका ऐसे लक्ष्य खोजने और बड़े, व्यवस्थित डेटा सेट तैयार करने की होगी, जिनसे बाद के विस्तृत अध्ययन और अधिक उपयोगी बनेंगे।
रोमन के आधिकारिक लक्ष्य डार्क एनर्जी, डार्क मैटर, एक्सोप्लैनेट और इन्फ्रारेड खगोल भौतिकी से जुड़े हैं। लेकिन इसकी सबसे यादगार खोजें ऐसी वस्तुएं भी हो सकती हैं, जिनकी तलाश वैज्ञानिकों ने अभी शुरू ही नहीं की है।
बड़े और एकरूप सर्वेक्षण असामान्य क्षणिक घटनाओं, दुर्लभ ग्रह प्रणालियों और आकाशगंगाओं या तारों की नई आबादियों को सामने ला सकते हैं। विशाल क्षेत्रों को बार-बार देखने से रोमन यह भी दर्ज करेगा कि समय के साथ आकाशीय वस्तुएं कैसे बदलती हैं।
यह दृष्टिकोण नैन्सी ग्रेस रोमन की वैज्ञानिक विरासत से मेल खाता है। NASA की पहली chief astronomer के रूप में उन्होंने बड़े अंतरिक्ष वेधशालाओं के लिए समर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाई और उन्हें “हबल की मां” के नाम से जाना गया। उनके नाम पर बना यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड को केवल चुनिंदा, गहरे क्लोज-अप में देखने के बजाय उसका कहीं व्यापक नक्शा तैयार करने की दिशा में अगला कदम है। 1
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NASA और SpaceX रोमन स्पेस टेलीस्कोप को 30 अगस्त 2026 को सुबह 7:26 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे) से पहले नहीं लॉन्च करने का लक्ष्य रख रहे हैं।
NASA और SpaceX रोमन स्पेस टेलीस्कोप को 30 अगस्त 2026 को सुबह 7:26 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 4:56 बजे) से पहले नहीं लॉन्च करने का लक्ष्य रख रहे हैं। रोमन में हबल के बराबर 2.4 मीटर का दर्पण और 300 मेगापिक्सल का इन्फ्रारेड कैमरा है, जिसका दृश्य क्षेत्र हबल से कम से कम 100 गुना बड़ा होगा।
इसकी सबसे बड़ी ताकत बड़े पैमाने पर तेज सर्वेक्षण है—यह अरबों आकाशगंगाओं, सुपरनोवा और एक्सोप्लैनेट का अध्ययन कर हबल, वेब और धरती पर मौजूद दूरबीनों के लिए नए लक्ष्य खोजेगा।