नेपाल की अपील ऐसे समय आई जब बचाव अभियान जारी था और सोशल मीडिया पर नकली ‘लाइव’ बाढ़ वीडियो, पुराने फुटेज और फर्जी राहत अपील तेजी से फैल रही थीं। अधिकारियों ने Meta और TikTok से 24–48 घंटे की कथित प्रतिक्रिया अवधि से तेज कार्रवाई और नेपाली भाषा वाली आपदा संबंधी गलत सूचना की बेहतर पहचान की मांग की। [15] AFP ने भारत के...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What prompted Nepal’s government, amid the deadly August 26 flash floods along the Trishuli River caused by a glacial collapse near the Nepa. Article summary: Nepal’s request was driven by a surge of harmful posts during an active rescue emergency: fabricated “live” flood videos, old footage relabelled as Nepal, graphic imagery, and QR code appeals that could divert donations . Topic tags: general web, openai, ai, automation, workflow. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, chart
26 अगस्त को त्रिशूली नदी के आसपास आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान नेपाल में बचाव अभियान चल रहा था। इसी बीच सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट बढ़ने लगे जिनमें AI से बनाए गए ‘लाइव’ बाढ़ वीडियो, किसी दूसरी आपदा का पुराना फुटेज, भ्रामक दावे, अत्यधिक विचलित करने वाली तस्वीरें और फर्जी राहत-दान QR कोड शामिल थे।
नेपाल सरकार ने Meta और TikTok से इन सामग्री को तुरंत हटाने, शिकायतों पर 24–48 घंटे इंतजार न करने और नेपाली भाषा तथा आपदा-विशेष गलत सूचना की स्वचालित पहचान बेहतर बनाने को कहा। 15
हालांकि, ‘OpenAI Verify ने Google SynthID वॉटरमार्क खोजे’ जैसे दावों को सावधानी से देखना चाहिए। SynthID, Google की प्रामाणिकता और वॉटरमार्क तकनीक है, OpenAI की नहीं। वॉटरमार्क तभी सीमित रूप से किसी फाइल के स्रोत का संकेत दे सकता है जब जनरेटर ने उसे जोड़ा हो और डिटेक्टर उसे भरोसेमंद तरीके से पढ़ सके। यह अपने-आप में इंटरनेट पर प्रसारित हर वीडियो के बारे में निर्णायक प्रमाण नहीं है। उपलब्ध साक्ष्य इन खास बाढ़ वीडियो पर Meta या OpenAI की किसी औपचारिक संयुक्त जांच की पुष्टि नहीं करते।
रिपोर्ट की गई कुछ चेतावनियों में शामिल हैं:
ये संकेत उपयोगी शुरुआती चेतावनियां हैं, अंतिम प्रमाण नहीं। किसी वीडियो की जांच के लिए रिवर्स इमेज या वीडियो सर्च, सबसे पहली पोस्ट का पता लगाना, लोकेशन की पुष्टि और उपलब्ध प्रामाणिकता-संबंधी डेटा अधिक भरोसेमंद तरीके हैं। AFP की जांच में स्रोतों का पीछा करने पर पता चला कि कई वायरल क्लिप नेपाल की घटना से पहले के थे। 2345
आपदा के दौरान लोग जल्दी से मदद भेजना चाहते हैं। ऐसे में फर्जी QR कोड शोकाकुल परिवारों और दानदाताओं को निशाना बना सकते हैं, धन को सत्यापित राहत चैनलों से दूर मोड़ सकते हैं और उन लोगों को भ्रमित कर सकते हैं जो निकासी, लापता परिजनों या सहायता की जानकारी खोज रहे हों।
इसी वजह से नेपाल की मांग केवल ‘फर्जी वीडियो हटाने’ तक सीमित नहीं थी। सरकार तेज एस्केलेशन, बेहतर स्वचालित मॉडरेशन और दान-संबंधी धोखाधड़ी पर तत्काल कार्रवाई चाहती थी।
गलत सामग्री Meta के प्लेटफॉर्मों और TikTok पर प्रमुख रूप से प्रसारित हुई, जबकि दोबारा पोस्ट किए गए आपदा वीडियो अन्य सोशल मीडिया नेटवर्कों पर भी पहुंचे। AFP के उदाहरणों में भारत, पाकिस्तान और चिली की पुरानी सामग्री को नेपाल की घटना से जोड़कर साझा किया गया। उपलब्ध साक्ष्य यह दिखाते हैं कि सामग्री कई भाषाई और सीमा-पार नेटवर्कों में घूमी, लेकिन हर भाषा के हिसाब से इसके प्रसार का पूरा और विश्वसनीय मानचित्र उपलब्ध नहीं है।
गलत सूचना का असर इसलिए भी गंभीर था क्योंकि घटना वास्तविक और तेजी से बदलती हुई थी। विशेषज्ञों और अधिकारियों के आकलन के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर का हिस्सा टूटना इस बाढ़ का संभावित कारण था। 24 रसुवा और नुवाकोट नेपाल के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल थे, जहां बुनियादी ढांचे और बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा। 113
बचाव और खोज अभियान जारी रहने के कारण मानवीय नुकसान के आंकड़े तेजी से बदल रहे थे। Reuters ने 28 अगस्त को मृतकों की संख्या 600 के करीब और लापता लोगों की संख्या लगभग 2,500 बताई। एक अन्य अपडेट में 579 मौतें, करीब 2,400 लापता और 3,742 लोगों के बचाए जाने की जानकारी दी गई। 18
चीन से आई शुरुआती रिपोर्ट में तिब्बत में 554 नहीं, बल्कि 558 लोगों के लापता होने की बात कही गई थी। 3 इसलिए प्रश्न में दिए गए 553–579 मौतों, 1,900 से अधिक लापता लोगों, 3,700 से अधिक बचाए गए लोगों और चीनी हिस्से में 554 लापता लोगों के आंकड़े अलग-अलग समय की अंतरिम गिनतियों से मेल खा सकते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम और स्थिर आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
कनाडा ने नेपाल के राहत प्रयासों के लिए 50 लाख डॉलर की तत्काल मानवीय सहायता की घोषणा की थी। 18 ऐसे माहौल में सत्यापित संस्थाओं के बजाय सोशल मीडिया पर साझा किए गए किसी QR कोड पर दान भेजने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करना जरूरी है। उपलब्ध स्रोतों से यह स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका कि Catholic Relief Services इस प्रतिक्रिया का Caritas Nepal के साथ समन्वय कर रही थी।
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नेपाल की अपील ऐसे समय आई जब बचाव अभियान जारी था और सोशल मीडिया पर नकली ‘लाइव’ बाढ़ वीडियो, पुराने फुटेज और फर्जी राहत अपील तेजी से फैल रही थीं।
नेपाल की अपील ऐसे समय आई जब बचाव अभियान जारी था और सोशल मीडिया पर नकली ‘लाइव’ बाढ़ वीडियो, पुराने फुटेज और फर्जी राहत अपील तेजी से फैल रही थीं। अधिकारियों ने Meta और TikTok से 24–48 घंटे की कथित प्रतिक्रिया अवधि से तेज कार्रवाई और नेपाली भाषा वाली आपदा संबंधी गलत सूचना की बेहतर पहचान की मांग की। [15]
AFP ने भारत के केरल, उत्तराखंड, पाकिस्तान और चिली के पुराने वीडियो को नेपाल की बाढ़ के नाम पर साझा किए जाने का पता लगाया। [2][3][4][5]