28 अगस्त 2026 को जैक्सन होल में BIS के महाप्रबंधक पाब्लो हर्नांडेज़ दे कोस ने कहा कि Stablecoins अभी बड़े पैमाने पर रोज़मर्रा के भुगतान के लिए विश्वसनीय विकल्प नहीं हैं। मुख्य समस्या ‘Singleness of Money’ की है—एक ही मुद्रा में जारी अलग अलग भुगतान साधन अंकित मूल्य पर, अंतिम रूप से, केंद्रीय बैंक के पैसे में बदले जा...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did BIS General Manager Pablo Hernández de Cos argue in his Jackson Hole speech, “Pushing the monetary frontier: stablecoins and tokeni. Article summary: Hernández de Cos’s core argument was that stablecoins may be useful technology, but their current design does not make them credible as a mass, everyday payment instrument. He favored tokenised bank deposits, settled thr. Topic tags: general, general web, user generated, government, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
जैक्सन होल में 28 अगस्त 2026 को दिए गए अपने भाषण में BIS (Bank for International Settlements) के महाप्रबंधक पाब्लो हर्नांडेज़ दे कोस ने Stablecoins को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उनका तर्क यह था कि Stablecoins की मौजूदा बनावट उन्हें सभी के लिए रोज़मर्रा के भुगतान की भरोसेमंद नींव नहीं बनाती। इसके मुकाबले, Tokenised Bank Deposits—यानी पारंपरिक बैंक जमाओं का डिजिटल और programmable रूप, जिसका अंतिम settlement केंद्रीय बैंक के पैसे में हो—भुगतान व्यवस्था को आधुनिक बनाने का अधिक विश्वसनीय रास्ता हो सकते हैं। 2
दे कोस ने बहस को दो बुनियादी अवधारणाओं के इर्द-गिर्द रखा: एक साझा unit of account और ‘Singleness of Money’। इसका अर्थ है कि एक ही मुद्रा में मूल्यांकित अलग-अलग प्रकार के पैसे अंकित मूल्य पर एक-दूसरे के बदले इस्तेमाल किए जा सकें और अंततः केंद्रीय बैंक के पैसे में तय रूप से redeem हो सकें। किसी ग्राहक को भुगतान स्वीकार करते समय यह जांचने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि पैसा किस बैंक या किस निजी संस्था ने जारी किया है। 2 9
मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था में यह बात सहज लगती है। अलग-अलग वाणिज्यिक बैंकों की जमा राशि अर्थव्यवस्था में इसलिए आसानी से चलती है क्योंकि केंद्रीय बैंक का settlement infrastructure उन्हें संप्रभु मुद्रा की इकाई के हिसाब से बराबर मूल्य पर बदलने में मदद करता है। Tokenised Deposits इसी ढांचे को बनाए रखते हुए programmable और संभावित रूप से तेज डिजिटल भुगतान की सुविधा देने का प्रयास हैं। 10 12
Stablecoins अलग-अलग निजी संस्थाओं द्वारा जारी किए गए दावे होते हैं। मान लीजिए भुगतान करने वाले के पास USDT है, लेकिन प्राप्तकर्ता केवल USDC स्वीकार करता है। ऐसे में भुगतान सीधे बराबर मूल्य पर होने के बजाय पहले secondary market में एक token को दूसरे में बदलने की मांग कर सकता है। इससे कीमत में अंतर, redemption में रुकावट और यह अनिश्चितता पैदा हो सकती है कि एक डिजिटल डॉलर को दूसरे डिजिटल डॉलर के बिल्कुल बराबर माना जाएगा या नहीं। 2 10
BIS की चिंता केवल अल्पकालिक price volatility को लेकर नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि क्या निजी तौर पर जारी किए गए tokens उस मौद्रिक व्यवस्था की मूल धारणा कायम रख सकते हैं जिसमें पैसा हर जगह अंकित मूल्य पर स्वीकार्य होता है। BIS पहले भी चेतावनी दे चुका है कि सामान्य परिस्थितियों में Stablecoins अपने अंकित मूल्य से थोड़ा हट सकते हैं और बाजार में तनाव के समय यह अंतर काफी बढ़ सकता है। 5
Stablecoins ऐसे networks पर चलते हैं जिनमें liquidity, settlement व्यवस्था और तकनीकी standards स्वतः साझा नहीं होते। एक blockchain पर मौजूद token दूसरे blockchain पर सीधे इस्तेमाल योग्य न हो, ऐसा संभव है। Bridges networks को जोड़ सकते हैं, लेकिन वे seamless interoperability अपने-आप पैदा नहीं करते; इसके बजाय वे नई तकनीकी निर्भरताएं और अतिरिक्त जोखिम जोड़ते हैं। 5 11
बड़े पैमाने की भुगतान व्यवस्था में उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग platforms के बीच इस भरोसे के साथ पैसा भेजने और पाने में सक्षम होना चाहिए कि transaction अंतिम और निश्चित है। Fragmentation के कारण अनुभव एक एकीकृत monetary system में भुगतान करने के बजाय अलग-अलग networks के बीच assets exchange करने जैसा हो सकता है। 9
दे कोस ने public और permissionless blockchains, pseudonymous activity, self-custodied wallets तथा सीधे wallet-to-wallet transfers को लेकर financial-integrity संबंधी चिंताएं भी उठाईं। इन विशेषताओं के कारण anti-money-laundering (AML) और counter-terrorist-financing (CFT) नियमों को supervised, account-based system की तुलना में समान रूप से लागू करना कठिन हो सकता है। 2 7
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर Stablecoin transaction अवैध है या उसकी निगरानी नहीं की जा सकती। तर्क यह है कि जो भुगतान साधन systemic महत्व हासिल करना चाहता है, उसमें मजबूत compliance और resilience व्यवस्था के मूल डिजाइन का हिस्सा होनी चाहिए—सिर्फ network के किनारों पर मौजूद असमान नियंत्रणों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
Foreign-currency Stablecoins उन अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से अपनाए जा सकते हैं जहां स्थानीय मुद्रा कम आकर्षक या कम स्थिर है। दे कोस ने चेतावनी दी कि इससे लोग अपनी घरेलू मुद्रा की जगह किसी विदेशी मुद्रा-आधारित token को अपनाने लग सकते हैं और देश की monetary sovereignty कमजोर हो सकती है। 2
यह चिंता खास तौर पर dollar-pegged tokens के मामले में महत्वपूर्ण है। इनके व्यापक इस्तेमाल से डॉलर में भुगतान तक पहुंच बढ़ सकती है, लेकिन घरेलू monetary systems किसी विदेशी मुद्रा और निजी जारीकर्ताओं की reserves तथा redemption व्यवस्था पर अधिक निर्भर भी हो सकते हैं।
यहीं BIS का दृष्टिकोण अमेरिका में Stablecoins के पक्ष में दिए जा रहे तर्कों से अलग दिखाई देता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का कहना है कि डॉलर Stablecoins अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की भूमिका मजबूत कर सकते हैं और उन्हें समर्थन देने वाले अमेरिकी Treasury securities की मांग बढ़ा सकते हैं। दे कोस ने भी माना कि reserves से समर्थित Stablecoins सरकारी securities की मांग बढ़ा सकते हैं और संभवतः सरकारों की borrowing cost कम कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने इस संभावित लाभ के साथ monetary sovereignty और financial stability के जोखिमों को भी रेखांकित किया। 2
यदि लोग बड़ी मात्रा में अपनी सामान्य bank deposits को Stablecoins में बदलने लगें, तो बैंकों की funding व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। Deposits बैंकों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर और कम लागत वाला funding source होते हैं। इन जमाओं में बड़ी कमी आने पर बैंकों की funding cost बढ़ सकती है और वे इसका भार परिवारों तथा कारोबारों को महंगे या अधिक अस्थिर कर्ज के रूप में दे सकते हैं। 2
यही policy debate का अहम trade-off है। Stablecoins सुरक्षित सरकारी assets की मांग बढ़ा सकते हैं, लेकिन उनका व्यापक इस्तेमाल bank intermediation और credit availability को भी बदल सकता है। इसलिए BIS इसे केवल efficiency gain नहीं मानता; policymakers को खासकर वित्तीय तनाव के समय इसके प्रभावों पर नजर रखनी होगी। 2
दे कोस का प्रस्ताव Stablecoins पर पूर्ण प्रतिबंध का नहीं, बल्कि भूमिकाओं के विभाजन का है। उनके अनुसार Tokenised Deposits मौजूदा two-tier monetary architecture के भीतर अधिकांश general-purpose और day-to-day payments संभाल सकते हैं। इस व्यवस्था में वाणिज्यिक बैंक जनता को money उपलब्ध कराते हैं, जबकि केंद्रीय बैंक settlement assets और अंतिम monetary anchor प्रदान करते हैं। 2 6
Stablecoins उन सीमित या विशेष उपयोगों में बने रह सकते हैं जहां उनका design उपयुक्त हो और regulation मजबूत हो। लेकिन BIS का मानना है कि core payment system ऐसे instruments पर आधारित होना चाहिए जो parity, finality और व्यापक interoperability कायम रखें।
BIS का पसंदीदा विकल्प भी पूरी तरह तैयार infrastructure नहीं है। Tokenised Deposits को खुद fragmented platforms, असंगत standards और governance से जुड़े अनसुलझे सवालों का सामना करना होगा। बड़े पैमाने पर काम करने वाली व्यवस्था के लिए settlement finality के स्पष्ट कानूनी नियम, compatible data arrangements और programmable rails पर केंद्रीय बैंक के पैसे तक भरोसेमंद पहुंच भी जरूरी होगी। 2 7
यह सावधानी महत्वपूर्ण है। बहस केवल ‘Stablecoins बनाम तैयार replacement’ की नहीं है। असल सवाल अलग-अलग monetary architectures में चुनाव का है—और हर architecture को बड़े पैमाने के भुगतान के लिए तकनीकी, कानूनी और regulatory काम की जरूरत है।
दे कोस के तर्क को एक सिद्धांत में समेटा जा सकता है: payment innovation को गति और programmability बढ़ानी चाहिए, लेकिन उन गुणों को कमजोर नहीं करना चाहिए जो money को भरोसेमंद बनाते हैं। Stablecoins ने दिखाया है कि digital assets नए payment functions को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन BIS के अनुसार मौजूदा designs बड़े पैमाने पर singleness, interoperability और समान financial-integrity safeguards भरोसेमंद ढंग से उपलब्ध नहीं कराते। 2 7
Tokenised Deposits को मजबूत आधार इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वे programmable payment technology को commercial-bank money और central-bank settlement के साथ जोड़ सकते हैं। Stablecoins इस व्यवस्था के साथ coexist कर सकते हैं, लेकिन संभवतः अधिक सीमित भूमिका में। हालांकि, Tokenised Deposits की सफलता भी उनके अपने interoperability, governance और legal-settlement से जुड़े सवालों के समाधान पर निर्भर करेगी।
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28 अगस्त 2026 को जैक्सन होल में BIS के महाप्रबंधक पाब्लो हर्नांडेज़ दे कोस ने कहा कि Stablecoins अभी बड़े पैमाने पर रोज़मर्रा के भुगतान के लिए विश्वसनीय विकल्प नहीं हैं।
28 अगस्त 2026 को जैक्सन होल में BIS के महाप्रबंधक पाब्लो हर्नांडेज़ दे कोस ने कहा कि Stablecoins अभी बड़े पैमाने पर रोज़मर्रा के भुगतान के लिए विश्वसनीय विकल्प नहीं हैं। मुख्य समस्या ‘Singleness of Money’ की है—एक ही मुद्रा में जारी अलग अलग भुगतान साधन अंकित मूल्य पर, अंतिम रूप से, केंद्रीय बैंक के पैसे में बदले जा सकने चाहिए।
Tokenised Deposits कोई तैयार समाधान नहीं हैं; उन्हें भी साझा मानकों, बेहतर interoperability, स्पष्ट कानूनी settlement नियमों, governance और programmable platforms पर केंद्रीय बैंक के पैसे तक पहुंच की जरूरत होगी।