अगस्त की शुरुआत से सोना करीब $400 यानी लगभग 10% चढ़कर $4,700 के करीब पहुंचा, क्योंकि निवेशक और केंद्रीय बैंक दोनों खरीदार बने। World Gold Council के अनुसार, दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने 288.9 टन सोना खरीदा—एक साल पहले की तुलना में 62% अधिक और किसी भी Q2 का रिकॉर्ड। [34] पहली छमाही में पोलैंड 82 टन की खरीद के...
शोध उत्तर

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अगस्त 2026 में सोने की तेजी किसी एक खबर का नतीजा नहीं थी। इसके पीछे दो ताकतें एक साथ काम कर रही थीं—केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और निवेशकों की सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने में वापसी। भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई, सरकारी घाटे और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर अस्पष्टता ने इस मांग को और मजबूत किया।
कई हफ्तों तक करीब $4,000 प्रति औंस के आसपास टिके रहने के बाद सोना अगस्त की शुरुआत से लगभग $400 यानी 10% चढ़ा। 1 इस रैली में केंद्रीय बैंकों की खरीद ने अपेक्षाकृत टिकाऊ आधार दिया, जबकि ETF प्रवाह, अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों की उम्मीदों ने तेजी की रफ्तार तय की।
World Gold Council (WGC) की Q2 2026 Gold Demand Trends रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने शुद्ध रूप से 288.9 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। यह साल-दर-साल 62% की वृद्धि थी, संशोधित पहली तिमाही के 57 टन से पांच गुना से अधिक और WGC के आंकड़ों में किसी भी दूसरी तिमाही का रिकॉर्ड था।
इस खरीद का समय भी महत्वपूर्ण था। केंद्रीय बैंकों ने सोने की कीमतों में शुरुआती साल की ऊंचाई से गिरावट के बाद भी खरीदारी जारी रखी। इससे संकेत मिलता है कि उनका उद्देश्य अल्पकालिक तेजी का पीछा करना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता और दीर्घकालिक जोखिम प्रबंधन था। हालांकि, पहली तिमाही की कमजोर खरीद के कारण 2026 की पहली छमाही की आधिकारिक मांग 2022 के बाद सबसे कम रही।
WGC ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में सोना खरीदना जारी रखने का इरादा रखते हैं। पोर्टफोलियो में विविधता, महंगाई से बचाव और जोखिम-हेजिंग इसके प्रमुख कारण बताए गए। फिर भी, रिपोर्ट ने यह दावा नहीं किया कि हर तिमाही में Q2 जैसी ही खरीदारी होगी।
WGC के जून 2026 के केंद्रीय बैंक आंकड़ों के अनुसार, पहली छमाही में प्रमुख खरीदारों का क्रम इस प्रकार रहा: 15
पोलैंड स्पष्ट रूप से सबसे बड़ा खरीदार था, लेकिन मांग केवल एक देश तक सीमित नहीं रही। चीन, उज्बेकिस्तान और कजाखस्तान की खरीद ने आधिकारिक मांग का आधार व्यापक बनाया। चेक गणराज्य और जॉर्डन की मात्रा छोटी थी, फिर भी उन्होंने उभरते और छोटे बाजारों में भंडार बढ़ाने की व्यापक प्रवृत्ति को मजबूत किया। 15
सबसे हालिया उपलब्ध मासिक आंकड़ों में आधिकारिक सोने के भंडार में शुद्ध 41 टन की वृद्धि हुई। इसमें पोलैंड की खरीद 18 टन और चीन की 10 टन रही, जबकि उज्बेकिस्तान और कजाखस्तान ने भी खरीद जारी रखी। 5
निवेशकों के लिए इस मांग का व्यापक होना अहम है, क्योंकि इससे रैली किसी एक देश की रिजर्व नीति पर कम निर्भर रहती है। हालांकि, आधिकारिक खरीद एकतरफा नहीं है। पहली छमाही में तुर्की और रूस शुद्ध विक्रेता रहे, जिससे पता चलता है कि सभी केंद्रीय बैंक एक ही दिशा में नहीं चल रहे थे। 15
WGC की Q2 रिपोर्ट के अनुसार, ओवर-द-काउंटर (OTC) कारोबार समेत कुल वैश्विक सोना मांग दूसरी तिमाही में साल-दर-साल स्थिर रही और 1,269 टन रही। 2026 की पहली छमाही में कुल मांग 2,522 टन रही, जो एक साल पहले से 2% अधिक थी।
हालांकि केंद्रीय बैंकों की खरीद मजबूत रही, OTC को छोड़कर निवेश मांग घटकर 262.2 टन रह गई। गोल्ड ETFs में outflows दर्ज हुए, जबकि बार और सिक्कों की मांग पिछले साल की दूसरी तिमाही और लंबी अवधि के औसत के करीब रही।
फिर भी, WGC का आगे का अनुमान अधिक सकारात्मक था। उसके अनुसार, 2026 के बाकी हिस्से में निवेश मांग वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत बन सकती है। इसमें OTC गतिविधि और एशियाई खरीदारों का योगदान बढ़ने की उम्मीद थी। केंद्रीय बैंक महत्वपूर्ण खरीदार बने रह सकते हैं, जबकि ऊंची कीमतें आभूषणों की मांग पर दबाव डालती रहेंगी।
WGC के केंद्रीय बैंक रिजर्व सर्वेक्षण के विस्तृत प्रतिशत आंकड़े उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं हैं। इसलिए सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि केंद्रीय बैंक सोना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध बने हुए हैं; देश-दर-देश सर्वेक्षण प्रतिशतों का कोई अतिरिक्त दावा उपलब्ध साक्ष्य से साबित नहीं होता।
केंद्रीय बैंक खरीद ने सोने को आधार दिया, लेकिन अगस्त में तेजी की गति निवेशकों की वापसी से बढ़ी। भू-राजनीतिक और राजनीतिक अनिश्चितता के बीच safe-haven मांग बढ़ी। कमजोर डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीदों ने भी बिना ब्याज देने वाली संपत्ति के रूप में सोने को अधिक आकर्षक बनाया। 11012
हालांकि, उपलब्ध स्रोतों में ETF प्रवाह के अलग-अलग आंकड़े अलग-अलग अवधियों और datasets से जुड़े हैं:
इसलिए उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि जुलाई में $3 अरब का inflow आया और अगस्त की शुरुआत में उसके ऊपर फिर $6.4 अरब की खरीद हुई। अधिक सटीक निष्कर्ष यह है कि तिमाही के शुरुआती हिस्से में ETF मांग कमजोर या नकारात्मक थी, लेकिन अगस्त के बाद के एक सप्ताह में कीमतों में गिरावट पर खरीदारी लौटने से प्रवाह तेजी से सुधरा। 210
सोना ब्याज नहीं देता। इसलिए जब निवेशकों को ब्याज दरों में कमी, वास्तविक यील्ड में गिरावट या डॉलर के कमजोर होने की उम्मीद होती है, तो सोने की तुलनात्मक अपील बढ़ती है। इसके उलट, ऊंची वास्तविक यील्ड और मजबूत डॉलर सोना रखने की opportunity cost बढ़ाते हैं और मुनाफावसूली को बढ़ावा दे सकते हैं।
जुलाई में फेड ने federal-funds rate का लक्ष्य दायरा 3.5% से 3.75% पर बरकरार रखा, जबकि महंगाई को अपने 2% लक्ष्य से ऊपर बताया। इससे सोने के लिए दोहरा माहौल बना: लगातार महंगाई और राजकोषीय अनिश्चितता ने hedge की मांग को सहारा दिया, लेकिन लंबे समय तक ऊंची दरों की आशंका ने तेजी पर दबाव बनाए रखा।
अगस्त की तेजी ऐसे समय आई जब अमेरिकी ट्रेजरी बाजार की गतिविधियों और अपेक्षाकृत कमजोर डॉलर ने सोने को सहारा दिया। 24 अगस्त को spot gold $4,635.39 प्रति औंस तक पहुंचा, जबकि दिसंबर futures $4,697.80 पर बंद हुए। 10 उपलब्ध बाजार रिपोर्ट के अनुसार, futures बाद में $4,716.41 तक भी पहुंचे। 13
27 से 29 अगस्त के Jackson Hole symposium में केविन वार्श की उपस्थिति इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि Fed chair बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा भाषण था। निवेशक महंगाई, बॉन्ड यील्ड और मौद्रिक नीति के ढांचे पर उनका रुख समझना चाहते थे।
बाजार का मुख्य सवाल यह था कि ऊंची महंगाई और बढ़ती Treasury यील्ड के बीच फेड किस दिशा में जाएगा। वार्श ने संकेत दिया था कि ऊंची बाजार यील्ड खुद वित्तीय परिस्थितियों को इतना सख्त कर सकती है कि अतिरिक्त Fed hikes की जरूरत घट जाए—भले ही महंगाई लक्ष्य से ऊपर बनी रहे। इस अस्पष्टता के कारण निवेशक यह तय नहीं कर पा रहे थे कि उनका संदेश hawkish होगा या अपेक्षाकृत नरम नीति का समर्थन करेगा।
सोने पर संभावित असर इस तरह समझा जा सकता था:
Jackson Hole अल्पकालिक दर-अपेक्षाओं को तेजी से बदल सकता था, लेकिन Q2 में दर्ज केंद्रीय बैंक खरीद को पलट नहीं सकता था। इसलिए यह रैली का मूल कारण नहीं, बल्कि निकट अवधि का catalyst था। 11
संस्थागत पूर्वानुमानों में बड़ा अंतर बाजार की अनिश्चितता को दिखाता है। उपलब्ध सामग्री में बेहतर समर्थित अनुमानों का सार यह है:
इस तरह अनुमानों की सीमा निकट अवधि में गिरावट की चेतावनी से लेकर काफी ऊंची कीमतों की उम्मीद तक फैली रही। सभी अनुमानों में बार-बार आने वाले प्रमुख कारक वही थे—केंद्रीय बैंक खरीद, ETF मांग, वास्तविक यील्ड, डॉलर, महंगाई और Fed की policy reaction function।
तेजी का पक्ष इस बात पर टिका है कि केंद्रीय बैंक रिजर्व में विविधता लाने के लिए सोना खरीदते रहें, भौतिक और ETF निवेश फिर मजबूत हो, महंगाई या राजकोषीय चिंताएं बनी रहें और भू-राजनीतिक तनाव बढ़े। ऐसी मांग अल्पकालिक कीमतों के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील हो सकती है। 3
गिरावट का मामला यह है कि अगस्त की तेजी बहुत तेज रही और अब मुनाफावसूली का खतरा बढ़ गया है। hawkish Fed, ऊंची वास्तविक यील्ड, मजबूत डॉलर, ETF inflows का रुकना, भू-राजनीतिक तनाव में कमी या केंद्रीय बैंक खरीद में मंदी—इनमें से कोई भी marginal demand को कमजोर कर सकता है। 1718
अगस्त की तेजी को केवल किसी एक ETF headline से समझना सही नहीं होगा। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद ने सोने के लिए टिकाऊ आधार तैयार किया, जबकि निवेशकों की वापसी और व्यापक आर्थिक अनिश्चितता ने तेजी को गति दी।
सोना करीब $4,700 के स्तर को बनाए रख पाएगा या तेज चढ़ाई के बाद correction देखेगा, यह मुख्य रूप से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर और Fed नीति की अगली दिशा पर निर्भर था।
Studio Global AI
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अगस्त की शुरुआत से सोना करीब $400 यानी लगभग 10% चढ़कर $4,700 के करीब पहुंचा, क्योंकि निवेशक और केंद्रीय बैंक दोनों खरीदार बने।
अगस्त की शुरुआत से सोना करीब $400 यानी लगभग 10% चढ़कर $4,700 के करीब पहुंचा, क्योंकि निवेशक और केंद्रीय बैंक दोनों खरीदार बने। World Gold Council के अनुसार, दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने 288.9 टन सोना खरीदा—एक साल पहले की तुलना में 62% अधिक और किसी भी Q2 का रिकॉर्ड। [34]
पहली छमाही में पोलैंड 82 टन की खरीद के साथ सबसे आगे रहा; उसके बाद उज्बेकिस्तान 41 टन, चीन 40 टन, कजाखस्तान 27 टन, चेक गणराज्य 11 टन और जॉर्डन 6 टन पर रहे। [15]