IMF के जुलाई अनुमान के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था 2026 में 3.0% और 2027 में 3.4% बढ़ सकती है, लेकिन AI निवेश और ऊर्जा संकट के बीच जोखिम बना हुआ है। तेल गैस भंडार जारी होने, खाड़ी के बाहर से आपूर्ति बढ़ने, मांग घटने, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने और कुछ देशों में कोयले के दोबारा इस्तेमाल से ऊर्जा झटके का असर उम्मीद स...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did IMF Managing Director Kristalina Georgieva say about the global economic outlook ahead of the G20 finance leaders’ meeting in Ashev. Article summary: Ahead of the Asheville G20 finance meeting, Kristalina Georgieva said the world economy has absorbed the Iran-war energy shock better than feared, but it remains caught in a “tug of war” between the drag from disrupted G. Topic tags: general, government, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना स्थित एशविल में होने वाली G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक से पहले IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीएवा ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश की है—अर्थव्यवस्था उम्मीद से अधिक मजबूत साबित हुई है, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं हुआ। यह बैठक 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को निर्धारित है। 1
जॉर्जीएवा ने मौजूदा स्थिति को “खींचतान” (tug of war) बताया। एक ओर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़े निवेश ने विकास को सहारा दिया है। यह रुझान पहले अमेरिका में केंद्रित था, लेकिन अब डेटा सेंटर, चिप और अन्य हार्डवेयर परियोजनाओं के जरिये दूसरे देशों तक फैल रहा है। दूसरी ओर, ईरान युद्ध और होरमुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से पैदा हुआ ऊर्जा झटका महंगाई दोबारा बढ़ा सकता है, ब्याज दरों में राहत को टाल सकता है और आर्थिक गतिविधियों को कमजोर कर सकता है। 3 7
होरमुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था में तत्काल गिरावट नहीं आई। इसके पीछे कई राहत देने वाले कारक रहे:
इन उपायों ने होरमुज के रास्ते ऊर्जा प्रवाह में आई कमी का असर सीमित किया। हालांकि, अब तक की मजबूती को स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। तेल कीमतों में एक और तेज उछाल महंगाई को फिर बढ़ा सकता है, ब्याज दरों में कटौती को और देर से ला सकता है, सरकारों और कंपनियों की कर्ज चुकाने की लागत बढ़ा सकता है और आर्थिक गतिविधि घटा सकता है। 3
जॉर्जीएवा के अनुसार, AI निवेश का उछाल अब केवल अमेरिकी घटना नहीं रह गया है। डेटा सेंटर और उनसे जुड़ी आधारभूत संरचना बनाने के लिए दूसरे देशों में हो रहा निवेश वैश्विक मांग का नया स्रोत बन रहा है। इससे अमेरिकी कंपनियों की कमाई और उपभोक्ता खर्च को समर्थन मिल रहा है, साथ ही तकनीकी आपूर्ति शृंखला से जुड़े देशों के लिए नए अवसर बन रहे हैं। 3 7
यही इस “खींचतान” का सकारात्मक पक्ष है। AI से जुड़ा पूंजीगत निवेश मांग को बढ़ा रहा है, जबकि महंगी ऊर्जा परिवारों की वास्तविक आय पर दबाव डाल रही है, कारोबार की लागत बढ़ा रही है और केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई पर काबू पाना कठिन बना रही है। IMF के जुलाई वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट के मुताबिक, वैश्विक महंगाई घटने की प्रक्रिया रुक गई है। 2026 में औसत वैश्विक हेडलाइन महंगाई 4.7% रहने का अनुमान है, जो 2025 के 4.1% से अधिक है।
IMF ने 2026 में वैश्विक विकास दर 3.0% और 2027 में 3.4% रहने का अनुमान लगाया है। फंड के मुताबिक, तस्वीर सभी देशों के लिए एक जैसी नहीं है। ऊर्जा आयात करने वाले और संघर्ष से अधिक प्रभावित देश दबाव में हैं, जबकि AI तकनीकी आपूर्ति शृंखला से जुड़े देशों को मजबूत मांग से लाभ मिल सकता है।
IMF का अगला पूर्ण वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अक्टूबर में जारी होना है। IMF हर साल अप्रैल और अक्टूबर में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करता है। जनवरी और जुलाई में आने वाले अपडेट सीमित संख्या में अर्थव्यवस्थाओं के लिए पुराने अनुमानों को ताजा करते हैं।
ऊर्जा संकट जोखिमों का केवल एक हिस्सा है। जॉर्जीएवा ने सरकारी वित्तीय स्थिति में गिरावट, बढ़ती सरकारी बॉन्ड यील्ड, ऊंचे कर्ज, अटकी हुई महंगाई-नियंत्रण प्रक्रिया, व्यापार तनाव और वैश्विक बाहरी असंतुलन को भी आर्थिक परिदृश्य के लिए गंभीर खतरे बताया। 3
चिंता यह है कि कई सरकारें बढ़ती उधारी लागत और पहले से भारी कर्ज के बीच अर्थव्यवस्था को सहारा देने की कोशिश कर रही हैं। यदि निवेशक सरकारी कर्ज को रखने के लिए अधिक रिटर्न मांगते हैं, तो सरकारों की वित्तीय गुंजाइश तेजी से घट सकती है। ऐसी स्थिति में उन्हें खर्च कम करने, कर बढ़ाने, और कर्ज लेने या आर्थिक सहायता घटाने जैसे कठिन विकल्पों में से किसी एक को चुनना पड़ सकता है।
जॉर्जीएवा ने सरकारों से मध्यम अवधि की विश्वसनीय योजनाएं पेश करने को कहा है। इन योजनाओं में घाटा घटाने और कर्ज को टिकाऊ स्तर पर लाने का स्पष्ट रास्ता होना चाहिए—सिर्फ आशावादी अनुमानों या अस्थायी उपायों पर निर्भरता नहीं। 3
लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड बाजार में भी दबाव दिखाई दिया है। G20 ब्रीफिंग से जुड़ी रिपोर्टों में अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में तेज वृद्धि, महंगाई की चिंता, बढ़ती सरकारी उधारी और राजकोषीय विश्वसनीयता पर बाजार की निगरानी का उल्लेख किया गया। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने लंबी अवधि के सामान्य ट्रेजरी बॉन्ड की बायबैक प्रक्रिया को प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम-से-कम 4 अरब डॉलर कर दिया।
इस बायबैक का उद्देश्य बाजार में तरलता बढ़ाना और लंबी अवधि की यील्ड पर नीचे की ओर दबाव डालना था। लेकिन इसका विस्तार यह भी दिखाता है कि बाजार सरकारी कर्ज की आपूर्ति और राजकोषीय नीति की विश्वसनीयता को कितनी बारीकी से देख रहा है। लंबी अवधि की यील्ड बढ़ने पर पूरी अर्थव्यवस्था में वित्तपोषण महंगा हो सकता है, भले ही छोटी अवधि की ब्याज दरों की दिशा अलग हो।
जॉर्जीएवा ने केंद्रीय बैंकों से मूल्य स्थिरता पर लगातार ध्यान देने का आग्रह किया। ऊर्जा कीमतों में नई तेजी महंगाई घटने की अब तक की प्रगति को पलट सकती है और केंद्रीय बैंकों को लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकती है। इससे परिवारों, कारोबारों और भारी कर्ज वाली सरकारों के लिए उधारी महंगी होगी। 3
इसलिए उनका संदेश घबराहट फैलाने वाला नहीं, बल्कि सावधानी का है। वैश्विक अर्थव्यवस्था ने शुरुआती ऊर्जा झटके को अपेक्षाकृत अच्छी तरह झेला है, लेकिन यह मजबूती ऐसी परिस्थितियों पर निर्भर है जो बदल सकती हैं। नई आपूर्ति बाधा, तेल कीमतों में बड़ा उछाल या राजकोषीय नीति पर भरोसा कम होना ऐसी कमजोरियों को उजागर कर सकता है, जिनकी भरपाई AI निवेश अकेले नहीं कर पाएगा।
जॉर्जीएवा ने राजकोषीय दबाव को वैश्विक मांग के असमान वितरण से भी जोड़ा। कुछ देशों में बड़े सरकारी और चालू खाते के घाटे हैं, जबकि अन्य देशों में बड़े बाहरी अधिशेष हैं। लंबे समय तक ऐसे असंतुलन को बनाए रखना कठिन हो सकता है। उनका नीति-संदेश है कि घाटे वाले देशों को विश्वसनीय राजकोषीय सुधार करना चाहिए, जबकि अधिशेष वाले देशों को निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता घटाकर घरेलू खपत मजबूत करनी चाहिए। 3
इस दृष्टि से G20 की चर्चा केवल तेल कीमतों या AI तक सीमित नहीं रहेगी। नीति-निर्माताओं को एक साथ ऊर्जा संक्रमण से जुड़े झटके, AI-आधारित निवेश चक्र, ऊंचे कर्ज और असमान वैश्विक मांग को संभालना होगा। जॉर्जीएवा की मुख्य चेतावनी यही है: वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी तूफान झेल रही है, लेकिन उसकी मजबूती कितने समय तक कायम रहेगी, यह राजकोषीय विश्वसनीयता और मूल्य स्थिरता पर निर्भर करेगा।
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IMF के जुलाई अनुमान के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था 2026 में 3.0% और 2027 में 3.4% बढ़ सकती है, लेकिन AI निवेश और ऊर्जा संकट के बीच जोखिम बना हुआ है।
IMF के जुलाई अनुमान के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था 2026 में 3.0% और 2027 में 3.4% बढ़ सकती है, लेकिन AI निवेश और ऊर्जा संकट के बीच जोखिम बना हुआ है। तेल गैस भंडार जारी होने, खाड़ी के बाहर से आपूर्ति बढ़ने, मांग घटने, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने और कुछ देशों में कोयले के दोबारा इस्तेमाल से ऊर्जा झटके का असर उम्मीद से कम रहा।
G20 वित्त बैठक से पहले जॉर्जीएवा ने सरकारों से विश्वसनीय कर्ज और घाटा घटाने की योजनाएं बनाने तथा केंद्रीय बैंकों से मूल्य स्थिरता पर ध्यान बनाए रखने को कहा।