Pandora को 11 जनवरी 2026 को निम्न पृथ्वी कक्षा में भेजा गया और उसने 25 अगस्त से मुख्य वैज्ञानिक अवलोकन शुरू किए। [1] एक वर्ष में यह कम से कम 20 एक्सोप्लैनेट को लगभग 10 10 बार, हर बार करीब 24 घंटे तक, उनके तारों के सामने से गुजरने के दौरान देखेगा। [2][3][5] दृश्य और निकट अवरक्त प्रकाश में ग्रह तथा तारे की एक साथ निगर...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is NASA’s Pandora mission, when did it launch and begin its primary science operations, what makes it the first satellite in NASA’s Ast. Article summary: NASA’s Pandora is a small exoplanet-atmosphere mission designed to distinguish a planet’s atmospheric signature from changes in the light of its host star. It launched on January 11, 2026, and NASA announced the start of. Topic tags: general, government, education, academic, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
NASA का छोटा उपग्रह Pandora उस चुनौती से निपटने के लिए बनाया गया है जिसमें किसी एक्सोप्लैनेट—सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रह—के वातावरण का संकेत उसके मेजबान तारे की गतिविधि से गड्डमड्ड हो सकता है। Pandora को 11 जनवरी 2026 को निम्न पृथ्वी कक्षा में लॉन्च किया गया था और 25 अगस्त 2026 को इसने अपने मुख्य वैज्ञानिक अवलोकन शुरू किए। 1
इसका एक वर्ष का प्राथमिक मिशन कम-से-कम 20 ज्ञात एक्सोप्लैनेट का अध्ययन करेगा। हर ग्रह और उसके मेजबान तारे को बार-बार देखकर मिशन यह समझने की कोशिश करेगा कि प्रकाश में दिखने वाली विशेषताएं ग्रह के वातावरण से आती हैं या तारे की अपनी गतिविधि से। 15
जब कोई ग्रह पृथ्वी से देखने पर अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो इसे ट्रांजिट कहा जाता है। इस दौरान तारे का कुछ प्रकाश ग्रह के वातावरण से होकर गुजरता है। वातावरण में मौजूद अलग-अलग गैसें प्रकाश की अलग-अलग तरंगदैर्ध्य को सोखती हैं। इन बदलावों को मापकर वैज्ञानिक ट्रांसमिशन स्पेक्ट्रम तैयार करते हैं, जिससे वातावरण की संरचना के संकेत मिल सकते हैं। 310
लेकिन तारा कोई बिल्कुल स्थिर बल्ब नहीं है। उसकी सतह पर मौजूद ठंडे और अपेक्षाकृत गहरे क्षेत्र स्टारस्पॉट कहलाते हैं, जबकि अधिक चमकीले क्षेत्र फैकुला कहे जाते हैं। इन क्षेत्रों के कारण तारे की चमक और स्पेक्ट्रम बदल सकते हैं। नतीजतन, तारे की गतिविधि ग्रह के वातावरण से जुड़े संकेतों जैसी दिख सकती है, उन्हें छिपा सकती है या उनका आकार बदल सकती है। 4
Pandora इसी समस्या को सीधे निशाना बनाता है। इसके उपकरण ग्रह के ट्रांजिट के साथ-साथ उसके तारे का भी अवलोकन करेंगे। उपग्रह दृश्य प्रकाश और निकट-अवरक्त स्पेक्ट्रम दोनों जुटाएगा, जिससे लंबे समय तक एक साथ किए गए बहुरंगी मापों का आधार तैयार होगा। वैज्ञानिक तारे के आंकड़ों से उसकी गतिविधि का अनुमान लगाकर ग्रह के ट्रांसमिशन स्पेक्ट्रम में मौजूद इस ‘स्टेलर कंटैमिनेशन’ को समझ सकेंगे। 15
Pandora के प्राथमिक मिशन में कम-से-कम 20 एक्सोप्लैनेट देखे जाएंगे। योजना के अनुसार हर लक्ष्य का लगभग 10 बार अवलोकन किया जाएगा। प्रत्येक अवलोकन करीब 24 घंटे का होगा और उसे ग्रह के ट्रांजिट के आसपास केंद्रित किया जाएगा। 35
बार-बार किए जाने वाले ये अवलोकन वैज्ञानिकों को केवल एक क्षण की तस्वीर पर निर्भर रहने से बचाएंगे। यदि तारे के दृश्य और अवरक्त व्यवहार में बदलाव के बावजूद कोई वायुमंडलीय संकेत लगातार दिखाई देता है, तो उसके ग्रह से जुड़े होने का भरोसा बढ़ सकता है। इसके उलट, तारे की गतिविधि के साथ बदलने वाला संकेत तारकीय स्रोत की ओर इशारा कर सकता है। 25
Pandora में लगभग 45 सेंटीमीटर यानी 17 इंच चौड़ा, पूरी तरह एल्युमिनियम से बना टेलीस्कोप है। इसे लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी और Corning Incorporated ने मिलकर विकसित किया है। 4
इसमें NASA गोडार्ड का दिया हुआ निकट-अवरक्त सेंसर भी है, जिसे मिशन दस्तावेजों के अनुसार James Webb Space Telescope के एक उपकरण के लिए अतिरिक्त उड़ान-सेंसर के रूप में विकसित किया गया था। इससे Pandora को अवरक्त क्षेत्र में अतिरिक्त कवरेज मिलेगी और वह ग्रह-तारा प्रणाली की लंबे समय तक निगरानी कर सकेगा।
Pandora एक्सोप्लैनेट के वातावरण में धुंध, बादल और पानी जैसी विशेषताओं की तलाश करेगा। 1 पानी पर विशेष ध्यान इसलिए है क्योंकि यह ग्रह की संरचना और जलवायु को समझने में मदद कर सकता है तथा रहने योग्य परिस्थितियों के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। NASA के अनुसार Pandora के आंकड़े Webb और भविष्य के उन मिशनों के अवलोकनों को समझने की मजबूत नींव देंगे, जो संभावित रूप से रहने योग्य ग्रहों की खोज करेंगे।
हालांकि, किसी ग्रह पर पानी मिलना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि वह ग्रह रहने योग्य है या वहां जीवन मौजूद है। इसका अर्थ ग्रह के पूरे वातावरण, तापमान, दबाव और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों के संदर्भ में ही समझा जा सकता है। Pandora का मुख्य योगदान इन मापों को अधिक विश्वसनीय बनाना है।
Pandora NASA के Astrophysics Pioneers कार्यक्रम के तहत कक्षा में पहुंचने वाला पहला उपग्रह है। यह कार्यक्रम अपेक्षाकृत छोटे अंतरिक्षयानों के जरिए महत्वाकांक्षी और केंद्रित खगोलीय शोध को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया है। 14
मिशन की खासियत यह है कि यह तारे की गतिविधि को महज पृष्ठभूमि शोर नहीं मानता। Pandora ग्रह और उसके तारे का दृश्य तथा निकट-अवरक्त प्रकाश एक साथ मापेगा। उपलब्ध स्रोतों के आधार पर इसे एक साथ किए जाने वाले बहुरंगी और लंबे समय के इन अवलोकनों का पहला नियोजित डेटासेट उपलब्ध कराने वाला मिशन कहा जा सकता है। 710
हालांकि, उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यह व्यापक दावा नहीं किया जा सकता कि Pandora अब तक का पहला ऐसा अंतरिक्ष टेलीस्कोप है जिसे एक्सोप्लैनेट के वातावरण से गुजरने वाले तारों के प्रकाश के सभी प्रकार के विस्तृत बहुरंगी अवलोकनों के लिए डिजाइन किया गया है।
NASA का गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर Pandora के वैज्ञानिक मिशन का नेतृत्व कर रहा है। Elisa Quintana इसकी प्रधान अन्वेषक हैं। लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी इस प्रयास की सह-नेतृत्वकर्ता है और परियोजना प्रबंधन तथा इंजीनियरिंग संभालती है। 1
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना मिशन संचालन का नेतृत्व करती है और वैज्ञानिक कार्यक्रम में योगदान देती है। लॉरेंस लिवरमोर ने Corning के साथ मिलकर CODA टेलीस्कोप विकसित किया, जबकि NASA गोडार्ड ने अवरक्त डिटेक्टर उपलब्ध कराया। 4
James Webb Space Telescope एक्सोप्लैनेट के वातावरण का बेहद संवेदनशील मापन कर सकता है, लेकिन उसके आंकड़ों की सही व्याख्या भी मेजबान तारे की बदलती रोशनी को ग्रह के संकेत से अलग करने पर निर्भर करती है। Pandora का दृश्य और निकट-अवरक्त प्रकाश में दोहराया गया अवलोकन तारकीय गतिविधि से होने वाली इस गड़बड़ी को मापने और उसका हिसाब लगाने में मदद करेगा।
इस अर्थ में Pandora केवल एक्सोप्लैनेट सर्वेक्षण मिशन नहीं, बल्कि एक तरह का कैलिब्रेशन मिशन भी है। इसके परिणाम वैज्ञानिकों को यह तय करने में मदद कर सकते हैं कि कोई संभावित वायुमंडलीय संकेत वास्तव में मजबूत है, तारे से जुड़ा है या अभी अनिश्चित है। यही जानकारी भविष्य की उन वेधशालाओं के डिजाइन और लक्ष्य-चयन में उपयोगी हो सकती है, जो संभावित रूप से रहने योग्य दुनिया के वातावरण का अध्ययन करेंगी। 7
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Pandora को 11 जनवरी 2026 को निम्न पृथ्वी कक्षा में भेजा गया और उसने 25 अगस्त से मुख्य वैज्ञानिक अवलोकन शुरू किए। [1]
Pandora को 11 जनवरी 2026 को निम्न पृथ्वी कक्षा में भेजा गया और उसने 25 अगस्त से मुख्य वैज्ञानिक अवलोकन शुरू किए। [1] एक वर्ष में यह कम से कम 20 एक्सोप्लैनेट को लगभग 10 10 बार, हर बार करीब 24 घंटे तक, उनके तारों के सामने से गुजरने के दौरान देखेगा। [2][3][5]
दृश्य और निकट अवरक्त प्रकाश में ग्रह तथा तारे की एक साथ निगरानी से वैज्ञानिक स्टारस्पॉट और फैकुला के असर को अलग कर पानी, बादल और धुंध के संकेतों की बेहतर जांच कर सकेंगे। [1][5][17]