Kpler का अनुमान है कि मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 7.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह संकट केवल कच्चे तेल की कमी नहीं है—रिफाइनरी क्षति, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सीमित आवाजाही और बाब अल मंदेब की असुरक्षा ने तैयार ईंधन की आपूर्ति को भी प्रभावित किया है। संघर्ष...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does Kpler’s analysis reveal about the Middle East’s refinery and refined-product supply disruption following the Iran war—including th. Article summary: Kpler’s assessment is that the Iran war created a refined-products shock, not merely a crude-oil disruption: physical refinery damage and impaired export routes have removed substantial Middle East fuel supply and will k. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
मध्य पूर्व में ऊर्जा संकट अब केवल कच्चे तेल की आपूर्ति का मामला नहीं रह गया है। क्षेत्र की रिफाइनरियों को नुकसान, ईंधन के निर्यात में रुकावट और प्रमुख समुद्री मार्गों पर असुरक्षा ने एक बड़ा रिफाइंड-प्रोडक्ट झटका पैदा किया है।
Kpler के अनुसार, मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (mbd) से घटकर लगभग 7.3 mbd रह गया है—यानी करीब 2.6 mbd की गिरावट। मार्च से अगस्त के बीच क्षेत्र की तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में लगभग 4 mbd की कमी आई। 4
इसका अर्थ है कि लड़ाई या हमले कम होने के बाद भी पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल, LPG और नैफ्था की आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं होगी। व्यापार मार्गों को फिर से खोलना अपेक्षाकृत तेज हो सकता है, लेकिन रिफाइनरी, बिजली और अन्य सहायक ढांचे की मरम्मत में कहीं अधिक समय लग सकता है।
Kpler के आकलन के मुताबिक, मध्य पूर्व की लगभग 4 mbd की रिफाइंड-प्रोडक्ट कमी दो हिस्सों में बंटी है: 4
यह फर्क महत्वपूर्ण है। केवल कच्चा तेल उपलब्ध होने से समस्या हल नहीं होगी। बाजार को चलाने के लिए प्रसंस्करण इकाइयां, सही फीडस्टॉक, निर्यात टर्मिनल और सुरक्षित समुद्री मार्ग—सभी की जरूरत होती है।
क्षेत्र में समस्या दोहरी है: एक ओर रिफाइनरी और संबंधित बुनियादी ढांचे को भौतिक नुकसान हुआ, दूसरी ओर उत्पादों को बाहर भेजने के रास्ते बाधित हुए। सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में कई रिफाइनरियां हमलों या एहतियाती बंदी से प्रभावित हुईं। रॉयटर्स के अनुसार, अप्रैल के मध्य तक मध्य पूर्व की 20 रिफाइनरियां या तो हमले की चपेट में आ चुकी थीं या एहतियातन बंद थीं। इससे 2.3 mbd से अधिक क्षमता बंद पड़ी थी। 2
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य ने इस नुकसान को और गंभीर बना दिया। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति, तैयार उत्पादों का निर्यात और टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई। Kpler ने बाद में चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ फिर से बंद हो गया है और बाब अल-मंदेब में भी अस्थिरता बढ़ रही है, जिससे आपूर्ति की वापसी की उम्मीदें 2027 तक खिसक गई हैं। 3
LPG और नैफ्था के लिए बाब अल-मंदेब एक अतिरिक्त जोखिम है। Kpler के अनुसार, जुलाई से इस मार्ग की नाकेबंदी ने इन उत्पादों की आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सऊदी अरब में यनबू का फ्रैक्शनेटर आम तौर पर पूर्वी क्षेत्र से अबकैक–यनबू पाइपलाइन के जरिये आने वाले NGL फीड पर निर्भर करता है। 17
मध्य पूर्व की रिकवरी अलग-अलग देशों में अलग गति से हो सकती है। इसका कारण उनकी भौगोलिक स्थिति, निर्यात ढांचा और हॉर्मुज़ पर निर्भरता है।
सऊदी अरब के पास लाल सागर के किनारे स्थित बुनियादी ढांचा है। यदि बाब अल-मंदेब के रास्ते में जोखिम बढ़ता है, तो वह कुछ कच्चे तेल की मात्रा को स्वेज नहर और SUMED पाइपलाइन के जरिये मोड़ सकता है। इससे उसे खाड़ी के कुछ पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक लॉजिस्टिक विकल्प मिलते हैं। 6
फिर भी इससे LPG और नैफ्था का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। यनबू का फ्रैक्शनेटर पूर्व से आने वाले NGL फीड पर निर्भर रहता है, इसलिए वैकल्पिक निर्यात मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद फीडस्टॉक की आपूर्ति कमजोर रह सकती है। 17
कुवैत, बहरीन और UAE की बड़ी रिफाइनिंग प्रणालियां खाड़ी के समुद्री व्यापार और हॉर्मुज़ के रास्ते उत्पादों की निकासी से निकटता से जुड़ी हैं। कुवैत की मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्लाह, बहरीन की सितरा और UAE की प्रमुख परिसंपत्तियां हमलों, बंदी या निर्यात बाधाओं से प्रभावित प्रणालियों में शामिल थीं। 2
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इसलिए इन देशों में रिकवरी केवल क्षतिग्रस्त संयंत्रों की मरम्मत पर निर्भर नहीं करेगी। सुरक्षित समुद्री आवाजाही भी उतनी ही जरूरी होगी। संयंत्र ठीक हो जाए लेकिन उत्पाद बाहर भेजने का रास्ता सुरक्षित न हो, तो निर्यात सामान्य स्तर पर नहीं लौटेगा।
ओमान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, इसलिए उसे भौगोलिक रूप से कुछ लाभ मिलता है। हालांकि उपलब्ध Kpler साक्ष्य ओमान में हुई किसी विशिष्ट रिफाइनरी बंदी का आंकड़ा नहीं देते और न ही यह दिखाते हैं कि ओमान पूरे क्षेत्र में खोई मात्रा और उत्पादों के मिश्रण की भरपाई कर सकता है। इसलिए ओमान को क्षेत्रीय कमी का पूर्ण विकल्प बताना उपलब्ध प्रमाण से आगे जाना होगा।
Kpler की तस्वीर में रिकवरी के दो चरण हैं।
पहला चरण: यदि समुद्री आवाजाही और लॉजिस्टिक्स में सुधार आता है, तो 2026 की चौथी तिमाही के अंतिम हिस्से में इसकी शुरुआत हो सकती है। इस दौरान बची हुई रिफाइनरियां उत्पादन बढ़ा पाएंगी और उत्पादों को अधिक भरोसेमंद तरीके से भेजा जा सकेगा। 4
6
दूसरा चरण: क्षतिग्रस्त प्रोसेसिंग इकाइयों, बिजली व्यवस्था और सहायक बुनियादी ढांचे की मरम्मत में अधिक समय लगेगा। Kpler के अनुसार, क्षेत्र के युद्ध-पूर्व संचालन स्तर पर पूरी तरह लौटने की उम्मीद कम-से-कम 2027 की दूसरी तिमाही से पहले नहीं है। 4
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यह अनुमान समुद्री सुरक्षा पर निर्भर है। हॉर्मुज़ में फिर से प्रतिबंध या बाब अल-मंदेब के आसपास जारी असुरक्षा रिकवरी को 2027 में और आगे धकेल सकती है। 3
संघर्ष क्षेत्र से बाहर की रिफाइनरियां मध्य पूर्व, एशिया और रूस से कम हुई आपूर्ति की भरपाई के लिए अपनी व्यावहारिक सीमाओं के करीब चल रही हैं। Kpler इसे वैश्विक रिफाइनिंग बाजार की “दो गति” वाली स्थिति बताता है—पश्चिमी और अन्य प्रभावित न होने वाले संयंत्र तेज गति से उत्पादन कर रहे हैं, जबकि मध्य पूर्व का संचालन युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे है। 5
इस असंतुलन से डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल, LPG और नैफ्था के बाजार तंग होते हैं तथा रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बने रहते हैं। रॉयटर्स ने बताया कि इस व्यवधान से डीजल और पेट्रोल की कीमतें वर्षों तक ऊंची रह सकती हैं। रॉयटर्स द्वारा उद्धृत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमानों के अनुसार, मध्य पूर्व की 20% से अधिक रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है। 1
लेकिन ऊंचे मार्जिन नई क्षमता रातोंरात पैदा नहीं करते। वे चालू संयंत्रों को अधिकतम उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, पर क्षतिग्रस्त इकाइयों, बाधित फीडस्टॉक प्रणालियों और असुरक्षित समुद्री मार्गों को तुरंत ठीक नहीं कर सकते।
शुरुआत में बाजार ने अतिरिक्त कच्चे तेल, रास्ते में मौजूद कार्गो और फ्लोटिंग स्टोरेज के सहारे झटका संभाला। Kpler के अनुसार, ये तीनों बफर अब काफी हद तक खत्म हो चुके हैं और वाणिज्यिक भंडार में कमी ही प्रमुख शेष सुरक्षा-कवच रह गई है। 11
यही वजह है कि व्यवधान की अवधि निर्णायक बन गई है। छोटा संकट भंडार और बदले हुए व्यापार मार्गों से संभाला जा सकता है। लेकिन लंबे संकट में रिफाइनरियां और ईंधन खरीदार सीमित बैरल और तैयार उत्पादों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे कीमतों में लंबे समय तक उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ता है।
हॉर्मुज़ में सीमित आवाजाही से टैंकरों की आवाजाही घटती है, यात्रा और बीमा जोखिम बढ़ते हैं, जहाजों का शेड्यूल बिगड़ता है और उत्पादों की अलग-अलग बाजारों के बीच खरीद-बिक्री प्रभावित होती है। कार्गो को लंबे या कम दक्षता वाले मार्गों से भेजना पड़ सकता है, जिससे डिलीवरी महंगी और धीमी हो जाती है। 3
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इसका असर तेल बाजार से बाहर भी जा सकता है। महंगा परिवहन और महंगा रिफाइंड ईंधन माल ढुलाई, सड़क परिवहन, पेट्रोकेमिकल उद्योग और खाद्य वितरण की लागत बढ़ा सकते हैं। इससे व्यापक महंगाई और सप्लाई-चेन जोखिम बढ़ने की आशंका है। हालांकि उपलब्ध साक्ष्य इन प्रभावों की दिशा बताते हैं, किसी खास देश पर महंगाई के असर का परिमाण नहीं बताते। 1
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युद्धविराम नए हमलों का जोखिम घटा सकता है, लेकिन वह किसी क्षतिग्रस्त रिफाइनरी की तत्काल मरम्मत नहीं करता और न ही समुद्री गलियारे को एक झटके में सुरक्षित बना देता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भी कहा था कि युद्धविराम की घोषणा के बाद यह स्पष्ट नहीं था कि वह स्थायी शांति और हॉर्मुज़ से नियमित जहाजरानी की वापसी में बदलेगा या नहीं। 9
Kpler के विश्लेषण का मूल निष्कर्ष यही है कि रिफाइंड-प्रोडक्ट बाजार दो चीजों पर निर्भर करता है—क्षमता और कनेक्टिविटी। क्षतिग्रस्त संयंत्र उत्पादन सीमित करते हैं और असुरक्षित जलमार्ग डिलीवरी रोकते हैं। जब तक दोनों बहाल नहीं होते, मध्य पूर्व की ईंधन कमी वैश्विक भंडार, रिफाइनिंग मार्जिन, माल ढुलाई लागत और उपभोक्ता कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
Kpler का अनुमान है कि मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 7.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है।
Kpler का अनुमान है कि मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 7.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह संकट केवल कच्चे तेल की कमी नहीं है—रिफाइनरी क्षति, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सीमित आवाजाही और बाब अल मंदेब की असुरक्षा ने तैयार ईंधन की आपूर्ति को भी प्रभावित किया है।
संघर्ष क्षेत्र से बाहर की रिफाइनरियां अपनी व्यावहारिक क्षमता के करीब चल रही हैं, लेकिन वे क्षतिग्रस्त संयंत्रों और बाधित आपूर्ति मार्गों की भरपाई तुरंत नहीं कर सकतीं।
Kpler का अनुमान है कि मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 7.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह संकट केवल कच्चे तेल की कमी नहीं है—रिफाइनरी क्षति, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सीमित आवाजाही और बाब अल मंदेब की असुरक्षा ने तैयार ईंधन की आपूर्ति को भी प्रभावित किया है। संघर्ष...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What does Kpler’s analysis reveal about the Middle East’s refinery and refined-product supply disruption following the Iran war—including th. Article summary: Kpler’s assessment is that the Iran war created a refined-products shock, not merely a crude-oil disruption: physical refinery damage and impaired export routes have removed substantial Middle East fuel supply and will k. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
मध्य पूर्व में ऊर्जा संकट अब केवल कच्चे तेल की आपूर्ति का मामला नहीं रह गया है। क्षेत्र की रिफाइनरियों को नुकसान, ईंधन के निर्यात में रुकावट और प्रमुख समुद्री मार्गों पर असुरक्षा ने एक बड़ा रिफाइंड-प्रोडक्ट झटका पैदा किया है।
Kpler के अनुसार, मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (mbd) से घटकर लगभग 7.3 mbd रह गया है—यानी करीब 2.6 mbd की गिरावट। मार्च से अगस्त के बीच क्षेत्र की तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में लगभग 4 mbd की कमी आई। 4
इसका अर्थ है कि लड़ाई या हमले कम होने के बाद भी पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल, LPG और नैफ्था की आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं होगी। व्यापार मार्गों को फिर से खोलना अपेक्षाकृत तेज हो सकता है, लेकिन रिफाइनरी, बिजली और अन्य सहायक ढांचे की मरम्मत में कहीं अधिक समय लग सकता है।
Kpler के आकलन के मुताबिक, मध्य पूर्व की लगभग 4 mbd की रिफाइंड-प्रोडक्ट कमी दो हिस्सों में बंटी है: 4
यह फर्क महत्वपूर्ण है। केवल कच्चा तेल उपलब्ध होने से समस्या हल नहीं होगी। बाजार को चलाने के लिए प्रसंस्करण इकाइयां, सही फीडस्टॉक, निर्यात टर्मिनल और सुरक्षित समुद्री मार्ग—सभी की जरूरत होती है।
क्षेत्र में समस्या दोहरी है: एक ओर रिफाइनरी और संबंधित बुनियादी ढांचे को भौतिक नुकसान हुआ, दूसरी ओर उत्पादों को बाहर भेजने के रास्ते बाधित हुए। सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में कई रिफाइनरियां हमलों या एहतियाती बंदी से प्रभावित हुईं। रॉयटर्स के अनुसार, अप्रैल के मध्य तक मध्य पूर्व की 20 रिफाइनरियां या तो हमले की चपेट में आ चुकी थीं या एहतियातन बंद थीं। इससे 2.3 mbd से अधिक क्षमता बंद पड़ी थी। 2
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य ने इस नुकसान को और गंभीर बना दिया। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति, तैयार उत्पादों का निर्यात और टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई। Kpler ने बाद में चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ फिर से बंद हो गया है और बाब अल-मंदेब में भी अस्थिरता बढ़ रही है, जिससे आपूर्ति की वापसी की उम्मीदें 2027 तक खिसक गई हैं। 3
LPG और नैफ्था के लिए बाब अल-मंदेब एक अतिरिक्त जोखिम है। Kpler के अनुसार, जुलाई से इस मार्ग की नाकेबंदी ने इन उत्पादों की आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सऊदी अरब में यनबू का फ्रैक्शनेटर आम तौर पर पूर्वी क्षेत्र से अबकैक–यनबू पाइपलाइन के जरिये आने वाले NGL फीड पर निर्भर करता है। 17
मध्य पूर्व की रिकवरी अलग-अलग देशों में अलग गति से हो सकती है। इसका कारण उनकी भौगोलिक स्थिति, निर्यात ढांचा और हॉर्मुज़ पर निर्भरता है।
सऊदी अरब के पास लाल सागर के किनारे स्थित बुनियादी ढांचा है। यदि बाब अल-मंदेब के रास्ते में जोखिम बढ़ता है, तो वह कुछ कच्चे तेल की मात्रा को स्वेज नहर और SUMED पाइपलाइन के जरिये मोड़ सकता है। इससे उसे खाड़ी के कुछ पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक लॉजिस्टिक विकल्प मिलते हैं। 6
फिर भी इससे LPG और नैफ्था का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। यनबू का फ्रैक्शनेटर पूर्व से आने वाले NGL फीड पर निर्भर रहता है, इसलिए वैकल्पिक निर्यात मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद फीडस्टॉक की आपूर्ति कमजोर रह सकती है। 17
कुवैत, बहरीन और UAE की बड़ी रिफाइनिंग प्रणालियां खाड़ी के समुद्री व्यापार और हॉर्मुज़ के रास्ते उत्पादों की निकासी से निकटता से जुड़ी हैं। कुवैत की मीना अल-अहमदी और मीना अब्दुल्लाह, बहरीन की सितरा और UAE की प्रमुख परिसंपत्तियां हमलों, बंदी या निर्यात बाधाओं से प्रभावित प्रणालियों में शामिल थीं। 2
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इसलिए इन देशों में रिकवरी केवल क्षतिग्रस्त संयंत्रों की मरम्मत पर निर्भर नहीं करेगी। सुरक्षित समुद्री आवाजाही भी उतनी ही जरूरी होगी। संयंत्र ठीक हो जाए लेकिन उत्पाद बाहर भेजने का रास्ता सुरक्षित न हो, तो निर्यात सामान्य स्तर पर नहीं लौटेगा।
ओमान हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, इसलिए उसे भौगोलिक रूप से कुछ लाभ मिलता है। हालांकि उपलब्ध Kpler साक्ष्य ओमान में हुई किसी विशिष्ट रिफाइनरी बंदी का आंकड़ा नहीं देते और न ही यह दिखाते हैं कि ओमान पूरे क्षेत्र में खोई मात्रा और उत्पादों के मिश्रण की भरपाई कर सकता है। इसलिए ओमान को क्षेत्रीय कमी का पूर्ण विकल्प बताना उपलब्ध प्रमाण से आगे जाना होगा।
Kpler की तस्वीर में रिकवरी के दो चरण हैं।
पहला चरण: यदि समुद्री आवाजाही और लॉजिस्टिक्स में सुधार आता है, तो 2026 की चौथी तिमाही के अंतिम हिस्से में इसकी शुरुआत हो सकती है। इस दौरान बची हुई रिफाइनरियां उत्पादन बढ़ा पाएंगी और उत्पादों को अधिक भरोसेमंद तरीके से भेजा जा सकेगा। 4
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दूसरा चरण: क्षतिग्रस्त प्रोसेसिंग इकाइयों, बिजली व्यवस्था और सहायक बुनियादी ढांचे की मरम्मत में अधिक समय लगेगा। Kpler के अनुसार, क्षेत्र के युद्ध-पूर्व संचालन स्तर पर पूरी तरह लौटने की उम्मीद कम-से-कम 2027 की दूसरी तिमाही से पहले नहीं है। 4
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यह अनुमान समुद्री सुरक्षा पर निर्भर है। हॉर्मुज़ में फिर से प्रतिबंध या बाब अल-मंदेब के आसपास जारी असुरक्षा रिकवरी को 2027 में और आगे धकेल सकती है। 3
संघर्ष क्षेत्र से बाहर की रिफाइनरियां मध्य पूर्व, एशिया और रूस से कम हुई आपूर्ति की भरपाई के लिए अपनी व्यावहारिक सीमाओं के करीब चल रही हैं। Kpler इसे वैश्विक रिफाइनिंग बाजार की “दो गति” वाली स्थिति बताता है—पश्चिमी और अन्य प्रभावित न होने वाले संयंत्र तेज गति से उत्पादन कर रहे हैं, जबकि मध्य पूर्व का संचालन युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे है। 5
इस असंतुलन से डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल, LPG और नैफ्था के बाजार तंग होते हैं तथा रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत बने रहते हैं। रॉयटर्स ने बताया कि इस व्यवधान से डीजल और पेट्रोल की कीमतें वर्षों तक ऊंची रह सकती हैं। रॉयटर्स द्वारा उद्धृत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमानों के अनुसार, मध्य पूर्व की 20% से अधिक रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है। 1
लेकिन ऊंचे मार्जिन नई क्षमता रातोंरात पैदा नहीं करते। वे चालू संयंत्रों को अधिकतम उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं, पर क्षतिग्रस्त इकाइयों, बाधित फीडस्टॉक प्रणालियों और असुरक्षित समुद्री मार्गों को तुरंत ठीक नहीं कर सकते।
शुरुआत में बाजार ने अतिरिक्त कच्चे तेल, रास्ते में मौजूद कार्गो और फ्लोटिंग स्टोरेज के सहारे झटका संभाला। Kpler के अनुसार, ये तीनों बफर अब काफी हद तक खत्म हो चुके हैं और वाणिज्यिक भंडार में कमी ही प्रमुख शेष सुरक्षा-कवच रह गई है। 11
यही वजह है कि व्यवधान की अवधि निर्णायक बन गई है। छोटा संकट भंडार और बदले हुए व्यापार मार्गों से संभाला जा सकता है। लेकिन लंबे संकट में रिफाइनरियां और ईंधन खरीदार सीमित बैरल और तैयार उत्पादों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे कीमतों में लंबे समय तक उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ता है।
हॉर्मुज़ में सीमित आवाजाही से टैंकरों की आवाजाही घटती है, यात्रा और बीमा जोखिम बढ़ते हैं, जहाजों का शेड्यूल बिगड़ता है और उत्पादों की अलग-अलग बाजारों के बीच खरीद-बिक्री प्रभावित होती है। कार्गो को लंबे या कम दक्षता वाले मार्गों से भेजना पड़ सकता है, जिससे डिलीवरी महंगी और धीमी हो जाती है। 3
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इसका असर तेल बाजार से बाहर भी जा सकता है। महंगा परिवहन और महंगा रिफाइंड ईंधन माल ढुलाई, सड़क परिवहन, पेट्रोकेमिकल उद्योग और खाद्य वितरण की लागत बढ़ा सकते हैं। इससे व्यापक महंगाई और सप्लाई-चेन जोखिम बढ़ने की आशंका है। हालांकि उपलब्ध साक्ष्य इन प्रभावों की दिशा बताते हैं, किसी खास देश पर महंगाई के असर का परिमाण नहीं बताते। 1
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युद्धविराम नए हमलों का जोखिम घटा सकता है, लेकिन वह किसी क्षतिग्रस्त रिफाइनरी की तत्काल मरम्मत नहीं करता और न ही समुद्री गलियारे को एक झटके में सुरक्षित बना देता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भी कहा था कि युद्धविराम की घोषणा के बाद यह स्पष्ट नहीं था कि वह स्थायी शांति और हॉर्मुज़ से नियमित जहाजरानी की वापसी में बदलेगा या नहीं। 9
Kpler के विश्लेषण का मूल निष्कर्ष यही है कि रिफाइंड-प्रोडक्ट बाजार दो चीजों पर निर्भर करता है—क्षमता और कनेक्टिविटी। क्षतिग्रस्त संयंत्र उत्पादन सीमित करते हैं और असुरक्षित जलमार्ग डिलीवरी रोकते हैं। जब तक दोनों बहाल नहीं होते, मध्य पूर्व की ईंधन कमी वैश्विक भंडार, रिफाइनिंग मार्जिन, माल ढुलाई लागत और उपभोक्ता कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
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Kpler का अनुमान है कि मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 7.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है।
Kpler का अनुमान है कि मध्य पूर्व में रिफाइनरी संचालन फरवरी 2026 के 9.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 7.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह संकट केवल कच्चे तेल की कमी नहीं है—रिफाइनरी क्षति, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में सीमित आवाजाही और बाब अल मंदेब की असुरक्षा ने तैयार ईंधन की आपूर्ति को भी प्रभावित किया है।
संघर्ष क्षेत्र से बाहर की रिफाइनरियां अपनी व्यावहारिक क्षमता के करीब चल रही हैं, लेकिन वे क्षतिग्रस्त संयंत्रों और बाधित आपूर्ति मार्गों की भरपाई तुरंत नहीं कर सकतीं।