2026 की पहली तिमाही में घोषित वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी 57.13% रही। यह 2000 के आसपास 70% से अधिक थी, लेकिन डॉलर अब भी सबसे बड़ी आरक्षित मुद्रा है। डॉलर की खोई हिस्सेदारी मुख्य रूप से यूरो या चीनी रेनमिन्बी के पास नहीं गई। केंद्रीय बैंक कई छोटी मुद्राओं और परिसंपत्तियों में विविधीकरण करते द...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What evidence suggests that the U.S. dollar is undergoing its most sustained challenge in decades and could suffer an abrupt loss of confide. Article summary: The evidence supports a gradual diversification away from the dollar and a potentially more fragile confidence backdrop—not a demonstrated imminent collapse. The central risk is Eichengreen’s: reserve managers may divers. Topic tags: general, general web, user generated, government, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, wat
डॉलर को लेकर बहस अक्सर दो अतियों में चली जाती है—या तो उसकी वैश्विक बादशाहत खत्म होने की घोषणा कर दी जाती है, या फिर हर गिरावट को मामूली उतार-चढ़ाव मान लिया जाता है। उपलब्ध आंकड़े इन दोनों निष्कर्षों का समर्थन नहीं करते।
असल तस्वीर यह है कि केंद्रीय बैंक लंबे समय से अपने विदेशी मुद्रा भंडारों में विविधीकरण कर रहे हैं। लेकिन डॉलर जैसी तरलता, खुले वित्तीय बाजार और सुरक्षित परिसंपत्तियों की बड़ी आपूर्ति वाला कोई एक विकल्प अभी सामने नहीं आया है। यही वह अंतर है, जिसे लेकर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के अर्थशास्त्री और मौद्रिक इतिहासकार बैरी आइकेनग्रीन अब पहले से अधिक चिंतित हैं। उनका कहना है कि विकल्प तैयार होने से पहले डॉलर पर भरोसा अचानक कमजोर पड़ सकता है।
इस बदलाव का सबसे स्पष्ट संकेत आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अनुसार, 2024 में घोषित वैश्विक आधिकारिक भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी लगभग 58% थी। सदी की शुरुआत के आसपास यह 70% से अधिक थी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के COFER आंकड़े बताते हैं कि यह गिरावट लगातार एक जैसी नहीं रही। 2025 की चौथी तिमाही में डॉलर की हिस्सेदारी 56.42% थी, जो 2026 की पहली तिमाही में बढ़कर 57.13% हो गई। इसी अवधि में यूरो की हिस्सेदारी 20.38% से घटकर 20.03% रही, जबकि चीनी रेनमिन्बी मामूली बढ़त के साथ 1.95% से 1.99% पर पहुंचा। 2
इसलिए दीर्घकालिक दिशा विविधीकरण की है, लेकिन तिमाही आंकड़े सीधी गिरावट नहीं दिखाते। विनिमय दरों में बदलाव भी भंडारों की रिपोर्टेड हिस्सेदारी को प्रभावित कर सकते हैं, भले ही केंद्रीय बैंक अपनी परिसंपत्तियों में बड़े बदलाव न करें। IMF ने चेताया है कि ऐसे valuation effects इन तुलनाओं पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं। 8
12
डॉलर की हिस्सेदारी कम होने का अर्थ यह नहीं कि कोई दूसरी मुद्रा उसी अनुपात में उसकी जगह ले रही है। आधिकारिक भंडारों में यूरो अब भी दूसरे स्थान पर है, लेकिन काफी पीछे है। रेनमिन्बी की हिस्सेदारी अभी 2% से भी कम है। 2
IMF का COFER डेटासेट डॉलर, यूरो, रेनमिन्बी, येन, पाउंड स्टर्लिंग, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कनाडाई डॉलर, स्विस फ्रैंक और अन्य मुद्राओं को अलग-अलग दर्ज करता है। 9 यह संरचना संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक किसी एक उत्तराधिकारी को चुनने के बजाय कई छोटी मुद्राओं और परिसंपत्तियों में जोखिम बांट रहे हैं।
यह फर्क महत्वपूर्ण है। आरक्षित मुद्रा बनने के लिए केवल व्यापारिक बिलों में इस्तेमाल होना पर्याप्त नहीं है। ऐसी मुद्रा के पीछे गहरे और तरल वित्तीय बाजार, भरोसेमंद संस्थान, व्यापक रूप से मुद्रा बदलने की सुविधा और इतनी बड़ी मात्रा में सुरक्षित परिसंपत्तियां होनी चाहिए कि दुनिया भर के निवेशक उन्हें बड़े पैमाने पर रख सकें। अभी के आंकड़े विविधीकरण दिखाते हैं, डॉलर के बराबर पहुंच वाले नए विकल्प का उभरना नहीं।
आइकेनग्रीन का तर्क केवल यह नहीं है कि डॉलर समय के साथ अपना प्रभुत्व खो सकता है। उनकी चिंता एक अचानक बदलाव की है—भरोसा तेजी से कमजोर हो जाए, जबकि यूरो, रेनमिन्बी या अन्य विकल्प उस बदलाव को सुचारु रूप से संभालने के लिए तैयार न हों।
Kitco में प्रकाशित एक इंटरव्यू के अनुसार, आइकेनग्रीन ने कहा कि वह अब इस संभावना को लेकर “काफी अधिक चिंतित” हैं कि विकल्पों के तैयार होने से पहले डॉलर पर भरोसा अचानक खत्म हो सकता है। उन्होंने अपनी चिंता में बदलाव की तारीख 2 अप्रैल 2025 बताई, जब ट्रंप प्रशासन ने अपने टैरिफ कार्यक्रम की घोषणा की थी।
यह तारीख एक विशेषज्ञ का आकलन है; इससे यह साबित नहीं होता कि टैरिफ घोषणा के बाद केंद्रीय बैंकों ने डॉलर से बड़े पैमाने पर निकासी शुरू कर दी। लेकिन इससे उस तंत्र की ओर संकेत मिलता है जिस पर आरक्षित मुद्रा की स्थिति निर्भर करती है: नीतिगत स्थिरता, कानून का शासन, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और अमेरिकी ट्रेजरी बाजारों का सुचारु संचालन। यदि राजनीतिक फैसलों से ये आधार कम भरोसेमंद दिखने लगें, तो डॉलर के नेटवर्क लाभ कायम रहने के बावजूद जोखिम बढ़ सकता है।
कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स यानी CIS के देशों में आपसी व्यापार के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। अक्टूबर 2025 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि CIS देशों के बीच आपसी भुगतान “लगभग पूरी तरह” राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे हैं। 18 बाद में CIS की कार्यकारी परिषद ने 2024–2025 के लिए यह हिस्सेदारी 96% बताई।
ये आंकड़े पश्चिमी मुद्राओं पर निर्भरता घटाने की क्षेत्रीय कोशिशों का महत्वपूर्ण संकेत हैं। लेकिन इन्हें वैश्विक आरक्षित मुद्रा व्यवस्था में बदलाव का स्वतंत्र रूप से ऑडिट किया गया प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी क्षेत्रीय व्यापार समूह के भीतर स्थानीय मुद्रा में भुगतान शुरू हो जाना अपने-आप में ऐसी सार्वभौमिक आरक्षित परिसंपत्ति नहीं बनाता, जिसे दुनिया भर के बाजारों में डॉलर जैसी आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।
चेतावनी का संकेत डॉलर की हिस्सेदारी में किसी एक तिमाही की गिरावट नहीं होगा। ज्यादा गंभीर स्थिति तब बनेगी जब संस्थागत भरोसा कमजोर हो और उसके समान क्षमता वाला विकल्प उपलब्ध न हो।
अचानक झटका अधिक अस्थिरकारी हो सकता है यदि भंडार प्रबंधकों को लगे कि:
ऐसी स्थिति में भी केंद्रीय बैंक अनिवार्य रूप से अपना पैसा पूरा का पूरा यूरो, रेनमिन्बी या सोने में नहीं डालेंगे। निकट भविष्य का अधिक संभावित परिणाम कई मुद्राओं और परिसंपत्तियों वाली एक व्यापक टोकरी हो सकता है। इससे डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे घटेगी, लेकिन वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था अधिक खंडित भी हो सकती है।
फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वॉर्श का पहला जैक्सन होल मुख्य भाषण 28 अगस्त को निर्धारित है। 2026 का जैक्सन होल आर्थिक नीति संगोष्ठी 27 से 29 अगस्त तक चलेगी और इसका आधिकारिक विषय है—“Financial Innovation: Implications for Payments and Policy।”
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भुगतान तकनीक, stablecoins, tokenization, सीमा-पार भुगतान और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा से जुड़े फैसले भविष्य में डॉलर के खाते की इकाई और भुगतान मुद्रा बने रहने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, केवल एक भाषण आरक्षित मुद्रा की स्थिति तय नहीं कर सकता। मौद्रिक विश्वसनीयता, खुले पूंजी बाजार, तरल सुरक्षित परिसंपत्तियां और संस्थागत भरोसा कहीं अधिक बुनियादी कारक हैं।
उपलब्ध प्रमाण डॉलर की आरक्षित स्थिति के धीरे-धीरे कमजोर होने की ओर इशारा करते हैं, तत्काल पतन की ओर नहीं। 2000 के आसपास 70% से अधिक रही हिस्सेदारी 2026 की पहली तिमाही में 57.13% पर आ गई है, फिर भी डॉलर यूरो और रेनमिन्बी से बहुत आगे है। 2
आइकेनग्रीन की चेतावनी का सबसे मजबूत अर्थ एक tail risk के रूप में समझा जाना चाहिए: कोई विकल्प तैयार होने से पहले डॉलर पर भरोसा अचानक टूट सकता है। दुनिया अधिक विविधीकृत मौद्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, लेकिन विविधीकरण का मतलब यह नहीं कि डॉलर का उत्तराधिकारी तैयार है।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
2026 की पहली तिमाही में घोषित वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी 57.13% रही। यह 2000 के आसपास 70% से अधिक थी, लेकिन डॉलर अब भी सबसे बड़ी आरक्षित मुद्रा है।
2026 की पहली तिमाही में घोषित वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी 57.13% रही। यह 2000 के आसपास 70% से अधिक थी, लेकिन डॉलर अब भी सबसे बड़ी आरक्षित मुद्रा है। डॉलर की खोई हिस्सेदारी मुख्य रूप से यूरो या चीनी रेनमिन्बी के पास नहीं गई। केंद्रीय बैंक कई छोटी मुद्राओं और परिसंपत्तियों में विविधीकरण करते दिख रहे हैं।
रुझान एक सीधी रेखा में नहीं चल रहा है: डॉलर की हिस्सेदारी 2025 की चौथी तिमाही के 56.42% से बढ़कर 2026 की पहली तिमाही में 57.13% हो गई।
2026 की पहली तिमाही में घोषित वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी 57.13% रही। यह 2000 के आसपास 70% से अधिक थी, लेकिन डॉलर अब भी सबसे बड़ी आरक्षित मुद्रा है। डॉलर की खोई हिस्सेदारी मुख्य रूप से यूरो या चीनी रेनमिन्बी के पास नहीं गई। केंद्रीय बैंक कई छोटी मुद्राओं और परिसंपत्तियों में विविधीकरण करते द...
प्रकाशितकर्ताGPT-5.6 Luna से संपादितGPT Image 1.5 से चित्र बनाए गए
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What evidence suggests that the U.S. dollar is undergoing its most sustained challenge in decades and could suffer an abrupt loss of confide. Article summary: The evidence supports a gradual diversification away from the dollar and a potentially more fragile confidence backdrop—not a demonstrated imminent collapse. The central risk is Eichengreen’s: reserve managers may divers. Topic tags: general, general web, user generated, government, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, wat
डॉलर को लेकर बहस अक्सर दो अतियों में चली जाती है—या तो उसकी वैश्विक बादशाहत खत्म होने की घोषणा कर दी जाती है, या फिर हर गिरावट को मामूली उतार-चढ़ाव मान लिया जाता है। उपलब्ध आंकड़े इन दोनों निष्कर्षों का समर्थन नहीं करते।
असल तस्वीर यह है कि केंद्रीय बैंक लंबे समय से अपने विदेशी मुद्रा भंडारों में विविधीकरण कर रहे हैं। लेकिन डॉलर जैसी तरलता, खुले वित्तीय बाजार और सुरक्षित परिसंपत्तियों की बड़ी आपूर्ति वाला कोई एक विकल्प अभी सामने नहीं आया है। यही वह अंतर है, जिसे लेकर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के अर्थशास्त्री और मौद्रिक इतिहासकार बैरी आइकेनग्रीन अब पहले से अधिक चिंतित हैं। उनका कहना है कि विकल्प तैयार होने से पहले डॉलर पर भरोसा अचानक कमजोर पड़ सकता है।
इस बदलाव का सबसे स्पष्ट संकेत आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अनुसार, 2024 में घोषित वैश्विक आधिकारिक भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी लगभग 58% थी। सदी की शुरुआत के आसपास यह 70% से अधिक थी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के COFER आंकड़े बताते हैं कि यह गिरावट लगातार एक जैसी नहीं रही। 2025 की चौथी तिमाही में डॉलर की हिस्सेदारी 56.42% थी, जो 2026 की पहली तिमाही में बढ़कर 57.13% हो गई। इसी अवधि में यूरो की हिस्सेदारी 20.38% से घटकर 20.03% रही, जबकि चीनी रेनमिन्बी मामूली बढ़त के साथ 1.95% से 1.99% पर पहुंचा। 2
इसलिए दीर्घकालिक दिशा विविधीकरण की है, लेकिन तिमाही आंकड़े सीधी गिरावट नहीं दिखाते। विनिमय दरों में बदलाव भी भंडारों की रिपोर्टेड हिस्सेदारी को प्रभावित कर सकते हैं, भले ही केंद्रीय बैंक अपनी परिसंपत्तियों में बड़े बदलाव न करें। IMF ने चेताया है कि ऐसे valuation effects इन तुलनाओं पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं। 8
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डॉलर की हिस्सेदारी कम होने का अर्थ यह नहीं कि कोई दूसरी मुद्रा उसी अनुपात में उसकी जगह ले रही है। आधिकारिक भंडारों में यूरो अब भी दूसरे स्थान पर है, लेकिन काफी पीछे है। रेनमिन्बी की हिस्सेदारी अभी 2% से भी कम है। 2
IMF का COFER डेटासेट डॉलर, यूरो, रेनमिन्बी, येन, पाउंड स्टर्लिंग, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कनाडाई डॉलर, स्विस फ्रैंक और अन्य मुद्राओं को अलग-अलग दर्ज करता है। 9 यह संरचना संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक किसी एक उत्तराधिकारी को चुनने के बजाय कई छोटी मुद्राओं और परिसंपत्तियों में जोखिम बांट रहे हैं।
यह फर्क महत्वपूर्ण है। आरक्षित मुद्रा बनने के लिए केवल व्यापारिक बिलों में इस्तेमाल होना पर्याप्त नहीं है। ऐसी मुद्रा के पीछे गहरे और तरल वित्तीय बाजार, भरोसेमंद संस्थान, व्यापक रूप से मुद्रा बदलने की सुविधा और इतनी बड़ी मात्रा में सुरक्षित परिसंपत्तियां होनी चाहिए कि दुनिया भर के निवेशक उन्हें बड़े पैमाने पर रख सकें। अभी के आंकड़े विविधीकरण दिखाते हैं, डॉलर के बराबर पहुंच वाले नए विकल्प का उभरना नहीं।
आइकेनग्रीन का तर्क केवल यह नहीं है कि डॉलर समय के साथ अपना प्रभुत्व खो सकता है। उनकी चिंता एक अचानक बदलाव की है—भरोसा तेजी से कमजोर हो जाए, जबकि यूरो, रेनमिन्बी या अन्य विकल्प उस बदलाव को सुचारु रूप से संभालने के लिए तैयार न हों।
Kitco में प्रकाशित एक इंटरव्यू के अनुसार, आइकेनग्रीन ने कहा कि वह अब इस संभावना को लेकर “काफी अधिक चिंतित” हैं कि विकल्पों के तैयार होने से पहले डॉलर पर भरोसा अचानक खत्म हो सकता है। उन्होंने अपनी चिंता में बदलाव की तारीख 2 अप्रैल 2025 बताई, जब ट्रंप प्रशासन ने अपने टैरिफ कार्यक्रम की घोषणा की थी।
यह तारीख एक विशेषज्ञ का आकलन है; इससे यह साबित नहीं होता कि टैरिफ घोषणा के बाद केंद्रीय बैंकों ने डॉलर से बड़े पैमाने पर निकासी शुरू कर दी। लेकिन इससे उस तंत्र की ओर संकेत मिलता है जिस पर आरक्षित मुद्रा की स्थिति निर्भर करती है: नीतिगत स्थिरता, कानून का शासन, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और अमेरिकी ट्रेजरी बाजारों का सुचारु संचालन। यदि राजनीतिक फैसलों से ये आधार कम भरोसेमंद दिखने लगें, तो डॉलर के नेटवर्क लाभ कायम रहने के बावजूद जोखिम बढ़ सकता है।
कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स यानी CIS के देशों में आपसी व्यापार के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। अक्टूबर 2025 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि CIS देशों के बीच आपसी भुगतान “लगभग पूरी तरह” राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे हैं। 18 बाद में CIS की कार्यकारी परिषद ने 2024–2025 के लिए यह हिस्सेदारी 96% बताई।
ये आंकड़े पश्चिमी मुद्राओं पर निर्भरता घटाने की क्षेत्रीय कोशिशों का महत्वपूर्ण संकेत हैं। लेकिन इन्हें वैश्विक आरक्षित मुद्रा व्यवस्था में बदलाव का स्वतंत्र रूप से ऑडिट किया गया प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी क्षेत्रीय व्यापार समूह के भीतर स्थानीय मुद्रा में भुगतान शुरू हो जाना अपने-आप में ऐसी सार्वभौमिक आरक्षित परिसंपत्ति नहीं बनाता, जिसे दुनिया भर के बाजारों में डॉलर जैसी आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।
चेतावनी का संकेत डॉलर की हिस्सेदारी में किसी एक तिमाही की गिरावट नहीं होगा। ज्यादा गंभीर स्थिति तब बनेगी जब संस्थागत भरोसा कमजोर हो और उसके समान क्षमता वाला विकल्प उपलब्ध न हो।
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ऐसी स्थिति में भी केंद्रीय बैंक अनिवार्य रूप से अपना पैसा पूरा का पूरा यूरो, रेनमिन्बी या सोने में नहीं डालेंगे। निकट भविष्य का अधिक संभावित परिणाम कई मुद्राओं और परिसंपत्तियों वाली एक व्यापक टोकरी हो सकता है। इससे डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे घटेगी, लेकिन वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था अधिक खंडित भी हो सकती है।
फेडरल रिजर्व के चेयर केविन वॉर्श का पहला जैक्सन होल मुख्य भाषण 28 अगस्त को निर्धारित है। 2026 का जैक्सन होल आर्थिक नीति संगोष्ठी 27 से 29 अगस्त तक चलेगी और इसका आधिकारिक विषय है—“Financial Innovation: Implications for Payments and Policy।”
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भुगतान तकनीक, stablecoins, tokenization, सीमा-पार भुगतान और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा से जुड़े फैसले भविष्य में डॉलर के खाते की इकाई और भुगतान मुद्रा बने रहने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, केवल एक भाषण आरक्षित मुद्रा की स्थिति तय नहीं कर सकता। मौद्रिक विश्वसनीयता, खुले पूंजी बाजार, तरल सुरक्षित परिसंपत्तियां और संस्थागत भरोसा कहीं अधिक बुनियादी कारक हैं।
उपलब्ध प्रमाण डॉलर की आरक्षित स्थिति के धीरे-धीरे कमजोर होने की ओर इशारा करते हैं, तत्काल पतन की ओर नहीं। 2000 के आसपास 70% से अधिक रही हिस्सेदारी 2026 की पहली तिमाही में 57.13% पर आ गई है, फिर भी डॉलर यूरो और रेनमिन्बी से बहुत आगे है। 2
आइकेनग्रीन की चेतावनी का सबसे मजबूत अर्थ एक tail risk के रूप में समझा जाना चाहिए: कोई विकल्प तैयार होने से पहले डॉलर पर भरोसा अचानक टूट सकता है। दुनिया अधिक विविधीकृत मौद्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, लेकिन विविधीकरण का मतलब यह नहीं कि डॉलर का उत्तराधिकारी तैयार है।
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
2026 की पहली तिमाही में घोषित वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी 57.13% रही। यह 2000 के आसपास 70% से अधिक थी, लेकिन डॉलर अब भी सबसे बड़ी आरक्षित मुद्रा है।
2026 की पहली तिमाही में घोषित वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडारों में डॉलर की हिस्सेदारी 57.13% रही। यह 2000 के आसपास 70% से अधिक थी, लेकिन डॉलर अब भी सबसे बड़ी आरक्षित मुद्रा है। डॉलर की खोई हिस्सेदारी मुख्य रूप से यूरो या चीनी रेनमिन्बी के पास नहीं गई। केंद्रीय बैंक कई छोटी मुद्राओं और परिसंपत्तियों में विविधीकरण करते दिख रहे हैं।
रुझान एक सीधी रेखा में नहीं चल रहा है: डॉलर की हिस्सेदारी 2025 की चौथी तिमाही के 56.42% से बढ़कर 2026 की पहली तिमाही में 57.13% हो गई।