ट्रंप ने कहा कि इटली, जर्मनी और फ्रांस ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देकर NATO एकजुटता की परीक्षा में उन्हें निराश किया। उन्होंने चेतावनी दी कि नकारात्मक प्रतिक्रिया होने पर NATO का भविष्य “बहुत खराब” हो सकता है।... इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों के लिए इतालवी सैन्य अड्डो...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did President Donald Trump say about Italy and Germany as NATO partners during the Iran conflict, why did he threaten to withhold futur. Article summary: Trump’s message was that Italy and Germany had failed a test of NATO solidarity by declining to support the U.S.-Israeli campaign against Iran and the U.S. effort to reopen the Strait of Hormuz. He used that refusal to q. Topic tags: general, news, general web, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके यूरोपीय NATO सहयोगियों के बीच विवाद केवल समुद्री मार्ग की सुरक्षा का सवाल नहीं था। ट्रंप ने इटली और जर्मनी समेत यूरोपीय देशों के ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इज़राइली युद्ध में शामिल न होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बलपूर्वक खोलने में मदद से इनकार को NATO साझेदारी की परीक्षा के रूप में पेश किया। अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि सहयोगियों की परीक्षा हो चुकी है और सवाल उठाया कि जिस गठबंधन के सदस्य संकट के समय अमेरिका के साथ खड़े नहीं होते, उस पर वॉशिंगटन भारी खर्च क्यों जारी रखे। 89
यूरोपीय देशों ने इसका अलग तर्क दिया। उनके लिए NATO के प्रति प्रतिबद्धता और ऐसे युद्ध में शामिल होना दो अलग बातें थीं, जिसे उन्होंने शुरू नहीं किया था। इटली, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने होर्मुज़ अभियान को NATO का लड़ाकू मिशन बनाने का विरोध किया। उन्होंने सुरक्षित नौवहन और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया, लेकिन संघर्ष जारी रहने के दौरान ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकाबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया। 21
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान का समर्थन न करने पर इटली और जर्मनी को “निराश करने वाला” बताया। उन्होंने इसे किसी एक समुद्री अभियान पर मतभेद के बजाय इस सवाल के रूप में पेश किया कि क्या NATO सहयोगी संकट में अमेरिका के साथ खड़े होंगे। 89
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सहयोगी होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सैन्य मदद की उनकी मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देते, तो NATO का “बहुत खराब भविष्य” हो सकता है। इस दबाव अभियान में यूरोप में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी घटाने की धमकी और उन सहयोगियों की लगातार आलोचना शामिल थी, जिन्हें ट्रंप सामूहिक सुरक्षा में पर्याप्त योगदान न देने वाला मानते हैं। 714
इटली इस विवाद का सबसे व्यक्तिगत केंद्र बन गया। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईरान युद्ध में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए इतालवी अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी। ट्रंप ने कहा कि इस फैसले से उनके और मेलोनी के संबंधों को नुकसान पहुंचा, हालांकि उन्होंने उन्हें “अच्छी इंसान” भी कहा। 15
मेलोनी ने जवाब दिया कि संघर्ष की शुरुआत से ही इटली की नीति स्पष्ट रही है और उन्हें अपने रुख पर कोई पछतावा नहीं है। उनका रुख कई यूरोपीय सरकारों की उस साझा सोच को दर्शाता है कि पश्चिमी गठबंधन के प्रति प्रतिबद्ध रहना और ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के लिए अपने क्षेत्र या सेनाएं उपलब्ध कराना एक ही बात नहीं है। 35
जर्मनी ने संघर्ष में NATO की भूमिका को खारिज किया। रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा, “यह हमारा युद्ध नहीं है; हमने इसे शुरू नहीं किया।” बर्लिन ने कूटनीति पर जोर दिया और युद्ध जारी रहने के दौरान सैन्य भागीदारी का विरोध किया।
ब्रिटेन का रुख अपेक्षाकृत सक्रिय, लेकिन सीमित था। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन सहयोगियों के साथ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन वह व्यापक युद्ध में नहीं खिंचेगा। ब्रिटेन के संभावित योगदान को शांतिपूर्ण और रक्षात्मक बताया गया तथा इसे ऐसी सुरक्षा परिस्थितियों से जोड़ा गया, जिनमें मिशन लड़ाकू और तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई न बन जाए। 22
फ्रांस ने भी इसी तरह की सावधानी बरती। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने किसी भी फ्रांसीसी सैन्य भागीदारी को सख्ती से रक्षात्मक बताया। पेरिस ने NATO को सक्रिय करने के बजाय ब्रिटेन के साथ अलग समुद्री पहल पर काम किया। 417
इसका मतलब यह नहीं था कि यूरोपीय देश वॉशिंगटन को कोई सहायता नहीं दे रहे थे या समुद्री सुरक्षा को महत्व नहीं दे रहे थे। उनका तर्क यह था कि ईरान के खिलाफ एक वैकल्पिक सैन्य अभियान को NATO की सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता का स्वतः हिस्सा नहीं माना जा सकता। इसी अंतर को समझना पूरे विवाद की कुंजी है।
NATO की बाद की भूमिका जानबूझकर सीमित रखी गई। सुप्रीम हेडक्वार्टर्स एलाइड पावर्स यूरोप ने इच्छुक सहयोगी देशों के रक्षा प्रमुखों की वीडियो बैठक आयोजित की, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए संभावित राष्ट्रीय योगदानों पर चर्चा हुई। NATO ने स्पष्ट किया कि इस बैठक से कोई NATO मिशन नहीं बना है। 19
व्यवहार में गठबंधन एक मंच और समन्वयक की भूमिका निभा रहा है। अलग-अलग देश अपने स्तर पर जहाज, लॉजिस्टिक्स या अन्य सहायता देने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन अभियान NATO कमान के तहत नहीं चलाया जा रहा और इसे गठबंधन का सामूहिक हस्तक्षेप नहीं बताया गया है। Reuters के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य NATO की समन्वय क्षमता का इस्तेमाल करना है, बिना समुद्री अभियान को औपचारिक रूप से NATO ऑपरेशन बनाए।
इस ढांचे से सरकारें जहाजों की सुरक्षा, रसद और समुद्री निगरानी पर बात कर सकती हैं, जबकि ईरान युद्ध में सीधे शामिल होने पर अपनी राजनीतिक और कानूनी आपत्तियां बरकरार रखती हैं।
फ्रांस और ब्रिटेन ने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए इच्छुक देशों का अलग गठबंधन बनाने की कोशिश की है। प्रस्तावित मिशन का उद्देश्य रक्षात्मक उपायों और जहाजों को सुरक्षा-एस्कॉर्ट देकर व्यापारिक नौवहन को भरोसा दिलाना है। इसे लड़ाई खत्म होने या सुरक्षा हालात स्थिर होने के बाद शुरू करने की बात कही गई है। 2022
इस कूटनीतिक प्रयास में व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी दिखाई गई। फ्रांस और ब्रिटेन ने अप्रैल में 51 देशों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर आयोजित शिखर बैठक में बुलाया। बैठक में नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानून, आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया गया। 17
यह पहल ट्रंप की ईरानी बंदरगाहों की प्रस्तावित नाकाबंदी से जानबूझकर अलग है। NATO सहयोगियों ने नाकाबंदी का समर्थन नहीं किया और इसके बजाय ऐसा रास्ता चुना, जो सक्रिय सैन्य संघर्ष समाप्त होने के बाद शुरू हो। 21
होर्मुज़ जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा निर्यात और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री संकरा मार्ग है। Reuters के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की करीब पांचवीं कच्चे तेल की आपूर्ति इसी जलमार्ग से गुजरती है। लंबे समय तक रुकावट से तेल की कीमतों, जहाजरानी शुल्क, बीमा और माल ढुलाई बाजार पर असर पड़ सकता है। 21
संकट के दौरान यह भी स्पष्ट नहीं रहा कि जलडमरूमध्य वास्तव में खुला है या नहीं। ट्रंप ने कहा कि मार्ग चालू है, जबकि तेहरान का कहना था कि उसकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी है।
यह अनिश्चितता तब भी महत्वपूर्ण होती है जब जहाजों पर सीधे हमले न हो रहे हों। जहाज मालिकों, बीमा कंपनियों और ऊर्जा कारोबारियों को भरोसा चाहिए कि जहाज सुरक्षित और अनुमानित परिस्थितियों में गुजर सकेंगे। केवल औपचारिक रूप से रास्ता खुला होना और नियमित वाणिज्यिक यातायात के लिए स्थिर मार्ग उपलब्ध होना एक ही बात नहीं है।
नौसैनिक एस्कॉर्ट कुछ जहाजों की सुरक्षा कर सकता है, लेकिन वह अकेले टिकाऊ नौवहन व्यवस्था नहीं बना सकता। ईरान जलडमरूमध्य के एक हिस्से पर नियंत्रण रखता है और यातायात को बाधित या धमकी देने की क्षमता भी रखता है। इसलिए राजनयिकों का आकलन था कि किसी स्थायी समुद्री व्यवस्था के लिए तेहरान की सहमति आवश्यक होगी।
इसी वजह से यूरोपीय योजना कूटनीति और युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर जोर देती है। ईरान के साथ समझौते के बिना बलपूर्वक रास्ता खोलने की कोशिश युद्ध का एक नया मोर्चा बन सकती है, न कि सामान्य जहाजरानी बहाल करने का उपाय। Reuters ने बताया कि प्रस्तावित पहल को ईरान द्वारा खारिज किए जाने से किसी समझौते की संभावना कम हो गई।
व्यावहारिक समस्या इसलिए सैन्य जितनी ही राजनीतिक भी है: जिन देशों से जहाज भेजने को कहा जा रहा है, वे चाहते हैं कि संघर्ष रुके, जबकि ईरान उस व्यवस्था को अस्वीकार कर चुका है जिसे वह अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियान से जुड़ा मानता है।
होर्मुज़ का टकराव ट्रंप की सहयोगियों पर दबाव बनाने की व्यापक शैली को दिखाता है। उन्होंने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार को गठबंधन के प्रति अपर्याप्त निष्ठा का प्रमाण बताया है और अमेरिकी समर्थन या यूरोप में सैनिकों की तैनाती घटाने की संभावना को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया है। 714
इसके विपरीत, यूरोपीय सरकारों ने सहयोग बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन इस धारणा को स्वीकार नहीं किया कि NATO को अमेरिका के हर सैन्य अभियान में शामिल होना चाहिए। उनका कहना है कि समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण है, पर NATO का सामूहिक रक्षा ढांचा गठबंधन के सामान्य उद्देश्य से बाहर शुरू किए गए हर युद्ध पर स्वतः लागू नहीं हो सकता।
फिलहाल समझौता रणनीतिक से अधिक प्रक्रियात्मक है: NATO चर्चाओं में मदद कर सकता है, जबकि फ्रांस, ब्रिटेन और अन्य इच्छुक देश अलग रक्षात्मक गठबंधन तैयार कर सकते हैं। नियमित जहाजरानी बहाल होगी या नहीं, यह NATO के नाम से कम और युद्धविराम, विश्वसनीय सुरक्षा परिस्थितियों तथा ईरान की शर्तें स्वीकार करने की इच्छा पर अधिक निर्भर करेगा।
Studio Global AI
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ट्रंप ने कहा कि इटली, जर्मनी और फ्रांस ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देकर NATO एकजुटता की परीक्षा में उन्हें निराश किया। उन्होंने चेतावनी दी कि नकारात्मक प्रतिक्रिया होने पर NATO का भविष्य “बहुत खराब” हो सकता है।...
ट्रंप ने कहा कि इटली, जर्मनी और फ्रांस ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देकर NATO एकजुटता की परीक्षा में उन्हें निराश किया। उन्होंने चेतावनी दी कि नकारात्मक प्रतिक्रिया होने पर NATO का भविष्य “बहुत खराब” हो सकता है।... इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों के लिए इतालवी सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी और कहा कि उन्हें अपनी नीति पर कोई पछतावा नहीं है। [1][3][5]
जर्मनी ने कहा कि यह NATO का युद्ध नहीं है, जबकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने होर्मुज़ को फिर से खोलने की योजना पर सहयोग की बात कही, लेकिन व्यापक युद्ध में शामिल होने से इनकार किया। [27][35]