इस अंतर को समझना जरूरी है: उपलब्ध रिपोर्टिंग राजनीतिक मकसद की संभावना पर एक आरोप या आकलन का समर्थन करती है, लेकिन यह साबित नहीं करती कि नेतन्याहू ने चुनावी कारणों से हमला करवाया था।
इज़राइल ने हमले को सुरक्षा संबंधी कार्रवाई बताया। इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, सीरिया अबू अल-दुहूर में तुर्की सैनिकों को तैनात करने की अनुमति देने के करीब था। इज़राइल ने इसे अपने लिए खतरा और इज़राइल-सीरिया के बीच बने सुरक्षा यथास्थिति समझौते का उल्लंघन माना। इज़राइल का कहना है कि उसने सीरिया को कई बार चेतावनी दी और तुर्की की संभावित गतिविधि से जुड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की। AM
बराक ने इस दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इज़राइल द्वारा साझा की गई जानकारी की समीक्षा की, लेकिन उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि तुर्की एयरबेस पर सैनिक तैनात करने की तैयारी कर रहा था। AM
इस तरह मामला एक सुलझे हुए घटनाक्रम के बजाय दो अलग-अलग खुफिया आकलनों का विवाद बन गया है:
उपलब्ध स्रोत यह स्वतंत्र रूप से तय नहीं करते कि दोनों में से कौन-सा खुफिया आकलन सही था।
बराक की सबसे गंभीर चिंता सैन्य संपर्क और सूचना-साझाकरण की कमी को लेकर थी। उन्होंने कहा कि तुर्की को पहले से यह नहीं बताया गया था कि इज़राइली विमान सीरियाई एयरबेस की ओर जा रहे हैं या उनका मिशन क्या है। तुर्की की सेना ने विमानों को उत्तर दिशा में अपने क्षेत्र की ओर बढ़ते देखा और वह संभावित जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर सकती थी। RI
ऐसी स्थिति में तुर्की के पायलट यह समझ सकते थे कि उनके अपने सैनिकों या ठिकानों पर हमला होने वाला है और वे लड़ाकू विमान भेज सकते थे। इससे इज़राइली और तुर्की विमान तेजी से बढ़ते हवाई टकराव में आमने-सामने आ सकते थे। सीरिया भी इस संकट में खिंच सकता था। बराक ने कहा कि हमले में इज़राइल और नाटो सदस्य तुर्की के बीच, साथ ही सीरिया के साथ, सीधे सैन्य टकराव का “वास्तविक जोखिम” था। YI
खतरा केवल एयरबेस को निशाना बनाए जाने से नहीं था। असली जोखिम यह था कि तुर्की की सेना सीमा के पास की इस अचानक कार्रवाई को वास्तविक समय में गलत समझ सकती थी। इसी खतरे को कम करने के लिए अमेरिका ने तुर्की, इज़राइल और सीरिया के बीच सैन्य संपर्क और “डी-कन्फ्लिक्शन” व्यवस्था बनाने की पहल की। इसका उद्देश्य है कि अलग-अलग पक्षों की सैन्य कार्रवाइयां गलती से एक-दूसरे से न टकराएं। RH
तुर्की ने हमले की निंदा की और सीरिया में तुर्की की सैन्य योजना को लेकर इज़राइल के दावों को “बेबुनियाद” बताया। अंकारा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उस कार्रवाई के खिलाफ प्रतिक्रिया देने की मांग की, जिसे उसने इज़राइल की बढ़ती आक्रामकता का हिस्सा बताया। R
सीरिया ने हमले को अनुचित आक्रामकता और अपनी संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन कहा। सीरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, अबू अल-दुहूर एयरबेस के रनवे और भंडारण सुविधाओं पर आठ इज़राइली हमले हुए। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी। RAP
दोनों देशों की आपत्तियां अलग-अलग थीं: तुर्की ने कथित सैन्य जमावड़े के इज़राइली दावे को खारिज किया, जबकि सीरिया ने अपनी धरती पर सैन्य ढांचे पर हमला करने के इज़राइल के अधिकार को ही नकार दिया।
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने बराक की टिप्पणियों को “गलतियों से भरा” बताया। काट्ज़ के अनुसार, इज़राइल ने अमेरिकी अधिकारियों को खुफिया जानकारी दी थी और सेना ने तुर्की की कथित मंशा से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद एयरबेस पर हमला करने की सिफारिश कई बार की थी। TM
काट्ज़ ने यह भी कहा कि कार्रवाई से पहले सीरिया को चेतावनी दी गई थी। यह बयान बराक के उस आकलन से सीधे टकराता है जिसमें उन्होंने हमले के औचित्य और खुफिया निष्कर्षों पर सवाल उठाए थे। ET
इस विवाद का बड़ा कूटनीतिक असर यह है कि इज़राइल और अमेरिका के करीबी संबंधों के बावजूद दोनों पक्षों की सार्वजनिक कहानी अलग हो गई है—एक ओर हमले के पीछे की खुफिया जानकारी पर मतभेद है, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई से पहले संचार को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
बराक ने कहा कि तुर्की, इज़राइल और सीरिया अमेरिका की भागीदारी के साथ हर शाम आईएसआईएस के लड़ाकों के खिलाफ अभियान को लेकर समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता का खालीपन जारी रहने पर आईएसआईएस दोबारा मजबूत होने की कोशिश कर सकता है। E
यह जानकारी क्षेत्र की स्थिति में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास दिखाती है। सरकारें सार्वजनिक रूप से अबू अल-दुहूर हमले की निंदा या उसका बचाव कर रही हैं, लेकिन पर्दे के पीछे आईएसआईएस से निपटने और आकस्मिक सैन्य टकराव रोकने के लिए सीमित सुरक्षा संपर्क बनाए हुए हैं।
इस समन्वय का अर्थ यह नहीं है कि तुर्की, इज़राइल और सीरिया ने अपने व्यापक विवाद सुलझा लिए हैं। इससे केवल इतना संकेत मिलता है कि साझा और तत्काल हित होने पर वे सीमित, उद्देश्य-विशेष सहयोग कर सकते हैं—जैसे आईएसआईएस की वापसी रोकना या अनजाने सैन्य टकराव से बचना। क्षेत्रीय प्रभाव, सैन्य तैनाती, संप्रभुता और सीरिया में इज़राइल की कार्रवाई की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर उनका टकराव अब भी कायम है। RE
टॉम बराक का आरोप है कि अबू अल-दुहूर पर इज़राइल का हमला टाला जा सकने वाला उकसावा था, जिसके पीछे घोषित सुरक्षा कारणों से आगे की राजनीतिक या रणनीतिक मंशा हो सकती थी। उन्होंने “तुर्की को उकसाने” और इज़राइल के आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने की संभावनाओं का उल्लेख किया। बराक के अनुसार, अमेरिकी खुफिया जानकारी ने तुर्की की आसन्न सैन्य तैनाती के इज़राइली दावे की पुष्टि नहीं की और तुर्की को पहले से सूचना न देने से हवाई टकराव का वास्तविक खतरा पैदा हुआ। AT
इज़राइल इस पूरे विवरण को खारिज करता है। काट्ज़ का कहना है कि हमला स्पष्ट खुफिया जानकारी पर आधारित था, जानकारी अमेरिकी अधिकारियों के साथ साझा की गई थी और सीरिया को पहले चेतावनियां दी गई थीं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री इस अहम खुफिया विवाद का अंतिम समाधान नहीं देती, लेकिन यह जरूर दिखाती है कि अबू अल-दुहूर हमले ने पर्दे के पीछे जारी सहयोग और खुले सैन्य कदमों के बीच खतरनाक अंतर उजागर कर दिया।