१२ जून २०२६ से पैक्ट लागू होने के बाद ऑस्ट्रिया से चार शरण आवेदकों का इटली स्थानांतरण दर्ज है, जबकि जर्मनी से तीन स्थानांतरण की रिपोर्ट है; कई अन्य देश भी ऐसे मामलों को फिर शुरू करना चाहते हैं। [5][11] पैक्ट यह नहीं कहता कि हर शरण आवेदक को अनिवार्य रूप से उसी पहले ईयू देश में आवेदन करना होगा, जहां वह दाखिल हुआ था; य...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How has the EU Migration and Asylum Pact, which took effect on June 12 and streamlined Dublin Regulation transfers requiring asylum seekers. Article summary: The Pact has revived and accelerated responsibility transfers to Italy, but it does not simply mandate that every applicant claim asylum in the first EU country entered. It sets responsibility rules—often making the firs. Topic tags: general, government, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
यूरोपीय संघ का माइग्रेशन और असाइलम पैक्ट १२ जून २०२६ से पूरी तरह लागू हो गया। इसने दो साल की संक्रमण अवधि खत्म करते हुए सीमा-जांच, शरण-प्रक्रिया, वापसी, जिम्मेदारी तय करने और सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए नया ढांचा तैयार किया है। HR
इस व्यवस्था की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा इटली के इर्द-गिर्द हो रही है। जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्वीडन, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड और अब नीदरलैंड उन मामलों को फिर से सक्रिय करना चाहते हैं, जिनमें किसी शरण-आवेदक का मामला इटली की जिम्मेदारी माना जा सकता है।
इससे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के सामने एक असहज स्थिति पैदा हुई है। जिस यूरोपीय व्यवस्था को इटली जैसे प्रमुख आगमन वाले देशों की मदद और जिम्मेदारी बांटने के साधन के रूप में पेश किया गया था, वही अब इटली को अधिक लोगों को स्वीकार करने के लिए बाध्य कर सकती है—जबकि एकजुटता के दूसरे उपाय अभी सीमित और विवादित हैं।
यह पैक्ट केवल ‘पहले देश में आवेदन’ वाले पुराने विचार का नया नाम नहीं है। इसमें अनियमित रूप से आने वालों की स्क्रीनिंग और पंजीकरण, तेज शरण और वापसी प्रक्रिया, आवेदनों पर नजर रखने वाली डिजिटल प्रणालियां, जिम्मेदारी तय करने के स्पष्ट नियम और प्रवासन दबाव झेल रहे देशों के लिए एकजुटता तंत्र शामिल हैं। HR
व्यवहार में, जिस ईयू देश से होकर कोई व्यक्ति पहली बार दाखिल हुआ हो, वह अक्सर उसके शरण आवेदन की जांच के लिए जिम्मेदार रह सकता है। नए नियमों का उद्देश्य ऐसे स्थानांतरणों को अधिक स्पष्ट, लागू करने योग्य और व्यावहारिक बनाना भी है। स्वीडन ने कहा है कि वह पैक्ट के नियमों को लागू करेगा और सभी सदस्य देशों से अपनी जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा करता है। फिनलैंड ने भी संकेत दिया है कि नए असाइलम एंड माइग्रेशन मैनेजमेंट रेगुलेशन के तहत पहले प्रवेश वाले देश में स्थानांतरण फिर शुरू हो सकता है। N
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण फर्क है। डबलिन व्यवस्था या उसके उत्तराधिकारी नियमों के तहत किसी व्यक्ति को इटली भेजा जाना अपने-आप में ऐसे व्यक्ति का निर्वासन नहीं है, जिसका शरण आवेदन पहले ही खारिज हो चुका हो। आम तौर पर ये मामले उन शरण-आवेदकों से जुड़े होते हैं, जिन्होंने एक देश में सुरक्षा मांगी, लेकिन उससे पहले किसी दूसरे देश में प्रवेश किया था। इसलिए हर स्थानांतरित व्यक्ति को ‘असफल शरणार्थी’ कहना उपलब्ध रिपोर्टिंग से आगे बढ़ जाना होगा। T
ऑस्ट्रिया ने १२ जून के बाद इटली में चार स्थानांतरणों की जानकारी दी है। इन लोगों ने सार्वजनिक परिवहन से यात्रा की और अधिकारियों ने उन्हें ट्रेन या बस के टिकट उपलब्ध कराए। UE
जर्मनी ने भी इटली और ग्रीस को स्थानांतरण फिर शुरू करने की कोशिश की है। बर्लिन का तर्क है कि जिम्मेदारी तय करने वाली व्यवस्था का प्रभावी संचालन साझा यूरोपीय शरण प्रणाली के लिए जरूरी है। DE जर्मनी से तीन स्थानांतरण पूरे होने की भी रिपोर्ट है, हालांकि उपलब्ध स्रोत पूरे संभावित मामलों की अंतिम संख्या स्थापित नहीं करते।
डबलिन व्यवस्था से जुड़े, लेकिन ईयू के सदस्य न होने वाले स्विट्जरलैंड ने भी इन नियमों को लागू करने की दिशा में कदम उठाया है। स्वीडन और फिनलैंड ने नए ढांचे का पालन करने की पुष्टि की है या उसका संकेत दिया है। नीदरलैंड ने भी इटली से जुड़े मामलों को वापस भेजने का इरादा जताया है। II
यहां १०,००० स्थानांतरणों का आंकड़ा सावधानी से देखना चाहिए। उपलब्ध स्रोत इसे किसी आधिकारिक लक्ष्य या निश्चित अनुमान के रूप में स्थापित नहीं करते। यह अधिकतर संभावित मामलों का राजनीतिक या मीडिया अनुमान है। इसी तरह, फ्रांस और स्पेन ने सभी ऐसे स्थानांतरण स्थायी रूप से ठुकरा दिए हैं—यह दावा भी मजबूत और स्वतंत्र स्रोतों से निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं होता।
इटली का मुख्य कानूनी तर्क संक्रमण अवधि से जुड़ा है। रोम का कहना है कि नई व्यवस्था उन लोगों पर लागू होनी चाहिए, जिनकी संबंधित आवाजाही या शरण-प्रक्रिया १२ जून के बाद के नियमों के दायरे में आती है। पुराने मामलों को नए नियमों के तहत फिर से खोलना उचित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, इटली और कुछ अन्य सरकारों के बीच इसी बात पर मतभेद है कि १२ जून से पहले के मामलों में भी स्थानांतरण किया जा सकता है या नहीं। I
यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वास्तविक असर केवल इस कानूनी सिद्धांत पर निर्भर नहीं करेगा कि जिम्मेदारी किसकी है। यह भी तय करेगा कि कौन-से मामले स्थानांतरण के योग्य हैं, स्थानांतरण की समय-सीमा कितनी है और प्राप्त करने वाला देश व्यक्तिगत अनुरोध स्वीकार करता है या नहीं। यूरोपीय आयोग ने पैक्ट को जिम्मेदारी और एकजुटता के बीच संतुलन बताया है, लेकिन लागू करने की प्रक्रिया में पहले ही प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव सामने आ चुके हैं।
इटली की सरकार का यह दावा भी सामने आया है कि उसने २०२३ से लगभग ८०,००० स्थानांतरण अनुरोध खारिज किए हैं। उपलब्ध मजबूत स्रोतों में यह आंकड़ा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है; इसलिए इसे इतालवी सरकार का दावा ही माना जाना चाहिए।
विपक्षी नेता मत्तेओ रेन्ज़ी और एली श्लाइन का आरोप है कि मेलोनी ने यूरोपीय स्तर पर कड़े प्रवासन ढांचे का समर्थन किया था। इसे इटली की रक्षा करने और उस पर दबाव कम करने के उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया। लेकिन अब वही व्यवस्था दूसरे देशों को कुछ शरण-आवेदकों को इटली वापस भेजने का अधिक स्पष्ट रास्ता दे रही है। IT
आलोचना का सार यह है कि इटली को प्रमुख आगमन वाले देश की जिम्मेदारियां तो निभानी पड़ सकती हैं, लेकिन यूरोपीय साझेदारों से मिलने वाली व्यावहारिक राहत अभी पर्याप्त नहीं दिख रही।
यह राजनीतिक हमला इसलिए असरदार है क्योंकि पैक्ट को पुराने डबलिन सिस्टम की कमजोरियों का सामूहिक यूरोपीय समाधान बताया गया था। यदि जिम्मेदारी वाले स्थानांतरण तेज हो जाते हैं, लेकिन लोगों के पुनर्वितरण, आर्थिक सहायता और अन्य एकजुटता उपाय सीमित रहते हैं, तो यह व्यवस्था बोझ बांटने के बजाय इटली की ‘यूरोप के स्वागत केंद्र’ वाली भूमिका को औपचारिक रूप देती हुई दिख सकती है।
एकजुटता की वास्तविक सीमा भी विवाद का विषय है। यूरोन्यूज़ के अनुसार, इस वर्ष ९,००० से कम शरण-आवेदकों के पुनर्वितरण की उम्मीद थी, जबकि न्यूनतम एकजुटता मानक ३०,००० का था। इसके साथ आर्थिक योगदान का प्रावधान भी है। E यही अंतर बताता है कि अब तक दर्ज स्थानांतरणों की संख्या कम होने के बावजूद यह विवाद इतना राजनीतिक महत्व क्यों रखता है।
मेलोनी ‘बूमरैंग’ वाली व्याख्या को खारिज करती हैं। उनकी सरकार का कहना है कि पैक्ट से सीमावर्ती और प्रमुख आगमन वाले देशों को स्पष्ट जिम्मेदारी नियम, तेज स्क्रीनिंग और प्रत्यावर्तन प्रक्रिया मिलती है। इसके अलावा, एकजुटता तंत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दबाव की स्थिति में कोई सदस्य देश अकेला न रह जाए। यूरोपीय आयोग भी पैक्ट को इसी तरह प्रस्तुत करता है। HI
मेलोनी यह भी कहती हैं कि स्पेन के साथ शेंगेन यात्रा नियंत्रणों का विवाद और शरण पैक्ट का संचालन दो अलग मुद्दे हैं। कानूनी और राजनीतिक रूप से यह अंतर महत्वपूर्ण है। पहला मुद्दा शरण आवेदन की जिम्मेदारी से जुड़ा है, जबकि दूसरा स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र सेउता में बड़े पैमाने पर हुए प्रवेश के बाद ईयू देशों के बीच यात्रा पर अस्थायी जांच से।
स्पेन और इटली के बीच टकराव मोरक्को से स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र सेउता में ३०–३१ जुलाई को हुए बड़े पैमाने के प्रवेश के बाद शुरू हुआ। स्पेन के अधिकारियों ने बाद में अनुमान लगाया कि करीब ७२,००० लोग वहां दाखिल हुए और लगभग ७०,००० लोग मोरक्को लौट गए।
इसके जवाब में इटली ने स्पेन से आने वाले गैर-ईयू नागरिकों पर लक्षित जांच के लिए शेंगेन क्षेत्र की मुक्त आवाजाही व्यवस्था में अस्थायी नियंत्रण फिर लागू किया। रोम ने कहा कि ईयू नागरिक इससे प्रभावित नहीं होंगे। इसके बाद स्पेन ने इटली से आने वाली हवाई और समुद्री यात्राओं पर करीब एक महीने के लिए जवाबी जांच शुरू कर दी। R
स्पेन द्वारा इटली से आने वाले ५,००० से अधिक लोगों को रोकने की खबरों को सावधानी से देखना चाहिए। उपलब्ध मजबूत रिपोर्टिंग पारस्परिक सीमा नियंत्रणों की पुष्टि करती है, लेकिन उस खास कुल आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती। इटली और स्पेन के बीच साझा जमीनी सीमा नहीं है, इसलिए इन उपायों का प्रभाव मुख्यतः हवाई और समुद्री मार्गों पर पड़ता है। R
अब तक के सबूत राजनीतिक नारों से कुछ अधिक सीमित निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं। पैक्ट ने जिम्मेदारी वाले स्थानांतरणों को अधिक स्पष्ट बनाया है और ऐसा लगता है कि कई देशों को इटली से जुड़े अनुरोध फिर शुरू करने में मदद मिली है। ऑस्ट्रिया के कम-से-कम चार स्थानांतरण दर्ज हैं और जर्मनी से तीन पूरे होने की रिपोर्ट है, लेकिन आने वाले समय में मामलों की कुल संख्या अभी तय नहीं है। UE
साथ ही, पैक्ट केवल हर व्यक्ति को उसके पहले प्रवेश वाले देश में लौटाने का आदेश नहीं है। यह जिम्मेदारी, प्रक्रिया, वापसी और एकजुटता को जोड़ने वाला व्यापक पैकेज है, जिसमें संक्रमण अवधि और लागू करने से जुड़े कई विवाद अभी बाकी हैं। H
इटली के लिए अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौते के दूसरे हिस्से कितने प्रभावी ढंग से काम करते हैं—जैसे लोगों का पुनर्वितरण, वित्तीय सहायता, बाहरी सीमा प्रबंधन और प्रभावी प्रत्यावर्तन।
जब तक यह स्पष्ट नहीं होता, मेलोनी के विरोधी इन स्थानांतरणों को राजनीतिक ‘ओन गोल’ कह सकते हैं। वहीं उनकी सरकार यह तर्क दे सकती है कि पहली बार अन्य ईयू देश भी जिम्मेदारी को अधिक व्यवस्थित ढंग से साझा करने के लिए बाध्य हो रहे हैं। फिलहाल स्थानांतरणों से पैक्ट का जिम्मेदारी वाला हिस्सा काम करता दिख रहा है; बड़ा अनसुलझा सवाल यह है कि क्या एकजुटता वाला हिस्सा भी उसी स्तर पर काम करेगा।
Studio Global AI
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१२ जून २०२६ से पैक्ट लागू होने के बाद ऑस्ट्रिया से चार शरण आवेदकों का इटली स्थानांतरण दर्ज है, जबकि जर्मनी से तीन स्थानांतरण की रिपोर्ट है; कई अन्य देश भी ऐसे मामलों को फिर शुरू करना चाहते हैं। [5][11]
१२ जून २०२६ से पैक्ट लागू होने के बाद ऑस्ट्रिया से चार शरण आवेदकों का इटली स्थानांतरण दर्ज है, जबकि जर्मनी से तीन स्थानांतरण की रिपोर्ट है; कई अन्य देश भी ऐसे मामलों को फिर शुरू करना चाहते हैं। [5][11] पैक्ट यह नहीं कहता कि हर शरण आवेदक को अनिवार्य रूप से उसी पहले ईयू देश में आवेदन करना होगा, जहां वह दाखिल हुआ था; यह जिम्मेदारी, जांच, प्रक्रिया, वापसी और एकजुटता—इन सभी को जोड़ने वाला व्यापक ढांचा है। [1][2]
इसी विरोधाभास के कारण जॉर्जिया मेलोनी के विरोधी इसे ‘स्पेक्टैक्युलर ओन गोल’ या ‘बूमरैंग’ बता रहे हैं: इटली को राहत देने के लिए समर्थित व्यवस्था अब अन्य देशों को कुछ मामलों में लोगों को इटली वापस भेजने का आधार दे रही ह...