यह घटना अलग-थलग हमला नहीं थी। मार्च से आई रिपोर्टों में दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के बढ़ते अभियान का वर्णन किया गया है। इसमें हवाई हमले, घरों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तथा कस्बों के कुछ हिस्सों को ध्वस्त करना शामिल है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार इजरायल ने लितानी नदी के दक्षिण में स्थित क्षेत्र पर नियंत्रण लेने की योजना की बात कही थी। इससे लंबे समय तक कब्जे और बड़े पैमाने पर विस्थापन की आशंकाएं बढ़ीं।
जून में घोषित युद्धविराम के बाद भी हिंसा पूरी तरह नहीं रुकी। 20 जून को लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार इजरायली हमलों में कम-से-कम 20 लोग मारे गए। इजरायल ने कहा कि ये हमले हिजबुल्लाह की ओर से किए गए रॉकेट फायर का जवाब थे। एक इजरायली सैन्य अधिकारी ने दावा किया कि हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली बलों पर 50 से अधिक प्रक्षेप्य दागे थे। R
इजरायल ने अपने सैनिकों पर हिजबुल्लाह के हमलों को भी अभियान जारी रखने का आधार बताया है। जून की एक अलग घटना के बारे में रॉयटर्स ने बताया कि इजरायली हमले उन घटनाओं के बाद हुए जिन्हें इजरायल ने दक्षिण में अपने बलों पर हिजबुल्लाह के हमले बताया था। R
इस तरह बढ़ती हिंसा को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने आते हैं। इजरायल अपने अभियानों को हिजबुल्लाह के हमलों और अपने सैनिकों के लिए खतरे का जवाब बताता है। दूसरी ओर, लेबनानी अधिकारी और स्थानीय लोग लगातार हो रहे हमलों, तबाही और विस्थापन को लेबनान की संप्रभुता तथा युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन बताते हैं। उपलब्ध स्रोत इन दोनों पक्षों की स्थितियां दर्ज करते हैं, लेकिन हर विवादित घटना का स्वतंत्र रूप से अंतिम निष्कर्ष नहीं देते।
ताजा फॉस्फोरस शेल का आरोप लेबनानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट पर आधारित है। इसलिए इसे फिलहाल आरोप के रूप में ही समझना चाहिए, पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं। उपलब्ध स्रोतों में रातभर के इस विशेष अभियान में फॉस्फोरस के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच या पुष्टि नहीं दी गई है।
हालांकि, पहले की एक घटना से जुड़ा दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद है। ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने कहा कि उसने 3 मार्च को दक्षिणी लेबनान के योहमोर में रिहायशी इलाके के ऊपर तोप से दागे गए सफेद फॉस्फोरस गोला-बारूद की आठ तस्वीरों को सत्यापित और जियोलोकेट किया। संगठन के अनुसार नागरिक सुरक्षा कर्मी घरों और एक वाहन में लगी आग पर कार्रवाई कर रहे थे। रॉयटर्स ने बताया कि इजरायली सेना ने कहा था कि उसे ऐसे किसी इस्तेमाल की जानकारी नहीं है और वह सफेद फॉस्फोरस वाले शेल की तैनाती की पुष्टि नहीं कर सकती। R
यह पिछला साक्ष्य मौजूदा आरोप को समझने के लिए संदर्भ देता है, लेकिन इसके आधार पर ताजा हमले में फॉस्फोरस के इस्तेमाल को सिद्ध तथ्य नहीं कहा जा सकता। उपलब्ध प्रमाणों से सबसे सटीक निष्कर्ष यही है: HRW ने मार्च में योहमोर में सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल का दस्तावेजीकरण किया था, जबकि नवीनतम रातभर के हमलों में इसके इस्तेमाल का आरोप अभी अपुष्ट है।
उपलब्ध स्रोतों में अलग-अलग तारीखों और गणना-पद्धतियों के कारण अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं। 10 जून को रॉयटर्स ने लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया कि 2 मार्च से इजरायली हमलों में लगभग 3,700 लोग मारे गए थे। इनमें 730 महिलाएं, बच्चे या चिकित्साकर्मी थे। R
27 जून तक BBC की रिपोर्ट में लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से कम-से-कम 4,192 मौतें, 11,600 से अधिक घायल और 12 लाख से अधिक विस्थापित लोगों की जानकारी दी गई। B ये आंकड़े अलग-अलग तारीखों पर प्रकाशित हुए हैं और उपलब्ध स्रोत नवीनतम रातभर के हमलों तक का एकल, अद्यतन संचयी आंकड़ा नहीं देते। इसलिए इन्हें जोड़कर एक नया कुल नहीं बनाया जाना चाहिए।
शनिवार के ताजा हमलों के लिए सबसे स्पष्ट आंकड़ा कम-से-कम 11 मौतों और 19 घायलों का है। अंसार में मारे गए लोगों में तीन बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। BRA उपलब्ध स्रोत नवीनतम रातभर के हमलों तक कुल मृतकों या विस्थापित लोगों की विश्वसनीय संयुक्त संख्या स्थापित नहीं करते।