दोहा ईरान के पूरे दावे को सिरे से खारिज करता है। कतर का कहना है कि ईरानी विमानों ने उसके हवाई क्षेत्र और संप्रभुता का उल्लंघन किया था, जिसके बाद उसने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप रक्षात्मक कार्रवाई की। कतर के अनुसार, उसके खोज एवं बचाव दलों ने एक पायलट के अवशेष बरामद किए और उन्हें ईरानी प्रतिनिधिमंडल को सौंप दिया। इसी आधार पर दोहा कहता है कि हिरासत में लेने के लिए कोई जीवित ईरानी पायलट बचा ही नहीं था।
कतर ने तीन पायलटों को बंदी बनाए जाने के आरोपों को निराधार और झूठा बताया है। उसका सार्वजनिक रुख ईरान के इस दावे से सीधे टकराता है कि नामित तीनों पायलट जीवित हैं, क़तरी हिरासत में हैं और उनकी सेहत खराब है।
विवाद केवल पायलटों के साथ वास्तव में क्या हुआ, इस पर नहीं है। दोनों देशों में इस बात पर भी मतभेद है कि सबूतों की स्वतंत्र जांच कौन और किस तरह कर सकता है। ईरान का आरोप है कि कतर ने पायलटों के भाग्य का पता लगाने के लिए ईरानी वायुसेना के तथ्य-जांच और तकनीकी दल को देश में प्रवेश देने में बार-बार देरी या रुकावट डाली।
कतर इस पर अलग पक्ष रखता है। दोहा कहता है कि उसने ईरानी विशेषज्ञों को अपने खोज एवं बचाव अभियान के निष्कर्षों और बरामद अवशेषों की जांच के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन तेहरान ने उस निमंत्रण का जवाब नहीं दिया। कतर ने इस मामले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी ईरानी मांग को प्रचार का प्रयास भी बताया है।
जब तक दोनों पक्षों की सहमति वाली जांच नहीं होती, किसी एक दावे की पुष्टि करना मुश्किल है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों में यह सवाल अब भी अनसुलझा है कि तीनों पायलट जीवित बचे थे, हिरासत में लिए गए या उनकी मौत हो गई।
कतर के स्पष्ट इनकार के बावजूद ईरान ने तीनों लापता पायलटों को कतर में बंदी मानने का फैसला किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि तेहरान उनकी स्थिति स्पष्ट कराने के लिए द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल जारी रखेगा।
इस रुख से कतर पर कूटनीतिक दबाव बना रहता है और ईरान का यह दावा भी कायम रहता है कि तीनों व्यक्ति जीवित हैं तथा उन्हें मानवीय सहायता और निरीक्षण का अधिकार मिलना चाहिए। दूसरी ओर, कतर के हिरासत के आरोप को स्वीकार न करने से ICRC के दौरे, चिकित्सकीय निकासी या 2 मार्च की घटना का साझा आधिकारिक विवरण तैयार करने का कोई सहमत आधार नहीं बन पाया है।
उपलब्ध रिपोर्टों से फिलहाल इतने सीमित निष्कर्ष ही निकलते हैं:
सबसे अहम दावे—तीनों की लगातार हिरासत, उनकी चिकित्सकीय स्थिति और उनका वास्तविक ठिकाना—अब भी आरोप हैं, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।