उत्तर कोरिया ने जापान के वित्त वर्ष 2027 के रिकॉर्ड रक्षा बजट को सामान्य प्रतिरोधक क्षमता नहीं, बल्कि सैन्यवाद की वापसी का प्रमाण बताया। प्योंगयांग ने टोक्यो पर ‘आक्रामक युद्ध’ की तैयारी करने का आरोप लगाया और कहा कि इसका जवाब ‘एकजुट ताकत’ से दिया जाएगा। [5] उत्तर कोरिया ने अमेरिकी निर्मित टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों और ज...
शोध उत्तर

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उत्तर कोरिया ने जापान के वित्त वर्ष 2027 के लिए प्रस्तावित रिकॉर्ड रक्षा बजट को सामान्य सुरक्षा या प्रतिरोधक नीति के रूप में नहीं देखा। प्योंगयांग के अनुसार, यह जापान के सैन्यवाद की वापसी और ‘आक्रामक युद्ध’ की तैयारी का संकेत है। उसने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जापान के ‘युद्धकालीन वंशजों’ के इस ‘सैन्य विकास’ को स्वीकार नहीं करेगा और इसका मुकाबला ‘एकजुट ताकत’ से किया जाएगा।
निशाने पर जापान का वित्त वर्ष 2027 के लिए प्रस्तावित 8.9 ट्रिलियन येन का रक्षा बजट है। इससे लंबी दूरी की मारक क्षमता और अन्य उन्नत सैन्य प्रणालियों के विस्तार की योजना है।
उत्तर कोरिया का आरोप है कि जापान अमेरिकी निर्मित टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों समेत आक्रामक हथियार जमा कर रहा है। प्योंगयांग ने यह भी कहा कि जापान का सरकारी कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद सैन्य खर्च बढ़ाना सुरक्षा की जरूरत नहीं, बल्कि गैर-जिम्मेदाराना युद्ध खर्च है। हालांकि, कर्ज से जुड़े इस विशिष्ट आरोप की शब्दावली या आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों से नहीं होती।
प्योंगयांग ने जापान की सैन्य वृद्धि को आक्रामक कार्रवाई की तैयारी बताया और ‘एकजुट ताकत’ के साथ व्यापक जवाब देने की धमकी दी।
अगस्त की शुरुआत में किम यो-जोंग ने जापान के टॉमहॉक मिसाइल परीक्षण और बढ़ती हमलावर क्षमताओं की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका टोक्यो के सैन्य विस्तार का समर्थन कर रहा है और चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया ‘अतिरिक्त सैन्य विकल्पों’ पर विचार करेगा। रॉयटर्स से बातचीत में विश्लेषकों ने कहा कि यह बयान उत्तर कोरिया की भविष्य की हथियार गतिविधियों को सही ठहराने में मदद कर सकता है।
वित्त वर्ष 2027 का प्रस्ताव जापान के वित्त वर्ष 2023 से 2027 तक चलने वाले 43 ट्रिलियन येन के रक्षा कार्यक्रम का अंतिम वर्ष है। इस योजना का लक्ष्य 2027 तक रक्षा-संबंधी खर्च को सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के करीब 2% तक ले जाना है। जापान ने मूल रूप से चीन और उत्तर कोरिया से perceived—यानी अपनी नजर में बढ़ते—खतरों के बीच इसे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने की नीति के रूप में पेश किया था।
प्रस्तावित बजट में पनडुब्बी से दागी जाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों, लंबी दूरी के हमलावर ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कमांड-एंड-कंट्रोल प्रणालियों पर काम शामिल होने की खबर है। ये क्षमताएं जापान को अधिक दूरी पर निगरानी, हमला और सैन्य समन्वय करने में सक्षम बना सकती हैं। इसी वजह से प्योंगयांग इन्हें रक्षात्मक व्यवस्था के बजाय आक्रामक सैन्य रुख के रूप में पेश कर रहा है।
प्रधानमंत्री साने ताकाइची द्वारा रक्षा खर्च की सभी सीमाएं हटाने का दावा व्यापक वित्त वर्ष 2027 बजट प्रक्रिया से जुड़ा प्रतीत होता है, न कि रक्षा खर्च पर हर तरह की सीमा समाप्त किए जाने के प्रमाण के रूप में। उपलब्ध साक्ष्य एक नई, बिना तय खर्च-सीमा वाली ‘विकास-निवेश’ बजट श्रेणी की ओर इशारा करते हैं, लेकिन प्रश्न में किए गए व्यापक दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है।
जापान ने उत्तर कोरिया के इस आकलन को खारिज किया है। रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का जापान के लिए सबसे गंभीर और जटिल दौर बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ जापान का सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास की अवधि 11 दिन से घटाकर पांच दिन कर दी। यह बदलाव अमेरिकी पक्ष के अनुरोध पर किया गया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को उत्तर कोरिया के लिए ‘अनुचित और शत्रुतापूर्ण’ संकेत से बचने की कोशिश के रूप में पेश किया। रिपोर्टों के अनुसार, वह शरद ऋतु में ही किम जोंग-उन से संभावित मुलाकात की कोशिश भी कर रहे थे।
इन घटनाओं ने दक्षिण कोरिया में चिंता पैदा की और अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं की विश्वसनीयता तथा शर्तों पर सवाल खड़े किए। हालांकि, सियोल ने सार्वजनिक रूप से दोहराया कि अमेरिका के साथ उसका गठबंधन राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद बना हुआ है।
उत्तर कोरिया जापान के पुनः सैन्यीकरण और अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान के बीच जारी समन्वय—दोनों का इस्तेमाल अपने ‘गुटीय टकराव’ वाले नैरेटिव को आगे बढ़ाने में कर सकता है। इस नैरेटिव में एक ओर अमेरिका के नेतृत्व वाला त्रिपक्षीय समूह और दूसरी ओर उत्तर कोरिया, चीन तथा रूस दिखाई देते हैं। हालांकि, उपलब्ध साक्ष्य इस सटीक दावे की पुष्टि नहीं करते कि बीजिंग और प्योंगयांग ने किसी समन्वित अभियान के तहत यही भाषा औपचारिक रूप से अपना ली है।
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उत्तर कोरिया ने जापान के वित्त वर्ष 2027 के रिकॉर्ड रक्षा बजट को सामान्य प्रतिरोधक क्षमता नहीं, बल्कि सैन्यवाद की वापसी का प्रमाण बताया।
उत्तर कोरिया ने जापान के वित्त वर्ष 2027 के रिकॉर्ड रक्षा बजट को सामान्य प्रतिरोधक क्षमता नहीं, बल्कि सैन्यवाद की वापसी का प्रमाण बताया। प्योंगयांग ने टोक्यो पर ‘आक्रामक युद्ध’ की तैयारी करने का आरोप लगाया और कहा कि इसका जवाब ‘एकजुट ताकत’ से दिया जाएगा। [5]
उत्तर कोरिया ने अमेरिकी निर्मित टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों और जापान की लंबी दूरी की हमलावर क्षमताओं के विस्तार की आलोचना की। [1][5]