इसलिए स्लोवेनिया की राशनिंग को ‘देश में ईंधन खत्म हो गया’ वाली स्थिति के बजाय खुदरा स्तर पर मांग को नियंत्रित करने और वितरण व्यवस्था को संभालने की कोशिश के रूप में देखना अधिक सही है। इसके मई के अंत तक हटाए जाने का दावा उपलब्ध सबसे मजबूत सामग्री से पुष्ट नहीं होता, इसलिए उस तारीख को अप्रमाणित मानना चाहिए।
यूरोप में कीमतों पर दबाव का बड़ा कारण रिफाइनरी और परिवहन व्यवस्था में आई बाधाएं थीं—खासकर डीजल के मामले में। यानी समस्या केवल कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की नहीं, बल्कि कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और अन्य तैयार ईंधनों में बदलने की क्षमता घटने की भी थी।
अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। युद्ध से पहले इस मार्ग से कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का प्रवाह लगभग 1.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन था। यह जुलाई में घटकर 48 लाख बैरल प्रतिदिन और अगस्त की शुरुआत में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।
मध्य पूर्व की रिफाइनरियों को हुए नुकसान और बंदी से दूसरी तिमाही में क्षेत्र की प्रसंस्करण क्षमता युद्ध-पूर्व स्तर से अनुमानित 29 लाख बैरल प्रतिदिन कम रही। तीसरी तिमाही में भी 22 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी रहने का अनुमान था। इसी दौरान यूक्रेनी हमलों ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता को लगभग दो दशक के निचले स्तर के करीब पहुंचा दिया।
इसका सीधा असर डीजल और पेट्रोल की उपलब्धता पर पड़ा। यूरोपीय डीजल की कीमतें युद्ध शुरू होने के बाद 70% से अधिक बढ़ीं और ब्रेंट कच्चे तेल की तुलना में गैसऑयल का प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
कच्चे तेल और पेट्रोल पंप की कीमतें हमेशा एक साथ नहीं चलतीं। रिफाइनरी बंद हों, जहाजों की आवाजाही बाधित हो या भंडार बहुत कम हों, तो कच्चे तेल की कीमत नीचे आने के बावजूद डीजल महंगा बना रह सकता है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) ने ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत दूसरी तिमाही 2026 में 103 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था, जो चौथी तिमाही में घटकर 70 डॉलर हो सकती है। यह पूर्वानुमान दिखाता है कि कच्चे तेल की कीमतों का रास्ता अस्थिर रहा, जबकि रिफाइंड ईंधनों पर दबाव अलग कारणों से बना रहा।
ईंधन संकट का असर यूरोपीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी दिखाई दिया। यूरोपीय संघ के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, क्रोएशिया में 30 मार्च को डीजल की औसत कीमत 1.88 यूरो प्रति लीटर थी। अगस्त के मध्य के बाजार आंकड़ों में यह करीब 1.835 यूरो प्रति लीटर रही, जो लगभग 1.86 यूरो प्रति लीटर के अनुमान के अनुरूप है।
मोल्दोवा में भी जुलाई के अंत में डीजल की नियंत्रित कीमत बढ़कर लगभग 1.62 यूरो प्रति लीटर हो गई। वहां आपूर्ति संबंधी दिक्कत इतनी गंभीर थी कि जुलाई के अंत तक करीब 53 पेट्रोल स्टेशन डीजल से पूरी तरह खाली हो चुके थे।
लड़ाई रुकने के बाद भी ईंधन बाजार तुरंत सामान्य नहीं हो सकते। रिफाइनरियों, निर्यात टर्मिनलों और जहाजरानी मार्गों की मरम्मत में समय लगता है। होर्मुज़ में लगातार बाधा, खाड़ी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान, रूस की कम रिफाइनिंग क्षमता और टैंकरों की सीमित उपलब्धता से ईंधन बाजार लंबे समय तक तंग रह सकते हैं।
गर्मी के मौसम में अत्यधिक तापमान थर्मल और परमाणु बिजली उत्पादन को भी प्रभावित कर सकता है। इससे बिजली बनाने के लिए गैस और तेल की मांग बढ़ सकती है और ईंधन बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।