ईरानी अधिकारियों ने पुनर्निर्माण को सैन्य आवश्यकता के साथ-साथ देश की घरेलू क्षमता और लचीलेपन का प्रमाण बताया है। कार्यवाहक रक्षा मंत्री मेजर जनरल माजिद इब्नोलरेज़ा ने कहा कि रक्षा उत्पादन लाइनें पहले से अधिक सक्रिय हैं। उन्होंने स्वदेशी तकनीक और उन्नत प्रणालियों पर भी जोर दिया।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रज़ा तलाएई-निक ने बाद में दावा किया कि जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच ईरान में रक्षा हथियारों और उपकरणों का वार्षिक उत्पादन दोगुना हो गया। उनके अनुसार, संघर्ष के दौरान कुछ रणनीतिक उत्पादों और युद्धकालीन आवश्यकताओं की आपूर्ति में तीन गुने से अधिक वृद्धि हुई।
इन आंकड़ों को ईरानी सरकार के आधिकारिक दावों के रूप में देखना चाहिए, स्वतंत्र रूप से जांचे गए आंकड़ों के रूप में नहीं। उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह संकेत मिलता है कि ईरान सैन्य उत्पादन को फिर से स्थापित और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे हर उस प्रणाली की वास्तविक संख्या, गुणवत्ता या युद्ध के लिए तैयार स्थिति साबित नहीं होती जिसका तेहरान दावा करता है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने संघर्षविराम के दौरान सैन्य क्षमताओं के पुनर्गठन को ऐसी सेना के सामान्य व्यवहार के अनुरूप बताया है जिसे लड़ाई के बाद पुनर्निर्माण के लिए समय और अवसर मिला हो।
ईरान की सैन्य चेतावनियां होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गहराई से जुड़ी हैं। यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। रॉयटर्स के अनुसार, जहाज़ों पर हमलों और आवाजाही पर प्रतिबंधों के बाद इस मार्ग से यातायात लगभग ठहर गया।
तेहरान की रणनीतिक ताकत इस बात में नहीं है कि जलडमरूमध्य पर उसका निर्विवाद कानूनी या सैन्य स्वामित्व है। उसका दबाव इस क्षमता से आता है कि वह आसपास की सैन्य प्रणालियों और हमलों की धमकी के जरिए जहाज़ों की आवाजाही को जोखिमपूर्ण या कठिन बना सकता है। इससे अमेरिका और अन्य देशों की आर्थिक तथा राजनीतिक लागत बढ़ती है। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट ने ऐसे खतरों और हमलों का उल्लेख किया है, जिनसे समुद्री यातायात काफी हद तक रुक गया, साथ ही जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर मतभेद भी दर्ज किए हैं।
दोनों पक्ष स्थिति को अलग-अलग ढंग से पेश करते हैं। 17 जून के एक ज्ञापन में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और 60 दिनों तक वाणिज्यिक जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग देने की ईरानी व्यवस्था का उल्लेख था, लेकिन जलडमरूमध्य के दीर्घकालिक प्रशासन का सवाल खुला छोड़ा गया। ईरान ने होर्मुज़ पर अमेरिकी नियंत्रण के दावे को खारिज किया है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका इस जलमार्ग पर “पूरी तरह नियंत्रण” रखता है।
ईरान की धमकियां कूटनीतिक प्रक्रिया के विफल होने की शर्त से जुड़ी हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अगर अमेरिका ने कुछ हफ्तों के भीतर अंतरिम समझौते को लागू नहीं किया तो तेहरान होर्मुज़ और उससे आगे तनाव बढ़ाएगा। कूटनीति विफल होने पर ईरान अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने के लिए “समय पर और सटीक” हमला कर सकता है।
दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा है कि अगर कोई त्वरित समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोक सके और होर्मुज़ को फिर से खोल सके तो अमेरिका नया हमला टाल देगा। इसका मतलब है कि सैन्य नीति और बातचीत एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हैं: जैसे-जैसे तेहरान को समझौते के लागू होने पर संदेह बढ़ेगा, वह सैन्य शक्ति को कूटनीति के विकल्प के रूप में पेश करेगा।
कुल मिलाकर, ईरान का नया सिद्धांत शर्तों पर संयम और जवाब के विस्तार पर आधारित है। ईरान कह रहा है कि वह पहले हमला नहीं करेगा, लेकिन किसी नए हमले की स्थिति में तेज़ और भौगोलिक रूप से व्यापक अभियान चलाया जा सकता है। इस धमकी को घरेलू हथियार उत्पादन और होर्मुज़ के समुद्री यातायात पर दबाव से बल देने की कोशिश की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल ईरानी अधिकारियों के बयानों का नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक सैन्य क्षमता का है: पुनर्निर्माण के कितने दावे मैदान में उपयोग के लिए तैयार हैं? यही तय करेगा कि यह रणनीति दूसरे हमले को रोकने वाला प्रतिरोध बनती है या क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़काने वाला संकेत।
ईरानी अधिकारियों ने पुनर्निर्माण को सैन्य आवश्यकता के साथ-साथ देश की घरेलू क्षमता और लचीलेपन का प्रमाण बताया है। कार्यवाहक रक्षा मंत्री मेजर जनरल माजिद इब्नोलरेज़ा ने कहा कि रक्षा उत्पादन लाइनें पहले से अधिक सक्रिय हैं। उन्होंने स्वदेशी तकनीक और उन्नत प्रणालियों पर भी जोर दिया।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रज़ा तलाएई-निक ने बाद में दावा किया कि जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच ईरान में रक्षा हथियारों और उपकरणों का वार्षिक उत्पादन दोगुना हो गया। उनके अनुसार, संघर्ष के दौरान कुछ रणनीतिक उत्पादों और युद्धकालीन आवश्यकताओं की आपूर्ति में तीन गुने से अधिक वृद्धि हुई।
इन आंकड़ों को ईरानी सरकार के आधिकारिक दावों के रूप में देखना चाहिए, स्वतंत्र रूप से जांचे गए आंकड़ों के रूप में नहीं। उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह संकेत मिलता है कि ईरान सैन्य उत्पादन को फिर से स्थापित और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे हर उस प्रणाली की वास्तविक संख्या, गुणवत्ता या युद्ध के लिए तैयार स्थिति साबित नहीं होती जिसका तेहरान दावा करता है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने संघर्षविराम के दौरान सैन्य क्षमताओं के पुनर्गठन को ऐसी सेना के सामान्य व्यवहार के अनुरूप बताया है जिसे लड़ाई के बाद पुनर्निर्माण के लिए समय और अवसर मिला हो।
ईरान की सैन्य चेतावनियां होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गहराई से जुड़ी हैं। यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। रॉयटर्स के अनुसार, जहाज़ों पर हमलों और आवाजाही पर प्रतिबंधों के बाद इस मार्ग से यातायात लगभग ठहर गया।
तेहरान की रणनीतिक ताकत इस बात में नहीं है कि जलडमरूमध्य पर उसका निर्विवाद कानूनी या सैन्य स्वामित्व है। उसका दबाव इस क्षमता से आता है कि वह आसपास की सैन्य प्रणालियों और हमलों की धमकी के जरिए जहाज़ों की आवाजाही को जोखिमपूर्ण या कठिन बना सकता है। इससे अमेरिका और अन्य देशों की आर्थिक तथा राजनीतिक लागत बढ़ती है। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट ने ऐसे खतरों और हमलों का उल्लेख किया है, जिनसे समुद्री यातायात काफी हद तक रुक गया, साथ ही जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर मतभेद भी दर्ज किए हैं।
दोनों पक्ष स्थिति को अलग-अलग ढंग से पेश करते हैं। 17 जून के एक ज्ञापन में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और 60 दिनों तक वाणिज्यिक जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग देने की ईरानी व्यवस्था का उल्लेख था, लेकिन जलडमरूमध्य के दीर्घकालिक प्रशासन का सवाल खुला छोड़ा गया। ईरान ने होर्मुज़ पर अमेरिकी नियंत्रण के दावे को खारिज किया है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका इस जलमार्ग पर “पूरी तरह नियंत्रण” रखता है।
ईरान की धमकियां कूटनीतिक प्रक्रिया के विफल होने की शर्त से जुड़ी हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अगर अमेरिका ने कुछ हफ्तों के भीतर अंतरिम समझौते को लागू नहीं किया तो तेहरान होर्मुज़ और उससे आगे तनाव बढ़ाएगा। कूटनीति विफल होने पर ईरान अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने के लिए “समय पर और सटीक” हमला कर सकता है।
दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा है कि अगर कोई त्वरित समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोक सके और होर्मुज़ को फिर से खोल सके तो अमेरिका नया हमला टाल देगा। इसका मतलब है कि सैन्य नीति और बातचीत एक-दूसरे से सीधे जुड़ी हैं: जैसे-जैसे तेहरान को समझौते के लागू होने पर संदेह बढ़ेगा, वह सैन्य शक्ति को कूटनीति के विकल्प के रूप में पेश करेगा।
कुल मिलाकर, ईरान का नया सिद्धांत शर्तों पर संयम और जवाब के विस्तार पर आधारित है। ईरान कह रहा है कि वह पहले हमला नहीं करेगा, लेकिन किसी नए हमले की स्थिति में तेज़ और भौगोलिक रूप से व्यापक अभियान चलाया जा सकता है। इस धमकी को घरेलू हथियार उत्पादन और होर्मुज़ के समुद्री यातायात पर दबाव से बल देने की कोशिश की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल ईरानी अधिकारियों के बयानों का नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक सैन्य क्षमता का है: पुनर्निर्माण के कितने दावे मैदान में उपयोग के लिए तैयार हैं? यही तय करेगा कि यह रणनीति दूसरे हमले को रोकने वाला प्रतिरोध बनती है या क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़काने वाला संकेत।