विनिर्माण कंपनियों ने दोबारा कर्मचारियों की नियुक्तियां भी शुरू कीं। इससे संकेत मिलता है कि सुधार अब केवल कारोबारी धारणा या पुराने ऑर्डरों के निपटारे तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन और रोजगार तक पहुंच रहा है। पहले फैक्टरी गतिविधि में सुधार को नाजुक माना जा रहा था, क्योंकि वह मुख्य रूप से पुराने ऑर्डर बैकलॉग को पूरा करने से संचालित हो रहा था, न कि नई मांग से।
इसके मुकाबले सेवा क्षेत्र में कोई अतिरिक्त तेजी नहीं दिखी। फ्लैश सर्विसेज PMI 51.7 पर स्थिर रहा। इसलिए अगस्त के आंकड़ों में नई गति का सबसे स्पष्ट स्रोत विनिर्माण ही रहा।
यूरोजोन का औसत आंकड़ा सदस्य देशों के बीच मौजूद बड़े अंतर को छिपा देता है। जर्मनी औद्योगिक सुधार का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा और वहां कारखानों की गतिविधि जनवरी 2022 के बाद सबसे मजबूत स्तर पर पहुंची।
फ्रांस की तस्वीर इसके विपरीत रही। गर्मी से जुड़ी बाधाओं ने वहां आर्थिक गतिविधि पर असर डाला और उसकी रिकवरी जर्मनी की तुलना में काफी कमजोर रही। इसका मतलब है कि यूरोजोन के समग्र PMI को सभी देशों में समान रूप से जारी सुधार का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जर्मनी के मजबूत औद्योगिक प्रदर्शन ने क्षेत्रीय औसत को ऊपर खींचा, जबकि अन्य हिस्सों में कारोबारी परिस्थितियां कठिन बनी रहीं।
कुल नए कारोबार में बढ़ोतरी अगस्त के आंकड़ों का एक सकारात्मक पहलू रही। नए ऑर्डरों की तेज वृद्धि, निर्यात में वापसी और विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन यह संकेत देते हैं कि मांग में वास्तविक सुधार हो रहा है—गतिविधि केवल पुराने ऑर्डर पूरे करने से नहीं चल रही।
फिर भी कंपनियों ने आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़ी महंगी ऊर्जा को लेकर चिंता जताई। संघर्ष, व्यापार और आपूर्ति की स्थितियों तथा भविष्य के ऊर्जा बिलों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से कारोबारी भरोसा कमजोर हुआ। अगस्त में इनपुट लागत महंगाई की रफ्तार घटी, लेकिन वह अब भी तेज थी और संघर्ष से पहले के स्तरों से काफी ऊपर बनी रही।
यही विरोधाभास यूरोजोन की रिकवरी की सबसे बड़ी चुनौती को दिखाता है: मौजूदा गतिविधि टिकाऊ नजर आ रही है, लेकिन कंपनियों को भरोसा नहीं है कि ऊर्जा कीमतों और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं जारी रहने पर यह सुधार लंबे समय तक कायम रहेगा।
PMI सर्वेक्षण से निकट अवधि के कारोबारी लागत दबाव पर कुछ राहत मिली। इनपुट लागत महंगाई फरवरी के बाद सबसे धीमी दर पर आई, हालांकि उसका स्तर अभी भी ऊंचा था। इससे यह जोखिम कुछ कम हो सकता है कि आर्थिक सुधार तुरंत व्यापक महंगाई की नई लहर पैदा कर दे।
लेकिन व्यापक महंगाई की तस्वीर ज्यादा चिंता पैदा करती है। यूरो क्षेत्र की कुल महंगाई जुलाई में बढ़कर 2.9% हो गई, जो जून में 2.8% थी। इसी अवधि में ऊर्जा महंगाई 8.5% से बढ़कर 10.0% हो गई, जबकि सेवा क्षेत्र की महंगाई 3.3% पर पहुंची।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के जून के स्टाफ अनुमान में पहले ही चेतावनी दी गई थी कि मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़ी ऊर्जा महंगाई के कारण 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कुल महंगाई करीब 3.4% तक पहुंच सकती है।
इससे ECB के सामने दोहरा संकेत है। PMI बताता है कि मांग और उत्पादन अपेक्षाकृत कड़ी वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद टिके हुए हैं। लेकिन ऊर्जा से जुड़ी महंगाई कीमतों की वृद्धि को ECB के 2% लक्ष्य से लंबे समय तक ऊपर रख सकती है।
अगस्त के आंकड़े सितंबर में ECB की एक और ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में तीन प्रमुख संकेत देते हैं:
हालांकि PMI यह साबित नहीं करता कि ECB को लंबे समय तक दरें बढ़ाते रहना ही होगा। कारोबारी भरोसा कमजोर हुआ है, आपूर्ति श्रृंखलाएं जोखिम में हैं, ऊर्जा महंगी है और फ्रांस का प्रदर्शन काफी नरम रहा है। इसलिए सबसे संतुलित निष्कर्ष यह है कि मजबूत गतिविधि ECB को सितंबर में एक और बढ़ोतरी की गुंजाइश देती है, लेकिन असमान रिकवरी उसके बाद सावधानी बरतने का आधार भी बनती है।
अगस्त का फ्लैश PMI यूरोजोन में ज्यादा व्यापक, लेकिन अब भी नाजुक रिकवरी की तस्वीर दिखाता है। कंपोजिट इंडेक्स 52.1 पर पहुंचा, विनिर्माण क्षेत्र चार साल से अधिक समय में सबसे तेज गति से बढ़ा, जर्मनी ने औद्योगिक सुधार की अगुआई की और नए ऑर्डर तथा निर्यात में सुधार आया।
दूसरी ओर, यह सुधार सभी देशों में समान नहीं है। कारोबारी भरोसा कमजोर हुआ है और महंगाई ECB के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। यही कारण है कि सितंबर में ECB की दूसरी दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी है, लेकिन उसके बाद की नीति को नए आंकड़ों के आधार पर तय करना होगा—इसे आगे की लगातार बढ़ोतरी का स्वतः संकेत नहीं माना जा सकता।
विनिर्माण कंपनियों ने दोबारा कर्मचारियों की नियुक्तियां भी शुरू कीं। इससे संकेत मिलता है कि सुधार अब केवल कारोबारी धारणा या पुराने ऑर्डरों के निपटारे तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन और रोजगार तक पहुंच रहा है। पहले फैक्टरी गतिविधि में सुधार को नाजुक माना जा रहा था, क्योंकि वह मुख्य रूप से पुराने ऑर्डर बैकलॉग को पूरा करने से संचालित हो रहा था, न कि नई मांग से।
इसके मुकाबले सेवा क्षेत्र में कोई अतिरिक्त तेजी नहीं दिखी। फ्लैश सर्विसेज PMI 51.7 पर स्थिर रहा। इसलिए अगस्त के आंकड़ों में नई गति का सबसे स्पष्ट स्रोत विनिर्माण ही रहा।
यूरोजोन का औसत आंकड़ा सदस्य देशों के बीच मौजूद बड़े अंतर को छिपा देता है। जर्मनी औद्योगिक सुधार का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा और वहां कारखानों की गतिविधि जनवरी 2022 के बाद सबसे मजबूत स्तर पर पहुंची।
फ्रांस की तस्वीर इसके विपरीत रही। गर्मी से जुड़ी बाधाओं ने वहां आर्थिक गतिविधि पर असर डाला और उसकी रिकवरी जर्मनी की तुलना में काफी कमजोर रही। इसका मतलब है कि यूरोजोन के समग्र PMI को सभी देशों में समान रूप से जारी सुधार का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जर्मनी के मजबूत औद्योगिक प्रदर्शन ने क्षेत्रीय औसत को ऊपर खींचा, जबकि अन्य हिस्सों में कारोबारी परिस्थितियां कठिन बनी रहीं।
कुल नए कारोबार में बढ़ोतरी अगस्त के आंकड़ों का एक सकारात्मक पहलू रही। नए ऑर्डरों की तेज वृद्धि, निर्यात में वापसी और विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन यह संकेत देते हैं कि मांग में वास्तविक सुधार हो रहा है—गतिविधि केवल पुराने ऑर्डर पूरे करने से नहीं चल रही।
फिर भी कंपनियों ने आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़ी महंगी ऊर्जा को लेकर चिंता जताई। संघर्ष, व्यापार और आपूर्ति की स्थितियों तथा भविष्य के ऊर्जा बिलों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से कारोबारी भरोसा कमजोर हुआ। अगस्त में इनपुट लागत महंगाई की रफ्तार घटी, लेकिन वह अब भी तेज थी और संघर्ष से पहले के स्तरों से काफी ऊपर बनी रही।
यही विरोधाभास यूरोजोन की रिकवरी की सबसे बड़ी चुनौती को दिखाता है: मौजूदा गतिविधि टिकाऊ नजर आ रही है, लेकिन कंपनियों को भरोसा नहीं है कि ऊर्जा कीमतों और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं जारी रहने पर यह सुधार लंबे समय तक कायम रहेगा।
PMI सर्वेक्षण से निकट अवधि के कारोबारी लागत दबाव पर कुछ राहत मिली। इनपुट लागत महंगाई फरवरी के बाद सबसे धीमी दर पर आई, हालांकि उसका स्तर अभी भी ऊंचा था। इससे यह जोखिम कुछ कम हो सकता है कि आर्थिक सुधार तुरंत व्यापक महंगाई की नई लहर पैदा कर दे।
लेकिन व्यापक महंगाई की तस्वीर ज्यादा चिंता पैदा करती है। यूरो क्षेत्र की कुल महंगाई जुलाई में बढ़कर 2.9% हो गई, जो जून में 2.8% थी। इसी अवधि में ऊर्जा महंगाई 8.5% से बढ़कर 10.0% हो गई, जबकि सेवा क्षेत्र की महंगाई 3.3% पर पहुंची।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के जून के स्टाफ अनुमान में पहले ही चेतावनी दी गई थी कि मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़ी ऊर्जा महंगाई के कारण 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कुल महंगाई करीब 3.4% तक पहुंच सकती है।
इससे ECB के सामने दोहरा संकेत है। PMI बताता है कि मांग और उत्पादन अपेक्षाकृत कड़ी वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद टिके हुए हैं। लेकिन ऊर्जा से जुड़ी महंगाई कीमतों की वृद्धि को ECB के 2% लक्ष्य से लंबे समय तक ऊपर रख सकती है।
अगस्त के आंकड़े सितंबर में ECB की एक और ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में तीन प्रमुख संकेत देते हैं:
हालांकि PMI यह साबित नहीं करता कि ECB को लंबे समय तक दरें बढ़ाते रहना ही होगा। कारोबारी भरोसा कमजोर हुआ है, आपूर्ति श्रृंखलाएं जोखिम में हैं, ऊर्जा महंगी है और फ्रांस का प्रदर्शन काफी नरम रहा है। इसलिए सबसे संतुलित निष्कर्ष यह है कि मजबूत गतिविधि ECB को सितंबर में एक और बढ़ोतरी की गुंजाइश देती है, लेकिन असमान रिकवरी उसके बाद सावधानी बरतने का आधार भी बनती है।
अगस्त का फ्लैश PMI यूरोजोन में ज्यादा व्यापक, लेकिन अब भी नाजुक रिकवरी की तस्वीर दिखाता है। कंपोजिट इंडेक्स 52.1 पर पहुंचा, विनिर्माण क्षेत्र चार साल से अधिक समय में सबसे तेज गति से बढ़ा, जर्मनी ने औद्योगिक सुधार की अगुआई की और नए ऑर्डर तथा निर्यात में सुधार आया।
दूसरी ओर, यह सुधार सभी देशों में समान नहीं है। कारोबारी भरोसा कमजोर हुआ है और महंगाई ECB के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। यही कारण है कि सितंबर में ECB की दूसरी दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़ी है, लेकिन उसके बाद की नीति को नए आंकड़ों के आधार पर तय करना होगा—इसे आगे की लगातार बढ़ोतरी का स्वतः संकेत नहीं माना जा सकता।