यह लगभग पांच वर्ष की राउंड-ट्रिप यात्रा होगी। मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी योजनाबद्ध लक्ष्य हैं, पूरे हो चुके परिणाम नहीं। लॉन्च की परिस्थितियां, यान की सेहत, नेविगेशन और फोबोस की सतह की स्थिति समय-सारिणी तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रभावित कर सकती हैं।
MMX को एक ही मिशन में ऑर्बिटर, लैंडर और सैंपल-रिटर्न यान की भूमिकाएं निभाने के लिए तैयार किया गया है। यह पहले दूर से अवलोकन और कक्षीय संचालन के जरिए मंगल प्रणाली तथा दोनों चंद्रमाओं की जानकारी जुटाएगा। यान केवल एक बार पास से गुजरकर आगे नहीं निकल जाएगा; इसके बजाय यह मंगल के चंद्रमाओं के पास क्वासी-सैटेलाइट ऑर्बिट जैसी कक्षाओं में रहकर लगातार अध्ययन करेगा।
मिशन का मुख्य लक्ष्य फोबोस है, जो मंगल के दो चंद्रमाओं में बड़ा और मंगल के अधिक नजदीक है। MMX फोबोस पर उतरने के प्रयास करेगा और वहां की सतह की मिट्टी तथा चट्टानी कणों—जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में रेगोलिथ कहा जाता है—को इकट्ठा करेगा। इसके लिए दो अलग-अलग नमूना संग्रह प्रणालियां, C-Sampler और P-Sampler, लगाई गई हैं। इन दोनों का इस्तेमाल वैज्ञानिक रूप से उपयोगी नमूना मिलने की संभावना बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
नमूना एक सीलबंद रिटर्न कैप्सूल में रखा जाएगा और पृथ्वी तक लाया जाएगा। इस प्रक्रिया में JAXA, हायाबुसा2 क्षुद्रग्रह मिशन से मिली सैंपल-रिटर्न तकनीक और अनुभव का उपयोग कर रहा है।
डिमोस MMX का नमूना-संग्रह लक्ष्य नहीं है। इसका अध्ययन कक्षा से और नियोजित नजदीकी मुलाकातों के दौरान किया जाएगा। वैज्ञानिक इसके सतही पदार्थ, संरचना, स्थलाकृति और भूवैज्ञानिक संदर्भ की तुलना फोबोस से करेंगे। दोनों चंद्रमाओं की समानताओं और अंतर को समझना उनके उद्गम से जुड़ी अलग-अलग अवधारणाओं में फर्क करने में मदद कर सकता है।
MMX का लक्ष्य फोबोस से 10 ग्राम से अधिक सामग्री पृथ्वी पर लाना है। सफल होने पर यह मंगल क्षेत्र से नमूना वापस लाने वाला दुनिया का पहला मिशन होगा।
पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में इस रेगोलिथ का विश्लेषण ऐसी जानकारी दे सकता है, जो केवल दूर से किए गए अवलोकनों से हासिल करना मुश्किल है। इससे फोबोस की खनिज और रासायनिक संरचना, पानी से जुड़ी सामग्रियों या जैविक यौगिकों की संभावित मौजूदगी तथा इसके क्षुद्रग्रह जैसे या मंगल-संबंधी पदार्थ होने के संकेत मिल सकते हैं।
संभावना यह भी है कि फोबोस की सतह पर मंगल से उछलकर पहुंचा हुआ पदार्थ जमा हो। यदि ऐसा है, तो फोबोस का रेगोलिथ मंगल की सतह के पुराने इतिहास का अप्रत्यक्ष रिकॉर्ड भी संजोए हो सकता है। इसी वजह से MMX केवल एक छोटे चंद्रमा का अध्ययन नहीं है; यह मंगल और शुरुआती स्थलीय ग्रहों के विकास को समझने का एक नया रास्ता खोल सकता है।
फोबोस और डिमोस की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों के सामने मुख्य रूप से दो परिकल्पनाएं हैं:
MMX दोनों चंद्रमाओं के भौतिक और रासायनिक गुणों की तुलना करेगा। साथ ही यह देखेगा कि मंगल ने उनकी सतह और आसपास के वातावरण को किस तरह प्रभावित किया है। फोबोस से वापस लाया गया नमूना इस सवाल के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि प्रयोगशाला में उसकी संरचना और रसायन का विश्लेषण अंतरिक्ष यान के उपकरणों से कहीं अधिक बारीकी से किया जा सकता है।
MMX का नेतृत्व JAXA कर रहा है, लेकिन यह एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना है। इसमें NASA, फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES, जर्मनी का DLR और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ESA शामिल हैं।
CNES और DLR ने IDEFIX नाम का छोटा रोवर विकसित किया है। इसे फोबोस की सतह पर संचालित करने के लिए बनाया गया है और योजना है कि इसे मुख्य अंतरिक्ष यान की सतही गतिविधियों से पहले वहां उतारा जाए।
IDEFIX फोबोस की सतह और रेगोलिथ के गुणों का मापन करेगा। इससे वैज्ञानिकों को भूभाग समझने में मदद मिलेगी और MMX के लैंडिंग तथा नमूना संग्रह अभियानों का जोखिम घट सकता है। रोवर के लिए लगभग 100 दिनों के सतही मिशन की योजना है।
NASA ने MMX के लिए MEGANE उपकरण उपलब्ध कराया है। इसका पूरा नाम Mars-moon Exploration with GAmma rays and NEutrons है। यह गामा-किरणों और न्यूट्रॉन के मापन से फोबोस और डिमोस में मौजूद तत्वों की संरचना का अध्ययन करेगा।
MEGANE से मिलने वाले आंकड़े इस मूल सवाल का जवाब खोजने में योगदान देंगे कि फोबोस मंगल द्वारा पकड़ा गया क्षुद्रग्रह है या किसी विशाल टकराव से बना पदार्थ।
JAXA अंतरिक्ष यान, नेविगेशन, दूरसंवेदी अवलोकन, फोबोस पर उतरने के प्रयास, नमूना संग्रह, पृथ्वी तक वापसी और नमूनों के संरक्षण व शुरुआती विश्लेषण से जुड़ी मुख्य जिम्मेदारियां संभाल रहा है। इस मिशन में हायाबुसा2 से विकसित तकनीकों को मंगल प्रणाली जैसे अधिक जटिल वातावरण में लागू किया जाएगा।
फोबोस को लंबे समय से भविष्य के मानव मंगल अभियानों के लिए संभावित ब्रिजहेड या पड़ाव के रूप में देखा जाता रहा है। यह मंगल के काफी करीब है, लेकिन वहां से संचालित मिशन को मंगल की सतह पर उतरने और फिर उसके वायुमंडल से बाहर निकलने की कुछ कठिनाइयों से बचाया जा सकता है।
MMX कोई मानवयुक्त स्टेशन बनाने या चलाने वाला मिशन नहीं है। इसका योगदान अधिक बुनियादी और व्यावहारिक है: यह फोबोस की सतह, भूभाग, गुरुत्वाकर्षण वातावरण, संभावित जोखिम, संरचना और वहां काम करने की व्यवहारिक कठिनाइयों के बारे में बेहतर जानकारी देगा। यही आंकड़े भविष्य के योजनाकारों को यह आकलन करने में मदद कर सकते हैं कि फोबोस पर परिवहन, बुनियादी ढांचे या मिशन-सहायता सुविधाएं बनाना कितना व्यवहार्य होगा।
MMX की खासियत यह है कि यह एक ही अभियान में तीन बड़े काम जोड़ता है: मंगल के दोनों चंद्रमाओं का तुलनात्मक सर्वेक्षण, फोबोस की सतह पर संचालन और नमूना लेकर पृथ्वी पर वापसी। 20 अक्टूबर 2026 का प्रस्तावित लॉन्च इस लंबी यात्रा की शुरुआत होगा। यदि मिशन योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो 2031 में फोबोस की सामग्री पृथ्वी पर पहुंच सकती है, जिससे मंगल के चंद्रमाओं की उत्पत्ति और मंगल प्रणाली के विकास पर नई रोशनी पड़ेगी।
सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यही है कि MMX अभी नियोजित मिशन है। फोबोस पर उतरना, 10 ग्राम से अधिक नमूना जुटाना और नमूना कैप्सूल को ऑस्ट्रेलिया तक वापस लाना—ये सभी लक्ष्य हैं, पहले से सुनिश्चित परिणाम नहीं।