‘M&Ms’ के पीछे कथित विचार केवल सैन्य नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि दबाव बनाना था। यदि मॉस्को के एयरपोर्ट लंबे समय तक बंद रहते, तो विदेश यात्रा के लिए इस्तांबुल या दुबई जैसे हब पर निर्भर अपेक्षाकृत संपन्न रूसियों की आवाजाही प्रभावित होती। सूत्रों के मुताबिक, इससे यह धारणा कमजोर पड़ सकती थी कि रूस का अभिजात वर्ग युद्ध के असर से अलग-थलग रह सकता है और बातचीत के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बन सकता है।
लेकिन यही रणनीति राजनीतिक और मानवीय रूप से बेहद जोखिमभरी होती। इसका असर केवल रूसी यात्रियों पर नहीं पड़ता; यात्री, पायलट, केबिन क्रू, एयरपोर्ट कर्मचारी और अन्य देशों से आने-जाने वाले लोग भी खतरे में आ सकते थे। योजना की कथित उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती कि भारी व्यवधान पैदा किया जाए, लेकिन बड़े पैमाने पर जनहानि न हो।
स्वायत्त तकनीक का इस्तेमाल अपने-आप में गैरकानूनी नहीं माना जाता। असली सवाल यह होता है कि हथियारों को किस तरह निर्देशित किया गया, उनका लक्ष्य क्या था, वे सैन्य और नागरिक वस्तुओं में कितनी विश्वसनीयता से अंतर कर सकते थे और नागरिक नुकसान को कम करने के लिए कौन-सी सावधानियां बरती गईं।
व्यस्त नागरिक एयरपोर्ट्स के आसपास स्वायत्त ड्रोन झुंड का संचालन विशेष रूप से कठिन होता। एक ही समय में विमान, रनवे, टर्मिनल, वाहन और लोग तेजी से बदलते हवाई क्षेत्र में मौजूद हो सकते हैं। दृश्य पहचान पर निर्भर ड्रोन अपने आसपास की स्थिति खो सकते हैं, किसी वस्तु को गलत पहचान सकते हैं या एक बार स्वतंत्र रूप से उड़ान शुरू करने के बाद उन्हें समय रहते मोड़ना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से ऐसी योजना पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तीन बुनियादी सिद्धांत लागू होते हैं: नागरिकों और सैन्य लक्ष्यों में अंतर करना, संभावित नुकसान की तुलना सैन्य लाभ से करना और हमले में संभव सभी सावधानियां बरतना। यदि किसी अभियान से नागरिक हवाई यात्रा को जानबूझकर असुरक्षित बनाने की आशंका हो, तो नागरिकों और नागरिक ढांचे पर संभावित असर का आकलन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
द अटलांटिक के सूत्रों के मुताबिक, वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को चिंता थी कि इनमें से कोई ड्रोन नागरिक विमान से टकरा सकता है। ऐसी घटना में यात्री, चालक दल या एयरपोर्ट कर्मचारी मारे जा सकते थे। रिपोर्ट के अनुसार, ज़ेलेंस्की को डर था कि इसे “पाइरेसी” यानी हवाई डकैती या समुद्री डकैती जैसी गंभीर कार्रवाई के रूप में पेश किया जा सकता है। इसके बावजूद, कथित राजनयिक लाभ की उम्मीद में योजना पर कई महीनों तक काम चलता रहा।
इस पूरे दावे को लेकर यूक्रेन के भीतर से विरोधाभासी प्रतिक्रियाएं आईं। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार किया, जबकि एक अन्य अधिकारी ने रिपोर्ट को झूठा बताया और कहा कि यूक्रेन के पास ऐसे पर्याप्त सटीक और विश्वसनीय लंबी दूरी के हथियार नहीं हैं, जिनसे मॉस्को के एयरपोर्ट्स को नागरिकों के लिए अस्वीकार्य जोखिम पैदा किए बिना निशाना बनाया जा सके।
इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘M&Ms’ किसी सफलतापूर्वक चलाए गए अभियान का प्रमाण नहीं है। यह मुख्यतः गुमनाम सूत्रों पर आधारित एक कथित प्रस्ताव है, जिसे ज़ेलेंस्की के कार्यालय के एक अधिकारी ने सीधे खारिज किया है।
द अटलांटिक ने योजना के ठहरने को रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव की जुलाई में हुई बर्खास्तगी से जोड़ा। फेदोरोव यूक्रेन में ड्रोन उत्पादन बढ़ाने और युद्धक्षेत्र में तकनीकी प्रयोगों को आगे बढ़ाने के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। अलग-अलग रिपोर्टों में फेदोरोव और उस समय के सेना प्रमुख ओलेक्सांद्र सिर्स्की के बीच युद्ध की दिशा और तकनीक की भूमिका को लेकर तनाव का भी जिक्र किया गया था।
इसके बाद दोनों को व्यापक नेतृत्व फेरबदल में उनके पदों से हटा दिया गया। येवहेनी खमारा को कार्यवाहक रक्षा मंत्री बनाया गया और बाद में उन्हें इस पद के लिए औपचारिक रूप से नामित तथा मंजूर किया गया।
फेदोरोव की बर्खास्तगी पर राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन भी हुए। उस समय की रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने युद्धकाल में चुनाव कराने की मांग की थी। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग यह साबित नहीं करती कि नेतृत्व में बदलाव विशेष रूप से ‘M&Ms’ योजना रोकने के लिए किया गया था। वह केवल योजना के कथित ठहराव और फेदोरोव की बर्खास्तगी के बीच संबंध बताती है।
द अटलांटिक ने ‘M&Ms’ को पूरी तरह रद्द किए जाने के बजाय ठहरा हुआ या shelved बताया। इसका मतलब है कि बदले हुए नेतृत्व या परिस्थितियों में इस विचार पर फिर विचार किए जाने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं गया है। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि योजना दोबारा शुरू हुई या वास्तव में लागू की गई।
इसे यूक्रेन के जारी लंबी दूरी वाले ड्रोन अभियान से अलग समझना चाहिए। 16 अगस्त को रूस ने दावा किया कि उसने पूरे देश में यूक्रेन के 822 ड्रोन मार गिराए, जिनमें से सैकड़ों मॉस्को क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। रॉयटर्स और एनपीआर ने इन रूसी दावों, मॉस्को क्षेत्र में हुई क्षति और मौतों की रिपोर्ट की, लेकिन लॉन्च किए गए ड्रोन और रोके गए ड्रोन की कुल संख्या की स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है।
‘M&Ms’ की कहानी एक ऐसी कथित, लेकिन लागू न की गई रणनीति का वर्णन करती है जिसमें सस्ते और दृश्य-निर्देशन वाले स्वायत्त ड्रोन बड़ी संख्या में भेजकर मॉस्को के नागरिक एयरपोर्ट्स को सामान्य संचालन के लिए असुरक्षित बनाने की योजना थी। इसका राजनीतिक दबाव रूस के संपन्न वर्ग की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही बाधित करके पैदा करना था।
लेकिन इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत—स्वायत्त ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल—सबसे बड़ा जोखिम भी थी। नागरिक विमानों और लोगों से भरे हवाई क्षेत्र में ऐसे हथियारों का संचालन गलत पहचान, नियंत्रण खोने और बड़े पैमाने पर नागरिक नुकसान की आशंका बढ़ाता। इसलिए यूक्रेन का व्यापक ड्रोन अभियान वास्तविक और लगातार जारी है, लेकिन विशेष ‘M&Ms’ योजना अभी भी गुमनाम सूत्रों पर आधारित एक अपुष्ट दावा है, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने खारिज किया है।