ब्रिटेन का अनुभव दिखाता है कि सामान्य कैमरा नियम हमेशा पर्याप्त नहीं हो सकते। कोई स्थल फिल्मांकन पर रोक लगा सकता है, लेकिन अगर यह पता लगाना ही मुश्किल हो कि रिकॉर्डिंग हो रही है या नहीं, तो वह पूरे डिवाइस को प्रतिबंधित करना चुन सकता है।
18 अगस्त 2026 को अमेरिकी Immigration and Customs Enforcement यानी ICE ने कथित तौर पर कर्मचारियों को संघीय कार्यस्थलों में Meta ग्लासेस या इसी तरह के उपकरण पहनने से रोक दिया। एजेंसी ने इन्हें निजी स्वामित्व वाले body-worn cameras यानी शरीर पर पहने जाने वाले कैमरों के रूप में देखा और चेतावनी दी कि ये अनजाने में संवेदनशील जानकारी रिकॉर्ड या प्रसारित कर सकते हैं, जिससे निजता और कानूनी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
यह निर्देश उन रिपोर्टों के बाद आया जिनमें कई अमेरिकी राज्यों में आव्रजन अभियानों के दौरान ICE और Customs and Border Protection के कर्मचारियों को Ray-Ban Meta ग्लासेस पहने देखा गया था।
अमेरिका में स्थिति एक नीति-विरोधाभास भी सामने लाती है। DHS के वित्तीय वर्ष 2027 के प्रस्तावित बजट में ICE के लिए वास्तविक समय में बायोमेट्रिक पहचान करने वाली स्मार्ट ग्लासेस के परिचालन प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए 75 लाख डॉलर का प्रावधान शामिल है। यह परियोजना अभी विकास और बजट प्रस्ताव के चरण में है; उपलब्ध स्रोत यह साबित नहीं करते कि ऐसी प्रणाली पहले से तैनात है।
सरकारी नियंत्रण वाले उपकरण और बिना आधिकारिक रिकॉर्डिंग प्रणाली या स्पष्ट chain of custody वाले उपभोक्ता डिवाइस के बीच यह अंतर कार्यस्थल की निगरानी और डेटा नियंत्रण से जुड़ा है। फिर भी सरकारी facial-recognition ग्लासेस अपने साथ सटीकता, निगरानी, डेटा रखने की अवधि और मैदान में पहचाने गए लोगों के अधिकारों से जुड़े अलग सवाल ला सकती हैं।
जर्मनी में डिजिटल अधिकार संगठन HateAid ने 12 अगस्त को Meta, Ray-Ban और Oakley से जुड़ी संस्थाओं तथा इन ग्लासेस को बेचने वाले कई खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की। संगठन का तर्क है कि सामान्य चश्मे जैसी दिखने वाली, लेकिन बिना जानकारी दिए रिकॉर्डिंग सक्षम करने वाली स्मार्ट ग्लासेस जर्मनी में रोजमर्रा की वस्तुओं के रूप में छिपे रिकॉर्डिंग उपकरणों की बिक्री पर लागू प्रतिबंधों से टकरा सकती हैं।
HateAid ने Wayfarer Gen 2 मॉडल की बिक्री पर रोक और “safety by design” के बाध्यकारी नियमों की मांग की है, ताकि लोगों को उनकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड करना मुश्किल या असंभव बनाया जा सके।
आपराधिक शिकायत किसी अपराध का अंतिम निष्कर्ष, दोषसिद्धि या तत्काल बिक्री प्रतिबंध नहीं होती। यह जांच की मांग और आरोप का औपचारिक माध्यम है। जर्मनी की कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल किसी व्यक्ति के व्यवहार पर नहीं, बल्कि उत्पाद के डिजाइन और उसकी बिक्री पर सवाल उठाती है।
Meta ने इस तर्क को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि ग्लासेस को 2022 में जर्मनी के नियामक से मंजूरी मिली थी और इनमें शुरुआत से ही निजता सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। दोनों पक्षों के बीच मूल कानूनी सवाल यही है: क्या रिकॉर्डिंग का स्पष्ट संकेत और अन्य सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं, जब कैमरा ऐसे उपकरण में लगा हो जो सामान्य चश्मे जैसा दिखता है?
विवाद तब और गहरा गया जब Meta के ग्लासेस ऐप से जुड़े facial-recognition code और एक ऐसे पेटेंट की रिपोर्ट सामने आई जिसमें स्मार्ट कैमरों के जरिए लोगों की पहचान करने या दृश्यों को समझने की संभावना बताई गई थी। पेटेंट किसी कंपनी की संभावित तकनीकी योजना दिखाता है; यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह फीचर मौजूदा उपभोक्ता उत्पादों में सक्रिय है।
Electronic Frontier Foundation ने static analysis के जरिए facial-recognition code की मौजूदगी की पुष्टि करने की बात कही। संगठन ने बाद में बताया कि सार्वजनिक जांच के बाद Meta ने ऐप के एक अपडेट से निष्क्रिय facial-recognition code हटा दिया।
आलोचकों के लिए निष्क्रिय या हटाया गया फीचर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कैमरे के संभावित इस्तेमाल का दायरा बदल जाता है। रिकॉर्डिंग एक दृश्य संग्रह बनाती है; स्वचालित पहचान उस संग्रह को नाम, प्रोफाइल या अन्य निजी जानकारी से जोड़ सकती है। इसी वजह से डिजिटल अधिकार समूह इसे केवल छिपकर फोटो लेने का मामला नहीं, बल्कि निगरानी और सार्वजनिक जीवन में व्यावहारिक गुमनामी का सवाल मानते हैं।
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब Meta की स्मार्ट-ग्लासेस बिक्री तेजी से बढ़ रही है। Ray-Ban की निर्माता EssilorLuxottica ने बताया कि 2025 में 70 लाख से अधिक AI ग्लासेस बिके, जबकि 2023 और 2024 में कुल मिलाकर लगभग 20 लाख ग्लासेस बिके थे।
इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने पर दुरुपयोग या लापरवाही का छोटा अनुपात भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर सकता है। जैसे-जैसे ये डिवाइस आम होते जाएंगे, कैमरा लगे चश्मों को असामान्य अपवाद मानना कठिन होगा। सवाल यह बन जाता है कि क्या लोगों को सिनेमाघर, रेस्तरां, कार्यस्थल या सड़क पर यह मानकर चलना पड़ेगा कि सामने दिख रहा सामान्य चश्मा उन्हें रिकॉर्ड कर सकता है।
ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी की प्रतिक्रियाएं अलग हैं, लेकिन समस्या एक जैसी है। संस्थाएं ऐसे स्थानों को सुरक्षित रखना चाहती हैं जहां रिकॉर्डिंग सीमित हो, गोपनीय जानकारी सुरक्षित रहे और लोग सार्वजनिक जीवन में बिना लगातार व्यक्तिगत पहचान के घूम सकें। स्मार्ट ग्लासेस इन अपेक्षाओं को कठिन बनाते हैं क्योंकि कैमरा पहनने योग्य, मोबाइल और सामाजिक रूप से अस्पष्ट होता है।
फिलहाल उठाए गए कदम व्यावहारिक हैं—प्रवेश द्वार पर ग्लासेस रोकना, कार्यस्थल में इन्हें रिकॉर्डिंग डिवाइस मानना या छिपे रिकॉर्डिंग उपकरणों से जुड़े कानूनों के तहत बिक्री को चुनौती देना। क्या ये उपाय पर्याप्त होंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य के सुरक्षा उपाय रिकॉर्डिंग को सचमुच स्पष्ट बनाते हैं या नहीं, बाद में पहचान और डेटा के दुरुपयोग को कितना सीमित करते हैं और आसपास मौजूद लोगों को कितनी वास्तविक सुरक्षा देते हैं। केवल उपयोगकर्ता के जिम्मेदार व्यवहार पर भरोसा करना इस समस्या का पूरा समाधान नहीं है।