तेल के प्रवाह से जुड़े प्रमुख आंकड़े अलग-अलग प्रणालियों से आए हैं, इसलिए उन्हें एक-दूसरे का सीधा विकल्प नहीं माना जा सकता:
इस अंतर की वजह यह हो सकती है कि अलग-अलग आकलन अलग चीजें गिन रहे हों—जहाजों पर दिखाई देने वाला तेल, पूरे खाड़ी क्षेत्र से बाहर भेजी गई खेप, पाइपलाइन निर्यात या कम दिखाई देने वाले मार्गों से गुजर रहे कार्गो। ट्रैकिंग तब और कठिन हो जाती है जब जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं या घोषित समुद्री मार्ग से अलग चलते हैं।
बाजार पर असर समझने वालों के लिए व्यावहारिक निष्कर्ष किसी एक विवादित आंकड़े से अधिक महत्वपूर्ण है: कुछ आपूर्ति वापस आई है, लेकिन हॉर्मुज़ अब भी सामान्य और भरोसेमंद मात्रा में तेल नहीं भेज रहा।
सैन्य सुरक्षा किसी मार्ग को अपने-आप व्यावसायिक रूप से सुरक्षित नहीं बना देती। टैंकर कंपनियों को बीमा, चालक दल की सुरक्षा, संभावित देरी, प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम और दोबारा हमले की आशंका का भी हिसाब रखना पड़ता है। संकट के शुरुआती दौर में कई जहाजों के लिए बीमा उपलब्ध नहीं था या उसकी कीमत अत्यधिक बढ़ गई थी।
जहाजों के आंकड़े बताते हैं कि प्रवाह कितनी तेजी से गिर सकता है। जुलाई में एक दिन ईरानी हमलों और ईरान से जुड़े जहाजों पर अमेरिकी नाकाबंदी फिर शुरू होने के बाद हॉर्मुज़ से केवल तीन कमोडिटी जहाज गुजरे। Reuters ने Kpler के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अगस्त के मध्य तक ऐसे जहाजों की आवाजाही में थोड़ी सुधार के बावजूद यह महीने के दैनिक औसत से कम थी।
बड़े जहाज संचालकों का व्यवहार भी सावधानी की पुष्टि करता है। उद्योग सूत्रों, टैंकर-ट्रैकर Vortexa और एक शिप ब्रोकर के अनुसार, COSCO Shipping Energy Transportation और China Merchants Energy Shipping ने जुलाई के अंत से हॉर्मुज़ और बाब-अल-मंदेब दोनों से अपने टैंकर दूर रखे हैं। वे खाड़ी के बाहर तेल कार्गो लेने का विकल्प अपना रहे हैं।
यानी सुरक्षित गलियारा यह दिखाता है कि सैन्य सुरक्षा में तेल ले जाना संभव है, लेकिन इससे पूरी शिपिंग इंडस्ट्री को सामान्य व्यापार फिर शुरू करने का भरोसा नहीं मिला है।
ईरान की नाकाबंदी केवल जलडमरूमध्य को भौतिक रूप से बंद करने पर निर्भर नहीं है। अनिश्चितता भी उसका बड़ा हथियार है। बारूदी सुरंगें, ड्रोन, मिसाइलें और छोटी नौकाएं किसी संकरे समुद्री रास्ते को व्यावसायिक रूप से अनुपयोगी बना सकती हैं, भले ही कुछ जहाज फिर भी उससे निकल जाएं। इससे तेहरान को खाड़ी के तेल निर्यातकों, जहाज मालिकों और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बनाने की ताकत मिलती है।
अमेरिकी सुरक्षा वाला मार्ग इस ताकत को कुछ हद तक कमजोर करता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि ईरान पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से जलडमरूमध्य बंद नहीं कर सकता। अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी अनिश्चितकाल तक जारी रख सकता है।
फिर भी यह ईरान के प्रभाव का निर्णायक अंत नहीं है। वह अब भी जहाजों, बंदरगाहों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की धमकी दे सकता है और मुख्यधारा की शिपिंग कंपनियों को सतर्क रहने पर मजबूर कर सकता है। जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को लेकर अमेरिका और ईरान के परस्पर विरोधी दावों के बीच कोई नया हमला, चेतावनी या कूटनीतिक विफलता यातायात को फिर घटा सकती है।
आपातकालीन तेल भंडार से निकासी ने आपूर्ति व्यवधान का असर कुछ कम किया है, लेकिन इससे अमेरिका की अगली आपदा से निपटने की गुंजाइश भी घटी है। 14 अगस्त तक अमेरिकी Strategic Petroleum Reserve (SPR)—यानी सरकार का आपात कच्चा तेल भंडार—करीब 29.34 करोड़ बैरल रह गया था। वाणिज्यिक कच्चे तेल का भंडार पांच साल के औसत से लगभग 2% नीचे था। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) का अनुमान है कि 2026 के अंत तक वाणिज्यिक भंडार अपने पांच साल के मौसमी दायरे की निचली सीमा से भी नीचे रह सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका में तेल खत्म होने वाला है। लेकिन अगर सुरक्षित समुद्री गलियारा बंद हो जाए, किसी रिफाइनरी में बड़ी खराबी आए या संघर्ष किसी अन्य आपूर्ति मार्ग तक फैल जाए, तो देश के पास रणनीतिक सुरक्षा-कवच कम होगा। भंडार अस्थायी कमी को संभाल सकते हैं; वे वैश्विक टैंकर यातायात की मात्रा और लचीलेपन की स्थायी भरपाई नहीं कर सकते।
अगर सुरक्षित समुद्री आवाजाही बनी रहती है तो कुछ उत्पादक अपना उत्पादन और निर्यात बढ़ा सकते हैं। जिन देशों को भंडारण टैंक भरने के कारण उत्पादन धीमा करना पड़ा है, वे यह भरोसा बनने पर कुएं और लोडिंग संचालन फिर शुरू कर सकते हैं कि कार्गो क्षेत्र से बाहर जा पाएगा।
हालांकि, निकट अवधि में संकट-पूर्व स्तर पर पूरी वापसी की संभावना कम है। जहाज मालिक अब भी जोखिम से बच रहे हैं, बीमा महंगा है और टर्मिनल, पाइपलाइन तथा लोडिंग सुविधाएं हमले की चपेट में हैं। सबसे संभावित स्थिति यह है कि उत्पादन में आंशिक सुधार हो, लेकिन बीच-बीच में व्यवधान आते रहें—न कि कारोबार एक झटके में सामान्य हो जाए।
सऊदी अरब अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल देश के भीतर से होते हुए लाल सागर के बंदरगाह यानबू तक भेज सकता है। यह मार्ग हॉर्मुज़ से पूरी तरह बच निकलता है और समुद्री संकट के दौरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। लेकिन पाइपलाइन और लाल सागर की लोडिंग सुविधाओं की क्षमता उस विशाल मात्रा की तुलना में सीमित है, जो सामान्यतः हॉर्मुज़ से गुजरती है।
यूएई की हबशन–फुजैराह पाइपलाइन अबू धाबी के तेल उत्पादक क्षेत्र को हॉर्मुज़ के बाहर स्थित बंदरगाह से जोड़ती है। Reuters के अनुसार इसकी क्षमता करीब 15–18 लाख बैरल प्रतिदिन है। लेकिन फुजैराह पर भी ड्रोन हमलों का असर पड़ा है। इससे स्पष्ट होता है कि वैकल्पिक मार्ग सुरक्षा जोखिम खत्म करने के बजाय उसे किसी दूसरे स्थान पर पहुंचा सकते हैं।
इराक किर्कुक–तुर्किये पाइपलाइन के जरिए भूमध्य सागर के जिहान बंदरगाह तक तेल भेज सकता है। बगदाद ने अन्य निर्यात तंत्र और मार्गों पर भी काम किया है। मगर इन विकल्पों पर सीमित क्षमता, पुराना या कमजोर बुनियादी ढांचा, वित्तीय अड़चनें और राजनीतिक-सुरक्षा जोखिम लागू होते हैं। इराक अब भी दक्षिणी खाड़ी टर्मिनलों पर काफी निर्भर है, इसलिए उत्तरी मार्ग राहत दे सकता है, पूरी भरपाई नहीं।
दक्षिणी समुद्री गलियारे की योजना में ओमान की अहम भूमिका है, क्योंकि मार्ग उसके समुद्री क्षेत्र और तटरेखा के करीब से गुजरता है। सार्वजनिक रिपोर्टिंग ओमान के भूगोल के महत्व की पुष्टि करती है, लेकिन उपलब्ध प्रमाण किसी ईरान–ओमान बातचीत की शर्तों या नतीजे का स्पष्ट विवरण देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए किसी बातचीत से संचालन संबंधी समझौता हुआ है, ऐसे दावों को मजबूत दस्तावेज सामने आने तक अपुष्ट मानना चाहिए।
कच्चे तेल को कभी-कभी पाइपलाइन या वैकल्पिक बंदरगाहों से मोड़ा जा सकता है, लेकिन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए ऐसा करना कहीं कठिन है। दुनिया के बड़े LNG निर्यातकों में शामिल कतर के पास निर्यात के लिए कोई सार्थक वैकल्पिक मार्ग नहीं है। लंबे व्यवधान की स्थिति में उसके शिपमेंट हॉर्मुज़ पर विशेष रूप से निर्भर रहेंगे।
अमेरिकी सुरक्षा वाला समुद्री गलियारा एक सामरिक सफलता है, लेकिन संरचनात्मक समाधान नहीं। इससे काफी मात्रा में तेल की आवाजाही जारी है और ईरान की पूरी तरह बंदी लागू करने की क्षमता पर सवाल खड़े हुए हैं। फिर भी यह व्यवस्था सैन्य सुरक्षा, अनुकूल परिस्थितियों और असाधारण जोखिम उठाने को तैयार जहाज मालिकों पर निर्भर है।
वैकल्पिक पाइपलाइनें खाड़ी के निर्यात मार्गों में विविधता ला सकती हैं, लेकिन वे हॉर्मुज़ की क्षमता, लचीलेपन और क्षेत्र के सबसे बड़े लोडिंग बुनियादी ढांचे तक पहुंच की बराबरी नहीं करतीं। वे पंपिंग स्टेशनों, बंदरगाहों और अंदरूनी सुविधाओं को नए लक्ष्य में बदल देती हैं। दूसरी ओर, बदले हुए समुद्री मार्ग लाल सागर या भूमध्य सागर के रास्तों में खतरा पैदा कर सकते हैं।
ऊर्जा बाजारों के लिए असली सवाल यह नहीं है कि हॉर्मुज़ से कुछ तेल निकल सकता है या नहीं। वह निकल सकता है। असली सवाल यह है कि क्या पर्याप्त संख्या में जहाज, बीमा कंपनियां और सरकारें इस मार्ग को इतना सुरक्षित मानती हैं कि नियमित और टिकाऊ व्यापार फिर शुरू हो सके। अभी तक के संकेत एक सीमित गलियारे और ऐसे संकट की ओर इशारा करते हैं, जो किसी एक हमले या नए तनाव के साथ फिर कस सकता है।