दर बढ़ाने का सबसे मजबूत आधार यह है कि महंगाई ECB के 2% लक्ष्य से ऊपर है और जुलाई में इसमें फिर तेजी आई। यूरोस्टैट के फ्लैश अनुमान के अनुसार, यूरो क्षेत्र की वार्षिक महंगाई जून के 2.8% से बढ़कर जुलाई 2026 में 2.9% हो गई।
इस बढ़ोतरी में ऊर्जा कीमतों का योगदान सबसे स्पष्ट रहा। जुलाई में ऊर्जा महंगाई 10.0% रहने का अनुमान है, जो जून के 8.5% से अधिक है। सेवा क्षेत्र की महंगाई भी 3.2% से बढ़कर 3.3% हो गई। दूसरी ओर, खाद्य पदार्थों, शराब और तंबाकू की महंगाई 1.5% से घटकर 1.2% रही, जबकि गैर-ऊर्जा औद्योगिक वस्तुओं की महंगाई 0.7% से बढ़कर 0.9% हो गई।
रॉयटर्स के अनुसार, अस्थिर खाद्य और ऊर्जा कीमतों को हटाकर देखी जाने वाली अंतर्निहित महंगाई जुलाई में 2.5% रही, जो जून के 2.4% से ऊपर है। सेवाओं की कीमतों को इस दबाव का अहम कारण बताया गया। इसलिए कुल महंगाई में बढ़ोतरी सीमित होने के बावजूद ECB के नीति-निर्माताओं के लिए सतर्क रहने की वजह बनी हुई है।
काज़ाक्स ने कहा कि दरों को और बढ़ाने के पक्ष और विपक्ष—दोनों में तर्क हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग में उन्होंने दर बढ़ोतरी के खिलाफ दिए गए सभी तर्कों की पूरी सूची नहीं दी है, इसलिए उन्हें ECB की निश्चित नीति-योजना के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
फिर भी व्यापक दुविधा साफ है। ऊंची ब्याज दरें महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन ECB को यह भी देखना होगा कि पहले की गई सख्ती का असर अर्थव्यवस्था पर अभी कितना बाकी है और नए झटके विकास को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं। लातविया के केंद्रीय बैंक की एक अलग रिपोर्ट काज़ाक्स के रुख को सतर्क और आंकड़ा-आधारित बताती है।
इसलिए जुलाई की 2.9% महंगाई ECB को सावधान रहने का कारण देती है, लेकिन अकेले यह आंकड़ा सितंबर में दर बढ़ोतरी को अनिवार्य साबित नहीं करता।
काज़ाक्स ने कहा कि मौजूदा अनिश्चितता के दौर में फॉरवर्ड गाइडेंस—यानी भविष्य की ब्याज दरों के बारे में पहले से स्पष्ट संकेत देना—उलटा असर डाल सकता है। उनका तर्क है कि जब आर्थिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हों, तब केंद्रीय बैंक को भविष्य के फैसलों का विस्तृत वादा नहीं करना चाहिए।
बाजारों के लिए इसका मतलब है कि सितंबर में संभावित नतीजों की सीमा कुछ व्यापक बनी रहेगी। निवेशक अब भी जमा दर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद लगा सकते हैं, लेकिन यह बाजार का अनुमान होगा, ECB की आधिकारिक प्रतिबद्धता नहीं। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, बाजार ऐसी बढ़ोतरी की लगभग पूरी तरह उम्मीद कर रहा है, जबकि काज़ाक्स ने फैसला खुला रखा है।
काज़ाक्स के बयानों के अनुसार, वेतन वृद्धि धीरे-धीरे धीमी हो रही है और महंगाई की उम्मीदें ECB के लक्ष्य के आसपास स्थिर बनी हुई हैं।
अगर यह रुझान कायम रहता है, तो वेतन में कम होती तेजी घरेलू कीमतों पर लगातार बने रहने वाले दबाव का जोखिम घटा सकती है। महंगाई की उम्मीदों का लक्ष्य के करीब टिके रहना यह भी संकेत देता है कि परिवारों, कंपनियों और वित्तीय बाजारों को मूल्य स्थिरता के लिए ECB की प्रतिबद्धता पर अब भी भरोसा है। हालांकि, इससे ऊर्जा कीमतों की ताजा तेजी और लक्ष्य से ऊपर बनी कुल महंगाई की चुनौती खत्म नहीं होती।
ECB का सितंबर फैसला ऐसे समय आ रहा है जब यूरोजोन के सरकारी बॉन्ड बाजार में भी दबाव है। रॉयटर्स के अनुसार, जर्मनी की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 3.275% के 15-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंची, हालांकि बाद में इसमें कुछ नरमी आई। फ्रांस की 10-वर्षीय यील्ड 4.13% से ऊपर चली गई, जो 2008 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से ECB की नीति दर बदले बिना भी वित्तीय परिस्थितियां कड़ी हो सकती हैं। हालांकि, उपलब्ध साक्ष्य यूरोजोन में रिकॉर्ड बॉन्ड जारी होने, परिपक्व हो रहे बॉन्ड में ECB के पुनर्निवेश न करने या सितंबर के फैसले पर इन कारकों के सटीक प्रभाव जैसे सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते। इसलिए इन्हें किसी खास ECB फैसले के स्थापित कारणों के बजाय व्यापक बाजार पृष्ठभूमि के रूप में देखना चाहिए।
सबसे अहम सवाल यह होगा कि जुलाई की महंगाई वृद्धि मुख्य रूप से ऊर्जा कीमतों का अस्थायी झटका है या फिर व्यापक और लंबे समय तक बने रहने वाले दबाव का संकेत। जुलाई के आंकड़े दोनों पहलुओं की ओर इशारा करते हैं: ऊर्जा महंगाई में तेज बढ़ोतरी हुई, लेकिन सेवा और अंतर्निहित महंगाई भी ऊंची बनी रही।
काज़ाक्स का रुख ECB को दोनों दिशाओं में गुंजाइश देता है। अगर महंगाई का दबाव बना रहता है या और व्यापक होता है, तो अतिरिक्त सख्ती का विकल्प उपलब्ध है। वहीं, अगर नए आंकड़े दिखाते हैं कि मौजूदा नीति पर्याप्त है और ऊर्जा का झटका कमजोर पड़ रहा है, तो ECB इंतजार करने का फैसला कर सकता है।