रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन 24 सितंबर 2026 को UN महासभा में प्रस्तावित भाषण के लिए मह्मूद अब्बास को वीजा देने से फिर इनकार कर सकता है। यह लगातार दूसरा साल होगा जब उन्हें व्यक्तिगत रूप से सभा में आने से रोका जाएगा। वॉशिंगटन का कहना है कि 2025 के प्रतिबंध फिलिस्तीनी नेतृत्व द्वारा 7 अक्टूबर के हमले की निंदा न क...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What is the Trump administration’s plan to again bar Palestinian Authority President Mahmoud Abbas from entering the United States to addres. Article summary: The reported 2026 plan is to deny Mahmoud Abbas a visa to enter the United States for the UN General Assembly in New York—where he is scheduled to speak on September 24—repeating the 2025 exclusion. It is a reported plan. Topic tags: general, general web, government, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
अमेरिका कथित तौर पर फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) के अध्यक्ष मह्मूद अब्बास को सितंबर 2026 में न्यूयॉर्क आने से रोकने की तैयारी कर रहा है। अब्बास को 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देना है। यदि यह कदम लागू होता है, तो लगातार दूसरे साल वह महासभा के उच्चस्तरीय सत्र में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे। फिलहाल इसे अमेरिकी प्रशासन की रिपोर्टेड नीति के रूप में बताया जा रहा है, न कि विदेश विभाग की ओर से जारी विस्तृत नए आदेश के रूप में।
यह कदम 2025 के उस अमेरिकी फैसले को दोहराएगा, जिसमें अब्बास समेत लगभग 80 फिलिस्तीनी प्राधिकरण और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) अधिकारियों के वीजा देने से इनकार या पहले से जारी वीजा रद्द करने की बात कही गई थी। उस फैसले से वरिष्ठ फिलिस्तीनी अधिकारी न्यूयॉर्क में UN महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके, हालांकि फिलिस्तीन की UN में भागीदारी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
2025 में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि PA और PLO ने शांति साझेदार के रूप में भरोसा कायम करने के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं की हैं। वॉशिंगटन के अनुसार, इन संगठनों को 7 अक्टूबर 2023 के हमले समेत आतंकवाद की लगातार और स्पष्ट निंदा करनी चाहिए थी। अमेरिका ने फिलिस्तीनी शिक्षा व्यवस्था में आतंकवाद के लिए कथित उकसावे को समाप्त करने की मांग भी की।
अमेरिका ने इजरायल के साथ सीधी बातचीत के बाहर फिलिस्तीनी कूटनीतिक पहलों पर भी आपत्ति जताई। बाद की एक अमेरिकी विदेश विभाग रिपोर्ट में PA पर फिलिस्तीनी राज्य की अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में कानूनी व कूटनीतिक पहल का समर्थन करने का आरोप लगाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, ये कदम अहिंसा और दो-राष्ट्र समाधान से जुड़ी पिछली प्रतिबद्धताओं के विपरीत थे।
ये अमेरिकी सरकार द्वारा दिए गए आरोप और नीतिगत तर्क हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग इन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णीत या अंतिम रूप से प्रमाणित निष्कर्ष के तौर पर स्थापित नहीं करती।
2025 के प्रतिबंधों से अब्बास और लगभग 80 अन्य फिलिस्तीनी अधिकारियों की न्यूयॉर्क यात्रा प्रभावित हुई। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि UN में स्थित फिलिस्तीनी मिशन से जुड़े राजनयिकों को छूट दी जा सकती है। इससे मिशन का काम जारी रह सकता था, जबकि वरिष्ठ अधिकारी महासभा में शामिल नहीं हो सकते थे।
फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने इस फैसले की निंदा की और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून तथा 1947 के UN मुख्यालय समझौते का उल्लंघन है। इसके बाद महासभा के सामने एक व्यावहारिक और प्रक्रियात्मक सवाल खड़ा हुआ: अब्बास अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सकते थे, लेकिन फिलिस्तीन उच्चस्तरीय बहस में भाग लेना चाहता था।
19 सितंबर 2025 को महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर फिलिस्तीन को अपने राष्ट्रपति का पहले से रिकॉर्ड किया गया बयान भेजने और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए भाग लेने की अनुमति दी। प्रस्ताव 145 मतों के पक्ष में, 5 के विरोध में और 6 देशों के मतदान से अलग रहने के साथ पारित हुआ। अमेरिका और इजरायल इसके विरोध में मतदान करने वालों में शामिल थे।
इस व्यवस्था के तहत अब्बास ने न्यूयॉर्क स्थित UN कक्ष में उपस्थित होने के बजाय रामल्लाह से दूरस्थ माध्यम से महासभा को संबोधित किया।
रिपोर्टों के अनुसार, अब्बास ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने को कहा। तुर्की फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व का प्रमुख कूटनीतिक समर्थक रहा है और एर्दोआन की ट्रंप तक सीधी पहुंच भी है।
बताया जाता है कि एर्दोआन ने ट्रंप के सामने यह मामला उठाया, लेकिन वॉशिंगटन ने अपना फैसला बदलने के संकेत नहीं दिए। उपलब्ध रिपोर्टिंग में यह नहीं बताया गया है कि अमेरिकी अपील अलग से क्यों विफल हुई। इतना जरूर सामने आता है कि प्रशासन ने 2025 के वीजा प्रतिबंधों के पीछे मौजूद अपनी मूल नीति को बरकरार रखा।
इस विवाद का मुख्य कानूनी प्रश्न यह है कि UN मुख्यालय के मेजबान देश के रूप में अमेरिका, न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय जाने वाले फिलिस्तीनी अधिकारियों का प्रवेश रोक सकता है या नहीं।
फिलिस्तीनी अधिकारियों और UN विशेषज्ञों का कहना है कि 1947 का मुख्यालय समझौता अमेरिका को UN मुख्यालय जिले तक प्रतिनिधियों की यात्रा में बाधा डालने से रोकता है। UN विशेषज्ञों ने वॉशिंगटन से फिलिस्तीनी नेताओं को वीजा देने का आग्रह करते हुए समझौते के तहत मिलने वाली पहुंच का हवाला दिया।
अमेरिका का रुख इसके विपरीत है। वॉशिंगटन का कहना है कि UN से जुड़ी यात्रा के मामलों में भी वह वीजा, सुरक्षा, उग्रवाद और विदेश नीति से संबंधित प्रतिबंध लागू कर सकता है।
इस तरह यह सिर्फ वीजा का मामला नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी और कूटनीतिक टकराव है। उपलब्ध सामग्री यह निर्णायक रूप से तय नहीं करती कि अमेरिकी व्याख्या सही है या फिलिस्तीनी और UN पक्ष की।
अगर अब्बास अमेरिका नहीं आ पाते हैं, तो महासभा को फिलिस्तीन की दूरस्थ भागीदारी की अनुमति देने के लिए फिर एक अलग प्रक्रियात्मक प्रस्ताव लाना पड़ सकता है। इसमें पहले से रिकॉर्ड किया गया भाषण या लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंस शामिल हो सकती है। 2025 का प्रस्ताव UN के 80वें सत्र में भागीदारी के लिए बनाया गया था, इसलिए उसे बाद के सत्र के लिए स्वतः लागू स्थायी अनुमति नहीं माना जा सकता।
2025 का घटनाक्रम एक व्यावहारिक मिसाल जरूर पेश करता है: अमेरिकी प्रवेश प्रतिबंध किसी नेता को UN में व्यक्तिगत भाषण देने से रोक सकता है, लेकिन महासभा फिलिस्तीन की भागीदारी बनाए रखने के लिए अलग तंत्र बना सकती है। 2026 में ऐसा फिर होगा या नहीं, यह महासभा के फैसले और सितंबर की बैठक से पहले वॉशिंगटन के रुख में संभावित बदलाव पर निर्भर करेगा।
अब्बास का मामला अमेरिकी नीति के बड़े दायरे का हिस्सा है। राष्ट्रपति उद्घोषणा 10998 के तहत 1 जनवरी 2026 से 39 देशों के नागरिकों और फिलिस्तीनी प्राधिकरण द्वारा जारी या अनुमोदित यात्रा दस्तावेजों पर यात्रा करने वाले लोगों के प्रवेश और वीजा जारी करने पर पूर्ण या आंशिक रोक लगाई गई।
अमेरिकी विदेश विभाग से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, इस व्यवस्था में न्यूयॉर्क स्थित फिलिस्तीनी UN मिशन से जुड़े अधिकारियों के लिए सीमित अपवाद हैं। इससे स्थायी मिशन अपना काम जारी रख सकता है, लेकिन वरिष्ठ PA अधिकारी और अस्थायी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकों से बाहर रह सकते हैं।
इसी वजह से यह विवाद केवल एक नेता की यात्रा योजना तक सीमित नहीं है। इसमें अमेरिकी आव्रजन और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकार, PA का कूटनीतिक आचरण और UN मुख्यालय के मेजबान देश की पहुंच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी—तीनों के बीच संतुलन का सवाल शामिल है।
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रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन 24 सितंबर 2026 को UN महासभा में प्रस्तावित भाषण के लिए मह्मूद अब्बास को वीजा देने से फिर इनकार कर सकता है। यह लगातार दूसरा साल होगा जब उन्हें व्यक्तिगत रूप से सभा में आने से रोका जाएगा।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन 24 सितंबर 2026 को UN महासभा में प्रस्तावित भाषण के लिए मह्मूद अब्बास को वीजा देने से फिर इनकार कर सकता है। यह लगातार दूसरा साल होगा जब उन्हें व्यक्तिगत रूप से सभा में आने से रोका जाएगा। वॉशिंगटन का कहना है कि 2025 के प्रतिबंध फिलिस्तीनी नेतृत्व द्वारा 7 अक्टूबर के हमले की निंदा न करने, शिक्षा में आतंकवाद के लिए कथित उकसावे और इजरायल से सीधी बातचीत के बाहर अंतरराष्ट्रीय पहलों के कारण लगाए गए थे।
विवाद का केंद्र 1947 के UN मुख्यालय समझौते की व्याख्या है: क्या अमेरिका अपनी वीजा और सुरक्षा शक्तियों के आधार पर UN मुख्यालय जाने वाले फिलिस्तीनी अधिकारियों को रोक सकता है?