शोधकर्ताओं के अनुसार, बिल्लियों की किडनी में मौजूद असामान्य रूप से अधिक लिपिड ड्रॉपलेट पेशाब की रासायनिक पहचान को लंबे समय तक बनाए रखने वाले भंडार की तरह काम कर सकते हैं। पेशाब में पाए गए 13 अर्ध वाष्पशील शाखित श्रृंखला वाले फैटी एसिड (BFA) हर बिल्ली में अलग मिश्रण और अनुपात बनाते हैं, जबकि एक ही बिल्ली में यह प्रोफ...
शोध उत्तर

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इवाते यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मासाओ मियाज़ाकी के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय टीम ने प्रस्तावित किया है कि बिल्लियों की किडनी में असामान्य रूप से अधिक मात्रा में पाए जाने वाले लिपिड ड्रॉपलेट पेशाब में एक टिकाऊ रासायनिक पहचान बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इस पहचान में 13 अर्ध-वाष्पशील शाखित-श्रृंखला वाले फैटी एसिड (branched-chain fatty acids या BFAs) अहम भूमिका निभाते दिखे। हालांकि, अध्ययन एक मजबूत संभावित तंत्र प्रस्तुत करता है—यह प्रक्रिया के हर शारीरिक चरण का अंतिम प्रमाण नहीं है।
जिन ऊतकों की जांच की गई, उनमें BFAs केवल किडनी के ऊतक में मिले। BFA वाले तटस्थ लिपिड किडनी के बाहरी हिस्से, यानी रीनल कॉर्टेक्स, की कोशिकाओं में मौजूद लिपिड ड्रॉपलेट में पाए गए। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ये ड्रॉपलेट इन लिपिड का भंडार बनकर काम करते हैं।
बिल्लियों की किडनी में इन वसा-संग्रहित संरचनाओं की अधिकता लगभग एक सदी से वैज्ञानिकों के लिए पहेली रही है। नया अध्ययन संकेत देता है कि इनका एक काम पेशाब की गंध में बिल्ली की पहचान से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रखना हो सकता है।
हर बिल्ली के पेशाब में पाए गए 13 BFAs का संयोजन और उनकी सापेक्ष मात्रा अलग थी। यानी अलग-अलग बिल्लियों की गंध-प्रोफ़ाइल एक-दूसरे से काफी भिन्न थी, जबकि एक ही बिल्ली की प्रोफ़ाइल अलग-अलग नमूना-तिथियों पर अपेक्षाकृत स्थिर रही। आपस में संबंधित बिल्लियों की प्रोफ़ाइल कुछ अधिक मिलती-जुलती थी, फिर भी उनमें व्यक्तिगत अंतर कायम रहा।
ये फैटी एसिड अर्ध-वाष्पशील होते हैं और जल्दी उड़ नहीं जाते। 25 डिग्री सेल्सियस पर रखे पेशाब से भीगे नमूनों में उनकी प्रोफ़ाइल कम से कम 24 घंटे तक तुलनात्मक रूप से स्थिर रही। इसके विपरीत, अधिक वाष्पशील गंध-यौगिक समय के साथ तेजी से बदल सकते हैं। इस तरह पेशाब का निशान छोड़ने के बाद भी उसमें ‘कौन यहां था’ जैसी जानकारी कुछ समय तक बनी रह सकती है।
फ्लेमेन प्रतिक्रिया वह व्यवहार है जिसमें बिल्ली किसी गंध को सूंघते समय मुंह थोड़ा खोल लेती है और कुछ क्षणों के लिए अजीब-सा चेहरा बनाती है। इस प्रक्रिया से गंध के अणु जैकबसन के अंग या वोमेरोनैज़ल ऑर्गन तक पहुंच सकते हैं, जो रासायनिक संकेतों की पहचान में मदद करता है।
प्रयोगों में बिल्लियों ने अपनी गंध की तुलना में अनजान बिल्ली के पेशाब पर यह प्रतिक्रिया अधिक बार दिखाई। जब उन्हें एक ही नमूना बार-बार सूंघाया गया, तो प्रतिक्रिया धीरे-धीरे कम हुई। लेकिन जैसे ही दूसरी बिल्ली का पेशाब पेश किया गया, प्रतिक्रिया फिर बढ़ गई। इससे पता चलता है कि बिल्लियाँ परिचित और नई गंध के बीच अंतर कर रही थीं।
एक नियंत्रित परीक्षण में शोधकर्ताओं ने पेशाब के अन्य लिपिड घटकों को नियंत्रित रखते हुए केवल BFA वाले अंश में दाता-बिल्ली का मिश्रण बदला। जिस नमूने की गंध से बिल्लियाँ अभ्यस्त हो चुकी थीं, उसमें केवल यह BFA अंश बदलने पर उन्होंने सूंघने का व्यवहार बढ़ा दिया। यह इस बात का प्रमाण है कि वे अलग-अलग बिल्लियों के विशिष्ट BFA मिश्रणों को पहचान सकती हैं।
शोधकर्ताओं के मॉडल के अनुसार, किडनी के लिपिड ड्रॉपलेट BFA वाले लिपिड को जमा करके उनकी आपूर्ति को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं। इससे भोजन, स्वास्थ्य, शारीरिक स्थिति या अन्य अल्पकालिक बदलावों का असर गंध-पहचान पर तुरंत और बहुत अधिक नहीं पड़ता। परिणामस्वरूप, बिल्ली की पेशाब-आधारित पहचान अपेक्षाकृत स्थिर रह सकती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘बफरिंग’ अभी एक प्रस्तावित कार्य है। अध्ययन के रासायनिक और व्यवहार संबंधी परिणाम इसे समर्थन देते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने भोजन या स्वास्थ्य में बदलाव कर इस प्रभाव को सीधे नियंत्रित हस्तक्षेप के रूप में प्रदर्शित नहीं किया है।
शोधकर्ताओं ने शेर, बाघ, तेंदुआ, जगुआर, लिंक्स और इरियोमोटे बिल्ली में भी संबंधित पेशाबी यौगिकों और किडनी लिपिड ड्रॉपलेट की रिपोर्ट की। हालांकि, इन प्रजातियों में फैटी एसिड की प्रोफ़ाइल तथा लिपिड ड्रॉपलेट की मात्रा और वितरण अलग-अलग था। इरियोमोटे बिल्ली और त्सुशिमा तेंदुआ बिल्ली के बीच भी अंतर मिला, जो क्रमिक विकास के दौरान इस रासायनिक प्रणाली के विविध रूप लेने की ओर संकेत करता है।
फिर भी, जंगली फेलिड वास्तव में इन यौगिकों का इस्तेमाल एक-दूसरे की व्यक्तिगत पहचान के लिए करते हैं या नहीं, यह अभी जांचा जाना बाकी है।
यदि किसी बिल्ली की BFA प्रोफ़ाइल प्राकृतिक परिस्थितियों में लिए गए नमूनों में भी भरोसेमंद ढंग से दोहराई जा सके, तो पेशाब के नमूने दुर्लभ जंगली बिल्लियों की गैर-आक्रामक निगरानी का साधन बन सकते हैं। इससे व्यक्तिगत जानवरों की पहचान और उनके क्षेत्रीय व्यवहार पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
घरेलू बिल्लियों के पेशाब की तेज गंध को समझने और भविष्य में उसे नियंत्रित करने के नए तरीके विकसित करने में भी यह प्रणाली उपयोगी हो सकती है। हालांकि, अध्ययन से अभी कोई तैयार उत्पाद, घरेलू उपचार या तत्काल गंध-नियंत्रण समाधान हासिल नहीं हुआ है।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किडनी के लिपिड ड्रॉपलेट में जमा BFAs किस प्रक्रिया से पेशाब में छोड़े जाते हैं या वहां तक पहुंचते हैं। यही वह कड़ी है जिसे समझना इस संभावित ‘रासायनिक विजिटिंग कार्ड’ की पूरी जैविक कहानी को साबित करने के लिए जरूरी होगा।
Studio Global AI
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शोधकर्ताओं के अनुसार, बिल्लियों की किडनी में मौजूद असामान्य रूप से अधिक लिपिड ड्रॉपलेट पेशाब की रासायनिक पहचान को लंबे समय तक बनाए रखने वाले भंडार की तरह काम कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, बिल्लियों की किडनी में मौजूद असामान्य रूप से अधिक लिपिड ड्रॉपलेट पेशाब की रासायनिक पहचान को लंबे समय तक बनाए रखने वाले भंडार की तरह काम कर सकते हैं। पेशाब में पाए गए 13 अर्ध वाष्पशील शाखित श्रृंखला वाले फैटी एसिड (BFA) हर बिल्ली में अलग मिश्रण और अनुपात बनाते हैं, जबकि एक ही बिल्ली में यह प्रोफ़ाइल अपेक्षाकृत स्थिर रहती है।
फ्लेमेन प्रतिक्रिया और नियंत्रित गंध परीक्षणों से संकेत मिला कि बिल्लियाँ अनजान व्यक्तियों की गंध को इन फैटी एसिड मिश्रणों के आधार पर पहचान सकती हैं।