टक्करें प्रति न्यूक्लियॉन युग्म 5.36 TeV की केंद्र-भारी ऊर्जा पर हुईं। इससे ALICE को उन प्रणालियों में सामूहिक व्यवहार का अध्ययन करने का अवसर मिला, जो QGP के अध्ययन में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाली सीसा–सीसा टक्करों से काफी छोटी हैं।
क्वार्क–ग्लूऑन प्लाज़्मा पदार्थ की वह अत्यंत गर्म और घनी अवस्था है जिसमें क्वार्क और ग्लूऑन अलग-अलग हैड्रॉन—जैसे प्रोटॉन, न्यूट्रॉन या पायन—के भीतर बंधे नहीं रहते। इसे पहचानने का एक तरीका यह देखना है कि ऊर्जावान पार्टॉन उस माध्यम से गुजरते समय कैसे प्रभावित होते हैं।
ALICE ने ऑक्सीजन–ऑक्सीजन टकरावों में उच्च-ऊर्जा पायनों की संख्या में अपेक्षित कमी दर्ज की। यह इस बात के अनुरूप है कि उन्हें बनाने वाले पार्टॉन गर्म माध्यम में ऊर्जा खो रहे हैं। सहयोग के अनुसार, यह ऊर्जा-हानि ऑक्सीजन टकरावों में QGP बनने का स्पष्ट प्रमाण है और अब तक खोजी गई सबसे छोटी परमाणु-टक्कर प्रणाली तक इस प्रमुख संकेत को विस्तारित करती है।
ALICE ने ऑक्सीजन–ऑक्सीजन और नियोन–नियोन दोनों टकरावों में anisotropic collective flow यानी कणों के दिशात्मक सामूहिक प्रवाह को भी मापा। इसमें elliptic flow (v₂) और triangular flow (v₃) शामिल हैं। ये गुणांक बताते हैं कि टक्कर के बाद निकलने वाले कण किसी एक दिशा में अपेक्षाकृत अधिक क्यों फैलते हैं। इनके पर्याप्त बड़े मान और टक्कर की centrality—अर्थात टक्कर कितनी आमने-सामने हुई—के साथ बदलने का तरीका, बने हुए पदार्थ के द्रव-जैसे, hydrodynamic व्यवहार से मेल खाता है।
इस तुलना की कुंजी ऑक्सीजन-16 और नियोन-20 की अलग-अलग आकृतियां हैं। ऑक्सीजन-16 अपेक्षाकृत गोल है, जबकि नियोन-20 के लम्बे, prolate आकार की भविष्यवाणी की गई थी। यह आकृति कुछ-कुछ बॉलिंग-पिन जैसी मानी जाती है और टक्कर के आंकड़े भी इसी तस्वीर का समर्थन करते हैं।
जब दो नाभिक आपस में टकराते हैं, तो उनके शुरुआती overlap क्षेत्र का आकार हमेशा गोल नहीं होता। यही शुरुआती ज्यामिति गर्म पदार्थ के फैलने के तरीके को प्रभावित करती है, और उसका असर बाहर निकलने वाले कणों के कोणीय वितरण में दर्ज हो जाता है।
केंद्रीय नियोन–नियोन टकरावों में ALICE ने ऑक्सीजन–ऑक्सीजन टकरावों की तुलना में elliptic-flow गुणांक v₂ का बड़ा मान पाया। यह वही परिणाम है जिसकी उम्मीद तब की जाती है जब नियोन का लम्बा आकार, ऑक्सीजन की अधिक गोल ज्यामिति की तुलना में, कणों के वितरण में मजबूत अंडाकार छाप छोड़ता है।
नाभिकीय-संरचना संबंधी गणनाओं और hydrodynamic simulations ने दोनों प्रणालियों के बीच देखे गए अंतर को दोहराया। इस मेल से यह व्याख्या मजबूत होती है कि अंतर मुख्य रूप से नाभिकों की ज्यामिति से पैदा हुआ, केवल संयोगवश होने वाले उतार-चढ़ाव से नहीं।
दूसरे शब्दों में, वैज्ञानिकों ने टक्कर के बाद बने कणों के प्रवाह को पढ़कर नाभिक का आकार समझने की कोशिश की। टक्कर इतनी तेज होती है कि उसे सीधे देखा नहीं जा सकता, लेकिन उसके बाद बिखरे कण शुरुआती विन्यास की जानकारी वाली एक तरह की ‘फिंगरप्रिंट’ छाप बचाए रखते हैं।
सीसा–सीसा टक्करें बड़ी और अपेक्षाकृत लंबे समय तक रहने वाली ‘फायरबॉल’ बनाती हैं, इसलिए उनमें सामूहिक प्रभाव देखना आसान होता है। ऑक्सीजन और नियोन इससे कहीं छोटी प्रणालियां हैं और प्रोटॉन–प्रोटॉन तथा भारी-आयन टक्करों के बीच एक मध्यवर्ती क्षेत्र में आती हैं। इनका अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करता है कि टक्कर प्रणाली के आकार और घनत्व के साथ सामूहिक व्यवहार कैसे उभरता है।
इससे यह जांचने का रास्ता खुलता है कि प्रणाली कितनी छोटी हो सकती है और फिर भी QGP से जुड़े hydrodynamic गुण बनाए रख सकती है। मौजूदा परिणाम बताते हैं कि ऑक्सीजन टक्करों में पार्टॉन ऊर्जा-हानि और सामूहिक प्रवाह दोनों दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इन संकेतों और बने हुए माध्यम के बीच विस्तृत संबंध अभी भी शोध का विषय है।
यह प्रयोग नाभिकीय संरचना के अध्ययन के लिए एक पूरक तरीका भी देता है। सामान्य scattering प्रयोग में किसी स्थिर नाभिक पर कणों की बौछार की जाती है; यहां वैज्ञानिक अलग-अलग आंतरिक आकार वाले नाभिकों की टक्कर से बने सामूहिक प्रवाह की तुलना करते हैं। ऑक्सीजन और नियोन के बीच का अंतर भारी-आयन टक्कर मॉडलों में शुरुआती स्थितियों को अधिक सटीक बनाने में मदद कर सकता है।
क्वार्क–ग्लूऑन प्लाज़्मा उस चरम अवस्था से मिलता-जुलता है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह ब्रह्मांड के शुरुआती कुछ माइक्रोसेकंड में मौजूद थी। बाद में क्वार्क और ग्लूऑन प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा अन्य हैड्रॉनों के भीतर बंध गए। हल्के-आयन टकराव इस आदिम पदार्थ का अधिक नियंत्रित और छोटे पैमाने पर अध्ययन करने का अवसर देते हैं। साथ ही, वे यह समझने में मदद करते हैं कि किस सीमा तक छोटी नाभिकीय टक्कर प्रणाली द्रव-जैसा माध्यम बना सकती है।
उपलब्ध साक्ष्य किसी निश्चित अगली प्रयोग-तिथि या ऑक्सीजन से हल्के नाभिकों की आधिकारिक सूची नहीं बताते। हालांकि, ये परिणाम हल्के-आयन प्रणालियों के बीच आगे तुलना की जरूरत स्पष्ट करते हैं—ताकि QGP-जैसे व्यवहार के लिए आवश्यक न्यूनतम आकार और घनत्व का पता लगाया जा सके और स्पष्ट आकार वाले नाभिकों की मदद से टक्कर की शुरुआती ज्यामिति के मॉडल बेहतर किए जा सकें।
यह अनिश्चितता खुद इसी वैज्ञानिक सवाल का हिस्सा है। ऑक्सीजन और नियोन उस सीमा के करीब हैं जहां नाभिक का आकार, शुरुआती उतार-चढ़ाव और माध्यम से होने वाली वास्तविक ऊर्जा-हानि एक-दूसरे पर असर डाल सकते हैं। भविष्य के मापों को इन प्रभावों को और अधिक सटीकता से अलग करना होगा। फिलहाल ALICE के परिणाम दो जुड़े हुए निष्कर्ष सामने रखते हैं: ऑक्सीजन टकरावों में QGP का एक प्रमुख संकेत मौजूद है, और ऑक्सीजन–नियोन की तुलना टक्कर के मलबे को नाभिकीय आकार जांचने के एक नए उपकरण में बदल सकती है।