सर्बिया यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, लेकिन उसे ईयू के सिविल प्रोटेक्शन मैकेनिज्म के जरिए आपातकालीन सहायता पाने की सुविधा है। इसके बावजूद सर्बिया के गृह मंत्रालय ने कहा कि यूरोप में फैली जंगल की आग के कारण ईयू के उपयुक्त विमान उपलब्ध नहीं थे, इसलिए बेलग्रेड ने मॉस्को से सहायता मांगी।
Il-76 विमान 19 अगस्त की शाम नीश हवाई अड्डे पर उतरा। वहां से उसे डेलिब्लातो सैंड्स की आग के लिए तैयार किया गया, जो नीश से लगभग 180 किलोमीटर दूर है। सर्बियाई अधिकारियों के अनुसार, विमान का संचालन गृह मंत्रालय की हेलीकॉप्टर इकाई के साथ समन्वय में होना था।
इस उड़ान का रास्ता अलग से राजनयिक चर्चा का विषय बन गया। बुल्गारियाई अधिकारियों ने बताया कि सर्बिया के औपचारिक अनुरोध और राजनयिक नोट के बाद उड़ान को मंजूरी दी गई। इसे आपदा और आपातकालीन सहायता से जुड़ी मानवीय उड़ान के रूप में बताया गया।
इसका अर्थ यह है कि बुल्गारिया ने एक विशेष उड़ान को अनुमति दी थी। यह रूस पर लागू व्यापक प्रतिबंधों के हटने या रूसी विमानों के लिए यूरोपीय हवाई क्षेत्र के नियमित रूप से खुल जाने का संकेत नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक विमान 19 अगस्त को लगभग रात 8:14 बजे से 9:05 बजे तक बुल्गारिया के हवाई क्षेत्र में रहा और उसके बाद नीश उतरा।
सबसे गंभीर आग बेलग्रेड से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित डेलिब्लातो सैंड्स संरक्षित क्षेत्र में लगी थी। आग 5 अगस्त को शुरू हुई और 7 अगस्त तक कम-से-कम 700 हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित कर चुकी थी। अत्यधिक गर्मी, लंबे सूखे और तेज हवाओं ने आग को फैलने में मदद की, जबकि सर्बिया के दूसरे हिस्सों में भी कई आग लगी हुई थीं।
आग जारी रहने के साथ प्रभावित क्षेत्र के अनुमान भी बढ़ते गए। बाद की स्थानीय रिपोर्टों में करीब 3,065 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित बताया गया और तीन बड़े तथा दो छोटे हॉटस्पॉट पर निगरानी जारी रहने की बात कही गई। 19 अगस्त तक सर्बिया की आपातकालीन सेवाओं की एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 3,500 हेक्टेयर से अधिक बताया गया। ये आंकड़े अलग-अलग इसलिए हैं क्योंकि उस समय आग पूरी तरह बुझी नहीं थी और अंतिम नुकसान का आकलन बाकी था।
संकट केवल एक प्राकृतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। अधिकारियों ने देश के कई हिस्सों में खुले इलाकों में लगी आग की सूचना दी। रिपोर्टों के अनुसार, स्मेदेरेवो के पास लगी आग में एक व्यक्ति की मौत भी हुई।
डेलिब्लातो सैंड्स में आग की गंभीरता के बावजूद, आसपास के कुछ घरों को बचा लिया गया। तेज हवाओं के कारण आग बस्तियों की ओर बढ़ने पर पास के एक छोटे गांव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर भी ले जाया गया।
कई रिपोर्टों में इस विमान को IL-76P दमकल टैंकर बताया गया। हालांकि, बुल्गारिया की रिपोर्टिंग में इसे IL-76TD कहा गया, जिससे विमान के सटीक वैरिएंट को लेकर अंतर दिखाई देता है। सभी रिपोर्टों में एक बात समान है: यह Il-76 परिवहन विमान था, जिसमें आग बुझाने के लिए विशेष जल-विसर्जन प्रणाली लगी थी।
रूस के आपातकालीन अधिकारियों के मुताबिक, विमान एक बार में 42 टन तक पानी गिरा सकता है और 700 मीटर गुणा 65 मीटर तक के क्षेत्र को कवर कर सकता है। रूसी मंत्रालय ने बाद में बताया कि डेलिब्लातो सैंड्स में उसकी पहली उड़ान के दौरान 42 टन पानी गिराया गया।
यह विमान झील या समुद्र से पानी भरने वाला उभयचर विमान नहीं, बल्कि जमीन से संचालित होने वाला बड़े आकार का वॉटर-बॉम्बर है। इसकी खासियत यह है कि यह आग की सक्रिय सीमा पर एक ही बार में बड़ी मात्रा में पानी पहुंचा सकता है। इस तरह यह जमीनी दमकलकर्मियों, हेलीकॉप्टरों और दूसरे अग्निशमन उपकरणों का पूरक बनता है।
पहली उड़ान ने विमान की भूमिका स्पष्ट कर दी, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि उसके इस्तेमाल से पूरी आग की दिशा कितनी बदली। डेलिब्लातो सैंड्स में हॉटस्पॉट बने हुए थे और अधिकारियों ने कहा था कि पर्यावरणीय नुकसान का पूरा आकलन आग बुझने के बाद ही संभव होगा।
रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय ने कहा कि Il-76 को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के “निर्देश पर” भेजा गया। रूसी सरकारी मीडिया और अन्य रिपोर्टों ने भी यही विवरण दोहराया। साथ ही, इन रिपोर्टों में कहा गया कि सहायता का अनुरोध सीधे सर्बियाई पक्ष से आया था।
यह बयान रूसी सरकार की ओर से दी गई मंजूरी की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देता है। लेकिन इससे यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि पुतिन ने उड़ान की योजना बनाई, विमान का चयन किया या मौके पर अग्निशमन अभियान का संचालन निर्देशित किया। ये परिचालन जिम्मेदारियां रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय और सर्बिया भेजी गई टीमों की थीं।
इस मिशन ने रूस और यूरोपीय संघ के बीच सर्बिया की व्यावहारिक संतुलन नीति को उजागर किया। बेलग्रेड के पास ईयू की आपातकालीन व्यवस्था तक पहुंच थी, लेकिन जब उसे लगा कि आवश्यक क्षमता वाले विमान उपलब्ध नहीं हैं, तो उसने रूस की मदद स्वीकार कर ली।
इस फैसले से रूस को सर्बिया में एक दिखाई देने वाली मानवीय भूमिका मिली—ऐसे देश में जिसके मॉस्को के साथ लंबे समय से राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। दूसरी ओर, बुल्गारिया में इस बात को लेकर असहजता सामने आई कि बेलग्रेड ने ईयू के बजाय मॉस्को से सहायता क्यों मांगी और व्यापक तनाव के बीच मानवीय अपवाद को कैसे संभाला जाना चाहिए।
हालांकि, इस घटना को यूरोप की पूरी तरह विफल अग्निशमन व्यवस्था के प्रमाण के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह साझा व्यवस्था की उस कमजोरी को दिखाती है जो क्षेत्रीय संकट के चरम पर सामने आती है: जब गर्मी, सूखा और तेज हवाएं कई देशों में एक साथ आग भड़काती हैं, तो बड़े दमकल विमान पहले से ही कहीं और तैनात हो सकते हैं। सर्बिया का अनुरोध यूरोपीय सहयोग की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि तत्काल उपलब्ध अतिरिक्त क्षमता की कमी दिखाता है।
Il-76 मिशन ने सर्बिया की तत्काल जरूरत पूरी की। ऐसा विमान आग के उस क्षेत्र तक पहुंचा, जहां सर्बियाई अधिकारियों के अनुसार यूरोपीय संसाधन उस समय उपलब्ध नहीं थे। लेकिन इस अभियान ने यह भी दिखाया कि आपदा-प्रतिक्रिया, प्रतिबंध, हवाई क्षेत्र की अनुमति और विदेश नीति के संकेत—ये सभी एक ही घटना में एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।
सर्बिया के लिए गणित सीधा था: आग के मोर्चे पर सबसे बड़ी उपलब्ध क्षमता पहुंचाई जाए, चाहे वह ईयू के रास्ते आए या रूस से। यूरोप के लिए यह एक चेतावनी थी कि क्षेत्रीय अग्निशमन सहयोग केवल औपचारिक तंत्र पर निर्भर नहीं करता; उसकी असली परीक्षा तब होती है जब कई आपदाएं एक साथ चरम पर हों और जरूरी विमान वास्तव में उपलब्ध हों।
सर्बिया यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, लेकिन उसे ईयू के सिविल प्रोटेक्शन मैकेनिज्म के जरिए आपातकालीन सहायता पाने की सुविधा है। इसके बावजूद सर्बिया के गृह मंत्रालय ने कहा कि यूरोप में फैली जंगल की आग के कारण ईयू के उपयुक्त विमान उपलब्ध नहीं थे, इसलिए बेलग्रेड ने मॉस्को से सहायता मांगी।
Il-76 विमान 19 अगस्त की शाम नीश हवाई अड्डे पर उतरा। वहां से उसे डेलिब्लातो सैंड्स की आग के लिए तैयार किया गया, जो नीश से लगभग 180 किलोमीटर दूर है। सर्बियाई अधिकारियों के अनुसार, विमान का संचालन गृह मंत्रालय की हेलीकॉप्टर इकाई के साथ समन्वय में होना था।
इस उड़ान का रास्ता अलग से राजनयिक चर्चा का विषय बन गया। बुल्गारियाई अधिकारियों ने बताया कि सर्बिया के औपचारिक अनुरोध और राजनयिक नोट के बाद उड़ान को मंजूरी दी गई। इसे आपदा और आपातकालीन सहायता से जुड़ी मानवीय उड़ान के रूप में बताया गया।
इसका अर्थ यह है कि बुल्गारिया ने एक विशेष उड़ान को अनुमति दी थी। यह रूस पर लागू व्यापक प्रतिबंधों के हटने या रूसी विमानों के लिए यूरोपीय हवाई क्षेत्र के नियमित रूप से खुल जाने का संकेत नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक विमान 19 अगस्त को लगभग रात 8:14 बजे से 9:05 बजे तक बुल्गारिया के हवाई क्षेत्र में रहा और उसके बाद नीश उतरा।
सबसे गंभीर आग बेलग्रेड से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित डेलिब्लातो सैंड्स संरक्षित क्षेत्र में लगी थी। आग 5 अगस्त को शुरू हुई और 7 अगस्त तक कम-से-कम 700 हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित कर चुकी थी। अत्यधिक गर्मी, लंबे सूखे और तेज हवाओं ने आग को फैलने में मदद की, जबकि सर्बिया के दूसरे हिस्सों में भी कई आग लगी हुई थीं।
आग जारी रहने के साथ प्रभावित क्षेत्र के अनुमान भी बढ़ते गए। बाद की स्थानीय रिपोर्टों में करीब 3,065 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित बताया गया और तीन बड़े तथा दो छोटे हॉटस्पॉट पर निगरानी जारी रहने की बात कही गई। 19 अगस्त तक सर्बिया की आपातकालीन सेवाओं की एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 3,500 हेक्टेयर से अधिक बताया गया। ये आंकड़े अलग-अलग इसलिए हैं क्योंकि उस समय आग पूरी तरह बुझी नहीं थी और अंतिम नुकसान का आकलन बाकी था।
संकट केवल एक प्राकृतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। अधिकारियों ने देश के कई हिस्सों में खुले इलाकों में लगी आग की सूचना दी। रिपोर्टों के अनुसार, स्मेदेरेवो के पास लगी आग में एक व्यक्ति की मौत भी हुई।
डेलिब्लातो सैंड्स में आग की गंभीरता के बावजूद, आसपास के कुछ घरों को बचा लिया गया। तेज हवाओं के कारण आग बस्तियों की ओर बढ़ने पर पास के एक छोटे गांव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर भी ले जाया गया।
कई रिपोर्टों में इस विमान को IL-76P दमकल टैंकर बताया गया। हालांकि, बुल्गारिया की रिपोर्टिंग में इसे IL-76TD कहा गया, जिससे विमान के सटीक वैरिएंट को लेकर अंतर दिखाई देता है। सभी रिपोर्टों में एक बात समान है: यह Il-76 परिवहन विमान था, जिसमें आग बुझाने के लिए विशेष जल-विसर्जन प्रणाली लगी थी।
रूस के आपातकालीन अधिकारियों के मुताबिक, विमान एक बार में 42 टन तक पानी गिरा सकता है और 700 मीटर गुणा 65 मीटर तक के क्षेत्र को कवर कर सकता है। रूसी मंत्रालय ने बाद में बताया कि डेलिब्लातो सैंड्स में उसकी पहली उड़ान के दौरान 42 टन पानी गिराया गया।
यह विमान झील या समुद्र से पानी भरने वाला उभयचर विमान नहीं, बल्कि जमीन से संचालित होने वाला बड़े आकार का वॉटर-बॉम्बर है। इसकी खासियत यह है कि यह आग की सक्रिय सीमा पर एक ही बार में बड़ी मात्रा में पानी पहुंचा सकता है। इस तरह यह जमीनी दमकलकर्मियों, हेलीकॉप्टरों और दूसरे अग्निशमन उपकरणों का पूरक बनता है।
पहली उड़ान ने विमान की भूमिका स्पष्ट कर दी, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि उसके इस्तेमाल से पूरी आग की दिशा कितनी बदली। डेलिब्लातो सैंड्स में हॉटस्पॉट बने हुए थे और अधिकारियों ने कहा था कि पर्यावरणीय नुकसान का पूरा आकलन आग बुझने के बाद ही संभव होगा।
रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय ने कहा कि Il-76 को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के “निर्देश पर” भेजा गया। रूसी सरकारी मीडिया और अन्य रिपोर्टों ने भी यही विवरण दोहराया। साथ ही, इन रिपोर्टों में कहा गया कि सहायता का अनुरोध सीधे सर्बियाई पक्ष से आया था।
यह बयान रूसी सरकार की ओर से दी गई मंजूरी की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देता है। लेकिन इससे यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि पुतिन ने उड़ान की योजना बनाई, विमान का चयन किया या मौके पर अग्निशमन अभियान का संचालन निर्देशित किया। ये परिचालन जिम्मेदारियां रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय और सर्बिया भेजी गई टीमों की थीं।
इस मिशन ने रूस और यूरोपीय संघ के बीच सर्बिया की व्यावहारिक संतुलन नीति को उजागर किया। बेलग्रेड के पास ईयू की आपातकालीन व्यवस्था तक पहुंच थी, लेकिन जब उसे लगा कि आवश्यक क्षमता वाले विमान उपलब्ध नहीं हैं, तो उसने रूस की मदद स्वीकार कर ली।
इस फैसले से रूस को सर्बिया में एक दिखाई देने वाली मानवीय भूमिका मिली—ऐसे देश में जिसके मॉस्को के साथ लंबे समय से राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। दूसरी ओर, बुल्गारिया में इस बात को लेकर असहजता सामने आई कि बेलग्रेड ने ईयू के बजाय मॉस्को से सहायता क्यों मांगी और व्यापक तनाव के बीच मानवीय अपवाद को कैसे संभाला जाना चाहिए।
हालांकि, इस घटना को यूरोप की पूरी तरह विफल अग्निशमन व्यवस्था के प्रमाण के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह साझा व्यवस्था की उस कमजोरी को दिखाती है जो क्षेत्रीय संकट के चरम पर सामने आती है: जब गर्मी, सूखा और तेज हवाएं कई देशों में एक साथ आग भड़काती हैं, तो बड़े दमकल विमान पहले से ही कहीं और तैनात हो सकते हैं। सर्बिया का अनुरोध यूरोपीय सहयोग की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि तत्काल उपलब्ध अतिरिक्त क्षमता की कमी दिखाता है।
Il-76 मिशन ने सर्बिया की तत्काल जरूरत पूरी की। ऐसा विमान आग के उस क्षेत्र तक पहुंचा, जहां सर्बियाई अधिकारियों के अनुसार यूरोपीय संसाधन उस समय उपलब्ध नहीं थे। लेकिन इस अभियान ने यह भी दिखाया कि आपदा-प्रतिक्रिया, प्रतिबंध, हवाई क्षेत्र की अनुमति और विदेश नीति के संकेत—ये सभी एक ही घटना में एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।
सर्बिया के लिए गणित सीधा था: आग के मोर्चे पर सबसे बड़ी उपलब्ध क्षमता पहुंचाई जाए, चाहे वह ईयू के रास्ते आए या रूस से। यूरोप के लिए यह एक चेतावनी थी कि क्षेत्रीय अग्निशमन सहयोग केवल औपचारिक तंत्र पर निर्भर नहीं करता; उसकी असली परीक्षा तब होती है जब कई आपदाएं एक साथ चरम पर हों और जरूरी विमान वास्तव में उपलब्ध हों।