व्यावहारिक रूप से यह चेतावनी रियाद की दो क्षमताओं पर सवाल उठाती है:
20 अगस्त को हूतियों ने नज्रान क्षेत्र में सऊदी ठिकानों पर हमलों का दावा किया। इनमें नज्रान हवाईअड्डे और सऊदी तेल कंपनी अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाने की बात कही गई। उपलब्ध रिपोर्टिंग में सऊदी अधिकारियों या अरामको ने इन दावों की पुष्टि नहीं की थी।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच हालिया हिंसा उस करीब चार साल की अपेक्षाकृत शांति के टूटने के बाद शुरू हुई, जिसे एक नाजुक युद्धविराम ने संभव बनाया था। 13 जुलाई को सना अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रनवे पर हमला हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इसका उद्देश्य एक ईरानी विमान को उतरने से रोकना था। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस कार्रवाई की जिम्मेदारी ली, जबकि हूतियों ने इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया।
इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब की ओर मिसाइलें दागीं, जिनमें अबहा हवाईअड्डे को निशाना बनाने का दावा भी शामिल था। हूतियों ने इसे जवाबी कार्रवाई बताया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों से निपट लिया और उस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी।
इस तरह यमन में विमान के उतरने को लेकर शुरू हुआ विवाद सऊदी अरब और ईरान-समर्थित हूती आंदोलन के बीच फिर से सीधे हमलों और जवाबी हमलों में बदल गया।
20 जुलाई को हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ तथाकथित “समुद्री प्रतिबंध” की घोषणा की। समूह ने कहा कि यह कदम हूती-नियंत्रित उत्तर-पश्चिमी यमन के बंदरगाहों और हवाईअड्डों पर सऊदी प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है। हूती बयानों में सऊदी से जुड़े जहाजों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य और सऊदी लाल सागर बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी दी गई।
बाब अल-मंदब लाल सागर का दक्षिणी प्रवेशद्वार है। इसलिए यहां जहाजों के खिलाफ धमकी का असर केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रहता। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल परिवहन और उन कंपनियों पर भी दबाव डाल सकता है जो इस मार्ग से गुजरती हैं। इसके बाद सऊदी टैंकरों, तेल सुविधाओं और अन्य जहाजों पर हमलों या हमले के प्रयासों की खबरें सामने आईं।
इससे मध्य-पूर्व में दो प्रमुख समुद्री मार्गों का संकट आपस में जुड़ गया है। लाल सागर पर खतरा बढ़ने से जहाजों के लिए वैकल्पिक मार्गों पर दबाव पड़ता है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान लाल सागर मार्ग का महत्व और बढ़ा देता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेल टैंकरों के लिए खतरा सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गया था। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में तेजी से घटी।
मोहेबी की चेतावनी का रणनीतिक अर्थ यह है कि ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी सऊदी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर दबाव बना सकते हैं, भले ही ईरान हर कार्रवाई में खुले तौर पर शामिल न दिखे।
रॉयटर्स द्वारा उद्धृत एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय देशों की खुफिया सूचनाएं इराकी सशस्त्र गुटों और हूतियों की संभावित समन्वित कार्रवाई की ओर इशारा करती हैं। अधिकारी के अनुसार, इन कार्रवाइयों में ऊर्जा ढांचे, बंदरगाहों और हवाईअड्डों जैसे नागरिक तथा आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है और इनके पीछे IRGC की कथित निगरानी हो सकती है।
अलग रिपोर्टिंग में इंटरसेप्ट किए गए संचार और अन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर दावा किया गया कि IRGC ने हूती-नियंत्रित इलाकों में कमांडरों को भेजा, खुफिया तथा लक्ष्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई और लाल सागर की ओर तैनात मिसाइलों, नौसैनिक हथियारों तथा ड्रोन लॉन्चरों की निगरानी की।
हालांकि, इन दावों को रिपोर्ट किए गए खुफिया आकलन के रूप में देखना जरूरी है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं। उपलब्ध स्रोत यह भी साबित नहीं करते कि हूती बाब अल-मंदब के आसपास की जमीन पर कब्जा करने वाले थे या सऊदी तेल लदान में रुकावट से जुड़े सटीक आंकड़े क्या थे।
मोहेबी का बयान ऐसे संघर्ष के बीच आया है जिसमें कई मोर्चे एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं:
इसी वजह से यह बयान महत्वपूर्ण है। यह केवल सऊदी-हूती संघर्ष की चेतावनी नहीं, बल्कि ऐसे क्षेत्रीय मुकाबले का संकेत है जिसमें बंदरगाहों, ऊर्जा ढांचे और समुद्री परिवहन पर हमले यमन से बहुत दूर तक राजनीतिक और आर्थिक असर डाल सकते हैं।
रियाद ने सैन्य चेतावनी के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा का क्षेत्रीय ढांचा बनाने की कोशिश की है। इससे पहले यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा था कि सऊदी अरब को निशाना बनाने वाली किसी भी कार्रवाई का जवाब “अभूतपूर्व दृढ़ता और ताकत” से दिया जाएगा।
इसके बाद सऊदी अरब ने व्यापक समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाया। 30 जुलाई को घोषित 14 देशों वाला गठबंधन लाल सागर क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति लाइनों की रक्षा करने तथा साझा समुद्री हितों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया जा रहा है।
गठबंधन का गठन खुद इस बात का संकेत है कि प्रतिक्रिया अब केवल सऊदी वायु रक्षा या यमन के भीतर सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इसमें बहुराष्ट्रीय प्रयासों के जरिए व्यापारिक समुद्री मार्ग खुले रखने और साझा समुद्री हितों की रक्षा करने की कोशिश भी शामिल है।
होसैन मोहेबी ने चेतावनी दी कि सऊदी अरब न तो हूतियों को नियंत्रित कर पाएगा और न ही उनकी जवाबी कार्रवाई से खुद को विश्वसनीय रूप से बचा सकेगा। यह बयान 13 जुलाई के सना हवाईअड्डा हमले, उसके बाद हुए हूती मिसाइल हमलों और 20 जुलाई के समुद्री प्रतिबंध जैसी घटनाओं के बाद आया है। इन घटनाओं ने संघर्ष को सऊदी ऊर्जा ढांचे और लाल सागर की जहाजरानी तक पहुंचा दिया है।
सबसे बड़ा जोखिम केवल एक और सऊदी-हूती हमले का नहीं है। खतरा यह है कि यमन, लाल सागर और खाड़ी में जुड़े हुए हमले क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा परिवहन और वैश्विक व्यापार के लिए लंबे समय का संकट पैदा कर दें। उपलब्ध रिपोर्टिंग इस जोखिम की ओर संकेत करती है, लेकिन विशिष्ट सैन्य योजनाओं, सऊदी तेल लदान में रुकावट के सटीक प्रतिशत और IRGC के प्रत्यक्ष नियंत्रण की सीमा से जुड़े दावे अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
व्यावहारिक रूप से यह चेतावनी रियाद की दो क्षमताओं पर सवाल उठाती है:
20 अगस्त को हूतियों ने नज्रान क्षेत्र में सऊदी ठिकानों पर हमलों का दावा किया। इनमें नज्रान हवाईअड्डे और सऊदी तेल कंपनी अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाने की बात कही गई। उपलब्ध रिपोर्टिंग में सऊदी अधिकारियों या अरामको ने इन दावों की पुष्टि नहीं की थी।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच हालिया हिंसा उस करीब चार साल की अपेक्षाकृत शांति के टूटने के बाद शुरू हुई, जिसे एक नाजुक युद्धविराम ने संभव बनाया था। 13 जुलाई को सना अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रनवे पर हमला हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इसका उद्देश्य एक ईरानी विमान को उतरने से रोकना था। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस कार्रवाई की जिम्मेदारी ली, जबकि हूतियों ने इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया।
इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब की ओर मिसाइलें दागीं, जिनमें अबहा हवाईअड्डे को निशाना बनाने का दावा भी शामिल था। हूतियों ने इसे जवाबी कार्रवाई बताया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों से निपट लिया और उस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी।
इस तरह यमन में विमान के उतरने को लेकर शुरू हुआ विवाद सऊदी अरब और ईरान-समर्थित हूती आंदोलन के बीच फिर से सीधे हमलों और जवाबी हमलों में बदल गया।
20 जुलाई को हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ तथाकथित “समुद्री प्रतिबंध” की घोषणा की। समूह ने कहा कि यह कदम हूती-नियंत्रित उत्तर-पश्चिमी यमन के बंदरगाहों और हवाईअड्डों पर सऊदी प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है। हूती बयानों में सऊदी से जुड़े जहाजों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य और सऊदी लाल सागर बंदरगाहों से दूर रहने की चेतावनी दी गई।
बाब अल-मंदब लाल सागर का दक्षिणी प्रवेशद्वार है। इसलिए यहां जहाजों के खिलाफ धमकी का असर केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रहता। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल परिवहन और उन कंपनियों पर भी दबाव डाल सकता है जो इस मार्ग से गुजरती हैं। इसके बाद सऊदी टैंकरों, तेल सुविधाओं और अन्य जहाजों पर हमलों या हमले के प्रयासों की खबरें सामने आईं।
इससे मध्य-पूर्व में दो प्रमुख समुद्री मार्गों का संकट आपस में जुड़ गया है। लाल सागर पर खतरा बढ़ने से जहाजों के लिए वैकल्पिक मार्गों पर दबाव पड़ता है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान लाल सागर मार्ग का महत्व और बढ़ा देता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेल टैंकरों के लिए खतरा सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गया था। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में तेजी से घटी।
मोहेबी की चेतावनी का रणनीतिक अर्थ यह है कि ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी सऊदी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर दबाव बना सकते हैं, भले ही ईरान हर कार्रवाई में खुले तौर पर शामिल न दिखे।
रॉयटर्स द्वारा उद्धृत एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने कहा कि सऊदी अरब, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय देशों की खुफिया सूचनाएं इराकी सशस्त्र गुटों और हूतियों की संभावित समन्वित कार्रवाई की ओर इशारा करती हैं। अधिकारी के अनुसार, इन कार्रवाइयों में ऊर्जा ढांचे, बंदरगाहों और हवाईअड्डों जैसे नागरिक तथा आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है और इनके पीछे IRGC की कथित निगरानी हो सकती है।
अलग रिपोर्टिंग में इंटरसेप्ट किए गए संचार और अन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर दावा किया गया कि IRGC ने हूती-नियंत्रित इलाकों में कमांडरों को भेजा, खुफिया तथा लक्ष्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई और लाल सागर की ओर तैनात मिसाइलों, नौसैनिक हथियारों तथा ड्रोन लॉन्चरों की निगरानी की।
हालांकि, इन दावों को रिपोर्ट किए गए खुफिया आकलन के रूप में देखना जरूरी है, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं। उपलब्ध स्रोत यह भी साबित नहीं करते कि हूती बाब अल-मंदब के आसपास की जमीन पर कब्जा करने वाले थे या सऊदी तेल लदान में रुकावट से जुड़े सटीक आंकड़े क्या थे।
मोहेबी का बयान ऐसे संघर्ष के बीच आया है जिसमें कई मोर्चे एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं:
इसी वजह से यह बयान महत्वपूर्ण है। यह केवल सऊदी-हूती संघर्ष की चेतावनी नहीं, बल्कि ऐसे क्षेत्रीय मुकाबले का संकेत है जिसमें बंदरगाहों, ऊर्जा ढांचे और समुद्री परिवहन पर हमले यमन से बहुत दूर तक राजनीतिक और आर्थिक असर डाल सकते हैं।
रियाद ने सैन्य चेतावनी के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा का क्षेत्रीय ढांचा बनाने की कोशिश की है। इससे पहले यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा था कि सऊदी अरब को निशाना बनाने वाली किसी भी कार्रवाई का जवाब “अभूतपूर्व दृढ़ता और ताकत” से दिया जाएगा।
इसके बाद सऊदी अरब ने व्यापक समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाया। 30 जुलाई को घोषित 14 देशों वाला गठबंधन लाल सागर क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति लाइनों की रक्षा करने तथा साझा समुद्री हितों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया जा रहा है।
गठबंधन का गठन खुद इस बात का संकेत है कि प्रतिक्रिया अब केवल सऊदी वायु रक्षा या यमन के भीतर सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इसमें बहुराष्ट्रीय प्रयासों के जरिए व्यापारिक समुद्री मार्ग खुले रखने और साझा समुद्री हितों की रक्षा करने की कोशिश भी शामिल है।
होसैन मोहेबी ने चेतावनी दी कि सऊदी अरब न तो हूतियों को नियंत्रित कर पाएगा और न ही उनकी जवाबी कार्रवाई से खुद को विश्वसनीय रूप से बचा सकेगा। यह बयान 13 जुलाई के सना हवाईअड्डा हमले, उसके बाद हुए हूती मिसाइल हमलों और 20 जुलाई के समुद्री प्रतिबंध जैसी घटनाओं के बाद आया है। इन घटनाओं ने संघर्ष को सऊदी ऊर्जा ढांचे और लाल सागर की जहाजरानी तक पहुंचा दिया है।
सबसे बड़ा जोखिम केवल एक और सऊदी-हूती हमले का नहीं है। खतरा यह है कि यमन, लाल सागर और खाड़ी में जुड़े हुए हमले क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा परिवहन और वैश्विक व्यापार के लिए लंबे समय का संकट पैदा कर दें। उपलब्ध रिपोर्टिंग इस जोखिम की ओर संकेत करती है, लेकिन विशिष्ट सैन्य योजनाओं, सऊदी तेल लदान में रुकावट के सटीक प्रतिशत और IRGC के प्रत्यक्ष नियंत्रण की सीमा से जुड़े दावे अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।