वास्तविक मात्रा का अधिक सावधान आकलन करना कठिन है। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि क्षेत्र से लगभग 90 लाख बैरल प्रतिदिन तेल बाहर जा रहा है, जबकि जहाज-निगरानी कंपनियों का अनुमान इसका अधिकतम करीब आधा है। AIS बंद होने और समुद्र में माल बदलने के कारण तेल का वास्तविक स्रोत, यात्रा और कुल मात्रा—तीनों का स्वतंत्र सत्यापन मुश्किल हो जाता है।
इराक इस व्यवस्था में सबसे बड़ा अतिरिक्त योगदानकर्ता दिखता है। जुलाई में इराक के बढ़े हुए निर्यात ने UAE से हुई कमी की कुछ भरपाई की। इसके बावजूद खाड़ी देशों का कच्चे तेल और कंडेन्सेट का कुल निर्यात 10.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो युद्ध-पूर्व स्तर से लगभग 40% कम था।
इराकी तेल को हॉर्मुज़ के बाहर बेचने की कोशिश भी तेज हुई है। TotalEnergies की ट्रेडिंग इकाई Totsa ने बसरा मीडियम क्रूड को जलडमरूमध्य के बाहर लोड करने की पेशकश की। इससे संकेत मिलता है कि कारोबारी अब समुद्र में होने वाले इस हस्तांतरण को अस्थायी जुगाड़ के बजाय अधिक औपचारिक व्यापार व्यवस्था में बदल रहे हैं।
सऊदी अरामको और UAE की Abu Dhabi National Oil Co. (ADNOC) ने कुछ एशियाई रिफाइनरियों को हॉर्मुज़ के बाहर कच्चा तेल पहुंचाने की पेशकश की है। इसके तहत खरीदार ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो सीधे इस जोखिमभरे जलमार्ग में प्रवेश ही नहीं करते; हॉर्मुज़ पार करने का जोखिम छोटे शटल टैंकर उठाते हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, अरामको कुछ एशियाई खरीदारों से फुजैराह के पास STS हस्तांतरण के जरिए Arab Medium और Arab Heavy क्रूड की आपूर्ति पर बातचीत कर रही थी।
चीनी सरकारी कंपनियां COSCO Shipping Energy Transportation और China Merchants Energy Shipping ने कथित तौर पर जुलाई के अंत से अपने टैंकरों को हॉर्मुज़ और बाब-अल-मंदेब से दूर रखा है। इसके बजाय वे खाड़ी के बाहर तेल उठा रही हैं।
इसका अर्थ यह है कि चीन महत्वपूर्ण खरीदार बना हुआ है, लेकिन यात्रा के सबसे जोखिमभरे हिस्से का बोझ खाड़ी के छोटे शटल और गैर-चीनी जहाजों पर जा रहा है। चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियों ने भी इराक, UAE और कतर का अपेक्षाकृत सस्ता तेल खरीदा है।
इस गुप्त शटल व्यवस्था ने तेल की पूरी तरह भौतिक कमी होने से रोका। इराक के अधिक निर्यात, सऊदी और UAE की वैकल्पिक डिलीवरी तथा चीन की मांग में कमी या बदलाव ने तत्काल दबाव को कम किया। इसी वजह से ब्रेंट शुरुआती युद्ध-आशंकाओं में बताए गए 150 डॉलर के बजाय व्यापक रूप से 80–90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।
मांग में समायोजन भी आपूर्ति जितना ही महत्वपूर्ण था। चीन की जुलाई में कच्चे तेल की आवक 8.41 मिलियन बैरल प्रतिदिन रही। रॉयटर्स ने इसे एशिया में मध्य-पूर्वी आपूर्ति घटने के बाद मांग-पक्ष पर सबसे बड़ा समायोजन बताया।
हालांकि, इसे सामान्य स्थिति की वापसी नहीं समझना चाहिए। यह एक अस्थायी मूल्य-सीमा या आपूर्ति-बफर है। जुलाई में क्षेत्रीय निर्यात अब भी युद्ध-पूर्व स्तर से करीब 40% नीचे था और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस तिमाही के लिए वैश्विक तेल बाजार में 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी का अनुमान लगाया।
ईरानी हमलों के बाद गल्फ ऑफ ओमान में जहाज-से-जहाज हस्तांतरण की गतिविधि पहले ही धीमी हुई है। UAE अधिकारियों ने कहा कि ईरान ने हॉर्मुज़ में ADNOC के दो जहाजों पर हमला किया। शटल टैंकरों, हस्तांतरण क्षेत्रों, पायलटों या सुरक्षा एस्कॉर्ट पर नए हमले इस नेटवर्क को तेजी से रोक सकते हैं।
रात में कम दूरी पर जहाज चलाना, AIS बंद रखना और जल्दबाजी में माल हस्तांतरित करना टक्कर, जहाज के फंसने और तेल रिसाव का जोखिम बढ़ाता है। ट्रैकिंग अस्पष्ट होने पर बचाव और प्रदूषण-नियंत्रण दलों की प्रतिक्रिया भी देर से हो सकती है। उपलब्ध स्रोतों से इस समय मौतों, घायलों या तेल रिसाव की कोई भरोसेमंद समेकित संख्या सत्यापित नहीं की जा सकी।
इस मॉडल में एक ही निर्यात खेप के लिए खाड़ी का शटल टैंकर और लंबी दूरी का समुद्री टैंकर—दोनों की जरूरत पड़ सकती है। रॉयटर्स ने क्षेत्र में अन्य लोडिंग के लिए टैंकरों की कमी की खबर दी है। इसका मतलब है कि यह नेटवर्क सीमित जहाजों के लिए प्रतिस्पर्धा करता है और मालभाड़े, बीमा तथा युद्ध-जोखिम प्रीमियम को ऊपर धकेल सकता है।
सऊदी अरब के लाल सागर वाले निर्यात मार्गों पर हूती हमलों का खतरा बना हुआ है। यानबू के पास एक सऊदी टैंकर पर हमले का दावा भी किया गया था। इसलिए ओमान या फुजैराह में डिलीवरी-पॉइंट बदलने से क्षेत्रीय संघर्ष का जोखिम समाप्त नहीं होता।
सऊदी अरब और UAE की वे पाइपलाइनें जो हॉर्मुज़ को बायपास करती हैं, सीमित क्षमता वाली और स्थायी, आसानी से पहचानी जा सकने वाली परिसंपत्तियां हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग यह साबित नहीं करती कि वे सामान्य समुद्री निर्यात में आई पूरी कमी की भरपाई कर सकती हैं। यदि इन पाइपलाइनों पर हमला होता है, तो समुद्र में चल रहा गुप्त नेटवर्क और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
उपलब्ध साक्ष्यों से कतर के LNG कार्गो के लिए किसी विशिष्ट और मौजूदा force majeure घोषणा की पुष्टि नहीं होती। फिर भी कतर से LNG आपूर्ति या जहाजों की क्षमता में रुकावट तेल संकट को और गहरा कर सकती है। इससे टैंकरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और एशिया की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव आएगा।
चीन अपनी खरीद घटाकर या भंडार से तेल निकालकर बाजार को कुछ समय तक संभाल सकता है। लेकिन उसके रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार का वास्तविक स्तर तथा उपलब्धता पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। यदि चीनी रिफाइनरियां फिर से तेजी से खरीद शुरू करती हैं, भंडार उम्मीद से कम निकलता है या बीजिंग समुद्र में हस्तांतरण के बजाय सुरक्षित सीधी डिलीवरी चाहता है, तो मौजूदा आपूर्ति-बफर जल्दी खत्म हो सकता है। चीन की सरकारी शिपिंग कंपनियों का हॉर्मुज़ से बचना इसी जोखिम को रेखांकित करता है।
हॉर्मुज़ के बाहर चल रहा ‘डार्क ट्रेड’ तत्काल 150 डॉलर प्रति बैरल वाले तेल उछाल की संभावना घटा रहा है, लेकिन उसने जोखिम खत्म नहीं किया—उसे छोटे जहाजों, समुद्र में होने वाले हस्तांतरण और अस्पष्ट भंडारों वाली एक सघन तथा महंगी व्यवस्था में स्थानांतरित कर दिया है। कुछ बड़े हमले, गंभीर तेल रिसाव या एस्कॉर्ट और टैंकरों की उपलब्धता में कमी इस नियंत्रित आपूर्ति-संकट को अचानक तेज भौतिक और मूल्य-संकट में बदल सकती है।