इस प्रतिस्पर्धा ने यूरोपीय गैस कीमतों को करीब पांच महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंचा दिया। जर्मनी की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी यूनिपर का अनुमान है कि जलडमरूमध्य बंद रहने तक कीमतें लगभग €50–€60 प्रति मेगावाट-घंटा रह सकती हैं।
यूरोपीय संघ के गैस भंडार अगस्त की शुरुआत में करीब 57% भरे थे। यह वर्ष के इस समय के लिए ऐतिहासिक रूप से सबसे निचला स्तर है और सामान्य रिफिल गति से यूरोप के पीछे रहने को दर्शाता है।
इक्विनॉर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडर्स ओपेडल ने कहा है कि यूरोप सर्दियों से पहले भंडारण को 80% तक भरने का लक्ष्य भी हासिल नहीं कर सकता। जर्मनी के लिए चुनौती और बड़ी है। 9 अगस्त तक जर्मनी के भूमिगत गैस भंडार केवल 48% भरे थे, जबकि यूरोपीय संघ का औसत करीब 59% था। नवंबर तक जर्मनी के भंडारण स्थलों को 70% तक भरने के लिए गैस कीमतों में गिरावट जरूरी होगी, ताकि खरीद और भंडारण आर्थिक रूप से आकर्षक बने रहें।
पहले के अनुमानों के अनुसार, यूरोप को पिछले वर्ष की तुलना में भंडार भरने के लिए करीब 180 अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की जरूरत थी। लेकिन एशिया में कीमतों और मांग के बढ़ने से अमेरिकी एलएनजी की कई लचीली खेपें यूरोप के बजाय दूसरे खरीदारों को भेजी गईं।
जून में अमेरिकी एलएनजी निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी 42% से कुछ कम रह गई। मिस्र ने रिकॉर्ड 1.06 करोड़ मीट्रिक टन अमेरिकी एलएनजी आयात किया, जबकि एशियाई बाजारों ने भी अधिक कार्गो आकर्षित किए। इसका अर्थ है कि यूरोप को अब भंडार भरने के लिए न केवल अधिक गैस खरीदनी होगी, बल्कि प्रतिस्पर्धी खरीदारों से ऊंची कीमत पर बोली भी लगानी पड़ सकती है।
अभी उपलब्ध साक्ष्य तत्काल पूरे यूरोप में गैस राशनिंग या भौतिक आपूर्ति-विफलता को अनिवार्य नहीं बताते। नॉर्वे से पाइपलाइन आपूर्ति, यूरोप के विविध एलएनजी आयात टर्मिनल, मांग में कमी और पवन-सौर ऊर्जा का बढ़ता उत्पादन स्थिति को कुछ हद तक संभाल सकते हैं। रॉयटर्स के विश्लेषण के अनुसार, बहस अब केवल इस बात पर केंद्रित नहीं है कि यूरोप गैस हासिल कर पाएगा या नहीं; असली चिंता गैस की कीमत और अस्थिरता बनती जा रही है।
फिर भी ये सुरक्षा-तत्व कम भंडारण से पैदा हुआ कमजोर सुरक्षा-कवच वापस नहीं ला सकते। यदि हॉर्मुज़ लंबे समय तक बंद रहता है, एलएनजी आपूर्ति में और कटौती होती है या सर्दी सामान्य से अधिक ठंडी पड़ती है, तो कम भंडार से कीमतों में तेज उछाल का खतरा बढ़ जाएगा।
एलएनजी एक वैश्विक बाजार में कारोबार होने वाली वस्तु है। जहाजों के जरिए भेजे जाने वाले कार्गो आम तौर पर उस बाजार की ओर जाते हैं जहां कीमत अधिक हो और मांग मजबूत हो। हॉर्मुज़ व्यवधान के बाद एशियाई खरीदारों ने अधिक कीमत की पेशकश की, जिससे अमेरिकी निर्यातकों के लिए यूरोप के बजाय एशिया को कार्गो भेजना अधिक लाभदायक हुआ। मिस्र की बढ़ी हुई खरीद ने भी यूरोप के लिए उपलब्ध खेपों पर दबाव डाला।
यही बदलाव यूरोप के भंडारण संकट को गहरा करता है: जिस समय उसे सर्दियों से पहले बड़ी मात्रा में गैस जमा करनी है, उसी समय उपलब्ध समुद्री गैस के लिए अन्य बाजार भी अधिक आक्रामक तरीके से खरीदारी कर रहे हैं।
गर्मी की लहर और सूखा गैस बाजार पर एक अलग रास्ते से भी दबाव डाल सकते हैं। अत्यधिक गर्मी में बिजली की मांग बढ़ती है, जबकि सूखे के कारण पानी पर निर्भर बिजली उत्पादन और ग्रिड संचालन प्रभावित हो सकते हैं।
रोमानिया में डेन्यूब नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद देश के एकमात्र संचालित परमाणु रिएक्टर को ग्रिड से अलग करना पड़ा और ऊर्जा आपातकाल घोषित किया गया। ऐसी घटनाएं गैस-आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता बढ़ा सकती हैं—ठीक उस समय जब गैस महंगी और सीमित हो।
निकट अवधि में सबसे बड़ा असर घरेलू और औद्योगिक ऊर्जा बिलों पर पड़ सकता है। यदि बाजार तंग बना रहा तो सरकारें और उपयोगिताएं खपत कम करने की अपील कर सकती हैं। पहले से कम भंडार के बीच कड़ाके की ठंड पड़ी तो भंडारण से निकासी तेज होगी और कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है।
इसके विपरीत, सामान्य से नरम सर्दी, ऊर्जा मांग में निरंतर कमी या हॉर्मुज़ का जल्द और विश्वसनीय रूप से खुलना स्थिति को काफी बेहतर कर सकता है।
यूरोप व्यापक गैस आपातकाल से तभी बच सकता है जब हॉर्मुज़ के बाहर से एलएनजी आपूर्ति बनी रहे, मौसम अनुकूल हो, मांग में पर्याप्त कमी आए और कोई बड़ी अतिरिक्त आपूर्ति-रुकावट न हो। अभी उपलब्ध जानकारी यूरोप की सर्दियों की कीमत-संबंधी कमजोरी और सीमित सुरक्षा-भंडार की ओर इशारा करती है; लेकिन पूरे महाद्वीप में गैस की अनिवार्य कमी को अभी निश्चित नहीं माना जा सकता।
इस प्रतिस्पर्धा ने यूरोपीय गैस कीमतों को करीब पांच महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंचा दिया। जर्मनी की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी यूनिपर का अनुमान है कि जलडमरूमध्य बंद रहने तक कीमतें लगभग €50–€60 प्रति मेगावाट-घंटा रह सकती हैं।
यूरोपीय संघ के गैस भंडार अगस्त की शुरुआत में करीब 57% भरे थे। यह वर्ष के इस समय के लिए ऐतिहासिक रूप से सबसे निचला स्तर है और सामान्य रिफिल गति से यूरोप के पीछे रहने को दर्शाता है।
इक्विनॉर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडर्स ओपेडल ने कहा है कि यूरोप सर्दियों से पहले भंडारण को 80% तक भरने का लक्ष्य भी हासिल नहीं कर सकता। जर्मनी के लिए चुनौती और बड़ी है। 9 अगस्त तक जर्मनी के भूमिगत गैस भंडार केवल 48% भरे थे, जबकि यूरोपीय संघ का औसत करीब 59% था। नवंबर तक जर्मनी के भंडारण स्थलों को 70% तक भरने के लिए गैस कीमतों में गिरावट जरूरी होगी, ताकि खरीद और भंडारण आर्थिक रूप से आकर्षक बने रहें।
पहले के अनुमानों के अनुसार, यूरोप को पिछले वर्ष की तुलना में भंडार भरने के लिए करीब 180 अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की जरूरत थी। लेकिन एशिया में कीमतों और मांग के बढ़ने से अमेरिकी एलएनजी की कई लचीली खेपें यूरोप के बजाय दूसरे खरीदारों को भेजी गईं।
जून में अमेरिकी एलएनजी निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी 42% से कुछ कम रह गई। मिस्र ने रिकॉर्ड 1.06 करोड़ मीट्रिक टन अमेरिकी एलएनजी आयात किया, जबकि एशियाई बाजारों ने भी अधिक कार्गो आकर्षित किए। इसका अर्थ है कि यूरोप को अब भंडार भरने के लिए न केवल अधिक गैस खरीदनी होगी, बल्कि प्रतिस्पर्धी खरीदारों से ऊंची कीमत पर बोली भी लगानी पड़ सकती है।
अभी उपलब्ध साक्ष्य तत्काल पूरे यूरोप में गैस राशनिंग या भौतिक आपूर्ति-विफलता को अनिवार्य नहीं बताते। नॉर्वे से पाइपलाइन आपूर्ति, यूरोप के विविध एलएनजी आयात टर्मिनल, मांग में कमी और पवन-सौर ऊर्जा का बढ़ता उत्पादन स्थिति को कुछ हद तक संभाल सकते हैं। रॉयटर्स के विश्लेषण के अनुसार, बहस अब केवल इस बात पर केंद्रित नहीं है कि यूरोप गैस हासिल कर पाएगा या नहीं; असली चिंता गैस की कीमत और अस्थिरता बनती जा रही है।
फिर भी ये सुरक्षा-तत्व कम भंडारण से पैदा हुआ कमजोर सुरक्षा-कवच वापस नहीं ला सकते। यदि हॉर्मुज़ लंबे समय तक बंद रहता है, एलएनजी आपूर्ति में और कटौती होती है या सर्दी सामान्य से अधिक ठंडी पड़ती है, तो कम भंडार से कीमतों में तेज उछाल का खतरा बढ़ जाएगा।
एलएनजी एक वैश्विक बाजार में कारोबार होने वाली वस्तु है। जहाजों के जरिए भेजे जाने वाले कार्गो आम तौर पर उस बाजार की ओर जाते हैं जहां कीमत अधिक हो और मांग मजबूत हो। हॉर्मुज़ व्यवधान के बाद एशियाई खरीदारों ने अधिक कीमत की पेशकश की, जिससे अमेरिकी निर्यातकों के लिए यूरोप के बजाय एशिया को कार्गो भेजना अधिक लाभदायक हुआ। मिस्र की बढ़ी हुई खरीद ने भी यूरोप के लिए उपलब्ध खेपों पर दबाव डाला।
यही बदलाव यूरोप के भंडारण संकट को गहरा करता है: जिस समय उसे सर्दियों से पहले बड़ी मात्रा में गैस जमा करनी है, उसी समय उपलब्ध समुद्री गैस के लिए अन्य बाजार भी अधिक आक्रामक तरीके से खरीदारी कर रहे हैं।
गर्मी की लहर और सूखा गैस बाजार पर एक अलग रास्ते से भी दबाव डाल सकते हैं। अत्यधिक गर्मी में बिजली की मांग बढ़ती है, जबकि सूखे के कारण पानी पर निर्भर बिजली उत्पादन और ग्रिड संचालन प्रभावित हो सकते हैं।
रोमानिया में डेन्यूब नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद देश के एकमात्र संचालित परमाणु रिएक्टर को ग्रिड से अलग करना पड़ा और ऊर्जा आपातकाल घोषित किया गया। ऐसी घटनाएं गैस-आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता बढ़ा सकती हैं—ठीक उस समय जब गैस महंगी और सीमित हो।
निकट अवधि में सबसे बड़ा असर घरेलू और औद्योगिक ऊर्जा बिलों पर पड़ सकता है। यदि बाजार तंग बना रहा तो सरकारें और उपयोगिताएं खपत कम करने की अपील कर सकती हैं। पहले से कम भंडार के बीच कड़ाके की ठंड पड़ी तो भंडारण से निकासी तेज होगी और कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है।
इसके विपरीत, सामान्य से नरम सर्दी, ऊर्जा मांग में निरंतर कमी या हॉर्मुज़ का जल्द और विश्वसनीय रूप से खुलना स्थिति को काफी बेहतर कर सकता है।
यूरोप व्यापक गैस आपातकाल से तभी बच सकता है जब हॉर्मुज़ के बाहर से एलएनजी आपूर्ति बनी रहे, मौसम अनुकूल हो, मांग में पर्याप्त कमी आए और कोई बड़ी अतिरिक्त आपूर्ति-रुकावट न हो। अभी उपलब्ध जानकारी यूरोप की सर्दियों की कीमत-संबंधी कमजोरी और सीमित सुरक्षा-भंडार की ओर इशारा करती है; लेकिन पूरे महाद्वीप में गैस की अनिवार्य कमी को अभी निश्चित नहीं माना जा सकता।