अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड में लिक्विडिटी-सपोर्ट बायबैक की अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम-से-कम 4 अरब डॉलर कर दी। यह बदलाव 9 सितंबर से लागू होकर मौजूदा रिफंडिंग तिमाही के अंत यानी 4 नवंबर तक प्रभावी रहना था।
Reuters के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़े हुए कार्यक्रम से तिमाही के दौरान कम-से-कम 14 अरब डॉलर के अतिरिक्त बायबैक हो सकते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी बाजार के कुल आकार की तुलना में यह रकम छोटी है, लेकिन घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि उसने लॉन्ग-ड्यूरेशन बॉन्ड में तत्काल मांग और बाजार की तरलता से जुड़ी चिंता को सीधे संबोधित किया।
इसका असर समझने का आसान तरीका है:
बाजार की प्रतिक्रिया फेडरल रिजर्व के पुराने ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ कार्यक्रम जैसी दिखी। दोनों में सरकारी कर्ज की अवधि यानी मैच्योरिटी प्रोफाइल पर ध्यान दिया जाता है और लंबी अवधि की यील्ड पर दबाव कम करने की कोशिश होती है। लेकिन ट्रेजरी की यह कार्रवाई वास्तविक अर्थों में ऑपरेशन ट्विस्ट नहीं थी। ट्रेजरी ने इसे मौद्रिक नीति नहीं, बल्कि बाजार की लिक्विडिटी सुधारने वाला कदम बताया। साथ ही, फेड ने शॉर्ट-टर्म सिक्योरिटीज बेचकर लॉन्ग-टर्म बॉन्ड खरीदने जैसा कोई समानांतर ऑपरेशन नहीं किया।
यह अंतर अहम है। ट्रेजरी कुछ अवधि वाले बॉन्ड में कारोबार की स्थिति और मांग-आपूर्ति संतुलन को अस्थायी रूप से सुधार सकती है, लेकिन वह फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति तय करने वाली भूमिका नहीं ले रही थी।
अमेरिकी ट्रेजरी दुनिया के प्रमुख बॉन्ड बाजारों के लिए बेंचमार्क हैं। जब उनकी लंबी अवधि की यील्ड तेजी से बढ़ती है, तो निवेशक दूसरे देशों के सरकारी बॉन्ड और जोखिम वाले एसेट से भी अधिक रिटर्न मांगते हैं। इससे कंपनियों की फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है और उन शेयरों का मूल्यांकन घट सकता है जिनकी बड़ी कमाई भविष्य में होने की उम्मीद होती है।
यील्ड घटने पर यह दबाव कुछ कम हुआ। एशियाई बॉन्ड बाजारों को लंबी अवधि की वैश्विक यील्ड में गिरावट से सहारा मिला और शेयर बाजारों में पिछले सत्र के दौरान खोई जोखिम लेने की इच्छा लौटने लगी। एक रिपोर्ट में MSCI Asia-Pacific इंडेक्स करीब 0.8% ऊपर था। जापान का Nikkei 225 लगभग 1% और Topix शुरुआती कारोबार में 0.80% चढ़ा।
सबसे तेज़ पलटाव दक्षिण कोरिया में दिखा। 19 अगस्त को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में बिकवाली के बीच KOSPI 5.8% गिरा था। 20 अगस्त को अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में इसकी तेजी 3.86% इंट्राडे से लेकर सत्र के अंत में 6.1% तक बताई गई। अलग-अलग आंकड़े इस बात को दिखाते हैं कि बाजार खुला रहने के दौरान तेजी मापी जा रही थी, लेकिन दिशा स्पष्ट थी: बॉन्ड यील्ड से शुरू हुई पिछली गिरावट का तेज़ उलटफेर हुआ।
चिप कंपनियों में उछाल खास तौर पर मजबूत रहा। Samsung Electronics और SK Hynix उन शेयरों में थे जिन पर AI निवेश, महंगी उधारी और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर सबसे ज्यादा दबाव था। लंबी अवधि की यील्ड घटने से निवेशकों को इन शेयरों का मूल्यांकन फिर से करने का आधार मिला।
दक्षिण कोरियाई टेक शेयरों की वापसी की वजह केवल अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा नहीं थी। SK Hynix के बोर्ड ने 40 ट्रिलियन वॉन के अपने शेयरों को खरीदकर रद्द करने की योजना मंजूर की। उस समय की रिपोर्टों में इसकी कीमत करीब 28.6 से 28.9 अरब डॉलर बताई गई। योजना में लगभग 24.07 मिलियन शेयर, यानी कुल बकाया शेयरों का करीब 3.3%, शामिल थे।
शेयर बायबैक कंपनी को बाजार में अपना ही शेयर खरीदने वाला एक बड़ा खरीदार देता है। इसके बाद शेयर रद्द किए जाने पर बाजार में बचे शेयरों की संख्या घटती है। यदि कंपनी की कमाई और फ्री कैश फ्लो समान रहें, तो हर बचे हुए शेयर का कंपनी पर आनुपातिक दावा बढ़ जाता है। इसलिए यह घोषणा शेयरधारकों को रिटर्न देने का सीधा संकेत बनी—ठीक उसी समय जब घटती अमेरिकी यील्ड ने पूरे टेक सेक्टर का दबाव कम किया।
घोषणा के बाद SK Hynix के शेयरों में तेजी आई। अलग-अलग बाजार माप और समय के अनुसार रिपोर्टों में यह उछाल करीब 7% से लगभग 11% तक बताया गया। कंपनी का अपना बायबैक इस बात को समझाता है कि शेयर ने व्यापक राहत रैली से बेहतर प्रदर्शन क्यों किया।
ट्रेजरी की कार्रवाई ने बिकवाली को रोकने में मदद की, लेकिन उसके मूल कारणों को खत्म नहीं किया।
बढ़े हुए बायबैक का आकार कुल सरकारी कर्ज की तुलना में छोटा है। यह कुछ खास मैच्योरिटी वाले बॉन्ड में लिक्विडिटी सुधार सकता है, लेकिन बड़े राजकोषीय घाटे और लगातार नई उधारी से पैदा होने वाली सप्लाई को स्थायी रूप से खत्म नहीं कर सकता। बॉन्ड यील्ड में सुधार के बावजूद विश्लेषक बढ़ते सरकारी कर्ज को लेकर चिंतित रहे।
कॉरपोरेट उधारी भी लॉन्ग-ड्यूरेशन सप्लाई का एक स्रोत है। AI और डेटा सेंटर बनाने के लिए भारी पूंजी चाहिए और टेक कंपनियां कर्ज की लागत के प्रति अधिक संवेदनशील होती जा रही हैं। इसलिए लंबी अवधि की यील्ड दोबारा बढ़ी तो वही ग्रोथ शेयर फिर दबाव में आ सकते हैं जिन्होंने इस वापसी का नेतृत्व किया था।
पिछली बिकवाली के दौरान मध्य-पूर्वी तनावों के बीच Brent कच्चा तेल 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई की चिंता बढ़ा सकती हैं और निवेशकों को लंबी अवधि के बॉन्ड रखने के लिए अधिक रिटर्न मांगने पर मजबूर कर सकती हैं।
यही ट्रेजरी बायबैक की सीमा भी है: यदि निवेशकों को लगता है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहेगी, तो सरकारी खरीदार अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन वह यील्ड के उस स्तर को स्थायी रूप से नहीं बदल सकता जिसे निवेशक अंततः जरूरी मानते हैं।
परंपरागत लंबी अवधि वाले बॉन्ड खरीदार पहले की तरह भरोसेमंद नहीं रहे हैं। ऐसे में आगामी ट्रेजरी नीलामियां यह परखेंगी कि निजी निवेशक ऊंची यील्ड की मांग किए बिना नई सरकारी सप्लाई को कितना अवशोषित कर सकते हैं। खासकर 20-वर्षीय कर्ज की मांग यह बताएगी कि ट्रेजरी का कदम बाजार की बुनियादी क्षमता सुधार रहा है या केवल कुछ समय के लिए घबराहट शांत कर रहा है।
ट्रेजरी के कदम ने मौद्रिक नीति के साथ उसके संबंध को लेकर भी सवाल उठाए। निवेशक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Kevin Warsh की अपेक्षाकृत कम विस्तृत फॉरवर्ड गाइडेंस पर पहले से नजर रख रहे थे और Jackson Hole बैठक में अधिक स्पष्टता की उम्मीद कर रहे थे। यदि फेड का संदेश बाजार को ऊंची दरों की ओर ले जाता है, तो ट्रेजरी के लिक्विडिटी-सपोर्ट के बाद भी लंबी अवधि की यील्ड फिर बढ़ सकती है।
जापान की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड करीब 3% तक पहुंच गई थी—यह कई दशकों में नहीं देखा गया स्तर है। यदि यह स्तर लंबे समय तक पार होता है, तो जापान में घरेलू फंडिंग लागत बढ़ सकती है और जापानी निवेशक विदेशी लॉन्ग-ड्यूरेशन बॉन्ड खरीदने के बजाय अधिक पूंजी अपने देश में रख सकते हैं। इससे वैश्विक बॉन्ड बाजारों से एक महत्वपूर्ण मांग स्रोत हट जाएगा।
20 अगस्त की तेजी ने दिखाया कि लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड पर दबाव कम होते ही वैश्विक बाजार कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं था कि ट्रेजरी बायबैक ने एशियाई कंपनियों की कमाई सीधे बढ़ा दी। असल में इस कदम ने ब्याज-दर और लिक्विडिटी का निकट-अवधि माहौल बदला, जिससे निवेशक पिछले दिन के बॉन्ड-झटके के दौरान बनाए गए कुछ ट्रेड उलट सके।
इसलिए यह कदम बाजार को स्थिर करने वाला उपाय था, समस्या का स्थायी समाधान नहीं। लगातार राजकोषीय घाटे, AI से जुड़ी कॉरपोरेट उधारी, ऊंची तेल कीमतें, महंगाई को लेकर अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की कम स्पष्ट संवाद नीति लंबी अवधि की यील्ड पर फिर दबाव बना सकती है। निवेशकों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि ट्रेजरी के शुरुआती संकेत के बाद निजी मांग और आगामी नीलामियां कम यील्ड को टिकाए रख पाती हैं या नहीं।
अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड में लिक्विडिटी-सपोर्ट बायबैक की अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम-से-कम 4 अरब डॉलर कर दी। यह बदलाव 9 सितंबर से लागू होकर मौजूदा रिफंडिंग तिमाही के अंत यानी 4 नवंबर तक प्रभावी रहना था।
Reuters के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़े हुए कार्यक्रम से तिमाही के दौरान कम-से-कम 14 अरब डॉलर के अतिरिक्त बायबैक हो सकते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी बाजार के कुल आकार की तुलना में यह रकम छोटी है, लेकिन घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि उसने लॉन्ग-ड्यूरेशन बॉन्ड में तत्काल मांग और बाजार की तरलता से जुड़ी चिंता को सीधे संबोधित किया।
इसका असर समझने का आसान तरीका है:
बाजार की प्रतिक्रिया फेडरल रिजर्व के पुराने ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ कार्यक्रम जैसी दिखी। दोनों में सरकारी कर्ज की अवधि यानी मैच्योरिटी प्रोफाइल पर ध्यान दिया जाता है और लंबी अवधि की यील्ड पर दबाव कम करने की कोशिश होती है। लेकिन ट्रेजरी की यह कार्रवाई वास्तविक अर्थों में ऑपरेशन ट्विस्ट नहीं थी। ट्रेजरी ने इसे मौद्रिक नीति नहीं, बल्कि बाजार की लिक्विडिटी सुधारने वाला कदम बताया। साथ ही, फेड ने शॉर्ट-टर्म सिक्योरिटीज बेचकर लॉन्ग-टर्म बॉन्ड खरीदने जैसा कोई समानांतर ऑपरेशन नहीं किया।
यह अंतर अहम है। ट्रेजरी कुछ अवधि वाले बॉन्ड में कारोबार की स्थिति और मांग-आपूर्ति संतुलन को अस्थायी रूप से सुधार सकती है, लेकिन वह फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति तय करने वाली भूमिका नहीं ले रही थी।
अमेरिकी ट्रेजरी दुनिया के प्रमुख बॉन्ड बाजारों के लिए बेंचमार्क हैं। जब उनकी लंबी अवधि की यील्ड तेजी से बढ़ती है, तो निवेशक दूसरे देशों के सरकारी बॉन्ड और जोखिम वाले एसेट से भी अधिक रिटर्न मांगते हैं। इससे कंपनियों की फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है और उन शेयरों का मूल्यांकन घट सकता है जिनकी बड़ी कमाई भविष्य में होने की उम्मीद होती है।
यील्ड घटने पर यह दबाव कुछ कम हुआ। एशियाई बॉन्ड बाजारों को लंबी अवधि की वैश्विक यील्ड में गिरावट से सहारा मिला और शेयर बाजारों में पिछले सत्र के दौरान खोई जोखिम लेने की इच्छा लौटने लगी। एक रिपोर्ट में MSCI Asia-Pacific इंडेक्स करीब 0.8% ऊपर था। जापान का Nikkei 225 लगभग 1% और Topix शुरुआती कारोबार में 0.80% चढ़ा।
सबसे तेज़ पलटाव दक्षिण कोरिया में दिखा। 19 अगस्त को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में बिकवाली के बीच KOSPI 5.8% गिरा था। 20 अगस्त को अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में इसकी तेजी 3.86% इंट्राडे से लेकर सत्र के अंत में 6.1% तक बताई गई। अलग-अलग आंकड़े इस बात को दिखाते हैं कि बाजार खुला रहने के दौरान तेजी मापी जा रही थी, लेकिन दिशा स्पष्ट थी: बॉन्ड यील्ड से शुरू हुई पिछली गिरावट का तेज़ उलटफेर हुआ।
चिप कंपनियों में उछाल खास तौर पर मजबूत रहा। Samsung Electronics और SK Hynix उन शेयरों में थे जिन पर AI निवेश, महंगी उधारी और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर सबसे ज्यादा दबाव था। लंबी अवधि की यील्ड घटने से निवेशकों को इन शेयरों का मूल्यांकन फिर से करने का आधार मिला।
दक्षिण कोरियाई टेक शेयरों की वापसी की वजह केवल अमेरिकी ट्रेजरी की घोषणा नहीं थी। SK Hynix के बोर्ड ने 40 ट्रिलियन वॉन के अपने शेयरों को खरीदकर रद्द करने की योजना मंजूर की। उस समय की रिपोर्टों में इसकी कीमत करीब 28.6 से 28.9 अरब डॉलर बताई गई। योजना में लगभग 24.07 मिलियन शेयर, यानी कुल बकाया शेयरों का करीब 3.3%, शामिल थे।
शेयर बायबैक कंपनी को बाजार में अपना ही शेयर खरीदने वाला एक बड़ा खरीदार देता है। इसके बाद शेयर रद्द किए जाने पर बाजार में बचे शेयरों की संख्या घटती है। यदि कंपनी की कमाई और फ्री कैश फ्लो समान रहें, तो हर बचे हुए शेयर का कंपनी पर आनुपातिक दावा बढ़ जाता है। इसलिए यह घोषणा शेयरधारकों को रिटर्न देने का सीधा संकेत बनी—ठीक उसी समय जब घटती अमेरिकी यील्ड ने पूरे टेक सेक्टर का दबाव कम किया।
घोषणा के बाद SK Hynix के शेयरों में तेजी आई। अलग-अलग बाजार माप और समय के अनुसार रिपोर्टों में यह उछाल करीब 7% से लगभग 11% तक बताया गया। कंपनी का अपना बायबैक इस बात को समझाता है कि शेयर ने व्यापक राहत रैली से बेहतर प्रदर्शन क्यों किया।
ट्रेजरी की कार्रवाई ने बिकवाली को रोकने में मदद की, लेकिन उसके मूल कारणों को खत्म नहीं किया।
बढ़े हुए बायबैक का आकार कुल सरकारी कर्ज की तुलना में छोटा है। यह कुछ खास मैच्योरिटी वाले बॉन्ड में लिक्विडिटी सुधार सकता है, लेकिन बड़े राजकोषीय घाटे और लगातार नई उधारी से पैदा होने वाली सप्लाई को स्थायी रूप से खत्म नहीं कर सकता। बॉन्ड यील्ड में सुधार के बावजूद विश्लेषक बढ़ते सरकारी कर्ज को लेकर चिंतित रहे।
कॉरपोरेट उधारी भी लॉन्ग-ड्यूरेशन सप्लाई का एक स्रोत है। AI और डेटा सेंटर बनाने के लिए भारी पूंजी चाहिए और टेक कंपनियां कर्ज की लागत के प्रति अधिक संवेदनशील होती जा रही हैं। इसलिए लंबी अवधि की यील्ड दोबारा बढ़ी तो वही ग्रोथ शेयर फिर दबाव में आ सकते हैं जिन्होंने इस वापसी का नेतृत्व किया था।
पिछली बिकवाली के दौरान मध्य-पूर्वी तनावों के बीच Brent कच्चा तेल 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई की चिंता बढ़ा सकती हैं और निवेशकों को लंबी अवधि के बॉन्ड रखने के लिए अधिक रिटर्न मांगने पर मजबूर कर सकती हैं।
यही ट्रेजरी बायबैक की सीमा भी है: यदि निवेशकों को लगता है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहेगी, तो सरकारी खरीदार अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन वह यील्ड के उस स्तर को स्थायी रूप से नहीं बदल सकता जिसे निवेशक अंततः जरूरी मानते हैं।
परंपरागत लंबी अवधि वाले बॉन्ड खरीदार पहले की तरह भरोसेमंद नहीं रहे हैं। ऐसे में आगामी ट्रेजरी नीलामियां यह परखेंगी कि निजी निवेशक ऊंची यील्ड की मांग किए बिना नई सरकारी सप्लाई को कितना अवशोषित कर सकते हैं। खासकर 20-वर्षीय कर्ज की मांग यह बताएगी कि ट्रेजरी का कदम बाजार की बुनियादी क्षमता सुधार रहा है या केवल कुछ समय के लिए घबराहट शांत कर रहा है।
ट्रेजरी के कदम ने मौद्रिक नीति के साथ उसके संबंध को लेकर भी सवाल उठाए। निवेशक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Kevin Warsh की अपेक्षाकृत कम विस्तृत फॉरवर्ड गाइडेंस पर पहले से नजर रख रहे थे और Jackson Hole बैठक में अधिक स्पष्टता की उम्मीद कर रहे थे। यदि फेड का संदेश बाजार को ऊंची दरों की ओर ले जाता है, तो ट्रेजरी के लिक्विडिटी-सपोर्ट के बाद भी लंबी अवधि की यील्ड फिर बढ़ सकती है।
जापान की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड करीब 3% तक पहुंच गई थी—यह कई दशकों में नहीं देखा गया स्तर है। यदि यह स्तर लंबे समय तक पार होता है, तो जापान में घरेलू फंडिंग लागत बढ़ सकती है और जापानी निवेशक विदेशी लॉन्ग-ड्यूरेशन बॉन्ड खरीदने के बजाय अधिक पूंजी अपने देश में रख सकते हैं। इससे वैश्विक बॉन्ड बाजारों से एक महत्वपूर्ण मांग स्रोत हट जाएगा।
20 अगस्त की तेजी ने दिखाया कि लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड पर दबाव कम होते ही वैश्विक बाजार कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं था कि ट्रेजरी बायबैक ने एशियाई कंपनियों की कमाई सीधे बढ़ा दी। असल में इस कदम ने ब्याज-दर और लिक्विडिटी का निकट-अवधि माहौल बदला, जिससे निवेशक पिछले दिन के बॉन्ड-झटके के दौरान बनाए गए कुछ ट्रेड उलट सके।
इसलिए यह कदम बाजार को स्थिर करने वाला उपाय था, समस्या का स्थायी समाधान नहीं। लगातार राजकोषीय घाटे, AI से जुड़ी कॉरपोरेट उधारी, ऊंची तेल कीमतें, महंगाई को लेकर अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की कम स्पष्ट संवाद नीति लंबी अवधि की यील्ड पर फिर दबाव बना सकती है। निवेशकों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि ट्रेजरी के शुरुआती संकेत के बाद निजी मांग और आगामी नीलामियां कम यील्ड को टिकाए रख पाती हैं या नहीं।