यूक्रेनी ड्रोन हमलों की श्रृंखला 18 जुलाई को मॉस्को के पास एलेक्ट्रोस्ताल और तांबोव क्षेत्र के कोतोव्स्क स्थित Wildberries केंद्रों से शुरू हुई। इसके बाद हमले रूस के कई पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों, दक्षिणी इलाकों, क्रीमिया तथा यूराल क्षेत्र तक फैल गए। Reuters ने तीन सप्ताह से कम समय में कम-से-कम 20 ठिकानों पर हमले की पुष्टि की थी; बाद के यूक्रेनी आकलनों और अन्य रिपोर्टों में प्रभावित सुविधाओं की संख्या 25 या उससे अधिक बताई गई।
मध्य अगस्त में मॉस्को के दक्षिण में कोलेदीनो औद्योगिक पार्क स्थित कंपनी के सबसे बड़े केंद्र में भीषण आग लगी। इस परिसर का क्षेत्रफल लगभग 2,50,000 वर्ग मीटर बताया गया है।
येकातेरिनबर्ग में भी एक लॉजिस्टिक्स केंद्र पर हमला हुआ—यह मॉस्को से करीब 1,400 किलोमीटर पूर्व में है। कंपनी ने कहा कि आग पर काबू पा लिया गया और अधिकांश माल सुरक्षित रहा, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने ड्रोन गिराए जाने की जानकारी दी।
Reuters की उपग्रह तस्वीरों पर आधारित समीक्षा के अनुसार कम-से-कम 11.8 लाख वर्ग मीटर वेयरहाउस क्षेत्र क्षतिग्रस्त या नष्ट हुआ। यह Wildberries की कुल वेयरहाउस क्षमता के पांचवें हिस्से से अधिक है। हालांकि यह स्वतंत्र ऑडिट से प्रमाणित अंतिम आंकड़ा नहीं, बल्कि उपलब्ध तस्वीरों और रिपोर्टों पर आधारित अनुमान है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय और Institute for the Study of War के आकलन के अनुसार Wildberries के 10 सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों में से सात पर हमला हुआ और वे संचालन से बाहर हो गए। रूस ने इस दावे पर विवाद किया है और कंपनी के नेटवर्क को सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचा बताए जाने से इनकार किया है।
इन हमलों से डिलीवरी में देरी, ऑर्डर सीमित होने और विक्रेताओं के स्टॉक के नष्ट होने जैसी समस्याएं पैदा हुईं। Wildberries रूस का सबसे बड़ा ऑनलाइन मार्केटप्लेस है और प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक ऑर्डर संभालने की क्षमता का दावा करता है।
मॉस्को के आसपास और उससे लगभग 1,400 किलोमीटर दूर येकातेरिनबर्ग जैसे क्षेत्रों में फैले, व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण गोदामों पर बार-बार सफल हमले यह संकेत देते हैं कि रूस की वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां हर बड़े आर्थिक ठिकाने को लगातार बड़े पैमाने के ड्रोन हमलों से सुरक्षित नहीं रख पा रही हैं।
फिर भी इससे रूस की वायु रक्षा के पूरी तरह ध्वस्त होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। रूसी अधिकारियों ने बड़े हमलों के दौरान सैकड़ों ड्रोन को रोकने या निष्क्रिय करने का दावा भी किया है। अधिक सटीक निष्कर्ष यह है कि विशाल क्षेत्र में फैले हर उच्च-मूल्य वाले आर्थिक केंद्र की सुरक्षा करना रूस के लिए कठिन साबित हो रहा है।
Wildberries मूल रूप से कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना और घरेलू सामान बेचने वाला नागरिक ऑनलाइन बाजार है। इसलिए इन हमलों का सीधा नुकसान आम व्यापारियों के स्टॉक, कर्मचारियों और ग्राहकों को हुआ।
लेकिन प्लेटफॉर्म पर सैन्य उपयोग के सामानों की खुली बिक्री और प्रचार ने नागरिक वितरण नेटवर्क तथा युद्ध अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों पर सवाल खड़े किए हैं। यूक्रेन का आरोप है कि Wildberries के लॉजिस्टिक्स केंद्र ड्रोन निर्माण और नेविगेशन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित दोहरे-उपयोग वाले घटकों की आपूर्ति में मदद करते हैं। मॉस्को और क्रेमलिन इस आरोप से इनकार करते हैं।
अब तक ऐसा पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि Wildberries औपचारिक रूप से रूस के रक्षा मंत्रालय की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवस्थित रूप से शामिल है। हालांकि सेना की मदद करने वाले स्वयंसेवकों द्वारा इस प्लेटफॉर्म से सामान खरीदने की जानकारी सामने आई है।
रूस में रखे किर्गिज़ कपड़ा निर्माताओं का माल एलेक्ट्रोस्ताल और कोतोव्स्क के प्रभावित गोदामों में था। हमलों के बाद इन व्यापारियों को माल के नुकसान और रूसी बाजार तक पहुंच में रुकावट का सामना करना पड़ा।
इससे क्षेत्रीय कारोबार के लिए एक ही देश या एक ही बड़े वेयरहाउस नेटवर्क पर निर्भरता घटाने की जरूरत सामने आई है। किर्गिस्तान ने Wildberries के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का कुछ हिस्सा अपने यहां स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।
कजाखस्तान में अल्माटी और अस्ताना में नए केंद्रों की योजनाओं की भी रिपोर्ट है। कुछ आकलनों में वहां कुल 2,60,000 वर्ग मीटर वेयरहाउसिंग क्षमता विकसित करने की बात कही गई है, हालांकि इन योजनाओं और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
हमलों के बाद किर्गिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रूस में रह रहे अपने नागरिकों, खासकर गोदामों में काम करने वालों, से अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा। यह चेतावनी दो किर्गिज़ नागरिकों के घायल होने की रिपोर्ट के बाद आई।
इस घटनाक्रम से साफ है कि युद्ध का असर केवल रूसी ग्राहकों और कंपनियों तक सीमित नहीं है। रूस के ई-कॉमर्स नेटवर्क से जुड़े मध्य एशियाई विक्रेता, निर्यातक और प्रवासी श्रमिक भी इसके जोखिम का सामना कर रहे हैं।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों की श्रृंखला 18 जुलाई को मॉस्को के पास एलेक्ट्रोस्ताल और तांबोव क्षेत्र के कोतोव्स्क स्थित Wildberries केंद्रों से शुरू हुई। इसके बाद हमले रूस के कई पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों, दक्षिणी इलाकों, क्रीमिया तथा यूराल क्षेत्र तक फैल गए। Reuters ने तीन सप्ताह से कम समय में कम-से-कम 20 ठिकानों पर हमले की पुष्टि की थी; बाद के यूक्रेनी आकलनों और अन्य रिपोर्टों में प्रभावित सुविधाओं की संख्या 25 या उससे अधिक बताई गई।
मध्य अगस्त में मॉस्को के दक्षिण में कोलेदीनो औद्योगिक पार्क स्थित कंपनी के सबसे बड़े केंद्र में भीषण आग लगी। इस परिसर का क्षेत्रफल लगभग 2,50,000 वर्ग मीटर बताया गया है।
येकातेरिनबर्ग में भी एक लॉजिस्टिक्स केंद्र पर हमला हुआ—यह मॉस्को से करीब 1,400 किलोमीटर पूर्व में है। कंपनी ने कहा कि आग पर काबू पा लिया गया और अधिकांश माल सुरक्षित रहा, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने ड्रोन गिराए जाने की जानकारी दी।
Reuters की उपग्रह तस्वीरों पर आधारित समीक्षा के अनुसार कम-से-कम 11.8 लाख वर्ग मीटर वेयरहाउस क्षेत्र क्षतिग्रस्त या नष्ट हुआ। यह Wildberries की कुल वेयरहाउस क्षमता के पांचवें हिस्से से अधिक है। हालांकि यह स्वतंत्र ऑडिट से प्रमाणित अंतिम आंकड़ा नहीं, बल्कि उपलब्ध तस्वीरों और रिपोर्टों पर आधारित अनुमान है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय और Institute for the Study of War के आकलन के अनुसार Wildberries के 10 सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों में से सात पर हमला हुआ और वे संचालन से बाहर हो गए। रूस ने इस दावे पर विवाद किया है और कंपनी के नेटवर्क को सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचा बताए जाने से इनकार किया है।
इन हमलों से डिलीवरी में देरी, ऑर्डर सीमित होने और विक्रेताओं के स्टॉक के नष्ट होने जैसी समस्याएं पैदा हुईं। Wildberries रूस का सबसे बड़ा ऑनलाइन मार्केटप्लेस है और प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक ऑर्डर संभालने की क्षमता का दावा करता है।
मॉस्को के आसपास और उससे लगभग 1,400 किलोमीटर दूर येकातेरिनबर्ग जैसे क्षेत्रों में फैले, व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण गोदामों पर बार-बार सफल हमले यह संकेत देते हैं कि रूस की वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां हर बड़े आर्थिक ठिकाने को लगातार बड़े पैमाने के ड्रोन हमलों से सुरक्षित नहीं रख पा रही हैं।
फिर भी इससे रूस की वायु रक्षा के पूरी तरह ध्वस्त होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। रूसी अधिकारियों ने बड़े हमलों के दौरान सैकड़ों ड्रोन को रोकने या निष्क्रिय करने का दावा भी किया है। अधिक सटीक निष्कर्ष यह है कि विशाल क्षेत्र में फैले हर उच्च-मूल्य वाले आर्थिक केंद्र की सुरक्षा करना रूस के लिए कठिन साबित हो रहा है।
Wildberries मूल रूप से कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना और घरेलू सामान बेचने वाला नागरिक ऑनलाइन बाजार है। इसलिए इन हमलों का सीधा नुकसान आम व्यापारियों के स्टॉक, कर्मचारियों और ग्राहकों को हुआ।
लेकिन प्लेटफॉर्म पर सैन्य उपयोग के सामानों की खुली बिक्री और प्रचार ने नागरिक वितरण नेटवर्क तथा युद्ध अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों पर सवाल खड़े किए हैं। यूक्रेन का आरोप है कि Wildberries के लॉजिस्टिक्स केंद्र ड्रोन निर्माण और नेविगेशन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित दोहरे-उपयोग वाले घटकों की आपूर्ति में मदद करते हैं। मॉस्को और क्रेमलिन इस आरोप से इनकार करते हैं।
अब तक ऐसा पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि Wildberries औपचारिक रूप से रूस के रक्षा मंत्रालय की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवस्थित रूप से शामिल है। हालांकि सेना की मदद करने वाले स्वयंसेवकों द्वारा इस प्लेटफॉर्म से सामान खरीदने की जानकारी सामने आई है।
रूस में रखे किर्गिज़ कपड़ा निर्माताओं का माल एलेक्ट्रोस्ताल और कोतोव्स्क के प्रभावित गोदामों में था। हमलों के बाद इन व्यापारियों को माल के नुकसान और रूसी बाजार तक पहुंच में रुकावट का सामना करना पड़ा।
इससे क्षेत्रीय कारोबार के लिए एक ही देश या एक ही बड़े वेयरहाउस नेटवर्क पर निर्भरता घटाने की जरूरत सामने आई है। किर्गिस्तान ने Wildberries के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का कुछ हिस्सा अपने यहां स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।
कजाखस्तान में अल्माटी और अस्ताना में नए केंद्रों की योजनाओं की भी रिपोर्ट है। कुछ आकलनों में वहां कुल 2,60,000 वर्ग मीटर वेयरहाउसिंग क्षमता विकसित करने की बात कही गई है, हालांकि इन योजनाओं और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
हमलों के बाद किर्गिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रूस में रह रहे अपने नागरिकों, खासकर गोदामों में काम करने वालों, से अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा। यह चेतावनी दो किर्गिज़ नागरिकों के घायल होने की रिपोर्ट के बाद आई।
इस घटनाक्रम से साफ है कि युद्ध का असर केवल रूसी ग्राहकों और कंपनियों तक सीमित नहीं है। रूस के ई-कॉमर्स नेटवर्क से जुड़े मध्य एशियाई विक्रेता, निर्यातक और प्रवासी श्रमिक भी इसके जोखिम का सामना कर रहे हैं।