कुल 1,320 डिजाइन किए गए प्रोटीनों का परीक्षण हुआ, जिनमें से 354 अपने इच्छित लक्ष्य से बंधे। यानी समग्र दर 26.8% रही। केवल MBP लक्ष्य के मामले में कोई बाइंडर नहीं मिला।
Adaptyv Bio ने डिजाइन गुमनाम रूप से प्राप्त किए, उनके DNA का संश्लेषण कराया, प्रोटीन बनाए और surface plasmon resonance जैसी तकनीक से बाइंडिंग मापी। परीक्षणों में दोहराव और गुणवत्ता नियंत्रण भी शामिल थे। Twist Bioscience ने भी डिजाइन स्वतंत्र रूप से बनाए और जांचे।
यह कंप्यूटरी बेंचमार्क से मजबूत सत्यापन है, क्योंकि डिजाइन वास्तविक जैविक प्रणाली में परखे गए। फिर भी यह सत्यापन केवल इस बात का है कि प्रोटीन लक्ष्य से जुड़ता है—यह नहीं कि वह उपचार के रूप में काम करेगा।
एक मानव प्रोटीन-डिजाइन विशेषज्ञ ने लगभग 30,000 टोकन का शुरुआती प्रॉम्प्ट तैयार किया। इसके बाद अपेक्षाकृत कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ Claude ने लक्ष्यों पर शोध किया, बाइंडिंग साइट चुनीं, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विशेषज्ञ संरचना-अनुमान और प्रोटीन-डिजाइन टूल चलाए, कई उम्मीदवार बनाए तथा उन्हें छांटकर रैंक किया।
अभियान में कुछ स्थापित बेंचमार्क लक्ष्य शामिल थे। साथ ही दो नए प्रतियोगिता लक्ष्यों को भी रखा गया, ताकि परिणाम केवल पहले से प्रकाशित उदाहरणों को दोहराने का नतीजा न हों।
Anthropic के अनुसार, कम-से-कम छह लक्ष्यों के लिए उच्च-संबंधता वाले बाइंडर मिले। कम-से-कम चार लक्ष्यों पर परिणाम पहले प्रकाशित संबंधता-आंकड़ों के बराबर या उनसे बेहतर थे। कुछ शीर्ष डिजाइन कथित तौर पर पहले प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ परिणामों की तुलना में कई गुना अधिक मजबूती से जुड़े।
RBX1 लक्ष्य पर Claude की रिपोर्टेड हिट रेट लगभग 40% रही, जबकि पहले की प्रतियोगिता में शामिल डिजाइनरों की दर 3.7% थी। Anthropic का कहना है कि Claude का परिणाम उस प्रतियोगिता के विजेता डिजाइन से भी बेहतर था।
प्रोटीन बाइंडर एक छोटा प्रोटीन होता है जिसे किसी लक्षित प्रोटीन से जुड़ने के लिए डिजाइन किया जाता है। ऐसे बाइंडर दवा, डायग्नोस्टिक्स और प्रयोगशाला अनुसंधान के लिए शुरुआती सामग्री बन सकते हैं।
लेकिन केवल बाइंडिंग से कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिलते। क्या बाइंडर सही लक्ष्य से चुनिंदा रूप से जुड़ता है? क्या वह लक्ष्य के कार्य को बदलता है? क्या वह शरीर में स्थिर रहता है, सही ऊतक तक पहुंचता है और सुरक्षित है? उसकी औषधीय गति, प्रतिरक्षा-प्रतिक्रिया, विषाक्तता और बड़े पैमाने पर निर्माण की व्यवहार्यता क्या है? इन सवालों का जवाब इस प्रयोग से नहीं मिला। Anthropic भी इसे दवा विकास के शुरुआती चरणों का काम बताता है, तैयार दवा-खोज प्रणाली नहीं।
Martin Shkreli ने कहा कि कई रिपोर्टेड संबंधता-आंकड़े उन फार्मास्यूटिकल दावों के लिए कमजोर हैं जिनका संकेत दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी आलोचना की कि कार्यक्रम ने मुख्यतः बाह्य-कोशिकीय लक्ष्यों पर ध्यान दिया, जबकि कोशिका के अंदर मौजूद प्रोटीनों को लक्षित करना अधिक कठिन होता है।
ये सीमाएं महत्वपूर्ण हैं, हालांकि इनसे यह मापा गया तथ्य खत्म नहीं होता कि बड़ी संख्या में डिजाइन किए गए प्रोटीन प्रयोगशाला में अपने लक्ष्यों से बंधे।
Anthropic प्रोटीन-बाइंडर डिजाइन और रासायनिक डेटा विश्लेषण को दवा विकास की पूरी प्रक्रिया को तेज करने वाली भविष्य की बहु-विधि प्रणाली के हिस्से के रूप में देखता है। कंपनी का कहना है कि आगे की कई बाधाएं केवल मॉडल की क्षमता से जुड़ी नहीं, बल्कि संचालन और नीति से भी संबंधित हैं।
कंपनी की सबसे उन्नत जीवन-विज्ञान क्षमताएं फिलहाल सामान्य उपयोग के लिए सीमित हैं। Anthropic ने वैज्ञानिकों के लिए नियंत्रित पहुंच वाला कार्यक्रम बनाने की इच्छा जताई है, जबकि Opus 5 को जीवन-विज्ञान संबंधी काम के लिए सबसे सक्षम सामान्य रूप से उपलब्ध मॉडल बताया है।
स्वायत्त प्रोटीन-डिजाइन की यही कार्यप्रणाली लाभकारी शोध को तेज कर सकती है और हानिकारक जैविक काम के लिए जरूरी विशेषज्ञता तथा समय को भी कम कर सकती है। इसी वजह से Anthropic अपने सबसे सक्षम मॉडलों पर उन्नत जैविक-शोध कार्यों को सीमित करता है और व्यापक रिलीज के बजाय नियंत्रित या सत्यापित पहुंच का संकेत देता है।
नीतिगत चुनौती यह है कि वैध उपचार-संबंधी शोध को आगे बढ़ाया जाए, लेकिन रोगजनक इंजीनियरिंग, विष-सम्बंधी काम और अन्य दोहरे-उपयोग वाली जैविक गतिविधियों में खतरनाक सहायता को रोका जाए।
इस प्रयोग ने दिखाया कि Claude मौजूदा प्रोटीन-डिजाइन टूलों को स्वायत्त रूप से जोड़कर एक प्रभावी शुरुआती अभियान चला सकता है और प्रयोगशाला में औसत से बेहतर बाइंडिंग दर हासिल कर सकता है। लेकिन इसने न तो किसी दवा के स्वायत्त निर्माण को साबित किया, न कोशिका के अंदर के लक्ष्यों की समस्या हल की और न ही बाइंडर से दवा तक पहुंचने वाली लंबी प्रयोगात्मक तथा नियामकीय प्रक्रिया को समाप्त किया।