रूसी रिफाइनरियों पर हमलों के बाद पेट्रोल की कमी, सीमित बिक्री और क्षेत्रीय राशनिंग फिर सामने आई है। 14 अगस्त को मॉस्को क्षेत्र की सीमा से लगे कालुगा क्षेत्र के अधिकारियों ने वाहन पंजीकरण संख्या के आधार पर ईंधन देने की व्यवस्था घोषित की। कैस्पियन सागर के पास स्थित अस्त्रखान क्षेत्र ने प्रति वाहन 40 लीटर तक बिक्री सीमित करने और कुछ पेट्रोल पंपों का संचालन अस्थायी रूप से रोकने की योजना बताई।
राजधानी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी Rosneft ने अपने सभी पेट्रोल पंपों पर प्रति वाहन 30 लीटर की सीमा लागू की। Lukoil ने भी मॉस्को और आसपास के इलाकों में बिक्री पर प्रतिबंध लगाए। कंपनी ने इसके पीछे बढ़ी हुई मांग, रिफाइनरियों में अनियोजित रखरखाव और आपूर्ति स्थिर करने की जरूरत बताई।
समस्या एक-दो रिफाइनरियों तक सीमित नहीं है। पहले की रिपोर्टों में रूस के अधिकांश क्षेत्रों में ईंधन प्रतिबंधों का उल्लेख हुआ था। देश के अनाज उत्पादक इलाकों में किसानों ने डीजल की कमी के कारण फसल कटाई प्रभावित होने की चिंता जताई। हमलों के बाद रूसी अधिकारियों ने कुछ रिफाइनरियों को बंद किया या उनका संचालन रोक दिया, जिससे घरेलू ईंधन-शोधन क्षमता पर दबाव और बढ़ गया।
रूस ने साइबेरिया से राजधानी की ओर ईंधन भेजकर और बेलारूस तथा भारत से आयात बढ़ाकर मॉस्को में तत्काल संकट को कुछ हद तक नियंत्रित किया। Reuters के अनुसार, जुलाई के मध्य तक मॉस्को में आपूर्ति अस्थायी रूप से स्थिर हो गई थी, जबकि क्रीमिया सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बना रहा और देश का उत्पादन मांग से पीछे था।
यह प्रतिक्रिया रूस की अनुकूलन क्षमता के साथ-साथ हमलों की लागत भी दिखाती है। राजधानी में कमी न हो, इसके लिए ईंधन को देश के दूसरे हिस्सों से मोड़ना या विदेश से मंगाना पड़ रहा है। इसका अर्थ देशव्यापी ठहराव नहीं, बल्कि एक महंगी और असमान वितरण व्यवस्था है—कुछ क्षेत्रों में कमी सहकर उन इलाकों को चालू रखा जा रहा है जिन्हें राजनीतिक रूप से अधिक संवेदनशील माना जाता है।
यूक्रेन का अभियान ऊर्जा ढांचे से आगे बढ़कर बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक पहुंच गया है। 18 जुलाई के बाद से Wildberries के कम-से-कम 20 ठिकानों पर हमले की रिपोर्ट है। इन हमलों से बड़े पैमाने पर आग लगी, गोदामों में रखा सामान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुआ और रूस के सबसे बड़े ऑनलाइन खुदरा नेटवर्क की डिलीवरी व्यवस्था बाधित हुई। Reuters की उपग्रह तस्वीरों की समीक्षा में कम-से-कम 11.8 लाख वर्ग मीटर गोदाम क्षेत्र के क्षतिग्रस्त या नष्ट होने का अनुमान लगाया गया—रिपोर्ट के अनुसार यह कंपनी की क्षमता के पांचवें हिस्से से अधिक है।
हालांकि इन आंकड़ों को सावधानी से देखना चाहिए। अन्य आकलनों में प्रभावित गोदाम क्षेत्र 12.1 लाख से 14.7 लाख वर्ग मीटर और विक्रेताओं का नुकसान 215 अरब से 280 अरब रूबल के बीच बताया गया है। ये अनुमान हैं, ऑडिट किए गए अंतिम आंकड़े नहीं।
Institute for the Study of War के अनुसार, 16 अगस्त तक यूक्रेनी सेना ने Wildberries के 10 सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों में से सात को निशाना बनाया था। डिलीवरी ट्रकों से कंपनी का ब्रांड हटाने और नए भंडारण साझेदार तलाशने की खबरें बताती हैं कि नेटवर्क को चालू रखने की कोशिश हो रही है। लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि व्यवधान कितने समय तक चलेगा या पूरी व्यवस्था कितनी जल्दी दोबारा खड़ी की जा सकेगी।
इन गोदामों की सैन्य भूमिका पर भी विवाद है। यूक्रेनी अधिकारी कुछ लॉजिस्टिक्स केंद्रों को सैन्य-संबंधी उपकरणों की आपूर्ति करने वाले दोहरे उपयोग के नेटवर्क का हिस्सा बताते हैं। उपलब्ध साक्ष्य, हालांकि, यह साबित नहीं करते कि Wildberries के वाणिज्यिक गोदामों को जानबूझकर ड्रोन के पुर्जों या नेविगेशन प्रणालियों की आपूर्ति के लिए समर्पित किया गया था। उनका कारोबारी महत्व स्पष्ट है, प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका नहीं।
15 अगस्त को यूक्रेन ने कहा कि उसके घरेलू स्तर पर निर्मित FP-5 Flamingo मिसाइलों ने समारा स्थित Progress Rocket and Space Center को निशाना बनाया। यह केंद्र यूक्रेन की सीमा से लगभग 900 किलोमीटर दूर है और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos से जुड़ा हुआ है। यहां अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन होता है।
रिपोर्टों और यूक्रेनी सैन्य बयानों में लगभग 5,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में आग लगने की बात कही गई। इस औद्योगिक परिसर में Aviakor विमान संयंत्र भी है, लेकिन दोनों सुविधाओं को हुए नुकसान की सटीक सीमा अभी स्पष्ट नहीं है। उत्पादन में हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि भी सीमित है।
इस हमले का महत्व नष्ट हुए उत्पादन के सत्यापित आंकड़े से कम और उसके संकेत से अधिक जुड़ा है: यूक्रेन रूस के भीतर बहुत दूर स्थित रणनीतिक औद्योगिक ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम है। इससे मॉस्को को हवाई सुरक्षा, संयंत्रों का बिखराव, मरम्मत और उत्पादन जारी रखने की व्यवस्था पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि रूस का पूरा सैन्य-औद्योगिक आधार निर्णायक रूप से पंगु हो गया है।
घरेलू आर्थिक असर लोगों के व्यवहार में भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों में रूस के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि अगस्त के पहले दो हफ्तों में चलन में नकदी 286.4 अरब रूबल बढ़ी। इससे पहले जुलाई में बैंकों से लगभग 7.3 अरब डॉलर की निकासी की खबर आई थी।
बैंक से पैसा निकालना जनता में बढ़ती सावधानी के अनुरूप है, लेकिन इसे केवल यूक्रेनी हमलों का परिणाम नहीं माना जा सकता। संपत्ति जब्त होने की आशंका, भुगतान व्यवस्था में व्यवधान, महंगाई और व्यापक युद्ध अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता भी इसके कारण हो सकते हैं। इसलिए नकदी निकासी चिंता का संकेत है, न कि जनमत या राजनीतिक समर्थन पर हमलों के प्रभाव का अकेला माप।
इन हमलों ने कई माध्यमिक लागतें पैदा की हैं:
रूस के पास अब भी दबाव को संभालने की पर्याप्त क्षमता है। उसने आपूर्ति का रुख बदला है, पेट्रोल आयात किया है और ऊर्जा तथा लॉजिस्टिक्स ढांचे को हुए नुकसान के बावजूद कामकाज जारी रखा है। उपलब्ध साक्ष्य रूस के सैन्य उत्पादन, घरेलू स्थिरता या राज्य नियंत्रण के निर्णायक पतन का समर्थन नहीं करते।
अधिक संतुलित निष्कर्ष यह है कि यूक्रेन युद्ध को रूस के लिए लगातार महंगा और कठिन बना रहा है। क्रेमलिन अभी भी दबाव को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर काफी हद तक संभाल सकता है, लेकिन मॉस्को और आसपास पेट्रोल की राशनिंग, वाणिज्यिक लॉजिस्टिक्स को नुकसान और परिवारों में बढ़ती वित्तीय सावधानी उस दावे को चुनौती देते हैं कि युद्ध का रूस की रोजमर्रा की जिंदगी पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा।
रूसी रिफाइनरियों पर हमलों के बाद पेट्रोल की कमी, सीमित बिक्री और क्षेत्रीय राशनिंग फिर सामने आई है। 14 अगस्त को मॉस्को क्षेत्र की सीमा से लगे कालुगा क्षेत्र के अधिकारियों ने वाहन पंजीकरण संख्या के आधार पर ईंधन देने की व्यवस्था घोषित की। कैस्पियन सागर के पास स्थित अस्त्रखान क्षेत्र ने प्रति वाहन 40 लीटर तक बिक्री सीमित करने और कुछ पेट्रोल पंपों का संचालन अस्थायी रूप से रोकने की योजना बताई।
राजधानी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी Rosneft ने अपने सभी पेट्रोल पंपों पर प्रति वाहन 30 लीटर की सीमा लागू की। Lukoil ने भी मॉस्को और आसपास के इलाकों में बिक्री पर प्रतिबंध लगाए। कंपनी ने इसके पीछे बढ़ी हुई मांग, रिफाइनरियों में अनियोजित रखरखाव और आपूर्ति स्थिर करने की जरूरत बताई।
समस्या एक-दो रिफाइनरियों तक सीमित नहीं है। पहले की रिपोर्टों में रूस के अधिकांश क्षेत्रों में ईंधन प्रतिबंधों का उल्लेख हुआ था। देश के अनाज उत्पादक इलाकों में किसानों ने डीजल की कमी के कारण फसल कटाई प्रभावित होने की चिंता जताई। हमलों के बाद रूसी अधिकारियों ने कुछ रिफाइनरियों को बंद किया या उनका संचालन रोक दिया, जिससे घरेलू ईंधन-शोधन क्षमता पर दबाव और बढ़ गया।
रूस ने साइबेरिया से राजधानी की ओर ईंधन भेजकर और बेलारूस तथा भारत से आयात बढ़ाकर मॉस्को में तत्काल संकट को कुछ हद तक नियंत्रित किया। Reuters के अनुसार, जुलाई के मध्य तक मॉस्को में आपूर्ति अस्थायी रूप से स्थिर हो गई थी, जबकि क्रीमिया सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बना रहा और देश का उत्पादन मांग से पीछे था।
यह प्रतिक्रिया रूस की अनुकूलन क्षमता के साथ-साथ हमलों की लागत भी दिखाती है। राजधानी में कमी न हो, इसके लिए ईंधन को देश के दूसरे हिस्सों से मोड़ना या विदेश से मंगाना पड़ रहा है। इसका अर्थ देशव्यापी ठहराव नहीं, बल्कि एक महंगी और असमान वितरण व्यवस्था है—कुछ क्षेत्रों में कमी सहकर उन इलाकों को चालू रखा जा रहा है जिन्हें राजनीतिक रूप से अधिक संवेदनशील माना जाता है।
यूक्रेन का अभियान ऊर्जा ढांचे से आगे बढ़कर बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक पहुंच गया है। 18 जुलाई के बाद से Wildberries के कम-से-कम 20 ठिकानों पर हमले की रिपोर्ट है। इन हमलों से बड़े पैमाने पर आग लगी, गोदामों में रखा सामान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुआ और रूस के सबसे बड़े ऑनलाइन खुदरा नेटवर्क की डिलीवरी व्यवस्था बाधित हुई। Reuters की उपग्रह तस्वीरों की समीक्षा में कम-से-कम 11.8 लाख वर्ग मीटर गोदाम क्षेत्र के क्षतिग्रस्त या नष्ट होने का अनुमान लगाया गया—रिपोर्ट के अनुसार यह कंपनी की क्षमता के पांचवें हिस्से से अधिक है।
हालांकि इन आंकड़ों को सावधानी से देखना चाहिए। अन्य आकलनों में प्रभावित गोदाम क्षेत्र 12.1 लाख से 14.7 लाख वर्ग मीटर और विक्रेताओं का नुकसान 215 अरब से 280 अरब रूबल के बीच बताया गया है। ये अनुमान हैं, ऑडिट किए गए अंतिम आंकड़े नहीं।
Institute for the Study of War के अनुसार, 16 अगस्त तक यूक्रेनी सेना ने Wildberries के 10 सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों में से सात को निशाना बनाया था। डिलीवरी ट्रकों से कंपनी का ब्रांड हटाने और नए भंडारण साझेदार तलाशने की खबरें बताती हैं कि नेटवर्क को चालू रखने की कोशिश हो रही है। लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि व्यवधान कितने समय तक चलेगा या पूरी व्यवस्था कितनी जल्दी दोबारा खड़ी की जा सकेगी।
इन गोदामों की सैन्य भूमिका पर भी विवाद है। यूक्रेनी अधिकारी कुछ लॉजिस्टिक्स केंद्रों को सैन्य-संबंधी उपकरणों की आपूर्ति करने वाले दोहरे उपयोग के नेटवर्क का हिस्सा बताते हैं। उपलब्ध साक्ष्य, हालांकि, यह साबित नहीं करते कि Wildberries के वाणिज्यिक गोदामों को जानबूझकर ड्रोन के पुर्जों या नेविगेशन प्रणालियों की आपूर्ति के लिए समर्पित किया गया था। उनका कारोबारी महत्व स्पष्ट है, प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका नहीं।
15 अगस्त को यूक्रेन ने कहा कि उसके घरेलू स्तर पर निर्मित FP-5 Flamingo मिसाइलों ने समारा स्थित Progress Rocket and Space Center को निशाना बनाया। यह केंद्र यूक्रेन की सीमा से लगभग 900 किलोमीटर दूर है और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos से जुड़ा हुआ है। यहां अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन होता है।
रिपोर्टों और यूक्रेनी सैन्य बयानों में लगभग 5,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में आग लगने की बात कही गई। इस औद्योगिक परिसर में Aviakor विमान संयंत्र भी है, लेकिन दोनों सुविधाओं को हुए नुकसान की सटीक सीमा अभी स्पष्ट नहीं है। उत्पादन में हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि भी सीमित है।
इस हमले का महत्व नष्ट हुए उत्पादन के सत्यापित आंकड़े से कम और उसके संकेत से अधिक जुड़ा है: यूक्रेन रूस के भीतर बहुत दूर स्थित रणनीतिक औद्योगिक ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम है। इससे मॉस्को को हवाई सुरक्षा, संयंत्रों का बिखराव, मरम्मत और उत्पादन जारी रखने की व्यवस्था पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि रूस का पूरा सैन्य-औद्योगिक आधार निर्णायक रूप से पंगु हो गया है।
घरेलू आर्थिक असर लोगों के व्यवहार में भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों में रूस के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि अगस्त के पहले दो हफ्तों में चलन में नकदी 286.4 अरब रूबल बढ़ी। इससे पहले जुलाई में बैंकों से लगभग 7.3 अरब डॉलर की निकासी की खबर आई थी।
बैंक से पैसा निकालना जनता में बढ़ती सावधानी के अनुरूप है, लेकिन इसे केवल यूक्रेनी हमलों का परिणाम नहीं माना जा सकता। संपत्ति जब्त होने की आशंका, भुगतान व्यवस्था में व्यवधान, महंगाई और व्यापक युद्ध अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता भी इसके कारण हो सकते हैं। इसलिए नकदी निकासी चिंता का संकेत है, न कि जनमत या राजनीतिक समर्थन पर हमलों के प्रभाव का अकेला माप।
इन हमलों ने कई माध्यमिक लागतें पैदा की हैं:
रूस के पास अब भी दबाव को संभालने की पर्याप्त क्षमता है। उसने आपूर्ति का रुख बदला है, पेट्रोल आयात किया है और ऊर्जा तथा लॉजिस्टिक्स ढांचे को हुए नुकसान के बावजूद कामकाज जारी रखा है। उपलब्ध साक्ष्य रूस के सैन्य उत्पादन, घरेलू स्थिरता या राज्य नियंत्रण के निर्णायक पतन का समर्थन नहीं करते।
अधिक संतुलित निष्कर्ष यह है कि यूक्रेन युद्ध को रूस के लिए लगातार महंगा और कठिन बना रहा है। क्रेमलिन अभी भी दबाव को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर काफी हद तक संभाल सकता है, लेकिन मॉस्को और आसपास पेट्रोल की राशनिंग, वाणिज्यिक लॉजिस्टिक्स को नुकसान और परिवारों में बढ़ती वित्तीय सावधानी उस दावे को चुनौती देते हैं कि युद्ध का रूस की रोजमर्रा की जिंदगी पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा।